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कोरबा

किसान-हितैषी नीतियों का प्रतिफल : साय सरकार की धान खरीदी व्यवस्था से किसानों में संतोष, खेती बनी लाभ का आधार

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कोरबा । छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले किसान वर्ग को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा निरंतर ठोस और प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में प्रदेश में संचालित धान खरीदी व्यवस्था न केवल देश में सर्वाधिक समर्थन मूल्य प्रदान कर रही है, बल्कि टोकन से लेकर अंतिम विक्रय और भुगतान तक किसानों को हर स्तर पर सुविधा, पारदर्शिता और सम्मान का अनुभव करा रही है।
राज्य सरकार की स्पष्ट मंशा है कि किसान अपनी उपज बेचने के लिए किसी भी प्रकार की असुविधा, लंबी प्रतीक्षा या अव्यवस्था का सामना न करें। इसी उद्देश्य से समिति स्तर पर टोकन व्यवस्था, मंडियों में सुव्यवस्थित प्रबंधन, सहयोगी वातावरण और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की गई है। इन प्रयासों का सकारात्मक असर अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

कोरबा जिले के कनकी धान मंडी में ग्राम गुमिया निवासी कृषक जमुना प्रसाद बियार इस सुगठित व्यवस्था के प्रत्यक्ष लाभार्थी बने। श्री बियार ने अपनी लगभग 06 से 07 एकड़ कृषि भूमि में उपजाए गए 104 क्विंटल धान का विक्रय मंडी में किया। उन्होंने बताया कि ऑफलाइन समिति के माध्यम से उन्हें बिना किसी लाइन में लगे और बिना किसी परेशानी के समय पर टोकन प्राप्त हो गया, जिससे मंडी में धान विक्रय की प्रक्रिया सहजता से पूरी हुई।
श्री बियार ने बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने 110 क्विंटल धान का विक्रय किया था और उस समय भी शासन की व्यवस्था संतोषजनक रही। सरकार द्वारा सर्वाधिक समर्थन मूल्य दिए जाने से उन्हें अपनी फसल का उचित और लाभकारी मूल्य मिलने का पूरा भरोसा है। उनके अनुसार, वर्तमान व्यवस्था ने खेती को केवल आजीविका का साधन ही नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सुरक्षित भविष्य का आधार बनाया है। धान खरीदी की पारदर्शी और किसान-मैत्री व्यवस्था से न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। समय पर खरीदी, स्पष्ट प्रक्रिया और सहयोगपूर्ण वातावरण ने किसानों में शासन के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ किया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की यह पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि राज्य सरकार किसानों के श्रम का सम्मान करने, उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। धान खरीदी की यह सुव्यवस्थित प्रणाली छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और किसान कल्याण की मजबूत नींव को दर्शाती है।

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कोरबा

गलत प्रमोशन कभी भी वापस लिया जा सकता है:हाईकोर्ट बोला- गलत पदोन्नति पर कर्मचारी का अधिकार नहीं, सालों बाद डिमोशन आदेश भी वैध

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बिलासपुर/कोरबा। हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी को विभागीय पदोन्नति समिति की गलती या नियमों को ताक पर रखकर प्रमोशन दे दिया जाता है, तो शासन को उसे सुधारने और कर्मचारी को दोबारा उसके मूल पद पर भेजने का पूरा अधिकार है।

कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से मिला प्रमोशन चाहे कितने भी समय तक प्रभावी रहा हो, उससे कर्मचारी को कोई स्थायी या कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों के तीन साल बाद डिमोशन आदेश को को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है।

कोरबा के हीरमन दास महंत और रायगढ़ के विद्याभूषण शुक्ला को 12 अप्रैल 2023 को जीप ड्राइवर के पद से मैकेनिक ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नत किया गया था। दोनों कर्मचारी लगभग तीन वर्षों तक इस पद पर कार्यरत रहे और उनका नाम अंतरिम वरिष्ठता सूची में भी आ गया था।

लेकिन 25 जून 2026 को मिनीमाता हसदेव बांगो परियोजना बिलासपुर के मुख्य अभियंता ने आदेश जारी कर उनकी पदोन्नति रद्द कर दी और उन्हें वापस मूल पद पर भेज दिया।

प्रमोशन आदेश निरस्त करने के खिलाफ लगाई याचिका

तीन साल बाद प्रमोशन आदेश निरस्त करने के खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इसमें तर्क दिया कि उन्होंने नियमानुसार चयन प्रक्रिया पूरी की थी और इसमें उनकी कोई धोखाधड़ी या जानकारी छिपाने की भूमिका नहीं थी।

जब वे तीन साल से पद पर काम कर रहे थे, तो अचानक इतनी लंबी अवधि के बाद बिना किसी विभागीय जांच के डिमोशन करना मनमाना और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

राज्य सरकार का जवाब- प्रमोशन में नियमों की अनदेखी

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि डीपीसी ने कार्यभारित कर्मचारियों के नियमों और अनिवार्य पात्रता शर्तों की अनदेखी कर प्रमोशन की सिफारिश की थी। यह विभागीय जांच या सजा का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक गलती का सुधार है। फैसला लेने से पहले कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका जवाब सुनने के बाद ही अंतिम आदेश जारी किया गया था।

हाईकोर्ट बोला- शासन को है गलती सुधारने का अधिकार

हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि यह मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई का नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक त्रुटि को सुधारने का है। गलत पदोन्नति के आधार पर लंबे समय तक काम करने मात्र से कोई स्थायी अधिकार नहीं बन जाता और विभाग को अपनी गलती सुधारने का पूरा हक है।

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कोरबा

फसल बीमा कराने का अंतिम अवसर: 31 जुलाई तक करें आवेदन

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कोरबा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत जिले के किसानों के लिए अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। उप संचालक कृषि, कोरबा ने जिले के सभी किसानों से निर्धारित समयावधि के भीतर फसल बीमा कराने की अपील की है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली संभावित फसल क्षति की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत धान (सिंचित एवं असिंचित), मक्का, उड़द, तुअर, मूंग, कोदो, कुटकी, मूंगफली एवं रागी फसलें अधिसूचित हैं। योजना का लाभ ऋणी, अऋणी, भू-धारक, बटाईदार तथा वनपट्टाधारी किसान प्राप्त कर सकते हैं।
कृषि विभाग ने बताया है कि प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान होने की स्थिति में किसान 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना देकर दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। समय पर सूचना देने से दावा प्रक्रिया सुगमता से पूर्ण की जा सकेगी।
अऋणी किसान आवश्यक दस्तावेजों के साथ कॉमन सर्विस सेंटर, संबंधित बैंक, लोक सेवा केन्द्र अथवा प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

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कोरबा

कोरबा में शुरू होगा शासकीय अनुसूचित जनजाति बालक क्रीड़ा परिसर, 10 अगस्त को होगी प्रवेश चयन परीक्षा

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कोरबा। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, रायपुर द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से जिला मुख्यालय कोरबा में शासकीय अनुसूचित जनजाति बालक क्रीड़ा परिसर की शुरुआत की जा रही है। परिसर में चयनित बालक खिलाड़ियों को एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो एवं तैराकी खेलों का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। छात्रावास एवं खेल मैदान की उपलब्धता के आधार पर इस वर्ष 40 खिलाड़ियों को प्रवेश दिया जाएगा।
प्रवेश के लिए ऐसे बालक पात्र होंगे, जिनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2009 अथवा उसके बाद की हो तथा वे कक्षा 6वीं से 12वीं तक अध्ययनरत हों। खिलाड़ियों का अंतिम चयन विभाग द्वारा आयोजित “10 बैटरी टेस्ट” में उनके प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। इस परीक्षण में 50 मीटर दौड़, उछाल परीक्षण, 4×10 मीटर शटल रेस, स्टैंडिंग ब्रॉड जंप, गतिशील स्फूर्ति परीक्षण, अपर बॉडी बेंडिंग, पुश-अप, लेग रेसिंग, सिट-अप तथा 400 मीटर दौड़ सहित कुल 10 शारीरिक दक्षता परीक्षण शामिल रहेंगे।
प्रवेश चयन परीक्षा 10 अगस्त 2026 को प्रातः 8 बजे से प्रियदर्शिनी इंदिरा गांधी स्टेडियम, टी.पी. नगर, कोरबा में आयोजित की जाएगी। चयनित खिलाड़ियों की सूची 13 अगस्त 2026 को जारी की जाएगी। इसके उपरांत अभ्यर्थियों का चिकित्सकीय परीक्षण कर उन्हें क्रीड़ा परिसर में प्रवेश प्रदान किया जाएगा।
क्रीड़ा परिसर में प्रवेशित विद्यार्थियों की पढ़ाई निकटवर्ती शासकीय विद्यालयों में कराई जाएगी। साथ ही उन्हें छात्रावास में निःशुल्क आवास, पलंग, गद्दा, तकिया, चादर, कंबल एवं मच्छरदानी, पौष्टिक भोजन, शालेय गणवेश तथा ट्रैकसूट, टी-शर्ट, निकर, जूते और मोजों सहित संपूर्ण खेल किट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, कोरबा ने पात्र एवं इच्छुक खिलाड़ियों से निर्धारित तिथि पर चयन परीक्षा में उपस्थित होकर इस अवसर का लाभ उठाने की अपील की है।

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