नवादा,एजेंसी। PM मोदी ने आज रविवार को भोजपुर और नवादा में जनसभा की। इस दौरान कांग्रेस और आरजेडी उनके निशाने पर रहे। प्रधानमंत्री ने जंगलराज दिलाया, साथ ही दावा किया कि कांग्रेस-राजद में रिश्ते खराब हो चुके हैं और चुनाव बाद एक-दूसरे का सिर फोड़ेंगे।
PM ने नवादा की सभा में कहा, ‘जंगलराज वाले-कांग्रेस वाले आपके हक का सारा पैसा लूट कर अपनी तिजोरी भरते हैं। ये मैं नहीं कह रहा, कांग्रेस के पीएम ने कहा था- अगर मैं 1 रुपए भेजता हूं, तो वो लाभार्थी के पास पहुंचते-पहुंचते 15 पैसा हो जाता है। ये कौन-सा पंजा था, जो पैसे खा जाता था।’
‘जंगलराज ने नवादा में नरसंहार का दाग लगाया था। हालत ये थी कि किसी कर्मचारी का वेतन बढ़ता था तो वो परेशान हो जाता था। क्योंकि ज्यादा वेतन का मतलब था ज्यादा रंगदारी देना।’
कांग्रेस-RJD की राजनीति परिवार के इर्द-गिर्द रहती है
बिहार की जनता का अंक गणित अच्छा है, उनका सामान्य ज्ञान भी अच्छा है। ये चारा घोटाले वाले सोचते हैं, लोगों को चरा देंगे। इनकी राजनीति परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। एक बिहार का सबसे भ्रष्ट परिवार, दूसरा देश का सबसे भ्रष्ट परिवार।
अब दोनों परिवार में घमासान है। एक जंगलराज के युवराज हैं, उन्हें लगता है कांग्रेस युवराज की पदयात्रा ने उन्हें ही पैदल कर दिया है। कांग्रेस ने सीएम पद पर हामी तक नहीं भरी। उसके बाद राजद ने भी सबक सिखाने की ठानी। सब जानते हैं कैसे प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ ही राजद ने कैंडिडेट दे दिया।
नवादा की सभा से जुड़ी कुछ तस्वीरें….
नवादा में PM मोदी ने लोगों से मोबाइल की फ्लैश लाइट जलवाई। पूछा आपके हाथ में इतनी रोशनी है तो लालटेन की क्या जरूरत है।
PM मोदी ने कहा- नवादा की पहचान मगही पान है, मगध पुरातन भारत की शान है।
नवादा में मोदी की सभा में जुटी भीड़। लोगों के हाथों में PM के कटआउट थे, ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगे।
कनपट्टी में कट्टा सटाकर राजद ने सीएम पद लिया
इससे पहले PM ने आरा में सभा की। PM ने कहा, कि मैं आपको अंदर की बात बता रहा हूं। नामांकन वापस लेने से पहले बिहार में गुंडागर्दी का खेल खेला गया था। कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी कि CM पद पर RJD के नेता का नाम हो। RJD ने भी मौका नहीं छोड़ा।
RJD ने कांग्रेस की कनपट्टी पर कट्टा रखकर CM पद चोरी कर लिया। सिर पर कट्टा रखकर कांग्रेस से CM पद की घोषणा करवाई गई। RJD-कांग्रेस में भयंकर झगड़ा बढ़ गया है।
चुनाव से पहले इतनी दुश्मनी बढ़ गई है कि चुनाव के बाद ये एक-दूसरे का सिर फोड़ने लगेंगे। ऐसे लोग कभी बिहार का भला नहीं कर सकते हैं।
कट्टा-क्रूरता इनकी पहचान है
PM मोदी ने कहा कि, ‘विकसित भारत के लिए बिहार का विकसित होना जरूरी है। RJD और कांग्रेस कभी भी बिहार को विकसित नहीं बना सकते हैं।
इन लोगों ने बिहार पर कई सालों तक राज किया। इन लोगों ने आपके साथ सिर्फ विश्वासघात किया है। जहां कट्टा, क्रूरता का राज हो, वहां कानून दम तोड़ देता है।
जहां कटुता बढ़ाने वाली RJD और कांग्रेस हो, वहां समाज में सद्भाव मुश्किल होता है। जहां RJD और कांग्रेस का कुशासन हो, वहां विकास का नामो-निशान नहीं होता है। जहां करप्शन हो, वहां सामाजिक न्याय नहीं मिलता, ऐसे लोग कभी भी बिहार का भला नहीं कर सकते।
बिहार में जंगलराज वापस नहीं आना चाहिए
बिहार में जंगलराज वापस नहीं आना चाहिए, इसलिए फिर एक बार NDA सरकार। एक तरफ हमारा घोषणा पत्र है दूसरी तरफ महागठबंधन वालों का घोषणा पत्र है। इनके मेनिफेस्टो में सब झूठ है। जनता जनार्दन को बुड़बक बूझे हो क्या। ये पब्लिक है सब जानती है।
विकसित बिहार, विकसित भारत का आधार है। जब मैं विकसित बिहार की बात करता हूं, तो इसका मतलब है बिहार का औद्योगिक विकास, बिहार के युवाओं को बिहार में ही रोजगार है। आरा के इस मंच से मैं कहता हूं कि आपका सपना ही हमारा संकल्प है।
इस बार बिहार की जनता NDA को रिकॉर्ड सीटें देने जा रही है, ये जंगलराज वाले इस बार सबसे करारी हार का रिकॉर्ड बनाने वाले हैं क्योंकि बिहार की पुरानी पीढ़ी और अब नई पीढ़ी ने ठान लिया है फिर एक बार NDA सरकार।
भीड़ देखकर मोदी बोले- आपने मेरे अंदर जोश भर दिया
PM ने भीड़ देखकर कहा कि, आपको देखकर साफ समझ आ रहा है। NDA सरकार आ रही है।
प्रधानमंत्री ने लोगों की भीड़ देखकर कहा, आपने तो मेरे अंदर जोश भर दिया।
PM बोले- बिहार का युवा बिहार में ही काम करेगा
PM ने कहा, बिहार देश की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले राज्यों में से एक है, इसलिए NDA बिहार में शिक्षा और कौशल पर बहुत जोर दे रहा है। हमारा संकल्प है कि बिहार का युवा बिहार में ही काम करेगा, बिहार का नाम करेगा।
इसके लिए हमने आने वाले वर्षों में एक करोड़ रोजगार देने की घोषणा की है और यह सिर्फ घोषणा नहीं है, यह कैसे होगा, इसकी योजना भी जनता के सामने रखी गई है।
आज दुनिया में मेक इन इंडिया को लेकर काफी उत्साह है। हमारा लक्ष्य बिहार को मेड इन इंडिया का केंद्र बनाना है। इसके लिए हम हजारों लघु और कुटीर उद्योगों के नेटवर्क को मजबूत करेंगे।
PM मोदी की स्पीच की 5 बड़ी बातें
नरसंहार के दोषियों सम्मान दे रही कांग्रेस: अगर RJD बिहार में ‘जंगलराज’ और तुष्टिकरण की राजनीति लाई, तो कांग्रेस की पहचान सिखों के नरसंहार से जुड़ी है। यह 1 और 2 नवंबर 1984 की बात है। आज भी 2 नवंबर है। कांग्रेस के लोगों ने 1 और 2 नवंबर 1984 को दिल्ली और देश के कई अन्य हिस्सों में सिख नरसंहार को अंजाम दिया था। आज भी कांग्रेस अपनी पार्टी में सिख नरसंहार के दोषियों को पूरे सम्मान के साथ नए पद दे रही है। उन्हें बढ़ावा दे रही है। कांग्रेस हो या राजद, उन्हें अपने पापों का कोई पछतावा नहीं है।
छठ का अपमान करने वालों को मत भूलिएगा: आपने देखा है कि आपका ये बेटा तो छठी मैया की जय-जयकार दुनिया में कराने में लगा है। दूसरी तरफ ये कांग्रेस और RJD के लोग छठी मैया का अपमान कर रहे हैं। क्या ऐसा अपमान, बिहार, हिंदुस्तान और मेरी माताएं जो निर्जला उपवास करती हैं, वो सहन कर सकती हैं। क्या बिहार की माताएं-बहनें छठी मैया का ये अपमान बर्दाश्त करेंगी। मैं जानता हूं कि छठी मैया के इस अपमान को बिहार का कोई भी व्यक्ति नहीं भूलेगा।
फिर एक बार NDA सरकार का नारा दिया: आपकी भीड़ देखकर साफ समझ आ रहा है कि इस बार बिहार में सुशासन की सरकार आ रही है। इस बार NDA की सरकार बनने जा रही है। कहिए फिर एक बार सुशासन सरकार फिर एक बार NDA सरकार।
भ्रष्टाचार पर RJD-कांग्रेस को घेरा: ऐसे लोग कभी बिहार का भला नहीं कर सकते हैं। साथियों बिहार को आगे बढ़ाने के लिए उद्योग चाहिए। उद्योग के लिए जमीन, बिजली, कनेक्टिविटी और कानून का राज चाहिए। जिनका इतिहास जमीन कब्जाने का है वो बिहार का विकास कर सकता है क्या। जिन्होंने रेल को रेल को लूटा वो बिहार में कनेक्टिविटी बढ़ाएंगे क्या। जिन्होंने भ्रष्टाचार के रिकॉर्ड तोड़ दिए वो कानून का राज ला सकते हैं क्या। बिहार ने कांग्रेस-RJD का कुशासन देखा है।
नरेंद्र-नीतीश, हम महिला सशक्तिकरण के लिए खड़े हैं: हमने घर दिया तो पेपर बहनों के नाम पर दिए। 1 करोड़ 20 लाख बहनों के खाते में 10-10 हजार रुपए भेजे गए। इन पैसों से बहनें अपना व्यवसाय शुरू कर रही हैं। मैं विश्वास दिलाता हूं। हम यहीं नहीं रुकेंगे बहनों को आगे बढ़ाने के लिए फिर पैसे दिए जाएंगे।
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के मध्य और पूर्वी हिस्से में मानसून एक्टिव है। मध्यप्रदेश, राजस्थान के कई इलाकों में लगातार तीसरे दिन भारी बारिश से हालात खराब हैं। इसकी वजह तीन मानसूनी सिस्टम हैं। इनके कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी आ रही है।
भोपाल में बुधवार को लगातार तीसरे दिन स्कूलों में छुट्टी है। यहां दो दिनों में 8.57 इंच बारिश हुई। करीब 200 मकानों में ढाई फीट तक पानी भर गया। रतलाम, झाबुआ, धार, बड़वानी और इंदौर में अगले 24 घंटे में यहां 4 इंच से ज्यादा बारिश का अनुमान है।
उधर, राजस्थान में खोखी बांध की दीवार टूटने से 300 बीघा फसल खराब हो गई है। कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की टनल के एक हिस्से में दो-तीन फीट तक पानी भरा हुआ है।
वहीं, उत्तर प्रदेश में पिछले 2 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार को पानी भर गया था। इसका वीडियो आज सामने आया है। वाराणसी में घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। 100 से ज्यादा छोटे मंदिर डूब गए हैं।
सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति
देशभर से मौसम की तस्वीरें
मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है। वहीं, शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। इससे काफी देर तक जाम लगा रहा। प्रदेश में अब तक 19.6 इंच बारिश हो चुकी है।
राजस्थान में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल में पानी भर गया है। इस वजह से बुधवार सुबह से यहां लंबा जाम लगा हुआ है। पिछले दो दिनों से ट्रैफिक रेंग-रेंगकर चल रहा है।
उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बारिश के बाद पानी भर गया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इससे फ्लाइट ऑपरेशन और यात्रियों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।
मुंबई में कुर्ला के अशोक नगर इलाके में बुधवार सुबह 3 बजे गौसिया चॉल के पास बारिश की वजह से मिट्टी का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसकी चपेट में दो-तीन घर आ गए। महाराष्ट्र के कई इलाकों में 24 घंटे से बारिश हो रही है।
उत्तराखंड के चमोली की नीति घाटी में दो दिन पहले बादल फटने से तमक नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव में 17 टन स्टील से बना वैली ब्रिज बह गया। अब नाले पर अस्थायी ब्रिज बनाने का काम किया जा रहा है।
हिमाचल के शिमला-धर्मशाला NH-205 पर भराड़ीघाट के पास मंगलवार को चलती कार पर बड़ी चट्टान गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग घायल हो गए। राज्य में लैंडस्लाइड से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।
मुंबई, एजेंसी। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आज 12 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे।
चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। नए कारोबारों में भारी निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस के भविष्य को लेकर मतभेद इस फैसले की बड़ी वजह बने।
एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर के शेयर 3% तक नीचे हैं।
चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देते हुए क्या कहा
चंद्रशेखरन ने कहा कि, “टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मेरे अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी।
इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने दर्ज किया था और आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था।
हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना। उस बोर्ड मीटिंग को हुए 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।
टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”
इस्तीफे की 4 बड़ी वजह
चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर मतभेद
फरवरी 2026 में टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले 5 साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। बाद में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया और सिर्फ 2 साल का कार्यकाल देने की वकालत की।
24 फरवरी 2026 को 5 साल के विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया। एक सदस्य के समर्थन न देने से इस पर सहमति नहीं बन सकी है।
नए कारोबारों के प्रदर्शन पर सवाल
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, डिजिटल कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इनमें से कुछ कारोबार अभी घाटे में हैं।
एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस को FY26 में कुल रू.22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि टाटा डिजिटल का घाटा रू.4,974 करोड़ रहा। इन्हीं मुद्दों पर नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई थी।
टाटा संस की लिस्टिंग हो या नहीं
टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए या निजी कंपनी ही रखा जाए, इस पर टाटा ट्रस्ट्स के अंदर अलग-अलग राय सामने आई। नोएल टाटा लिस्टिंग के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं, जबकि कुछ ट्रस्टी लिस्टिंग की वकालत कर चुके हैं।
टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच तालमेल
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए दोनों के बीच बड़े फैसलों पर सहमति बेहद अहम है। नए कारोबारों की रणनीति, निवेश और चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर मतभेदों से दोनों के बीच तालमेल का सवाल भी सामने आया।
चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू रू.16.24 लाख करोड़ पहुंचा
चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा।
रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू रू.7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर रू.16.24 लाख करोड़ हो गया।
मुनाफा: ग्रुप का मुनाफा रू.32,000 करोड़ से बढ़कर रू.1.71 लाख करोड़ हो गया।
मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 के रू.9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में रू.24.39 लाख करोड़ पहुंच गया।
टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क
टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
कैसे चुना जाएगा नया चैयरमैन
टाटा संस के चेयरमैन को चुनने की प्रक्रिया में पहले चयनसमिति उम्मीदवारों पर विचार करती है। इस समिति में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित सदस्य, टाटा संस बोर्ड का एक सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य शामिल होते हैं।
समिति उम्मीदवार के नाम की सिफारिश टाटा संस के बोर्ड से करती है। बोर्ड उम्मीदवार की योग्यता और ग्रुप की जरूरतों को देखते हुए अंतिम नियुक्ति का फैसला करता है। अगर मौजूदा चेयरमैन को ही जारी रखना हो, तो उनके कार्यकाल के विस्तार पर भी इसी प्रक्रिया के तहत फैसला होता है।
मुंबई, एजेंसी। आलू-प्याज जैसे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से रिटेल महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी है। जुलाई में यह 4.45% रही। एक महीने पहले जून में यह 4.38% पर थी। आज 12 अगस्त को रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी किए गए हैं।
खाने-पीने के सामानों की महंगाई यानी फूड इंफ्लेशन जुलाई में बढ़कर 5.52% पर पहुंच गई है। जून में यह आंकड़ा 5.32% पर था।
RBI के 4% टारगेट से लगातार दूसरे महीने ऊपर
रिजर्व बैंक ने रिटेल महंगाई दर का लक्ष्य 4% तय किया है। यह लगातार दूसरा महीना होगा जब रिटेल महंगाई आरबीआई के तय कम्फर्ट जोन 4% से ऊपर दर्ज की गई है।
महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?
महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।
4.45% महंगाई दर का क्या मतलब है?
1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल)
जब हम कहते हैं कि जूलाई 2026 में महंगाई 4.45% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना जुलाई 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 4.45% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं:
किसी चीज के दाम बहुत ज्यादा बढ़े होंगे।
किसी चीज के दाम घटे भी होंगे।
जब इन सबको एक साथ मिलाया गया, तो औसतन खर्च 4.45% बढ़ गया।
2. रू.100 की चीज अब रू.104.45 की हो गई
इसका गणित बहुत सीधा है। अगर जुलाई 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन रू.100 में खरीदा था, तो वही सामान जुलाई 2026 में रू.104.45 का हो गया है।