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कोरबा

फसल का दाम भी बढ़ और उपार्जन केंद्र में सुविधाएं भी – किसान ठंड़ीराम बिंझवार

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कोरबा। जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम अरसिया में रहने वाले किसान ठंड़ीराम बिंझवार अपने परिश्रम और खेती के प्रति समर्पण से एक मिसाल बने हुए हैं। आठ एकड़ भूमि में वे मुख्य रूप से मोटा धान की खेती करते हैं।

पिछले वर्ष उन्होंने 136 क्विंटल धान उपार्जन केंद्र में बेचा था, जिससे प्राप्त राशि से उनके घर-परिवार की आवश्यक जरूरतें पूरी हुईं। इस वर्ष मौसम और मेहनत दोनों के सहयोग से उन्हें 160 क्विंटल धान बेचने की उम्मीद है, जो उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को और सुदृढ़ करेगा। श्री ठंड़ीराम बताते हैं कि क्षेत्र में अधिकतर किसान धान की ही फसल लेते हैं और सरकार द्वारा प्रदान की जा रही समर्थन मूल्य और आदान राशि से किसानों को बड़ी आर्थिक सहायता मिल रही है। सरकार की यह पहल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ा रही है, बल्कि खेती को और अधिक लाभकारी भी बना रही है।उन्होंने उपार्जन केंद्र की व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की और बताया कि पीने के पानी की सुविधा, आराम व बैठने के लिए कुर्सी, छांव की समुचित व्यवस्था है। इन सुविधाओं के कारण किसानों को उपार्जन केंद्र में किसी प्रकार की समस्या नहीं होती और वे संतोषपूर्वक धान विक्रय कर सकते हैं। ठंड़ीराम बिंझवार की यह उपलब्धि बताती है कि यदि मेहनत और सही सहयोग मिल जाए तो खेती न केवल जीवनयापन का साधन, बल्कि समृद्धि का मार्ग भी बन सकती है और अन्य किसानों को प्रोत्साहित भी किया जा सकता है।

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कोरबा

कोरबा में 2 घंटे भीषण जाम, ट्रेलर ब्रेकडाउन:स्कूल बसें फंसीं, ट्रेनें छूटीं, लोगों ने सड़क चौड़ीकरण की मांग की

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कोरबा। कोरबा-भिलाई मार्ग पर बुधवार सुबह गौ माता चौक से भिलाई खुर्द तक करीब 2 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। सुबह 6 बजे से 8 बजे तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। एक ट्रेलर के अचानक ब्रेकडाउन होने से सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

जाम में ट्रेलर, ट्रैक्टर, कार और बाइक के साथ बच्चों से भरी स्कूल बसें भी फंस गईं। कई छात्र 30 से 40 मिनट की देरी से स्कूल पहुंचे। जाम के कारण चांपा रेलवे स्टेशन जाने वाले कई यात्री समय पर नहीं पहुंच सके और उनकी ट्रेन छूट गई। घंटों जाम में फंसे रहने के बाद कई लोग पैदल ही अपने गंतव्य के लिए निकल पड़े।

पुलिस ने हटवाया ब्रेकडाउन ट्रेलर

सूचना मिलते ही यातायात पुलिस मौके पर पहुंची। ब्रेकडाउन ट्रेलर को सड़क से हटाकर करीब सुबह 8 बजे तक एक-एक कर वाहनों को निकाला गया और यातायात सामान्य कराया गया।

स्थानीय लोगों में नाराजगी

लगातार लगने वाले जाम से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सुबह के समय इस मार्ग पर अक्सर जाम की समस्या रहती है। इसकी वजह भारी वाहनों की आवाजाही, संकरी सड़क और कमजोर यातायात प्रबंधन है।

वैकल्पिक मार्ग भी नहीं बना राहत

लोगों ने बताया कि कुछ वाहन चालक नहर किनारे के रास्ते से निकलने की कोशिश करते हैं, लेकिन बारिश के कारण वहां कीचड़ और जलभराव होने से यह रास्ता भी उपयोगी नहीं रह गया है।

प्रशासन से ये मांगें

स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने सुबह के व्यस्त समय में भारी वाहनों के प्रवेश पर समय सीमा तय करने, नियमित यातायात पुलिस की तैनाती और गौ माता चौक से भिलाई खुर्द तक सड़क चौड़ीकरण की मांग की है।

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कोरबा

कोरबा में हरियर धरती समिति ने किया वृक्षारोपण:4 साल में लगाए 3000 से अधिक पौधे, अधिकारी-कर्मचारी, परिवार हुए शामिल

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कोरबा। कोरबा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कोरबा रेल मंडल में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्यरत हरियर धरती समिति ने मानसून की शुरुआत के साथ इस वर्ष भी वृक्षारोपण अभियान चलाया। क्षेत्रीय रेल प्रबंधक उत्कर्ष गौरव (IRMS-ट्रैफिक) के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों, उनके परिजनों और आसपास की बस्ती के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

अभियान के तहत परिवारों ने अपने हाथों से 10 पीपल और बरगद के पौधे लगाए। पौधों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें बेर के कांटों से घेरा गया। समिति के सदस्यों ने बताया कि पौधों के बड़े होने तक उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी इन्हीं परिवारों की रहेगी, ताकि उनका संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

रेलवे अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में एस. के. पाण्डेय (CSM), दिनेश प्रसाद (SSE), सतीश कुमार (RPF इंस्पेक्टर) सहित हरियर मित्र गुलाब धुर्वे, आनंद गुप्ता, धनेश्वर लाल, धर्मवीर, अजय, संजीत गोंड, अमरेश सिन्हा, नितेश, शिवम और अंगूर दिवाकर मौजूद रहे।

सिर्फ पौधे नहीं, पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी

हरियर धरती समिति रेलवे की एक सामाजिक पहल है, जिसमें अधिकारी और कर्मचारी मिलकर पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के कार्य करते हैं। समिति का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।

4 साल में लगाए 3000 से ज्यादा पौधे

समिति पिछले चार वर्षों से रेलवे कॉलोनी, आसपास की बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार काम कर रही है। इस दौरान 3,000 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। समिति का कहना है कि पौधारोपण के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और नियमित देखभाल भी टीम स्वयं सुनिश्चित करती है।

समाज सेवा के कार्यों में भी सक्रिय

वृक्षारोपण के अलावा समिति ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को कपड़ों का वितरण, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर और अन्य सामाजिक गतिविधियां भी संचालित करती है। हर वर्ष मानसून के दौरान व्यापक स्तर पर हरित अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

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कोरबा

गलत प्रमोशन कभी भी वापस लिया जा सकता है:हाईकोर्ट बोला- गलत पदोन्नति पर कर्मचारी का अधिकार नहीं, सालों बाद डिमोशन आदेश भी वैध

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बिलासपुर/कोरबा। हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी को विभागीय पदोन्नति समिति की गलती या नियमों को ताक पर रखकर प्रमोशन दे दिया जाता है, तो शासन को उसे सुधारने और कर्मचारी को दोबारा उसके मूल पद पर भेजने का पूरा अधिकार है।

कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से मिला प्रमोशन चाहे कितने भी समय तक प्रभावी रहा हो, उससे कर्मचारी को कोई स्थायी या कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों के तीन साल बाद डिमोशन आदेश को को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है।

कोरबा के हीरमन दास महंत और रायगढ़ के विद्याभूषण शुक्ला को 12 अप्रैल 2023 को जीप ड्राइवर के पद से मैकेनिक ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नत किया गया था। दोनों कर्मचारी लगभग तीन वर्षों तक इस पद पर कार्यरत रहे और उनका नाम अंतरिम वरिष्ठता सूची में भी आ गया था।

लेकिन 25 जून 2026 को मिनीमाता हसदेव बांगो परियोजना बिलासपुर के मुख्य अभियंता ने आदेश जारी कर उनकी पदोन्नति रद्द कर दी और उन्हें वापस मूल पद पर भेज दिया।

प्रमोशन आदेश निरस्त करने के खिलाफ लगाई याचिका

तीन साल बाद प्रमोशन आदेश निरस्त करने के खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इसमें तर्क दिया कि उन्होंने नियमानुसार चयन प्रक्रिया पूरी की थी और इसमें उनकी कोई धोखाधड़ी या जानकारी छिपाने की भूमिका नहीं थी।

जब वे तीन साल से पद पर काम कर रहे थे, तो अचानक इतनी लंबी अवधि के बाद बिना किसी विभागीय जांच के डिमोशन करना मनमाना और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

राज्य सरकार का जवाब- प्रमोशन में नियमों की अनदेखी

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि डीपीसी ने कार्यभारित कर्मचारियों के नियमों और अनिवार्य पात्रता शर्तों की अनदेखी कर प्रमोशन की सिफारिश की थी। यह विभागीय जांच या सजा का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक गलती का सुधार है। फैसला लेने से पहले कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका जवाब सुनने के बाद ही अंतिम आदेश जारी किया गया था।

हाईकोर्ट बोला- शासन को है गलती सुधारने का अधिकार

हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि यह मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई का नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक त्रुटि को सुधारने का है। गलत पदोन्नति के आधार पर लंबे समय तक काम करने मात्र से कोई स्थायी अधिकार नहीं बन जाता और विभाग को अपनी गलती सुधारने का पूरा हक है।

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