देश
अजित पवार के भतीजे का आरोप- प्लेन क्रैश बड़ी साजिश:दुर्घटना के समय कई धमाके हुए थे, विमान में पेट्रोल के डिब्बे रखे गए थे
नई दिल्ली/बारामती/मुंबई,एजेंसी। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने शनिवार को अजित पवार के प्लेन क्रैश पर फिर सवाल उठाए। उन्होंने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फेंस में स्क्रीन पर डेटा और फोटो दिखाए।
उन्होंने कहा कि ब्लैक बॉक्स को लेकर शक जताया जा रहा था। उनके मुताबिक, दुर्घटना के समय सिर्फ एक धमाका नहीं हुआ था, बल्कि कई धमाके हुए थे।
विमान में सामान रखने वाली जगह पर अतिरिक्त पेट्रोल के डिब्बे रखे गए थे, जिससे आग भड़की। सभी पहलुओं की गहराई से जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर साजिश की बात करें तो यह दो तरह की हो सकती है, राजनीतिक या व्यावसायिक। अभी यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस मामले में किस तरह की साजिश शामिल है।
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की 28 जनवरी को बारामती में प्लेन क्रैश में मौत हो गई थी। यह प्लेन VSR कंपनी का था।
रोहित बोले- पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह न्याय दिलाएं
रोहित ने आरोप लगाया है कि अजित पवार प्लेन क्रैश के मामले को कुछ लोग कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को लेटर लिखा है।
- मैं आपसे केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के मामले में तुरंत कार्रवाई करने का निवेदन करता हूं। कंपनी VSR और उनकी पार्टी के बीच संबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। इन संबंधों की जांच किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी से कराई जानी चाहिए, जरूरत हो तो अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद भी ली जाए।
- आपने हमेशा अजित दादा और उनके देश के प्रति योगदान का सम्मान किया है। इसलिए मेरा अनुरोध है कि जांच पूरी होने तक राम मोहन नायडू से मंत्री पद से इस्तीफा लेने को कहा जाए। हादसे में शामिल विमान की कंपनी का सीधा संबंध तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) से है।
- हमारी जानकारी के मुताबिक VSR मामले में उद्योग और राजनीति से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग शामिल हैं। ऐसे में आशंका है कि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो पाएगी। इसलिए आपसे अनुरोध है कि यह तय किया जाए कि VSR मामले में DGCA की भूमिका की जांच बिना किसी दबाव या हस्तक्षेप के निष्पक्ष तरीके से हो।
रोहित के 3 आरोप
- जिस CVR की हम बात कर रहे हैं, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, उसकी उस उड़ान में रिकॉर्डिंग क्षमता केवल 30 मिनट की थी। लेकिन यदि आप सरकारी नियमों को देखें, तो डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) की आवश्यकता दो घंटे की रिकॉर्डिंग की है। तो अगर विमान का CVR केवल 30 मिनट रिकॉर्ड कर सकता था, जबकि नियम दो घंटे का है, तो उस विमान का रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ? यह बात हम सभी जानना चाहते हैं
- यह दुर्घटना से पहले के अंतिम 30 मिनटों का रिकॉर्ड है, यानी यह आखिरी दर्ज किया गया हिस्सा है। उन अंतिम 30 मिनटों में क्या हुआ, इसकी जानकारी केवल CVR से ही मिल सकती है। कहा जा रहा है कि CVR क्षतिग्रस्त हो गया है, लेकिन हमें इस पर विश्वास नहीं है।
- मुद्दा यह है कि वास्तव में उसमें क्या रिकॉर्ड हुआ था। उस रिकॉर्डिंग से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। ऐसे तथ्य जिन्हें शायद VSR या VSR का समर्थन करने वाले लोग उजागर नहीं होने देना चाहते हैं, जिस VSR कंपनी की तरफ से यह फ्लाइट ऑपरेट की जा रही थी, उसके खिलाफ पहले से ही कई शिकायतें हैं। कंपनी में मैकेनिकल और मेंटेनेंस से जुड़ी समस्याएं थीं।
19 फरवरी: अजित के बेटे ने हादसे पर सवाल उठाया
महाराष्ट्र के पूर्व डिप्टी CM अजित पवार के बेटे जय पवार ने 18 फरवरी को इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा था- VSR वेंचर्स के विमानों के उड़ने पर रोक लगा देनी चाहिए। प्लेन क्रैश में ब्लैक बॉक्स आसानी से नष्ट नहीं होते। महाराष्ट्र के लोगों को इस दिल दहला देने वाली त्रासदी का पूरा, पारदर्शी और बिना किसी शक के सच जानने का अधिकार है।
VSR वेंचर्स के एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस में गड़बड़ियों की पूरी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने एक इमोशनल मैसेज भी शेयर किया और लिखा- मिस यू डैड।

10 फरवरी: रोहित बोले- अजित पवार प्लेन क्रैश में साजिश की आशंका
NCP (SCP) विधायक रोहित पवार ने आरोप लगाया था कि अजित पवार की मौत मामले में साजिश हुई है। रोहित पवार ने कैप्टन सुमित कपूर के रिकॉर्ड पर सवाल उठाए, जो 28 जनवरी को हादसे वाले दिन अजित का विमान उड़ा रहे थे।
वहीं, एविएशन पर नजर रखने वाली संस्था डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने मंगलवारप को VSR वेंचर्स समेत नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट ऑपरेटर्स का स्पेशल सेफ्टी ऑडिट शुरू किया है। एजेंसी ने बताया कि ये ऑर्डर 2 फरवरी को दिया गया था जो कि 25 फरवरी तक जारी रहेगा।
लियरजेट 45 वीएसआर वेंचर्स का जेट है, मुख्यालय दिल्ली में
VSR वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली स्थित एक नॉन-शेड्यूल्ड एयर ऑपरेटर कंपनी है। यह कंपनी प्राइवेट जेट चार्टर्ड, मेडिकल इवेक्युएशन (एयर एम्बुलेंस) और एविएशन कंसल्टेंसी का काम करती है। जिस लियरजेट 45XR विमान का बारामती में एक्सीडेंट हुआ, उसे 1990 के दशक में ‘सुपर-लाइट’ बिजनेस कैटेगरी के तहत बनाया गया था। इसे लग्जरी और तेज रफ्तार कॉर्पोरेट उड़ानों के लिए जाना जाता है।
28 जनवरी को क्या हुआ था…
पुणे के बारामती में 28 जनवरी को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित 5 लोगों की प्लेन क्रैश में मौत हुई थी। अजित की पत्नी और डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार ने मंगलवार को CM देवेंद्र फडणवीस से मिलकर मामले की CBI जांच की मांग की थी।


कोरबा
एविडेंस एक्ट की धारा 68- रजिस्टर्ड सेल डीड के लिए गवाहों के सर्टिफिकेशन (अटेस्टेशन) के सबूत की ज़रूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली/कोरबा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई) को फैसला सुनाया कि इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 की धारा 68 का प्रोविज़ो (शर्त) रजिस्टर्ड सेल डीड पर लागू नहीं होता है, क्योंकि कानून के तहत सेल डीड के लिए गवाहों से सर्टिफिकेशन ज़रूरी नहीं है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह बात कही, जिसमें सेल डीड ट्रांज़ैक्शन पर धारा 68 के प्रोविज़ो को गलत तरीके से लागू किया गया।
बेंच ने कहा,
“धारा 68 का प्रोविज़ो कहता है कि किसी भी डॉक्यूमेंट (वसीयत को छोड़कर) के निष्पादन (execution) के सबूत के तौर पर अटेस्टिंग गवाह को बुलाना ज़रूरी नहीं है, अगर उसे इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 (1908 का 16) के प्रावधानों के अनुसार रजिस्टर किया गया हो; सिवाय तब जब उस व्यक्ति द्वारा इसके निष्पादन से खास तौर पर इनकार किया गया हो, जिसके द्वारा इसे निष्पादित किया गया माना जाता है। चूंकि कानून के तहत सेल डीड के लिए अटेस्टेशन ज़रूरी नहीं है, इसलिए इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रावधान इस पर लागू नहीं होते हैं।”
बेंच ने धारा 68 के प्रोविज़ो के सीमित दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह प्रावधान केवल उन डॉक्यूमेंट्स पर लागू होता है जिनके लिए अनिवार्य अटेस्टेशन की ज़रूरत होती है।
“‘किसी भी डॉक्यूमेंट का निष्पादन, वसीयत को छोड़कर’ का मतलब है, वे डॉक्यूमेंट्स जिनके लिए अनिवार्य अटेस्टेशन की ज़रूरत होती है, जैसे कि गिफ्ट डीड, मॉर्गेज डीड, सेटलमेंट डीड आदि; लेकिन ऐसे डॉक्यूमेंट्स के सबूत के तौर पर किसी अटेस्टिंग गवाह से पूछताछ करना ज़रूरी नहीं है, जब तक कि इसके निष्पादन से खास तौर पर इनकार न किया गया हो।”
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद केरल में प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े एक सिविल प्रॉपर्टी विवाद से संबंधित है, जिसका दावा एक रजिस्टर्ड सेल डीड के ज़रिए किया गया।
वादी ने विवादित प्रॉपर्टी पर पूर्ण मालिकाना हक और कब्ज़ा साबित करने के लिए मुकदमा दायर किया और मालिकाना हक के मुख्य सबूत के तौर पर रजिस्टर्ड सेल डीड पेश की।
इसके जवाब में, प्रतिवादी ने लिखित बयान दायर करके साफ तौर पर इनकार किया कि सेल डीड निष्पादित की गई और दावा किया कि यह धोखाधड़ी थी। हालांकि, उन्होंने डॉक्यूमेंट को कानूनी रूप से अमान्य करने के लिए कोई स्वतंत्र मुकदमा या औपचारिक काउंटर-क्लेम दायर नहीं किया। केरल हाईकोर्ट ने सेल डीड (बिक्री विलेख) पेश करने वाले के खिलाफ फैसला सुनाया, क्योंकि उन्होंने गवाही देने वाले किसी भी गवाह को कोर्ट में नहीं बुलाया। कोर्ट का तर्क था कि चूंकि लिखित बयान में डीड के निष्पादन (execution) से “साफ तौर पर इनकार” किया गया, इसलिए एविडेंस एक्ट की धारा 68 का प्रावधान लागू होता है, जिसके तहत डीड को साबित करने के लिए गवाह की गवाही अनिवार्य हो जाती है।
इसके बाद वादी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और तर्क दिया कि सेल डीड के लिए कानूनी रूप से गवाही (Attestation) की आवश्यकता ही नहीं होती है, इसलिए हाई कोर्ट द्वारा धारा 68 को लागू करना बुनियादी रूप से गलत था।
फैसला
अपील स्वीकार करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 68 केवल उन दस्तावेजों पर लागू होती है, जिनके लिए कानूनन गवाही अनिवार्य है, जैसे कि वसीयत (इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 की धारा 63 के तहत), गिफ्ट डीड (ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 123 के तहत) और मॉर्गेज डीड (बंधक विलेख)। हालांकि, सेल डीड इस श्रेणी में नहीं आती है। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 54 के तहत सेल डीड का रजिस्ट्रेशन तो जरूरी है, लेकिन इसकी गवाही अनिवार्य नहीं है।
कोर्ट ने कहा,
“पहली नज़र में ऐसा लगता है कि हाईकोर्ट ने एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रोविज़ो (शर्त) में दिए गए वाक्यांश ‘वसीयत के अलावा किसी भी दस्तावेज़ का निष्पादन (Execution)’ का गलत अर्थ निकाला। हाईकोर्ट ने ‘किसी भी दस्तावेज़ के निष्पादन’ का अर्थ निकालते हुए इसमें रजिस्टर्ड सेल डीड (बिक्री विलेख) को भी शामिल कर लिया। हमारी राय है कि हाईकोर्ट ने एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रोविज़ो के असली मकसद को समझने में गलती की। ‘वसीयत के अलावा किसी भी दस्तावेज़ का निष्पादन’ का मतलब है वे दस्तावेज़ जिनके लिए गवाहों द्वारा तस्दीक (Attestation) अनिवार्य है, जैसे कि गिफ्ट डीड, मॉर्गेज डीड, सेटलमेंट डीड आदि; लेकिन ऐसे दस्तावेज़ों को साबित करने के लिए गवाहों से पूछताछ करना तब तक ज़रूरी नहीं है जब तक कि उनके निष्पादन से साफ़ तौर पर इनकार न किया गया हो। वसीयत के मामले में गवाहों में से किसी एक से पूछताछ करना ज़रूरी है, चाहे उसके निष्पादन से साफ़ तौर पर इनकार किया गया हो या नहीं। एविडेंस एक्ट की धारा 68 का प्रोविज़ो बस यही बात बताना या स्पष्ट करना चाहता है।”
कोर्ट ने कानूनी व्याख्या के उस अहम नियम को दोहराया कि प्रोविज़ो को उसी मुख्य प्रावधान के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए, जिसे वह सीमित या स्पष्ट करता है।
कोर्ट ने कहा,
“धारा 68 का प्रोविज़ो केवल उन दस्तावेज़ों के संबंध में अपवाद बनाता है, जिनकी कानूनन तस्दीक (attestation) अनिवार्य है। सेल डीड ऐसे दस्तावेज़ों की श्रेणी में नहीं आती है।”
चूंकि हाई कोर्ट ने CPC की धारा 100 के तहत कानून का अहम सवाल (Substantial Question of Law) तय न करके गंभीर गलती की, इसलिए कोर्ट ने मामले को वापस हाईकोर्ट भेज दिया ताकि कानून का अहम सवाल तय करने के बाद मामले की फिर से सुनवाई हो सके।
Cause Title: R. VERONICA & ANR. VERSUS RUDRAYANI DEVAKI(D) THROUGH LRS. S. SATHA KUMAR & ORS.
देश
पीएम आवास के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस ने राहुल-प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया
नई दिल्ली, एजेंसी। संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन (21 जुलाई) भी विपक्षी पार्टियों ने जोरदार हंगामा किया. जिसे देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया. संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने पीएम आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.
दिल्ली पुलिस ने राहुल-प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया
लोक कल्याण मार्ग पर विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.
विपक्ष से कुछ भी कहना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है : चिराग पासवान
चिराग पासवान ने कहा, “विपक्ष हम पर बार-बार यह आरोप लगाता है कि हम बातचीत नहीं करते, है ना? लेकिन जब असल में बातचीत शुरू होती है, तो वे कहां होते हैं? सच कहूं तो, मुझे लगता है कि विपक्ष से कुछ भी कहना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है. वे बस सुनना ही नहीं चाहते. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यहां कितने अहम मुद्दे उठाए जा रहे हैं, जैसे कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाना. आज NDA सांसदों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि भारत के भविष्य या युवाओं और छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. लेकिन अगर आप हर सत्र से पहले एक-दो मुद्दे चुनते हैं, तो सारे मुद्दों पर एक साथ बात क्यों नहीं करते? आप मुद्दों को बीच में ही क्यों छोड़ देते हैं? आपको उन मुद्दों को उनके अंजाम तक पहुंचाना चाहिए. आप आज एक मुद्दा उठाते हैं, लेकिन अगले सत्र में कोई नया मुद्दा ले आते हैं. इसका मतलब है कि आपका एकमात्र मकसद हंगामा करना है, न कि बातचीत से मामलों को सुलझाना. जब हम किसानों, छात्रों और युवाओं के साथ खड़े होते हैं, तो कृपया सुझाव दें कि हम उनके साथ और मजबूती से कैसे खड़े हो सकते हैं. हम आपके हर सुझाव को अपनाएंगे और तथ्यों पर आधारित आपकी हर सही बात को मानेंगे. चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, फिर भी आप हंगामा करना चुनते हैं, सड़कों पर अफरा-तफ़री मचाते हैं और लोगों को गुमराह करते हैं, जबकि बातचीत और सही चर्चा के लिए बने मंच को ही नज़रअंदाज़ कर देते हैं.”
सरकार पेपर लीक और युवाओं के मामले को राजनीतिक रंग देना चाहती है: संदीप दीक्षित
PM आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा, “कोई माने या न माने, राहुल गांधी ने हमेशा ऐसे मुद्दे उठाए हैं. उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया. जिस दिन पेपर लीक हुआ, वे सड़कों पर उतर आए. सरकार इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है. हमें देश के हर उस युवा के साथ खड़ा होना है, जिसकी उम्मीदों और आकांक्षाओं को कल सरकार ने बेरहमी से कुचल दिया.”
छात्रों के साथ अत्याचार हो रहा, लोकतंत्र को दबाया जा रहा: जयराम रमेश
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि छात्रों पर अत्याचार हो रहा है और लोकतंत्र को दबाया जा रहा है. विपक्ष पिछले 45 दिनों से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है. हम इन सभी अहम मुद्दों पर संसद में विस्तार से चर्चा और जवाब चाहते हैं.
लोक कल्याण मार्ग पहुंचे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, विरोध प्रदर्शन में बैठे राहुल गांधी से की बात
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और यहां कांग्रेस के चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात की.
दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार समेत कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया
दिल्ली पुलिस ने लोक कल्याण मार्ग पर विरोध प्रदर्शन कर रहे कन्हैया कुमार समेत कांग्रेस नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया.
पीएम आवास के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगें उठाईं.
छात्र प्रदर्शन के बहाने डिंपल यादव का सियासी दांव: बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए युवाओं से मांगा साथ
सपा सांसद डिंपल यादव ने सीजेपी आंदोलन पर कहा- मुझे लगता है कि इससे एक मजबूत संदेश गया है कि कितने युवा बदलाव चाहते हैं. मैं छात्रों से कहना चाहती हूं कि बदलाव सिर्फ वोटिंग से ही आ सकता है. आने वाले समय में, आपको उन पार्टियों का समर्थन करना चाहिए जो BJP को सत्ता से हटाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
डिंपल यादव का दावा, विपक्षी पार्टियों ने स्पीकर से चर्चा की मांग की, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, “विपक्षी पार्टियों ने स्पीकर से मुलाक़ात की और चर्चा की मांग की, लेकिन उन्होंने इसे साफ़ तौर पर ठुकरा दिया. यहां सरकार की मंशा को समझना ज़रूरी है; उनका पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है और कई मामलों में बीमार नजर आता है. जो युवा विरोध करने आए थे, वे सिस्टम की नाकामी को उजागर करना चाहते थे, क्योंकि सरकार खुद इस मुद्दे पर ध्यान देने को तैयार नहीं थी. वे सरकार से शिक्षा में सुधार लाने और NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले 20 छात्रों की मौत के मामले पर कार्रवाई करने की अपील करने आए थे. उन्हें यह भी लगा कि जिम्मेदार होने के नाते शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए; लेकिन मंत्री के इस्तीफे की मांग करने के बजाय, जैसा कि छात्रों ने किया था, अधिकारियों ने उन पर लाठियां बरसाईं और उनके कपड़े फाड़ दिए. मेरा मानना है कि सरकार के इन कामों ने इन युवाओं की उम्मीदों और सपनों को बुरी तरह तोड़ दिया है.
CCTV फुटेज खंगाले जा रहे, जांच के आधार पर होगी प्राथमिकी दर्ज
एडिशनल DCP आनंद कुमार मिश्रा ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, “कुछ FIR पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं और यह संख्या निश्चित रूप से और बढ़ सकती है. अभी CCTV फुटेज की जांच की जा रही है और जैसे-जैसे दूसरे पहलुओं की जांच होगी, और FIR दर्ज की जा सकती हैं. विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर 100 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए हैं. उन सभी की निगरानी की जा रही है; इसके लिए एक खास टीम लगाई गई है और कई टीमें मिलकर काम कर रही हैं. हम हर चीज़ की बारीकी से जांच कर रहे हैं- CCTV फुटेज, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और हमारे अपने लगाए गए कैमरों की फुटेज। हमने पहले ही एक टीम बना ली थी ताकि जरूरत पड़ने पर तेजी से जांच की जा सके; वह टीम अभी काम कर रही है.”
संसद की कार्यवाही आज दिन भर के लिए स्थगित
विपक्ष के हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा को आज दिन भर के लिए स्थगित करने का फैसला किया. जबकि राज्यसभा में भी भारी हंगामे को देखते हुए कार्यवाही को आज के लिए स्थगित कर दिया गया है. सदन की कार्यवाही अब 22 जुलाई को सुबह 11 बजे से होगी.
देश
PM आवास के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेसी नेताओं ने केंद्र सरकार के सामने रखीं ये 5 बड़ी मांगें
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य नेता छात्रों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने पर बैठ गए। प्रधानमंत्री के आवास ‘7 लोक कल्याण मार्ग’ के निकट धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं ने यहां ‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’ के नारे लगाए।
केंद्र के सामने रखी ये 5 बड़ी मांगें
- प्रदर्शन के दौरान हिंसा की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की
- गृहमंत्री का दोनों सदनों में बयान
- सदन में इस मामले की डिटेल पर चर्चा होनी चाहिए
- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग रखी
- छात्रों के मुद्दे को सुने जाने की बात कही
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने की खरगे से मुलाकात
धरना स्थल पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पहुंचे हैं। यहां पर वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बातचीत कर उन्हें प्रदर्शन रोकने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
इससे पहले, राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए और पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से यह भी कहा कि छात्रों की पिटाई के लिए गृह मंत्री अमित शाह को भी त्यागपत्र देना चाहिए। प्रियंका गांधी ने कहा, ”हम सदन में चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन विपक्ष को बात करने नहीं दिया जाता। ये सदन उन्हीं युवाओं का है जिन पर सरकार लाठी चला रही है, आंसू गैस के गोले छोड़ रही है। बच्चों की बात सुनी जाए और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए। ” कांग्रेस के दोनों प्रमुख नेताओं ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात भी की।
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