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कोरबा

मुंबई के व्यापारी के 10 किलो चांदी के जेवर चोरी:कहा- पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की, बची चांदी जीएसटी में फंसी, व्यापारियों ने किया घेराव

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कोरबा। कोरबा में मुंबई के व्यापारी संजय कुमार बाहेती के 10 किलो चांदी के जेवर बस से चोरी हो गए। व्यापारी का आरोप है कि पुलिस चोरी की रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है, जबकि चोरी से बची 12.377 किलो चांदी केंद्रीय जीएसटी कार्यालय में फंसी हुई है। इस मामले में पुलिस और जीएसटी अधिकारियों के रवैये से परेशान होकर व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया है।

जानकारी के मुताबिक संजय कुमार बाहेती 13 मई को 23 किलो चांदी के जेवर लेकर अंबिकापुर से रायपुर जा रहे थे। रात करीब 1 बजे बांगो थाना क्षेत्र के एक होटल पर बस रुकी। संजय यूरिन के लिए नीचे उतरे और अपने तीन बैग सीट पर ही छोड़ दिए। वापस लौटने पर उन्होंने पाया कि 10 किलो चांदी वाले दो बैग गायब थे।

संजय का आरोप है कि बस ड्राइवर ने उन्हें गुमराह किया और किसी से बात नहीं करने दी। जब उन्होंने बांगो थाने में शिकायत की, तो पुलिस ने उन पर ही चोरी का शक जताया। पुलिस ने कथित तौर पर कहा कि उनके पास कोई माल नहीं था, और यदि था भी तो चोरी उन्होंने खुद की है।

इसके बाद पुलिस ने चोरी से बचे 12.377 किलो जेवर जब्त कर संबंधित कागजात जीएसटी कार्यालय भेज दिए।

संजय का आरोप है कि बस ड्राइवर ने उन्हें गुमराह किया और किसी से बात नहीं करने दी।

संजय का आरोप है कि बस ड्राइवर ने उन्हें गुमराह किया और किसी से बात नहीं करने दी।

जीएसटी कार्यालय में अटकी चांदी, व्यापारी परेशान

अब संजय पिछले कई दिनों से जीएसटी कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। उनके अनुसार, सभी आवश्यक कागजात जमा करने के बावजूद अधिकारी जेवर वापस करने के लिए क्लीयरेंस नहीं दे रहे हैं। इस परेशानी के बाद संजय ने कोरबा के स्थानीय व्यापारियों से मदद मांगी।

व्यापारियों का विरोध, आंदोलन की चेतावनी

संजय की समस्या सुनने के बाद छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के जिला अध्यक्ष संतोष अग्रवाल, जगदीश सोनी, सुभाष अग्रवाल सहित कई पदाधिकारी बुधवार शाम को जीएसटी कार्यालय पहुंचे। व्यापारियों ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि यदि सभी दस्तावेज जमा करने के बाद भी व्यापारी को परेशान किया जा रहा है, तो यह दर्शाता है कि छत्तीसगढ़ में निर्भय होकर कारोबार करना संभव नहीं है। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि मुंबई के व्यापारी को न्याय नहीं मिला, तो कोरबा के व्यापारी आंदोलन करेंगे।

उन्होंने बांगो पुलिस के व्यवहार पर भी खेद व्यक्त किया और आरोप लगाया कि पुलिस ने चोरी का मुकदमा दर्ज करने के बजाय व्यापारी पर ही आरोप लगा दिया।

कोरबा के व्यापारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

कोरबा के व्यापारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

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कोरबा

डंबल से सिर कुचलकर पत्नी की हत्या:नया घर बनाने को लेकर विवाद, सुबह 4-5 बजे वारदात, दूसरी पत्नी के घर रह रहा था

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा में पति ने सीमेंट के डंबल से पत्नी के सिर पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि पति नया घर बनाने की बात कह रहा था, जबकि पत्नी इसका विरोध कर रही थी। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ।

विवाद बढ़ने पर पति ने गुस्से में पत्नी के सिर पर डंबल से हमला कर दिया। दोनों की यह दूसरी शादी थी और शादी के बाद पति पत्नी के घर में रह रहा था। घटना पाली थाना क्षेत्र की है।

पुलिस ने आरोपी पति को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।

पति ने सीमेंट के डम्बल से हमला कर पत्नी को मार डाला।

पति ने सीमेंट के डम्बल से हमला कर पत्नी को मार डाला।

गंभीर चोट लगने से महिला की मौके पर ही मौत हो गई।

गंभीर चोट लगने से महिला की मौके पर ही मौत हो गई।

पूछताछ के दौरान आरोपी पति ने पत्नी की हत्या करने की बात कबूल की।

पूछताछ के दौरान आरोपी पति ने पत्नी की हत्या करने की बात कबूल की।

घर बनाने की बात को लेकर हुआ विवाद

आरोपी रमेश डोंगरे (40) पत्नी बंधन कुंवर (39) के साथ शांति बस्ती के वार्ड नंबर-9 में रहता था। दोनों ने दूसरी शादी की थी। शादी के बाद रमेश पत्नी के घर में रह रहा था। रमेश नया घर बनाकर उसमें रहने की बात कह र​हा था।

पत्नी ने इसका विरोध किया। दोनों के बीच इसी बात को लेकर विवाद हुआ था। बुधवार सुबह करीब 4 से 5 बजे के करीब रमेश ने गुस्से में सीमेंट के डंबल से बंधन कुंवर के सिर पर हमला कर दिया।

हमला इतना गंभीर था कि बंधन कुंवर की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी।

दोनों की दूसरी शादी थी

पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बंधन कुंवर आरोपी रमेश डोंगरे की दूसरी पत्नी थी। रमेश ने पहली पत्नी को छोड़ने के बाद बंधन कुंवर से शादी की थी। वहीं बंधन कुंवर की भी यह दूसरी शादी बताई जा रही है। दोनों पति-पत्नी घर में अकेले रहते थे और उनकी कोई संतान नहीं थी।

पुलिस और FSL टीम ने जुटाए साक्ष्य

घटना की सूचना मिलते ही पाली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। इसके साथ ही एफएसएल टीम को भी बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से जरूरी सबूत जुटाए और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की।

आरोपी ने कबूला जुर्म

पाली थाना प्रभारी के मुताबिक, पुलिस ने आरोपी पति को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उसने पत्नी की हत्या करने की बात कबूल की है।

पुलिस ने आरोपी रमेश डोंगरे के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। उसे गिरफ्तार करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

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कोरबा

कटघोरा-अंबिकापुर हाईवे पर पेट्रोल-डीजल टैंकर में आग:ड्राइवर-कंडक्टर ने कूदकर बचाई जान, 12 हजार लीटर ज्वलनशील-पदार्थ लोड था, बड़ा हादसा टला, हाईवे पर जाम लगा

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कोरबा। कोरबा के कटघोरा-अंबिकापुर नेशनल हाईवे-130 पर गुरुवार दोपहर गुरसियां के पास एक पेट्रोल-डीजल टैंकर में आग लग गई। टैंकर में करीब 4 हजार लीटर पेट्रोल और 8 हजार लीटर डीजल भरा था। हालांकि, आग लगते ही ड्राइवर और कंडक्टर टैंकर से कूद गए और अपनी जान बचाई। इससे बड़ा हादसा होने से टल गया।

टैंकर कोरबा से पेट्रोल-डीजल लेकर वाड्रफनगर जा रहा था। ड्राइवर दीपक कुमार ने बताया कि वे गुरसियां के पास एक होटल में खाना खाने रुके थे। खाना खाने के बाद जैसे ही उन्होंने टैंकर स्टार्ट करने के लिए चाबी ऑन कर सेल्फ मारा, तो बैटरी से धुआं निकलने लगा और अचानक आग लग गई।

दो फायर एक्सटिंग्विशर से भी नहीं बुझी आग

दीपक कुमार के अनुसार, उन्होंने टैंकर में रखे फायर बोतल से आग बुझाने की कोशिश की। दो फायर एक्सटिंग्विशर का इस्तेमाल भी किया, लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका और वह टायरों तक फैल गई। देखते ही देखते पूरा टैंकर आग की चपेट में आ गया।

घटना की सूचना मिलते ही बांगो थाना पुलिस और यातायात पुलिस मौके पर पहुंची। सुरक्षा के लिए हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई, जिससे गाड़ियों की लंबी कतार लग गई। टैंकर में बड़ी मात्रा में पेट्रोल-डीजल होने के कारण विस्फोट की आशंका को देखते हुए आसपास के रिहायशी इलाकों को खाली कराया गया।

दमकल ने बुझाई टैंकर की आग

बांगो थाना प्रभारी दुर्गेश वर्मा ने बताया कि आग लगने की सूचना के बाद तुरंत दमकल वाहन बुलाया गया और आग बुझाने की कोशिश की गई। सुरक्षा के लिए लोगों की आवाजाही रोकी गई, ताकि कोई हादसा न हो। फिलहाल आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन वाहन बहुत गर्म होने के कारण उसे लगातार ठंडा किया जा रहा है।

दमकल की टीम आग बुझाने में लगी हुई है और पुलिस ने पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा बनाया है।

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कोरबा

25 सितंबर की पर्यावरण जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों की चेतावनी:SECL मानिकपुर परियोजना से प्रभावित बोले-पहले मुआवजा-रोजगार दो, फिर सुनवाई कराओ

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कोरबा। SECL मानिकपुर परियोजना से प्रभावित भिलाई खुर्द और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने 25 सितंबर को होने वाली पर्यावरण जनसुनवाई से पहले अपनी पुरानी और लंबित मांगों का समाधान करने की मांग की है। इस संबंध में एसईसीएल मानिकपुर प्रभावित ग्राम (भू-विस्थापित) समिति भिलाई खुर्द के तहत ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।

ग्रामीणों ने कहा कि वे क्षेत्र के विकास और परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की प्रक्रिया में उन परिवारों के अधिकारों और हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए, जिनकी जमीन, आजीविका और सामाजिक जीवन परियोजना से प्रभावित हुआ है।

पहले मांगों का समाधान, फिर जनसुनवाई की मांग

ग्रामीणों के मुताबिक, वे लंबे समय से उचित मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन के सामने अपनी मांगें रखते आ रहे हैं। उनका कहना है कि पहले भी पर्यावरण जनसुनवाई की तारीख तय की गई थी, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों और भूमि विस्थापित संगठन ने लंबित मांगों को लेकर आपत्ति जताते हुए विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद जनसुनवाई टाल दी गई थी।

अब एक बार फिर 25 सितंबर को जनसुनवाई प्रस्तावित है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुरानी मांगों का ठोस समाधान किए बिना जनसुनवाई कराई गई, तो प्रभावित परिवारों में असंतोष और बढ़ेगा।

1963-64 में जमीन गई, रोजगार अब तक नहीं मिला

ग्रामीणों ने मांग की है कि 1963-64 में जिन किसानों की जमीन ली गई थी और उन्हें विस्थापन के बदले एसईसीएल में रोजगार नहीं मिला, उन्हें जमीन के बदले रोजगार दिया जाए। इसके साथ ही उस अवधि में अधिग्रहित जिन जमीनों के किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें तत्काल मुआवजा देने की मांग की गई है।

पारदर्शी मुआवजा और युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता

ग्रामीणों ने भूमि और संपत्तियों का उचित और पारदर्शी मुआवजा देने की मांग की है। इसके अलावा प्रभावित परिवारों के योग्य युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता, सम्मानजनक पुनर्वास और प्रभावित गांवों में सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए केवल मुआवजा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके पुनर्वास और भविष्य की आजीविका की भी ठोस व्यवस्था होनी चाहिए।

जनसुनवाई से पहले बैठक कर बिंदुवार समाधान की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जनसुनवाई से पहले प्रभावित परिवारों के साथ बैठक आयोजित कर एक-एक मांग पर चर्चा की जाए और तय समय सीमा में समाधान किया जाए। उनका कहना है कि पुरानी शिकायतों का निराकरण किए बिना नई जनसुनवाई कराने से प्रभावित परिवारों की समस्याएं और लंबी हो जाएंगी।

भिलाई खुर्द और आसपास के प्रभावित गांवों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

भिलाई खुर्द और आसपास के प्रभावित गांवों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

मांग नहीं मानी तो कड़ा विरोध

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि इस बार भी उनकी मांगों की अनदेखी हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो जेल जाने के लिए भी तैयार हैं और जनसुनवाई का कड़ा विरोध किया जाएगा।

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के पक्ष में हैं, लेकिन परियोजना की प्रक्रिया में जिन परिवारों ने अपनी जमीन और आजीविका गंवाई है, उनके अधिकारों और लंबित मांगों का समाधान भी उतनी ही गंभीरता से किया जाना चाहिए।

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