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कोरबा

निर्माण कार्यों को गुणवत्तापूर्ण तरीके से निश्चित समय-सीमा में पूर्ण कराएं : कलेक्टर

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डीएमएफ सहित पीएम आवास योजना ग्रामीण, पीएम जनमन, मनरेगा, आजीविका मिशन एवं एसबीएम कार्यों की हुई समीक्षा

निर्माण कार्य प्रारंभ होने से पूर्व नागरिक सूचना पटल बनाना अनिवार्य

कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास ,डीएमएफ के अंतर्गत संचालित कार्यों सहित ग्रामीण पंचायत विभाग की प्रमुख योजनाओं—प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, पीएम जनमन आवास, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन एवं स्वच्छ भारत मिशन की विस्तृत समीक्षा की।

समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में संचालित समस्त निर्माण कार्यों को उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। पारदर्शिता एवं आमजन की जानकारी के लिए डीएमएफ अंतर्गत सीसी रोड निर्माण सहित सभी भवन निर्माण कार्यों में नागरिक सूचना पटल अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। निर्माण कार्य प्रारंभ होने से पूर्व सूचना पटल बनाना सुनिश्चित किया जाए तथा भवन निर्माण कार्यों में दीवारों पर आवश्यक जानकारी अंकित की जाए।

कलेक्टर ने ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान के संदर्भ में डीएमएफ की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इस कार्ययोजना में प्राथमिकता से उन क्षेत्रों को शामिल करने को कहा गया, जहां आंगनवाड़ी भवन एवं विद्यालय भवन उपलब्ध नहीं हैं या जर्जर स्थिति में हैं। साथ ही जिन स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों में बाउंड्रीवाल, शौचालय अथवा पेयजल की व्यवस्था नहीं है, वहां आवश्यक निर्माण कार्यों को शामिल करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य हर बसाहट तक सड़क की सुविधा पहुंचाना है, इसके लिए सीसी रोड निर्माण किए जाएंगे, जिनके लिए ग्राम पंचायतों द्वारा औचित्य प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।

सोलर संबंधी कार्यों के लिए कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत अथवा जनपद पंचायत एजेंसी नहीं होगी, बल्कि इन कार्यों की एजेंसी क्रेडा विभाग रहेगा। जिला एवं जनपद पंचायत कार्यालयों में सभी प्रकार की सामग्री की खरीदी अनिवार्य रूप से जैम पोर्टल के माध्यम से करने के निर्देश दिए गए। जैम पोर्टल की प्रक्रिया के संबंध में संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।

कलेक्टर श्री दुदावत ने डीएमएफ अंतर्गत शैक्षणिक संस्थानों, उप स्वास्थ्य केंद्रों सहित जनहितेषी कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण, रंग-रोगन एवं पेंटिग में एकरूपता सुनिश्चित की जाए तथा तकनीकी स्वीकृति (टीएस) में निर्धारित सामग्री का ही उपयोग किया जाए। पूर्ण हो चुके कार्यों के लिए एक सप्ताह के भीतर सीसी जारी करने के निर्देश भी दिए गए।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत प्रथम एवं द्वितीय किश्त प्राप्त हितग्राहियों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले में प्रारंभ सभी आवास कार्य मई माह तक पूर्ण कर लिए जाएं। पीएम जनमन आवासों को प्राथमिकता के साथ मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि सीईओ जनपद पंचायत एवं एसडीओ आरईएस द्वारा सतत समीक्षा करते हुए फील्ड विजिट सुनिश्चित की जाए तथा तकनीकी अमला हितग्राहियों को आवास पूर्ण करने हेतु निरंतर प्रेरित करे।

मनरेगा के अंतर्गत निर्माण कार्यों को मार्च 2026 तक पूर्ण करने, मस्टर रोल समय-सीमा में जारी करने तथा तीन वर्ष से अधिक पुराने अप्रारंभ कार्यों को निरस्त करने के निर्देश दिए गए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत परिवारों के समावेशन, चक्रीय निधि लक्ष्य की पूर्ति, बैंक क्रेडिट लिंकेज में शत-प्रतिशत प्रगति एवं लखपति दीदी लक्ष्य को पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया गया। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत फिकल स्लज मैनेजमेंट प्लांट के निर्माण कार्य मार्च माह तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने डीएमएफ से स्वीकृत 803 आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी निर्माण कार्य मानसून पूर्व पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने तकनीकी अमले को नियमित फील्ड विजिट, कार्य स्थल निरीक्षण के उपरांत ही मूल्यांकन करने तथा निर्माण कार्यों की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। भूमि विवाद से संबंधित मामलों का निराकरण सीईओ जनपद पंचायत एवं एसडीएम के समन्वय से करने के निर्देश भी दिए गए।

समीक्षा बैठक में सहायक कलेक्टर क्षितिज गुरभेले, सीईओ जिला पंचायत दिनेश कुमार नाग, सहायक परियोजना अधिकारी जिला पंचायत, ईई आरईएस श्री जोगी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, सब इंजीनियर एवं तकनीकी सहायक उपस्थित रहे।

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कोरबा

कोरबा में 2 घंटे भीषण जाम, ट्रेलर ब्रेकडाउन:स्कूल बसें फंसीं, ट्रेनें छूटीं, लोगों ने सड़क चौड़ीकरण की मांग की

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कोरबा। कोरबा-भिलाई मार्ग पर बुधवार सुबह गौ माता चौक से भिलाई खुर्द तक करीब 2 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। सुबह 6 बजे से 8 बजे तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। एक ट्रेलर के अचानक ब्रेकडाउन होने से सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

जाम में ट्रेलर, ट्रैक्टर, कार और बाइक के साथ बच्चों से भरी स्कूल बसें भी फंस गईं। कई छात्र 30 से 40 मिनट की देरी से स्कूल पहुंचे। जाम के कारण चांपा रेलवे स्टेशन जाने वाले कई यात्री समय पर नहीं पहुंच सके और उनकी ट्रेन छूट गई। घंटों जाम में फंसे रहने के बाद कई लोग पैदल ही अपने गंतव्य के लिए निकल पड़े।

पुलिस ने हटवाया ब्रेकडाउन ट्रेलर

सूचना मिलते ही यातायात पुलिस मौके पर पहुंची। ब्रेकडाउन ट्रेलर को सड़क से हटाकर करीब सुबह 8 बजे तक एक-एक कर वाहनों को निकाला गया और यातायात सामान्य कराया गया।

स्थानीय लोगों में नाराजगी

लगातार लगने वाले जाम से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि सुबह के समय इस मार्ग पर अक्सर जाम की समस्या रहती है। इसकी वजह भारी वाहनों की आवाजाही, संकरी सड़क और कमजोर यातायात प्रबंधन है।

वैकल्पिक मार्ग भी नहीं बना राहत

लोगों ने बताया कि कुछ वाहन चालक नहर किनारे के रास्ते से निकलने की कोशिश करते हैं, लेकिन बारिश के कारण वहां कीचड़ और जलभराव होने से यह रास्ता भी उपयोगी नहीं रह गया है।

प्रशासन से ये मांगें

स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने सुबह के व्यस्त समय में भारी वाहनों के प्रवेश पर समय सीमा तय करने, नियमित यातायात पुलिस की तैनाती और गौ माता चौक से भिलाई खुर्द तक सड़क चौड़ीकरण की मांग की है।

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कोरबा

कोरबा में हरियर धरती समिति ने किया वृक्षारोपण:4 साल में लगाए 3000 से अधिक पौधे, अधिकारी-कर्मचारी, परिवार हुए शामिल

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कोरबा। कोरबा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कोरबा रेल मंडल में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कार्यरत हरियर धरती समिति ने मानसून की शुरुआत के साथ इस वर्ष भी वृक्षारोपण अभियान चलाया। क्षेत्रीय रेल प्रबंधक उत्कर्ष गौरव (IRMS-ट्रैफिक) के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों, उनके परिजनों और आसपास की बस्ती के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

अभियान के तहत परिवारों ने अपने हाथों से 10 पीपल और बरगद के पौधे लगाए। पौधों को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें बेर के कांटों से घेरा गया। समिति के सदस्यों ने बताया कि पौधों के बड़े होने तक उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी इन्हीं परिवारों की रहेगी, ताकि उनका संरक्षण सुनिश्चित हो सके।

रेलवे अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में एस. के. पाण्डेय (CSM), दिनेश प्रसाद (SSE), सतीश कुमार (RPF इंस्पेक्टर) सहित हरियर मित्र गुलाब धुर्वे, आनंद गुप्ता, धनेश्वर लाल, धर्मवीर, अजय, संजीत गोंड, अमरेश सिन्हा, नितेश, शिवम और अंगूर दिवाकर मौजूद रहे।

सिर्फ पौधे नहीं, पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी

हरियर धरती समिति रेलवे की एक सामाजिक पहल है, जिसमें अधिकारी और कर्मचारी मिलकर पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा के कार्य करते हैं। समिति का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है।

4 साल में लगाए 3000 से ज्यादा पौधे

समिति पिछले चार वर्षों से रेलवे कॉलोनी, आसपास की बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार काम कर रही है। इस दौरान 3,000 से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। समिति का कहना है कि पौधारोपण के साथ-साथ उनकी सुरक्षा और नियमित देखभाल भी टीम स्वयं सुनिश्चित करती है।

समाज सेवा के कार्यों में भी सक्रिय

वृक्षारोपण के अलावा समिति ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों को कपड़ों का वितरण, स्वास्थ्य परीक्षण शिविर और अन्य सामाजिक गतिविधियां भी संचालित करती है। हर वर्ष मानसून के दौरान व्यापक स्तर पर हरित अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

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कोरबा

गलत प्रमोशन कभी भी वापस लिया जा सकता है:हाईकोर्ट बोला- गलत पदोन्नति पर कर्मचारी का अधिकार नहीं, सालों बाद डिमोशन आदेश भी वैध

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बिलासपुर/कोरबा। हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि अगर किसी कर्मचारी को विभागीय पदोन्नति समिति की गलती या नियमों को ताक पर रखकर प्रमोशन दे दिया जाता है, तो शासन को उसे सुधारने और कर्मचारी को दोबारा उसके मूल पद पर भेजने का पूरा अधिकार है।

कोर्ट ने कहा कि गलत तरीके से मिला प्रमोशन चाहे कितने भी समय तक प्रभावी रहा हो, उससे कर्मचारी को कोई स्थायी या कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं होता। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों के तीन साल बाद डिमोशन आदेश को को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी है।

कोरबा के हीरमन दास महंत और रायगढ़ के विद्याभूषण शुक्ला को 12 अप्रैल 2023 को जीप ड्राइवर के पद से मैकेनिक ग्रेड-2 के पद पर पदोन्नत किया गया था। दोनों कर्मचारी लगभग तीन वर्षों तक इस पद पर कार्यरत रहे और उनका नाम अंतरिम वरिष्ठता सूची में भी आ गया था।

लेकिन 25 जून 2026 को मिनीमाता हसदेव बांगो परियोजना बिलासपुर के मुख्य अभियंता ने आदेश जारी कर उनकी पदोन्नति रद्द कर दी और उन्हें वापस मूल पद पर भेज दिया।

प्रमोशन आदेश निरस्त करने के खिलाफ लगाई याचिका

तीन साल बाद प्रमोशन आदेश निरस्त करने के खिलाफ कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इसमें तर्क दिया कि उन्होंने नियमानुसार चयन प्रक्रिया पूरी की थी और इसमें उनकी कोई धोखाधड़ी या जानकारी छिपाने की भूमिका नहीं थी।

जब वे तीन साल से पद पर काम कर रहे थे, तो अचानक इतनी लंबी अवधि के बाद बिना किसी विभागीय जांच के डिमोशन करना मनमाना और नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

राज्य सरकार का जवाब- प्रमोशन में नियमों की अनदेखी

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि डीपीसी ने कार्यभारित कर्मचारियों के नियमों और अनिवार्य पात्रता शर्तों की अनदेखी कर प्रमोशन की सिफारिश की थी। यह विभागीय जांच या सजा का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक गलती का सुधार है। फैसला लेने से पहले कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनका जवाब सुनने के बाद ही अंतिम आदेश जारी किया गया था।

हाईकोर्ट बोला- शासन को है गलती सुधारने का अधिकार

हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि यह मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई का नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक त्रुटि को सुधारने का है। गलत पदोन्नति के आधार पर लंबे समय तक काम करने मात्र से कोई स्थायी अधिकार नहीं बन जाता और विभाग को अपनी गलती सुधारने का पूरा हक है।

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