रायपुर। नन्हें लाभार्थी- मैं हॉकी की चैंपियन हूं, मैंने हॉकी में 5 मेडल जीते हैं, मेरे स्कूल में मेरी जांच हुई थी तो मुझे पता चला था कि स्कूल में कि मेरे दिल में छेद हैं, तो मैं यहां पर आई, तो मेरा ऑपरेशन हुआ, तो यहां पर मैं अब खेल पाती हूं हॉकी।
प्रधानमंत्री – तुम जब डॉक्टर बनोगी, तब हम बूढ़े बन जाएंगे तो हमारा कुछ करोगे कि नहीं?
नन्हें लाभार्थी – करूंगी।
प्रधानमंत्री – पक्का।
नन्हें लाभार्थी – हां पक्का।
प्रधानमंत्री – चलिए।
नन्हें लाभार्थी – मैंने सोचा ही नहीं था कि मैं कभी इनसे मिल पाऊंगी, आज पहली बार मिली, मुझे बहुत अच्छा लगा।
नन्हें लाभार्थी – मेरा ऑपरेशन अभी एक साल पहले हुआ है और मैं बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती हूं और सभी का इलाज करना चाहती हूं।
प्रधानमंत्री – अच्छा रोना कब आया था?
नन्हें लाभार्थी – रोना नहीं आया।
प्रधानमंत्री – डॉक्टर तो बता रहे थे कि तुम बहुत रोती थी।
नन्हें लाभार्थी – डॉक्टर ने कब बताया, नहीं बताया।
प्रधानमंत्री – नहीं।
नन्हें लाभार्थी – आपको एक स्पीच सुनाना चाहती हूं।
प्रधानमंत्री – हां बोलो- बोलो।
नन्हें लाभार्थी – मंजिल से आगे बढ़कर मंजिल तलाश कर, मिल जाए तुझको दरिया तो समुंदर तलाश कर, हर शीशा टूट जाता है पत्थर की चोट से, पत्थर भी टूट जाए वो शीशा तलाश कर। सजदों से तेरे क्या हुआ सदियाँ गुजर गई, सजदों से तेरे क्या हुआ सदियाँ गुजर गई, सजदा वो कर जो तेरी जिंदगी बदल दे, सजदा वो कर जो तेरी जिंदगी बदल दे।
प्रधानमंत्री – वाह वाह वाह।
नन्हें लाभार्थी – मेरा 2014 में ऑपरेशन हुआ था, तब मैं 14 महीने का था, अब मैं बिल्कुल स्वस्थ हूं और मैं क्रिकेट में बहुत।
प्रधानमंत्री – अच्छा रेगुलर चेकअप कराते हो, क्योंकि अब आपको 11 साल हो गए हैं आपका ऑपरेशन किए?
नन्हें लाभार्थी – यस सर।
प्रधानमंत्री – तो रेगुलर चेकअप कराते हो?
नन्हें लाभार्थी – यस सर।
प्रधानमंत्री – अभी कोई तकलीफ नहीं है
नन्हें लाभार्थी – नो सर
प्रधानमंत्री – खेलते हैं
नन्हें लाभार्थी – यस सर।
प्रधानमंत्री – क्रिकेट खेलते हैं
नन्हें लाभार्थी – यस सर।
नन्हें लाभार्थी – मुझे आपसे मिलना है मैं आ सकता हूं 2 मिनट।
प्रधानमंत्री – पास आना है, आइए।
प्रधानमंत्री – कैसा लगता था जब अस्पताल में आना पड़ा, तो दवाइयां खानी पड़ती थी, इंजेक्शन लगाते होंगे, कैसा लगता था?
नन्हें लाभार्थी – सर मुझे इंजेक्शन से डर भी नहीं लगता था इसलिए मेरे को अच्छे से ऑपरेशन हुआ, मेरे को डर भी नहीं लगा।
प्रधानमंत्री – हां अच्छा, तो आपके टीचर क्या बोलते हैं?
नन्हें लाभार्थी – मेरे टीचर बोलते हैं, तुम पढ़ाई में अच्छी हो, पर थोड़ा-थोड़ा अटकती हो।
प्रधानमंत्री – अच्छा यह है, लेकिन आप सच बोल रहे हैं सच बोलने का आपको बहुत फायदा होगा।
नन्हें लाभार्थी – मैं कक्षा सातवीं में पढ़ती हूं, मेरा ऑपरेशन!
प्रधानमंत्री – सातवीं में पढ़ती हो बेटा?
नन्हें लाभार्थी – यस सर!
प्रधानमंत्री – तो आप खाती नहीं हो?
नन्हें लाभार्थी – सर खाते हैं।
प्रधानमंत्री – टीचर का सर खाती रहती हो, अच्छा बताइए।
नन्हें लाभार्थी – मेरा ऑपरेशन 2023 में हुआ था और मैं बड़ी होकर टीचर बनना चाहती हूं, क्योंकि टीचर बनने से हमारे जो गरीब बच्चे होते हैं या फिर उनको आगे बढ़ाने के लिए उनको फ्री में पढ़ाना चाहती हूं और पढ़ाई से हमारा देश आगे बढ़ता है।
प्रधानमंत्री – अच्छा आप सबको पता है, किसका शताब्दी वर्ष का यह महीना शुरू हुआ है? सत्य साईं बाबा का सौ साल। साईं बाबा ने बहुत साल पहले पुट पट्टी के आसपास पानी की बहुत किल्लत थी और खेत के लिए पानी तो नहीं था, पीने के लिए भी पानी की किल्लत थी, तो उन्होंने उस समय पानी के लिए इतना काम किया, करीब 400 गांव को पीने का पानी पहुंचाया। यानी किसी सरकार को भी इतना काम करना हो, तो कभी-कभी बहुत सोचना पड़ता है, और उसमें से हमारे लिए संदेश यह है, कि हमें पानी बचाना चाहिए, उसी प्रकार से पेड़ लगाने चाहिए। आपको मालूम है, मैं एक अभियान चलाता हूं- एक पेड़ मां के नाम। हर एक को अपनी मां अच्छी लगती है ना, तो मां के नाम हमें एक पेड़ लगाना चाहिए, अपनी मां के नाम। तो धरती मां का भी कर्ज चुकाते हैं, अपनी मां का भी कर्ज चुकाते हैं।
नन्हें लाभार्थी – मेरा नाम अभिक है, मैं वेस्ट बंगाल से हूं, मुझे बड़े होकर आर्मी बनना है और मुझे देश की सेवा करनी है।
प्रधानमंत्री – देश की सेवा करोगे?
नन्हें लाभार्थी – हां
प्रधानमंत्री – पक्का?
नन्हें लाभार्थी – हां
प्रधानमंत्री – क्यों करोगे?
नन्हें लाभार्थी – क्योंकि देश के सिपाही हमारी रक्षा करते हैं, मैं भी रक्षा करना चाहता हूं!
प्रधानमंत्री – वाह वाह वाह।
नन्हें लाभार्थी – मैं हाथ मिलाना चाहता हूं।
नन्हें लाभार्थी – मेरा सपना था आपसे मिलने का।
प्रधानमंत्री – अच्छा, कब सपना आया था, आज को आया था कि पहले आया था?
नन्हें लाभार्थी – बहुत पहले था।
प्रधानमंत्री – जानती थी मुझे?
नन्हें लाभार्थी – न्यूज़ में आपको देखा था।
नन्हें लाभार्थी – प्रधानमंत्री न्यूज़ में पढ़ती देखती हो, अच्छा। चलिए बहुत अच्छा लगा मुझे आप सब से बात करके। अब आपको कोई भी अच्छा काम करना है, तो उसका साधन हमारा शरीर होता है, तो हमें अपना शरीर स्वस्थ रखना चाहिए, कुछ योगा करना, कुछ नियम से सोना, यह बहुत पक्का कर लेना चाहिए। इसके लिए आप लोगों को बहुत ध्यान रखना चाहिए। रखेंगे? पक्का रखेंगे? चलिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं आपको।
रायपुर, एजेंसी। रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना में प्रस्तावित जमीन आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्राधिकरण की वेबसाइट पर प्लॉट्स की जानकारी अपलोड होने के बाद कांग्रेस नेता डॉ. राकेश गुप्ता ने कचना की जमीन के बदले मंत्री केदार कश्यप की पत्नी की कंपनी को सड्डू में करीब 23 हजार वर्गफीट का प्लॉट दिए जाने का आरोप लगाया है।
उनके मुताबिक प्लॉट की कीमत करीब 20 करोड़ रुपए बताई गई है। उन्होंने आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए मुख्य सचिव से इसकी जांच कराने और योजना को निरस्त करने की मांग की है। वहीं, RDA अधिकारियों का कहना है कि अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है और दावा-आपत्ति आने पर मामले की जांच कराई जाएगी।
कांग्रेस नेता डॉ. राकेश गुप्ता ने आरडीए योजना में भूखंडों के प्रस्तावित आवंटन पर सवाल खड़े किए हैं।
कचना की जमीन के बदले सड्डू में प्लॉट देने का दावा
कांग्रेस नेता डॉ. राकेश गुप्ता का आरोप है कि डॉक्यूमेंट के अनुसार साय कैबिनेट के मंत्री केदार कश्यप की पत्नी शांति कश्यप की कंपनी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को सड्डू में प्लॉट नंबर 25 दिया जा रहा है। यह प्लॉट 2,168 वर्गमीटर यानी करीब 23,327 वर्गफीट का है।
डॉ. गुप्ता के मुताबिक, यह प्लॉट प्रस्तावित 150 फीट चौड़ी एमआर-43 सड़क के पास है। उन्होंने अनुमान लगाया है कि भविष्य में यहां जमीन की कीमत करीब 10 हजार रुपए प्रति वर्गफीट हो सकती है। इस हिसाब से उन्होंने प्लॉट की कीमत करीब 20 करोड़ रुपए बताई है।
कांग्रेस नेता का दावा है कि कंपनी के पास कचना के नालापारा इलाके में करीब 1.33 एकड़ जमीन है। उनके मुताबिक, इस जमीन तक पहुंचने के लिए संकरी सड़क है। इसलिए इसकी बाजार कीमत कुछ लाख रुपए ही थी।
डॉ. गुप्ता का आरोप है कि नगर विकास योजना में कचना की इस जमीन को शामिल करने के बाद कंपनी को इसके बदले सड्डू में अलग प्लॉट दिया जा रहा है।
कांग्रेस नेता डॉ. राकेश गुप्ता ने आरडीए योजना में भूखंडों के प्रस्तावित आवंटन पर सवाल खड़े किए हैं।
एक किलोमीटर दूर प्लॉट मिलने पर उठाए सवाल
डॉ. राकेश गुप्ता ने छत्तीसगढ़ नगर और ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50 का हवाला दिया है। उनका कहना है कि नियम के मुताबिक नया भूखंड मूल जमीन या उसके आसपास के इलाके में दिया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी की कचना वाली जमीन के बदले सड्डू में प्लॉट दिया जा रहा है, जो मूल जमीन से करीब एक किलोमीटर दूर है।
कांग्रेस नेता डॉ. राकेश गुप्ता ने भू-आवंटन को लेकर उठाए सवाल।
प्रमुख सड़क से हटाकर अंदरूनी प्लॉट देने का आरोप
डॉ. राकेश गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अन्य भू-स्वामियों को एमआर-43 जैसी प्रमुख सड़क पर मिलने वाले भूखंडों के बजाय योजना के अंदरूनी हिस्सों में जमीन दी गई। उन्होंने पूरे भूखंड आवंटन की प्रक्रिया की जांच की मांग की है।
इन आरोपों पर मंत्री केदार कश्यप की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, RDA अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है। अधिकारियों का कहना है कि दावा आपत्ति आने पर मामले में जांच कराई जाएगी।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अधिकारियों का तबादला किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को तबादला आदेश जारी किया। अधिकारियों को प्रशासनिक आधार पर नई पदस्थापना दी गई है।
तबादला सूची में अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और प्रवर श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। कई जिलों के संयुक्त कलेक्टर भी बदले गए हैं। जिलों से लेकर मंत्रालय स्तर तक अधिकारियों का फेरबदल किया गया है।
पुलक भट्टाचार्य को सूडा के अतिरिक्त CEO का प्रभार दिया गया है।
पुलक भट्टाचार्य को सूडा के अतिरिक्त CEO का प्रभार
पुलक भट्टाचार्य सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ हैं। वे पीएमओटी मिशन कर्मयोगी के समन्वयक और नगरीय प्रशासन-विकास संचालनालय में अपर संचालक के अतिरिक्त प्रभार में हैं।
आदेश के अनुसार, वर्तमान दायित्वों के साथ उन्हें राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा), रायपुर के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
विपुल गुप्ता को कर्मकार मंडल का अतिरिक्त प्रभार
विपुल कुमार गुप्ता श्रम विभाग में उप सचिव के पद पर पदस्थ हैं। उन्हें वर्तमान दायित्वों के साथ सचिव, छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, रायपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
विनायक शर्मा को नवा रायपुर विकास प्राधिकरण में प्रबंधक बनाया
विनायक शर्मा छत्तीसगढ़ राज्य शिष्टाचार कार्यालय में राज्य शिष्टाचार अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। उनके पास उप सचिव, खनिज साधन विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी है।
आदेश के अनुसार, उन्हें नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण में प्रबंधक के पद पर पदस्थ किया गया है।
डॉ. ऋतु वर्मा को उच्च शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार
डॉ. ऋतु वर्मा सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव (कक्ष-6 एवं 7) के पद पर पदस्थ हैं। उन्हें वर्तमान दायित्वों के साथ उच्च शिक्षा विभाग के उप सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
वैभव कुमार क्षेत्रज्ञ को छत्तीसगढ़ संवाद के प्रभार से हटाया
वैभव कुमार क्षेत्रज्ञ कृषि विकास-किसान कल्याण और जैव प्रौद्योगिकी विभाग में अवर सचिव के पद पर पदस्थ हैं। वे छत्तीसगढ़ संवाद में उप महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।
आदेश के अनुसार, उन्हें छत्तीसगढ़ संवाद के उप महाप्रबंधक के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। उनके शेष दायित्व यथावत रहेंगे।
पुष्पेन्द्र शर्मा बने राज्य शिष्टाचार अधिकारी
पुष्पेन्द्र कुमार शर्मा छत्तीसगढ़ राज्य शिष्टाचार अधिकारी के कार्यालय में सत्कार अधिकारी के पद पर पदस्थ हैं। आदेश के अनुसार, उन्हें राज्य शिष्टाचार अधिकारी, मंत्रालय, नवा रायपुर अटल नगर के पद पर पदस्थ किया गया है।
गौतम सिंह को मार्कफेड के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया
गौतम सिंह सुशासन-अभिसरण विभाग में अवर सचिव के पद पर पदस्थ हैं और मार्कफेड का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे।
आदेश के अनुसार, उन्हें मार्कफेड के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त किया गया है। उनके शेष दायित्व यथावत रहेंगे।
मोनिका जयनशीने बनीं डिप्टी कलेक्टर
मोनिका जयनशीने माध्यमिक शिक्षा मंडल, रायपुर में उप सचिव के पद पर पदस्थ हैं। वे नवाचार आयोग का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही थीं।
आदेश के अनुसार, उन्हें डिप्टी कलेक्टर, दुर्ग के पद पर पदस्थ किया गया है।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 19 नायब तहसीलदारों को तहसीलदार पद पर पदोन्नति दी है। प्रमोशन के साथ ही इन अधिकारियों की नई पदस्थापना भी की गई है। कुछ अधिकारियों को दूसरे जिलों में भेजा गया है। जबकि कुछ को वर्तमान जिले में ही नई जिम्मेदारी दी गई है।
पदोन्नत अधिकारियों को वर्तमान जगह से कार्यमुक्त होने के दिन से 10 दिन के भीतर नई पदस्थापना वाली जगह पर कार्यभार संभालना होगा। तय समय में ज्वाइन नहीं करने पर पदोन्नति आदेश अपने आप निरस्त माना जाएगा।