देश
टैरिफ रद्द होने का भारत पर क्या असर:ट्रम्प बोले- ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं, अमेरिकी अधिकारी ने कहा- 10% टैरिफ ही लगेगा
वॉशिंगटन डीसी/नई दिल्ली,एजेंसी। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दुनियाभर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया है। इसके कुछ घंटे बाद ही ट्रम्प ने फिर से 10% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया।
ऐसे में भारत पर लगे टैरिफ को लेकर यह भी सवाल उठ रहा है कि भारत को 18% टैरिफ देना होगा या 10%। इसकी दो वजहें हैं-
- राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि भारत के साथ ट्रेड डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह पहले की तरह आगे बढ़ेगी।
- BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय संघ सहित अमेरिका के साथ व्यापार समझौते करने वाले देशों को अब धारा 122 के तहत 10% वैश्विक टैरिफ का ही सामना करना पड़ेगा, न कि उस टैरिफ दर का जिस पर उन्होंने पहले बातचीत की थी।
BBC की रिपोर्ट सही मानें तो भारत पर कुल टैरिफ 18% घटकर 10% रह जाएगा, जबकि ट्रम्प का बयान 18% टैरिफ की ओर इशारा कर रहा है।
भारत सरकार बोली- मामले को ध्यान से देख रहे
टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रम्प की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भारत सरकार ने कहा है कि वह पूरे मामले को ध्यान से देख रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने जो भी नए कदम उठाए हैं, उनके भारत पर क्या असर पड़ सकते हैं, इसका आकलन किया जा रहा है।
मंत्रालय के अनुसार, शुक्रवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले और ट्रम्प की प्रेस कॉन्फ्रेंस को नोट किया गया है। अमेरिका की ओर से कुछ फैसलों की घोषणा भी की गई है।
सरकार इन सभी घटनाक्रमों को समझ रही है, ताकि यह तय किया जा सके कि इनका भारत और दोनों देशों के व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
ट्रेड डील फरवरी के अंत तक फाइनल होगी
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले शुक्रवार मीडिया से बात की थी। तब उन्होंने बताया था कि अमेरिका के साथ ‘अंतरिम व्यापार समझौता’ फरवरी के अंत तक फाइनल हो जाएगा। मार्च में इस पर हस्ताक्षर होंगे, वहीं अप्रैल से ये समझौता पूरी तरह लागू हो जाएगा।
इसके साथ ही आने वाले कुछ महीनों में भारत दुनिया के बड़े देशों साथ व्यापारिक समझौतों पर अंतिम मुहर लगाएगा। अप्रैल में ब्रिटेन और ओमान के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट शुरू होने की उम्मीद है।
23 फरवरी को फाइनल होगा कानूनी ड्राफ्ट
23 फरवरी से भारत और अमेरिका के अधिकारी अमेरिका में तीन दिनों की अहम बैठक करेंगे। इस बैठक का मकसद 7 फरवरी को जारी ‘जॉइंट स्टेटमेंट’ के आधार पर कानूनी ड्राफ्ट तैयार करना है। वाणिज्य मंत्रालय के चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन भारतीय डेलिगेशन का नेतृत्व करेंगे।
उम्मीद है कि टैक्स में 25% से 18% की कमी का आधिकारिक आदेश इसी हफ्ते या अगले हफ्ते तक आ जाएगा। इससे भारत के कपड़ा, चमड़ा और जेम्स-ज्वैलरी जैसे सेक्टर को सीधा फायदा होगा।
7 फरवरी को ट्रेड डील का ऐलान हुआ था
कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने 7 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के साथ ट्रेड डील की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि भारतीय कृषि उत्पाद अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात किए जाएंगे, जबकि अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है।
पीयूष गोयल ने साफ किया कि इस समझौते में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फूड को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने कहा- यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 27.18 लाख करोड़ रुपए) के बाजार को खोलेगा।
अमेरिका से 50 हजार करोड़ डॉलर के उत्पाद खरीदेगा भारत
इसके अलावा भारत ने अगले 5 साल में अमेरिका से 50 हजार करोड़ डॉलर (45 लाख 30 हजार करोड़ रुपए) के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है। भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते (ITA ) का फ्रेमवर्क जारी किया है।
इसके तहत भारतीय सामान पर अमेरिका का टैक्स 50% घटाकर 18% कर दिया गया है। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है।
नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करेंगे दोनों देश
पीयूष गोयल ने बताया कि दोनों देशों ने फैसला किया है कि वे इसके कुछ नियम तय करेंगे, ताकि इस समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले, न कि किसी तीसरे देश को।
भारत और अमेरिका का इस व्यापार समझौते में नॉन-टैरिफ बैरियर्स को दूर करने पर खास फोकस है। ये बाधाएं टैरिफ नहीं होतीं, लेकिन व्यापार को मुश्किल बनाती हैं। अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेस कंपनियों को भारत में कीमत तय करने के नियम, रजिस्ट्रेशन में देरी जैसी रुकावटों का सामना करना पड़ा रहा था।
अप्रैल में ब्रिटेन और ओमान के साथ हुई डील लागू होगी
भारत-ब्रिटेन पिछले साल जुलाई में हुए FTA के बाद अब इसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है। इससे भारत के 99% उत्पादों को ब्रिटेन में ‘जीरो ड्यूटी’ पर एंट्री मिलेगी। बदले में भारत ब्रिटेन से आने वाली कारों और स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स कम करेगा।
ओमान के साथ भी अप्रैल में डील लागू होने की उम्मीद है, जिससे खाड़ी देशों में भारतीय सामान की पहुंच आसान होगी। ओमान ने भारत के 98% से ज्यादा उत्पादों पर जीरो ड्यूटी की पेशकश की है।

कोरबा
एविडेंस एक्ट की धारा 68- रजिस्टर्ड सेल डीड के लिए गवाहों के सर्टिफिकेशन (अटेस्टेशन) के सबूत की ज़रूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली/कोरबा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई) को फैसला सुनाया कि इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 की धारा 68 का प्रोविज़ो (शर्त) रजिस्टर्ड सेल डीड पर लागू नहीं होता है, क्योंकि कानून के तहत सेल डीड के लिए गवाहों से सर्टिफिकेशन ज़रूरी नहीं है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह बात कही, जिसमें सेल डीड ट्रांज़ैक्शन पर धारा 68 के प्रोविज़ो को गलत तरीके से लागू किया गया।
बेंच ने कहा,
“धारा 68 का प्रोविज़ो कहता है कि किसी भी डॉक्यूमेंट (वसीयत को छोड़कर) के निष्पादन (execution) के सबूत के तौर पर अटेस्टिंग गवाह को बुलाना ज़रूरी नहीं है, अगर उसे इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 (1908 का 16) के प्रावधानों के अनुसार रजिस्टर किया गया हो; सिवाय तब जब उस व्यक्ति द्वारा इसके निष्पादन से खास तौर पर इनकार किया गया हो, जिसके द्वारा इसे निष्पादित किया गया माना जाता है। चूंकि कानून के तहत सेल डीड के लिए अटेस्टेशन ज़रूरी नहीं है, इसलिए इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रावधान इस पर लागू नहीं होते हैं।”
बेंच ने धारा 68 के प्रोविज़ो के सीमित दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह प्रावधान केवल उन डॉक्यूमेंट्स पर लागू होता है जिनके लिए अनिवार्य अटेस्टेशन की ज़रूरत होती है।
“‘किसी भी डॉक्यूमेंट का निष्पादन, वसीयत को छोड़कर’ का मतलब है, वे डॉक्यूमेंट्स जिनके लिए अनिवार्य अटेस्टेशन की ज़रूरत होती है, जैसे कि गिफ्ट डीड, मॉर्गेज डीड, सेटलमेंट डीड आदि; लेकिन ऐसे डॉक्यूमेंट्स के सबूत के तौर पर किसी अटेस्टिंग गवाह से पूछताछ करना ज़रूरी नहीं है, जब तक कि इसके निष्पादन से खास तौर पर इनकार न किया गया हो।”
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद केरल में प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े एक सिविल प्रॉपर्टी विवाद से संबंधित है, जिसका दावा एक रजिस्टर्ड सेल डीड के ज़रिए किया गया।
वादी ने विवादित प्रॉपर्टी पर पूर्ण मालिकाना हक और कब्ज़ा साबित करने के लिए मुकदमा दायर किया और मालिकाना हक के मुख्य सबूत के तौर पर रजिस्टर्ड सेल डीड पेश की।
इसके जवाब में, प्रतिवादी ने लिखित बयान दायर करके साफ तौर पर इनकार किया कि सेल डीड निष्पादित की गई और दावा किया कि यह धोखाधड़ी थी। हालांकि, उन्होंने डॉक्यूमेंट को कानूनी रूप से अमान्य करने के लिए कोई स्वतंत्र मुकदमा या औपचारिक काउंटर-क्लेम दायर नहीं किया। केरल हाईकोर्ट ने सेल डीड (बिक्री विलेख) पेश करने वाले के खिलाफ फैसला सुनाया, क्योंकि उन्होंने गवाही देने वाले किसी भी गवाह को कोर्ट में नहीं बुलाया। कोर्ट का तर्क था कि चूंकि लिखित बयान में डीड के निष्पादन (execution) से “साफ तौर पर इनकार” किया गया, इसलिए एविडेंस एक्ट की धारा 68 का प्रावधान लागू होता है, जिसके तहत डीड को साबित करने के लिए गवाह की गवाही अनिवार्य हो जाती है।
इसके बाद वादी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और तर्क दिया कि सेल डीड के लिए कानूनी रूप से गवाही (Attestation) की आवश्यकता ही नहीं होती है, इसलिए हाई कोर्ट द्वारा धारा 68 को लागू करना बुनियादी रूप से गलत था।
फैसला
अपील स्वीकार करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 68 केवल उन दस्तावेजों पर लागू होती है, जिनके लिए कानूनन गवाही अनिवार्य है, जैसे कि वसीयत (इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 की धारा 63 के तहत), गिफ्ट डीड (ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 123 के तहत) और मॉर्गेज डीड (बंधक विलेख)। हालांकि, सेल डीड इस श्रेणी में नहीं आती है। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 54 के तहत सेल डीड का रजिस्ट्रेशन तो जरूरी है, लेकिन इसकी गवाही अनिवार्य नहीं है।
कोर्ट ने कहा,
“पहली नज़र में ऐसा लगता है कि हाईकोर्ट ने एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रोविज़ो (शर्त) में दिए गए वाक्यांश ‘वसीयत के अलावा किसी भी दस्तावेज़ का निष्पादन (Execution)’ का गलत अर्थ निकाला। हाईकोर्ट ने ‘किसी भी दस्तावेज़ के निष्पादन’ का अर्थ निकालते हुए इसमें रजिस्टर्ड सेल डीड (बिक्री विलेख) को भी शामिल कर लिया। हमारी राय है कि हाईकोर्ट ने एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रोविज़ो के असली मकसद को समझने में गलती की। ‘वसीयत के अलावा किसी भी दस्तावेज़ का निष्पादन’ का मतलब है वे दस्तावेज़ जिनके लिए गवाहों द्वारा तस्दीक (Attestation) अनिवार्य है, जैसे कि गिफ्ट डीड, मॉर्गेज डीड, सेटलमेंट डीड आदि; लेकिन ऐसे दस्तावेज़ों को साबित करने के लिए गवाहों से पूछताछ करना तब तक ज़रूरी नहीं है जब तक कि उनके निष्पादन से साफ़ तौर पर इनकार न किया गया हो। वसीयत के मामले में गवाहों में से किसी एक से पूछताछ करना ज़रूरी है, चाहे उसके निष्पादन से साफ़ तौर पर इनकार किया गया हो या नहीं। एविडेंस एक्ट की धारा 68 का प्रोविज़ो बस यही बात बताना या स्पष्ट करना चाहता है।”
कोर्ट ने कानूनी व्याख्या के उस अहम नियम को दोहराया कि प्रोविज़ो को उसी मुख्य प्रावधान के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए, जिसे वह सीमित या स्पष्ट करता है।
कोर्ट ने कहा,
“धारा 68 का प्रोविज़ो केवल उन दस्तावेज़ों के संबंध में अपवाद बनाता है, जिनकी कानूनन तस्दीक (attestation) अनिवार्य है। सेल डीड ऐसे दस्तावेज़ों की श्रेणी में नहीं आती है।”
चूंकि हाई कोर्ट ने CPC की धारा 100 के तहत कानून का अहम सवाल (Substantial Question of Law) तय न करके गंभीर गलती की, इसलिए कोर्ट ने मामले को वापस हाईकोर्ट भेज दिया ताकि कानून का अहम सवाल तय करने के बाद मामले की फिर से सुनवाई हो सके।
Cause Title: R. VERONICA & ANR. VERSUS RUDRAYANI DEVAKI(D) THROUGH LRS. S. SATHA KUMAR & ORS.
देश
पीएम आवास के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस ने राहुल-प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया
नई दिल्ली, एजेंसी। संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन (21 जुलाई) भी विपक्षी पार्टियों ने जोरदार हंगामा किया. जिसे देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया. संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने पीएम आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
दिल्ली पुलिस ने राहुल-प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया
लोक कल्याण मार्ग पर विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.
विपक्ष से कुछ भी कहना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है : चिराग पासवान
चिराग पासवान ने कहा, “विपक्ष हम पर बार-बार यह आरोप लगाता है कि हम बातचीत नहीं करते, है ना? लेकिन जब असल में बातचीत शुरू होती है, तो वे कहां होते हैं? सच कहूं तो, मुझे लगता है कि विपक्ष से कुछ भी कहना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है. वे बस सुनना ही नहीं चाहते. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यहां कितने अहम मुद्दे उठाए जा रहे हैं, जैसे कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाना. आज NDA सांसदों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि भारत के भविष्य या युवाओं और छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. लेकिन अगर आप हर सत्र से पहले एक-दो मुद्दे चुनते हैं, तो सारे मुद्दों पर एक साथ बात क्यों नहीं करते? आप मुद्दों को बीच में ही क्यों छोड़ देते हैं? आपको उन मुद्दों को उनके अंजाम तक पहुंचाना चाहिए. आप आज एक मुद्दा उठाते हैं, लेकिन अगले सत्र में कोई नया मुद्दा ले आते हैं. इसका मतलब है कि आपका एकमात्र मकसद हंगामा करना है, न कि बातचीत से मामलों को सुलझाना. जब हम किसानों, छात्रों और युवाओं के साथ खड़े होते हैं, तो कृपया सुझाव दें कि हम उनके साथ और मजबूती से कैसे खड़े हो सकते हैं. हम आपके हर सुझाव को अपनाएंगे और तथ्यों पर आधारित आपकी हर सही बात को मानेंगे. चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, फिर भी आप हंगामा करना चुनते हैं, सड़कों पर अफरा-तफ़री मचाते हैं और लोगों को गुमराह करते हैं, जबकि बातचीत और सही चर्चा के लिए बने मंच को ही नज़रअंदाज़ कर देते हैं.”
सरकार पेपर लीक और युवाओं के मामले को राजनीतिक रंग देना चाहती है: संदीप दीक्षित
PM आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा, “कोई माने या न माने, राहुल गांधी ने हमेशा ऐसे मुद्दे उठाए हैं. उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया. जिस दिन पेपर लीक हुआ, वे सड़कों पर उतर आए. सरकार इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है. हमें देश के हर उस युवा के साथ खड़ा होना है, जिसकी उम्मीदों और आकांक्षाओं को कल सरकार ने बेरहमी से कुचल दिया.”
छात्रों के साथ अत्याचार हो रहा, लोकतंत्र को दबाया जा रहा: जयराम रमेश
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि छात्रों पर अत्याचार हो रहा है और लोकतंत्र को दबाया जा रहा है. विपक्ष पिछले 45 दिनों से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है. हम इन सभी अहम मुद्दों पर संसद में विस्तार से चर्चा और जवाब चाहते हैं.
लोक कल्याण मार्ग पहुंचे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, विरोध प्रदर्शन में बैठे राहुल गांधी से की बात
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और यहां कांग्रेस के चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात की.
दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार समेत कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया
दिल्ली पुलिस ने लोक कल्याण मार्ग पर विरोध प्रदर्शन कर रहे कन्हैया कुमार समेत कांग्रेस नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया.
पीएम आवास के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगें उठाईं.
छात्र प्रदर्शन के बहाने डिंपल यादव का सियासी दांव: बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए युवाओं से मांगा साथ
सपा सांसद डिंपल यादव ने सीजेपी आंदोलन पर कहा- मुझे लगता है कि इससे एक मजबूत संदेश गया है कि कितने युवा बदलाव चाहते हैं. मैं छात्रों से कहना चाहती हूं कि बदलाव सिर्फ वोटिंग से ही आ सकता है. आने वाले समय में, आपको उन पार्टियों का समर्थन करना चाहिए जो BJP को सत्ता से हटाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
डिंपल यादव का दावा, विपक्षी पार्टियों ने स्पीकर से चर्चा की मांग की, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, “विपक्षी पार्टियों ने स्पीकर से मुलाक़ात की और चर्चा की मांग की, लेकिन उन्होंने इसे साफ़ तौर पर ठुकरा दिया. यहां सरकार की मंशा को समझना ज़रूरी है; उनका पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है और कई मामलों में बीमार नजर आता है. जो युवा विरोध करने आए थे, वे सिस्टम की नाकामी को उजागर करना चाहते थे, क्योंकि सरकार खुद इस मुद्दे पर ध्यान देने को तैयार नहीं थी. वे सरकार से शिक्षा में सुधार लाने और NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले 20 छात्रों की मौत के मामले पर कार्रवाई करने की अपील करने आए थे. उन्हें यह भी लगा कि जिम्मेदार होने के नाते शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए; लेकिन मंत्री के इस्तीफे की मांग करने के बजाय, जैसा कि छात्रों ने किया था, अधिकारियों ने उन पर लाठियां बरसाईं और उनके कपड़े फाड़ दिए. मेरा मानना है कि सरकार के इन कामों ने इन युवाओं की उम्मीदों और सपनों को बुरी तरह तोड़ दिया है.
CCTV फुटेज खंगाले जा रहे, जांच के आधार पर होगी प्राथमिकी दर्ज
एडिशनल DCP आनंद कुमार मिश्रा ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, “कुछ FIR पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं और यह संख्या निश्चित रूप से और बढ़ सकती है. अभी CCTV फुटेज की जांच की जा रही है और जैसे-जैसे दूसरे पहलुओं की जांच होगी, और FIR दर्ज की जा सकती हैं. विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर 100 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए हैं. उन सभी की निगरानी की जा रही है; इसके लिए एक खास टीम लगाई गई है और कई टीमें मिलकर काम कर रही हैं. हम हर चीज़ की बारीकी से जांच कर रहे हैं- CCTV फुटेज, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और हमारे अपने लगाए गए कैमरों की फुटेज। हमने पहले ही एक टीम बना ली थी ताकि जरूरत पड़ने पर तेजी से जांच की जा सके; वह टीम अभी काम कर रही है.”
संसद की कार्यवाही आज दिन भर के लिए स्थगित
विपक्ष के हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा को आज दिन भर के लिए स्थगित करने का फैसला किया. जबकि राज्यसभा में भी भारी हंगामे को देखते हुए कार्यवाही को आज के लिए स्थगित कर दिया गया है. सदन की कार्यवाही अब 22 जुलाई को सुबह 11 बजे से होगी.
देश
PM आवास के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेसी नेताओं ने केंद्र सरकार के सामने रखीं ये 5 बड़ी मांगें
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य नेता छात्रों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने पर बैठ गए। प्रधानमंत्री के आवास ‘7 लोक कल्याण मार्ग’ के निकट धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं ने यहां ‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’ के नारे लगाए।
केंद्र के सामने रखी ये 5 बड़ी मांगें
- प्रदर्शन के दौरान हिंसा की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की
- गृहमंत्री का दोनों सदनों में बयान
- सदन में इस मामले की डिटेल पर चर्चा होनी चाहिए
- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग रखी
- छात्रों के मुद्दे को सुने जाने की बात कही
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने की खरगे से मुलाकात
धरना स्थल पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पहुंचे हैं। यहां पर वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बातचीत कर उन्हें प्रदर्शन रोकने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
इससे पहले, राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए और पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से यह भी कहा कि छात्रों की पिटाई के लिए गृह मंत्री अमित शाह को भी त्यागपत्र देना चाहिए। प्रियंका गांधी ने कहा, ”हम सदन में चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन विपक्ष को बात करने नहीं दिया जाता। ये सदन उन्हीं युवाओं का है जिन पर सरकार लाठी चला रही है, आंसू गैस के गोले छोड़ रही है। बच्चों की बात सुनी जाए और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए। ” कांग्रेस के दोनों प्रमुख नेताओं ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात भी की।
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कोरबा11 months agoअंकित सिंह बने श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला उपाध्यक्ष
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