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US विदेश मंत्री रूबियो ने दिल्ली में PM मोदी से की मुलाकात; अहम मुद्दों पर की खास बात, “कहा-India हमारा महान साझेदार”

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नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) शनिवार को चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचे। यह उनकी पहली भारत यात्रा है और इसे भारत-अमेरिका संबंधों में नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। रूबियो सबसे पहले कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने Missionaries of Charity के मुख्यालय मदर हाउस का दौरा किया। वहां उन्होंने सेंट टेरेसा को श्रद्धांजलि दी और मिशनरीज ऑफ चैरिटी की ननों से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने निर्मला शिशु भवन और Victoria Memorial का भी दौरा किया। कोलकाता में उनकी यात्रा के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ भारतीय सुरक्षा एजेंसियां भी लगातार तैनात रहीं।

US Secretary of State Marco Rubio visits Mother House, headquarters of Missionaries of Charity founded by Mother Teresa, in Kolkata

First US Secretary of State to visit in 14 years. Visit comes after West Bengal’s BJP government took office

Four-day India tour includes energy… pic.twitter.com/Mi0XSt0FmW

— Nabila Jamal (@nabilajamal_) May 23, 2026

पीएम मोदी से मुलाकात
नई दिल्ली पहुंचने के बाद रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से सेवा तीर्थ में मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक यह बैठक करीब एक घंटे से अधिक चली। बैठक में कई अहम वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी,  इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा,  चीन की बढ़ती आक्रामकता, पश्चिम एशिया संकट,  होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश, रक्षा सहयोग तथा महत्वपूर्ण तकनीक और सप्लाई चेन शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और अमेरिका को बदलते वैश्विक माहौल में और मजबूत साझेदारी की जरूरत है।  रूबियो की यात्रा का सबसे अहम हिस्सा नई दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक मानी जा रही है। इस बैठक में भारत, अमेरिका, जापान व ऑस्ट्रेलिया शामिल होंगे।

Happy to receive the US Secretary of State, Mr. Marco Rubio.

We discussed sustained progress in the India-US Comprehensive Global Strategic Partnership and issues related to regional and global peace and security.

India and the United States will continue to work closely for… pic.twitter.com/CuD0DdDXB7

— Narendra Modi (@narendramodi) May 23, 2026


क्वाड को चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ एक रणनीतिक मंच माना जाता है। बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन, साइबर सुरक्षा और रक्षा सहयोग पर चर्चा होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की गतिविधियों और दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। रूबियो की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है। होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और उसकी बड़ी ऊर्जा जरूरतें पश्चिम एशिया से पूरी होती हैं। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चर्चा को बेहद अहम माना जा रहा है। रूबियो ने भारत को “महान साझेदार” बताते हुए कहा कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना चाहता है। 
पिछले एक साल में भारत और अमेरिका के संबंधों में कई मुद्दों पर तनाव देखने को मिला था। भारत लगातार कहता रहा कि पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम दोनों देशों की सीधी बातचीत से हुआ था और इसमें किसी तीसरे देश की भूमिका नहीं थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों ने रिश्तों को सुधारने की दिशा में काम शुरू किया। अप्रैल में पीएम मोदी और ट्रंप के बीच लगभग 40 मिनट फोन पर बातचीत भी हुई थी।रूबियो सोमवार को Agra और Jaipur का भी दौरा करेंगे। इसके बाद मंगलवार को वे फिर दिल्ली लौटेंगे और क्वाड बैठक में हिस्सा लेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक सामान्य राजनयिक यात्रा नहीं है, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच भारत-अमेरिका रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश है।  

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पूर्व विधान परिषद सदस्य जयप्रकाश चतुर्वेदी का निधन, भाजपा नेताओं में शोक की लहर

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former legislative council member jaiprakash chaturvedi passes away wave of mou

लखनऊ, एजेंसी। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) जयप्रकाश चतुर्वेदी का देर रात निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन भाजपा के वरिष्ट नेता कलराज मिश्र ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कहा कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, कुशल संगठनकर्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक, पूर्व संगठन मंत्री एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य आदरणीय जयप्रकाश चतुर्वेदी  के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उनका निधन मेरे लिए एक अपूरणीय व्यक्तिगत क्षति है।

चतुर्वेदी का संगठन के प्रति समर्पण, कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीयता और राष्ट्रसेवा का उनका संपूर्ण जीवन सदैव स्मरणीय एवं प्रेरणादायी रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके असंख्य शुभचिंतकों को इस गहन दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। इसी कड़ी उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त कर विनम्र श्रद्धांजलि दी।

आप को बता दें कि जयप्रकाश चतुर्वेदी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के कोन क्षेत्र के ग्राम चांची, पोस्ट चाची कलां के निवासी थे। वे राजवंशी देवी इंटर कॉलेज के प्रबंधक भी थे। लंबे समय तक उन्होंने सामाजिक, शैक्षिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई और क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन पर भाजपा नेताओं के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। जयप्रकाश चतुर्वेदी के निधन को क्षेत्र की सामाजिक और राजनीतिक जीवन की बड़ी क्षति माना जा रहा है।

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रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय: ओडेसा पोर्ट पर इंडियन क्रू वाले जहाज पर हमला, 2 हिंदुस्तानी नागरिक लापता

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odesa port strike hits vessel with four indians two safe and two untraced

कीव, एजेंसी। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर क्षेत्र एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। यूक्रेन के प्रमुख ओडेसा बंदरगाह पर एक व्यापारिक जहाज पर हुए हमले में चार भारतीय नागरिक भी सवार थे। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि दो भारतीय सुरक्षित हैं, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। दूतावास संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और बचाव अभियान पर नजर बनाए हुए है। एमवी एजीएन रैग्नर (MV AGN Ragnar) ओडेसा बंदरगाह पर हमले की चपेट में आ गया। ओडेसा काला सागर क्षेत्र में यूक्रेन का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यह कई बार हमलों का निशाना बन चुका है।

यूक्रेन में भारतीय दूतावास के अनुसार, घटना के समय जहाज पर चार भारतीय नागरिक मौजूद थे। अब तक मिली जानकारी के अनुसार दो भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। दो अन्य भारतीयों के बारे में अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है। उनकी तलाश के लिए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय दूतावास ने जारी बयान में कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है। दूतावास संबंधित यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है ताकि लापता भारतीयों का जल्द पता लगाया जा सके और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि जहाज पर हमला किसने किया और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई। जहाज पर कुल कितने चालक दल के सदस्य थे, इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

अधिकारियों ने अभी तक चारों भारतीयों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। साथ ही जहाज पर उनकी जिम्मेदारियों और पदों के बारे में भी कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते काला सागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगातार जोखिम भरी बनी हुई है। हाल के महीनों में कई व्यापारी जहाज मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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IDFC बैंक घोटाला: मामले में गिरफ्तार पूर्व IAS पंकज अग्रवाल ने कहा- न रिश्वत मांगी, न ली, सिर्फ प्रशासनिक मंजूरी दी

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चंडीगढ़, एजेंसी। रू. 657 करोड़ के चर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक घोटाला मामले में गिरफ्तार हरियाणा के पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल ने सीबीआई की विशेष अदालत में दायर अपनी नियमित जमानत याचिका में सभी आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने अदालत के समक्ष कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में न कभी किसी से रिश्वत मांगी और न ही कोई रिश्वत स्वीकार की। उनकी भूमिका केवल अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों को प्रशासनिक स्वीकृति देने तक सीमित थी।

पंकज अग्रवाल को सीबीआई ने 22 जून को गिरफ्तार किया था। उनके खिलाफ दर्ज रू. 657 करोड़ के बैंक घोटाले के मामले में नियमित जमानत याचिका पर पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत 30 जुलाई को सुनवाई करेगी।

जमानत याचिका में अग्रवाल ने कहा है कि जांच एजेंसी अब तक ऐसा कोई प्रत्यक्ष या ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी है, जिससे यह साबित हो कि उनका कथित बैंक धोखाधड़ी या किसी आपराधिक षड्यंत्र से कोई संबंध था। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद का आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खाता खोलने संबंधी प्रस्ताव विभागीय अधिकारियों की संस्तुति पर स्वीकृत किया गया था और संबंधित खाता खोलने के प्रपत्रों पर उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं।

सीबीआई ने अपनी जांच में आरोप लगाया था कि पंकज अग्रवाल ने हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद और हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के बैंक खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खुलवाने में सहायता की तथा उन्हें लगभग रू. 60.54 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी थी।
हालांकि, अग्रवाल ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बैंक खाते खोलने के समय उन्हें किसी प्रकार की अनियमितता या बाद में खातों से कथित धोखाधड़ी के जरिए धन निकासी की कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक स्तर पर तय की गई रू. 50 करोड़ की सीमा बाद में हटा दी गई थी, जिससे यह आरोप भी कमजोर पड़ जाता है कि प्रशासनिक निर्णय स्वयं अवैध था।

जमानत अर्जी में यह भी तर्क दिया गया है कि सीबीआई ने एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय को आपराधिक षड्यंत्र का रूप देने का प्रयास किया है। याचिका में कहा गया है कि केवल इस आधार पर किसी अधिकारी को आपराधिक साजिश का आरोपी नहीं ठहराया जा सकता कि उसके प्रशासनिक निर्णय का बाद में किसी तीसरे पक्ष ने कथित रूप से अनुचित लाभ उठा लिया।

अब इस मामले में सभी की निगाहें 30 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत पंकज अग्रवाल की नियमित जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगी।

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