Connect with us

छत्तीसगढ़

बिहार वि.स. चुनाव में एनडीए की प्रभावी जीत : प्रधानमंत्री के नेतृत्व, जनविश्वास और संगठनात्मक मेहनत का परिणाम- अमर सुल्तानिया

Published

on

जांजगीर-चाम्पा। बिहार में हुए ताज़ा चुनाव परिणामों ने एनडीए गठबंधन को सशक्त बढ़त दिलाई है। इस विजय के बाद जांजगीर-चांपा के भाजपा नेता अमर सुल्तानिया ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जीत किसी एक पहलू का फल नहीं, बल्कि परिश्रम, दूरदर्शिता और योजनाबद्ध रणनीति के संयोजन से बनी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने गांव-गांव तक भरोसे का वातावरण तैयार किया, जिसने पूरे गठबंधन को नई ऊर्जा प्रदान की।

अमर सुल्तानिया ने बताया कि बिहार में विकास की सतत गति और नेतृत्व की स्थिरता मतदाताओं को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले कारकों में रही। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय ने योजनाओं को जमीन पर उतारने की गति बढ़ाई, जिससे लोगों में यह विश्वास सुदृढ़ हुआ कि उनकी समस्याओं पर संवेदनशीलता के साथ कार्य हो रहा है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि महिलाओं और युवाओं का अभूतपूर्व समर्थन इस चुनाव का निर्णायक पहलू रहा। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने रिकॉर्ड स्तर पर मतदान कर यह सिद्ध किया कि वे विकास, सुरक्षा और स्थिरता की सबसे मजबूत वाहक हैं। परिवार, समाज और भविष्य की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए महिला मतदाताओं ने जिस जागरूकता और दूरदर्शिता के साथ एनडीए का साथ दिया, उसने परिणामों की दिशा तय कर दी।

सुल्तानिया ने सामाजिक वर्गों के बीच समन्वय और संगठन की सजग मेहनत को भी जीत का एक मजबूत आधार बताया। उनका कहना था कि छोटे-छोटे समूहों तक पहुंचकर संवाद स्थापित करने की रणनीति ने विपक्ष की उम्मीदों को सीमित कर दिया।

अंत में उन्होंने कहा कि मतदाताओं की सक्रियता और कार्यकर्ताओं के अथक जनसंपर्क ने एनडीए को निर्णायक बढ़त दिलाई। यह जीत केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और उम्मीदों की जीत है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

छत्तीसगढ़

झीरम हमले में 10 दोषी, मास्टरमाइंड से पूछताछ तक नहीं:सरेंडर के बाद देवजी पढ़ता रहा, 12वीं की परीक्षा दी, 33 अब भी फरार

Published

on

रायपुर, एजेंसी। 25 मई 2013 के झीरम घाटी नरसंहार मामले में 13 साल बाद जगदलपुर की स्पेशल NIA कोर्ट ने 10 नक्सलियों को दोषी ठहराया है। 11 आरोपियों में से एक की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी। दोषियों की सजा पर फैसला 16 सितंबर को होगा। सीएम साय ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले का सभी को स्वागत करना चाहिए।

बता दें कि, लंबे ट्रायल में 101 गवाहों के बयान दर्ज हुए और दस्तावेज और दूसरे सबूत पेश किए गए। बचाव पक्ष फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगा। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की जान गई थी।

हालांकि, जांच में सामने आए बड़े नामों को लेकर अब भी सवाल हैं। अभियोजकों के मुताबिक झीरम हमले के मास्टरमाइंड थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने 24 फरवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर किया था।

इसके बाद उसने 12वीं की परीक्षा भी दी, लेकिन अब तक उससे पूछताछ नहीं हुई है। जांच के मुताबिक, हमले की प्लानिंग करीब 3 महीने पहले की गई थी और जंगल में कैंप बनाकर राशन जुटाया गया था।

मई 2026 में देवजी ने 12वीं की परीक्षा दी थी।

मई 2026 में देवजी ने 12वीं की परीक्षा दी थी।

ये 10 आरोपी दोषी पाए गए

कोर्ट ने प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा पुनेम, मोडियम मुक्का, मंडवी कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयाता मरकाम, मड़ाकामी देवा, जोगा मड़ाकामी, बंजामी सन्ना उर्फ चामरू उर्फ डेंगा और महादेव नाग को दोषी माना है।

मामले में नामजद कई अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। करीब 33 आरोपी अदालत की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे आरोपी भी हैं, जिन्होंने बाद में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में सरेंडर कर दिया।

थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी।

थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी।

मास्टरमाइंड देवजी से अब तक पूछताछ नहीं

जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी घटना के समय माओवादी संगठन की क्षेत्रीय कमान (SRUC) में सीनियर कमांडर था। वहीं, बारसे सुक्का उर्फ देवा दरभा डिवीजन कमेटी का सचिव रहा और बाद में बटालियन-1 का कमांडर बना। जांच में दोनों की भूमिका झीरम हमले से जुड़ी बताई गई है।

NIA ने 23 दिसंबर 2023 को जारी वांटेड इश्तहार में देवजी और देवा समेत 19 नक्सलियों की जानकारी सार्वजनिक की थी। इसमें देवजी का नाम और फोटो भी शामिल था। देवजी ने 24 फरवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर किया, जबकि देवा ने 2 जनवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर किया।

सरेंडर के बाद थिप्पिरी तिरुपति देवजी ने मई में इंटरमीडिएट सेकंड ईयर की तेलुगु परीक्षा भी दी थी। इसके बावजूद इस मामले में पुलिस ने अब तक उससे पूछताछ नहीं की है।

इस मामले में कट्कम सुदर्शन को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन 2023 में उसकी मौत हो गई। वहीं, सबसे बड़ा वांछित आरोपी मुपल्ला लक्ष्मणा राव उर्फ गणपति अब तक पकड़ से बाहर है। घटना के समय वह CPI (माओवादी) का महासचिव था।

स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर (SZCM) देवा बारसे ने हैदराबाद में सरेंडर किय था।

स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर (SZCM) देवा बारसे ने हैदराबाद में सरेंडर किय था।

23 दिसंबर 2023 को एनआईए ने इश्तहार में इन्हें फरार घोषित किया था, देवजी सरेंडर 24 फरवरी 2026, तेलंगाना गणेश उइके उर्फ राजेश मारा गया 25 दिसंबर 2025, ओडिशा मुठभेड़ {जयलाल मंडावी उर्फ गंगा जीवित/वांछित { बारसे सुक्का उर्फ देवा/देवअन्ना सरेंडर 2 जनवरी 2026 तेलंगाना {सोमा सोढ़ी उर्फ सुरेंद्र/माड़वी सीमा सरेंडर 7 दिसंबर 2025, बालाघाट, मप्र।

पूछताछ तो की ही जा सकती है

सरकार की सरेंडर पॉलिसी के तहत सरेंडर नक्सलियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती। लेकिन जांच एजेंसियों को सरेंडर नक्सलियों से किसी भी प्रकरण में पूछताछ की मनाही भी नहीं है। किसी प्रकरण में आवश्यकता है तो बिल्कुल पूछताछ होनी चाहिए। झीरम मामले में भी जिनके नाम एफआईआर में, भले ही वे सरेंडर कर चुके हैं उनसे पूछताछ से जांच को नई दिशा मिल सकती है।

आरके विज, सेवानिवृत्त डीजी

(लंबे समय तक छत्तीसगढ़ में एडीजी नक्सल ऑपरेशन के पद पर रहे।)

झीरम प्रकरण में जो आरोपी नक्सली पकड़ में आए, उनके खिलाफ ही ट्रायल हुआ। फैसला उन्हीं के खिलाफ आया है, क्योंकि उनके विरुद्ध ही चार्जशीट पेश हुई थी। – दिनेश पाणिग्रही, एनआईए अधिवक्ता, जगदलपुर (इनके द्वारा ही अभियोजन पक्ष रखा गया है)

पहले समझिए, 25 मई 2013 को हुआ क्या था?

13 साल पहले बस्तर में कांग्रेस अपनी परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी। 25 मई 2013 की शाम यह यात्रा सुकमा की ओर से लौट रही थी। काफिला जब दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था, तभी माओवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया।

हमले की शुरुआत IED विस्फोट से हुई। इसके बाद सड़क पर पेड़ गिराकर रास्ता बंद किया गया और जंगल से काफिले पर गोलियां बरसाई गईं। कुछ ही देर में पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा। नक्सलियों ने नेताओं और सुरक्षाकर्मियों को अलग-अलग किया।

माओवादियों का खास निशाना महेंद्र कर्मा थे। नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कई अन्य लोगों की भी हत्या कर दी गई। एक ही हमले में कांग्रेस की उस समय की प्रदेश की शीर्ष नेतृत्व पंक्ति लगभग खत्म हो गई थी। झीरम हमला अचानक लिया गया फैसला नहीं था। इसके लिए कई सप्ताह पहले से तैयारी चल रही थी।

2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।

2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।

मिनपा से दरभा कैसे बदला टारगेट

माओवादियों की शुरुआती योजना सुकमा के मिनपा क्षेत्र में सुरक्षा बलों की चौकी पर हमला करने की थी। फरवरी 2013 में बीजापुर के पिडिया गांव में हुई बैठक में रणनीति बदली गई। बैठक में फैसला हुआ कि हमला मिनपा के बजाय दरभा क्षेत्र में किया जाएगा। यह निर्णय वरिष्ठ माओवादी कमांडर देवजी की मौजूदगी में लिया गया था।

इसके बाद अलग-अलग हथियारबंद टीमों को दरभा की ओर भेजा गया। इनमें मिलिट्री कंपनी नंबर-2, प्लाटून 24 और 26, दरभा डिविजन कमेटी और CRC-2 के सदस्य शामिल थे।

25 बोरी चावल से लेकर जंगल में कैंप तक

हमले के लिए केवल हथियार ही नहीं जुटाए गए थे। NIA की जांच में सामने आया कि आसपास के गांवों से रसद और खाना जुटाया गया। करीब 25 बोरी चावल अलग-अलग जगहों से जुटाया गया था। प्रत्येक बोरी करीब 50 किलो की थी।

माओवादी कैडरों के लिए जंगल में अस्थायी कैंप भी तैयार किया गया। यानी हमले के लिए हथियार, लड़ाके, राशन, रास्ते की जानकारी और वापसी की योजना सब पहले से तैयार की जा रही थी।

कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा बनी हमले का टारगेट

मई 2013 में कांग्रेस ने बस्तर के सात जिलों में परिवर्तन यात्रा का कार्यक्रम घोषित किया था। माओवादियों को इसकी जानकारी मिली। NIA की जांच के मुताबिक उन्हें यह भी पता चला कि यात्रा में महेंद्र कर्मा शामिल रहेंगे।

इसके बाद हमले की योजना को अंतिम रूप दिया गया। माओवादियों ने दरभा इलाके में कमांड पोस्ट बनाया। सड़क की रेकी की गई। यह पता लगाया गया कि काफिला किस रास्ते से आएगा और किस जगह उसे आसानी से रोका जा सकता है।

इसके लिए अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी गई थी।

ब्लास्ट स्क्वॉड – IED विस्फोट के लिए

असॉल्ट ग्रुप – सीधे हमला करने के लिए

स्टॉप ग्रुप – काफिले का रास्ता रोकने के लिए

सिग्नल ग्रुप – हमले के संकेत के लिए

25 मई की शाम: पहले धमाका, फिर चारों तरफ से गोलियां

25 मई को कांग्रेस का करीब 20 वाहनों का काफिला जगदलपुर से सुकमा की ओर गया था। वापसी में काफिला केशलूर से होते हुए झीरम घाटी की ओर बढ़ा। काफिले के आगे एक ट्रक चल रहा था। उसके पीछे दो बोलेरो गाड़ियां थीं। इसी दौरान माओवादियों ने पुलिया के नीचे लगाए गए IED में विस्फोट कर दिया।

धमाका इतना जोरदार था कि गाड़ी बुरी तरह डैमेज हो गई। इसके बाद ट्रक के टायर भी फट गए और रास्ता बाधित हो गया। माओवादियों ने आसपास के पेड़ काटकर सड़क को बंद कर दिया। इसके बाद जंगल से काफिले पर गोलीबारी शुरू कर दी गई।

झीरम घाटी में हमले के दौरान IED ब्लास्ट से एक गाड़ी का हिस्सा उड़कर नदी में जा गिरा था। ये 12 साल बाद भी वहीं फंसा हुआ है।

झीरम घाटी में हमले के दौरान IED ब्लास्ट से एक गाड़ी का हिस्सा उड़कर नदी में जा गिरा था। ये 12 साल बाद भी वहीं फंसा हुआ है।

शाम करीब 4:30 बजे झीरम में गोलीबारी तेज हो गई

माओवादियों का एक ही सवाल था- महेंद्र कर्मा कहां हैं? हमले के दौरान नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, कवासी लखमा और अन्य लोग माओवादियों के कब्जे में आ गए थे। NIA अधिकारियों के मुताबिक हमलावर लगातार महेंद्र कर्मा के बारे में पूछ रहे थे।

कुछ देर बाद कर्मा अपने साथियों के साथ सामने आए। माओवादियों ने उन्हें पकड़ लिया। उनके हाथ बांधे गए और उनके साथ बर्बरता की गई। जांच में उनकी हत्या गोली मारने और धारदार हथियार से हमला करने के बाद किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल की भी हत्या कर दी गई।

कवासी लखमा, फूलोदेवी नेताम समेत कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को छोड़ दिया गया। हमले में गंभीर रूप से घायल कई लोगों की भी हत्या किए जाने और शवों के साथ बर्बरता किए जाने की बात NIA की जांच में सामने आई थी।

जान गंवाने वाले कांग्रेस नेताओं के नाम

नंदकुमार पटेल (तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष) महेंद्र कर्मा (पूर्व नेता प्रतिपक्ष), विद्याचरण शुक्ल (पूर्व केंद्रीय मंत्री), दिनेश पटेल, उदय मुदलियार, भागीरथी पालिया, राजकुमार, गोपीचंद माधवानी, अल्लानूर, योगेंद्र शर्मा, राजेश चंद्राकर, मनोज जोशी, अभिषेक गोलचा, गनपथ नाग, सदा सिंह, चंद्रहास ध्रुव, दीपक उपाध्याय, तरुण देशमुख, प्रहलाद, चंदर राम मांझी, पैतृक खलखो, पवन कोंद्रा, सियाराम सिंह, पुलिसकर्मी- प्रधान आरक्षक प्रफुल्ल शुक्ला, अशोक कुमार, राहुल प्रताप सिंह और इमैनुअल केरकेट्टा।

हमला खत्म करने के बाद हथियार भी लूटकर ले गए

नक्सलियों ने काफिले की गाड़ियों और मारे गए सुरक्षाकर्मियों के हथियारों को भी अपने कब्जे में लिया। 25 सितंबर 2014 को NIA की चार्जशीट के मुताबिक हमले के बाद एक 9 एमएम पिस्टल के साथ 2 मैगजीन और 20 कारतूस, दो AK-47 राइफलें, 14 मैगजीन और 455 कारतूस और 10 हैंड ग्रेनेड और वॉकी टॉकी और अन्य डिवाइस लूटे थे।

इसके साथ ही घटनास्थल से मिले विस्फोटकों की फोरेंसिक जांच में अमोनियम नाइट्रेट, PETN और अमाटोल जैसे पदार्थों का इस्तेमाल सामने आया था।

NIA की 1500 पन्नों की चार्जशीट में 152 माओवादियों का जिक्र

25 सिंतबर 2014 को NIA ने अपनी पहली चार्जशीट पेश की थी। जिसमें एजेंसी ने करीब 1,500 पन्नों की चार्जशीट में हमले की साजिश से लेकर तैयारी और वारदात तक का विवरण रखा। चार्जशीट में हमले में शामिल बताए गए करीब 152 माओवादी सदस्यों का उल्लेख किया गया था।

हालांकि इनमें से सभी को गिरफ्तार कर अदालत में ट्रायल के लिए पेश नहीं किया जा सका। जांच में यह भी सामने आया कि हमले के लिए अलग-अलग इलाकों से माओवादी दस्ते दरभा पहुंचे थे और स्थानीय स्तर पर रसद जुटाई गई थी। इसके बाद 28 सितंबर 2015 को NIA ने 30 आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी।

Continue Reading

कोरबा

खेतों में पहुंचा 10 से ज्यादा हाथियों का झुंड:कोरबा के तनेरा में धान की फसल खाई, पसान-केंदई में सबसे ज्यादा नुकसान

Published

on

कोरबा। कोरबा के कटघोरा वन मंडल में हाथियों की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। क्षेत्र में 50 से ज्यादा हाथियों का दल घूम रहा है और अब दिन में भी किसानों के खेतों में पहुंचकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। ताजा मामला तनेरा गांव का है, जहां 10 से ज्यादा हाथियों के झुंड ने खेत में घुसकर धान की फसल खा ली। झुंड में छोटे हाथी के बच्चे भी दिखाई दिए।

तनेरा गांव के खेतों में अचानक हाथियों का झुंड पहुंच गया और धान की फसल खाने लगा। ग्रामीणों ने सुरक्षित दूरी से शोर मचाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन काफी देर तक झुंड खेत में ही रहा। इसके बाद हाथी धीरे-धीरे जंगल की ओर चले गए।

झुंड में हाथी के बच्चे भी दिखे

झुंड में हाथी के बच्चे भी दिखे

भीड़ के शोर के बावजूद खेत में खाते रहे फसल

झुंड के गांव के बेहद करीब पहुंचने से ग्रामीणों में डर का माहौल बना हुआ है। हाथी के बच्चों को देखने के लिए लोग उत्सुक भी नजर आए, लेकिन वन विभाग ने लोगों से हाथियों से दूरी बनाए रखने की अपील की है।

बच्चों को बीच में रखकर चलता है झुंड

वन विभाग के मुताबिक, झुंड में रहने वाले हाथी आमतौर पर गांव के भीतर जाने से बचते हैं। वे बच्चों को बीच में रखकर चलते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा बनी रहे। हालांकि, झुंड से अलग घूम रहे दो दंतैल हाथी अलग चुनौती बने हुए हैं। विभाग के अनुसार, दोनों दंतैल रोजाना मकानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

कटघोरा वन मंडल में 50 से ज्यादा हाथियों की मौजूदगी

कटघोरा वन मंडल में 50 से ज्यादा हाथियों की मौजूदगी

वहीं हड़बड़ी के आसपास घूम रहा एक दंतैल शाम होते ही सड़क पर आ जाता है, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है।

पसान-केंदई में सबसे ज्यादा फसल नुकसान

हाथियों से सबसे ज्यादा नुकसान पसान और केंदई रेंज में हो रहा है। दोनों रेंज एक-दूसरे से लगी हुई हैं और हाथियों का दल इसी क्षेत्र में लगातार आवाजाही कर रहा है। खेतों में फसल तैयार होने के समय हाथियों के पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

हाथी मित्र दल के साथ निगरानी

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम सतर्क है। हाथी मित्र दल और वन विभाग के कर्मचारी लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। हालांकि, हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण फसलों को हो रहे नुकसान को पूरी तरह रोकना चुनौती बना हुआ है।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों के नजदीक न जाएं, उन्हें घेरने या उकसाने की कोशिश न करें और उनकी मौजूदगी की जानकारी तुरंत विभाग को दें।

अलग घूम रहे 2 दंतैल मकान तोड़ रहे

अलग घूम रहे 2 दंतैल मकान तोड़ रहे

मुआवजे और सुरक्षा की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से हाथियों से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ फसल नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है। लगातार बढ़ रही हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए ग्रामीणों में नुकसान और जनसुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

Continue Reading

कोरबा

करतला में कीटनाशक दुकानों का औचक निरीक्षण

Published

on

अनियमितता मिलने पर कई विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस, न्यूमेमन कृषि केन्द्र पचपेड़ी में कीटनाशक बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध
कोरबा, 06 सितंबर 2026। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक एवं कीटनाशक दवाएं उपलब्ध कराने तथा कृषि आदानों की बिक्री में अनियमितता, कालाबाजारी एवं निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री (ओवररेटिंग) पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से ब्लॉक स्तरीय निरीक्षण दल द्वारा आज विकासखंड करतला क्षेत्र के उर्वरक एवं कीटनाशक विक्रय प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान दुकानों में उपलब्ध कीटनाशकों के स्टॉक, मूल्य सूची, विक्रय अभिलेख, अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) एवं भंडारण व्यवस्था की बारीकी से जांच की गई। जांच के दौरान कुछ प्रतिष्ठानों में अनियमितताएं एवं कमियां पाए जाने पर कृषि विभाग द्वारा नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की गई।
न्यूमेमन कृषि केन्द्र में कीटनाशक बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध
निरीक्षण के दौरान न्यूमेमन कृषि केन्द्र, पचपेड़ी में अनियमितता पाए जाने पर कीटनाशक दवाओं की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया। संबंधित विक्रेता के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
कई कृषि केन्द्रों को कारण बताओ नोटिस
निरीक्षण के दौरान अनियमितता एवं कमियां पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठानों के संचालकों को तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी क्रम में संतोष कुमार कश्यप कृषि केन्द्र, सन्डैल, जय मां मड़वारानी कृषि केन्द्र तथा किसान कृषि केन्द्र, मड़वारानी में निरीक्षण के दौरान कमियां पाए जाने पर संबंधित संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
कृषि विभाग द्वारा जिले में कृषि आदानों की गुणवत्ता एवं निर्धारित दर पर बिक्री सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसानों को अमानक कृषि सामग्री उपलब्ध कराने, निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री करने अथवा स्टॉक एवं विक्रय अभिलेखों में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677