रायपुर, एजेंसी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज एक दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ के अभनपुर पहुंचे। जहां वे कांग्रेस के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए। यहां उन्होंने 40 मिनट तक सीनियर नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद जिलाध्यक्षों, शहर अध्यक्षों के साथ सीधी बातचीत की।
करीब 4 घंटे के प्रोग्राम के बाद वे एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए। इससे पहले एयरपोर्ट के पास ही रुककर राहुल गांधी ने टपरी पर चाय पी और PCC चीफ दीपक बैज को बिस्किट खिलाया। इस दौरान सचिन पायलट, भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत समेत कई सीनियर नेता मौजूद रहे।
बता दें कि अभनपुर में चल रहा शिविर पूरी तरह से गोपनीय है, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ता दूर-दूर से पहुंचे हुए थे। यहां कार्यकर्ताओं की इतनी भीड़ रही कि नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत धक्का-मुक्की के बीच गेट के बाहर ही रह गए थे।
सीनियर नेताओं सेमिले राहुल गांधी
पूर्व मंत्री गुरु रुद्र कुमार ने बताया कि, राहुल गांधी ने कार्यक्रम में सीनियर नेताओं और पूर्व मंत्रियों से करीब 40 मिनट तक मुलाकात की। इसके साथ ही करीब 70 लोगों का डेलिगेशन भी राहुल गांधी से मिला, जिसमें पूर्व विधायक, सांसद और अन्य पदाधिकारी शामिल थे। प्रदेश की राजनीति को लेकर राहुल गांधी से चर्चा हुई है। इसके बाद उन्होंने जिलाध्यक्षों को ट्रेनिंग दी।
बाइक चलाकर राहुल गांधी से मिलने पहुंचा था कार्यकर्ता
सक्ती जिले के जैजपुर से आए ब्लॉक अध्यक्ष कौशिक चंद्र ने बताया कि, बाइक चलाकर राहुल गांधी से मुलाक़ात करने दिल्ली गया, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। आज फिर बाइक से यहां मिलने आया हूं।
राहुल भ्रष्टाचार की ट्रेनिंग देने आए हैं- पुरंदर मिश्रा
राहुल गांधी के दौरे को लेकर भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने तंज कसते हुए कहा कि, राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में उनका स्वागत है। उन्होंने कहा कि यही भगवान राम हैं, जिनके अस्तित्व को राहुल गांधी ने कभी स्वीकार नहीं किया था।
राहुल गांधी यहां कांग्रेस कार्यकर्ताओं को क्या सिखाने आ रहे हैं। क्या वे भ्रष्टाचार की ट्रेनिंग देने आए हैं या फिर ‘आलू से सोना निकालने’ जैसी बातें सिखाने आ रहे हैं। वहीं, पुरंदर मिश्रा के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि पुरंदर मिश्रा मानसिक रूप से परेशान हो चुके हैं और उन्हें इलाज की जरूरत है।
अंबिकापुर में आज योग दिवस कार्यक्रम शामिल होने पहुंचे सीएम विष्णुदेव साय ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल जहां जाते हैं, हश्र सब जानते हैं।
मिश्रा ‘एक्सीडेंटल विधायक’ हैं- विकास
विकास उपाध्याय ने तंज कसते हुए कहा कि यदि भाजपा उनका इलाज नहीं करा पा रही है, तो कांग्रेस इसके लिए भी तैयार है। पुरंदर मिश्रा अपना राजनीतिक कद बढ़ाने के लिए इस तरह के बयान दे रहे हैं। मिश्रा ‘एक्सीडेंटल विधायक’ हैं, वे अनावश्यक बयानबाजी कर सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहे हैं।
भाजपा विधायक पुरदंर मिश्रा ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर सवाल उठाए हैं।
जिला-शहर अध्यक्षों के लिए प्रशिक्षण शिविर
कांग्रेस का 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर शुक्रवार से अभनपुर के चांदी मोड़ स्थित आशुतोष-अलका अग्रवाल मंगल भवन में शुरू हो चुका है। संगठन सृजन अभियान के तहत आयोजित इस शिविर में प्रदेशभर के नवनियुक्त जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्ष शामिल हुए हैं।
शिविर को केवल भाषणों तक सीमित नहीं रखा गया है। कांग्रेस नेताओं को गांवों में रुककर ग्रामीणों से संवाद करने, मनरेगा की जमीनी स्थिति समझने, नशे की समस्या पर चर्चा करने और स्थानीय सामाजिक-आर्थिक हालात का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रशिक्षण में योग, मार्शल आर्ट्स, व्यक्तित्व विकास और संगठन प्रबंधन के सत्र भी रखे गए हैं। अलग-अलग विषयों के विशेषज्ञ मीडिया हैंडलिंग, जनसंपर्क, राजनीतिक रणनीति और बूथ प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया गया।
संगठन विस्तार, बूथ स्तर की मजबूती पर दिया मंत्र
राहुल गांधी आज जिला और शहर कांग्रेस अध्यक्षों के साथ विशेष सत्र में शामिल हुए थे। उन्होंने संगठन विस्तार, बूथ स्तर की मजबूती, भाजपा के खिलाफ राजनीतिक नैरेटिव और आगामी चुनावी रणनीति पर मार्गदर्शन दिया।
शिविर में कांग्रेस प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट समेत कई वरिष्ठ राष्ट्रीय नेता भी अलग-अलग सत्रों में शामिल होकर कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देंगे। कांग्रेस इसे आगामी चुनावों से पहले संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की बड़ी कवायद मान रही है।
अभनपुर में कांग्रेस का 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर होगा।
कोरबा/कटघोरा। करीब 02 साल से अधिक समय तक कटघोरा वनमंडल में पदस्थ रहे आईएफएस कुमार निशांत का स्थानांतरण मरवाही डीएफओ के रूप में हो गया है। उनके स्थान पर शासन ने आईएफएस जितेन्द्र कुमार उपाध्याय को पोस्टिंग दी है। श्री उपाध्याय इसके पूर्व धरमजयगढ़ में डीएफओ थे। निशांत का भ्रष्टाचार और तानाशाही से रहा नाता कटघोरा में पदस्थ कुमार निशांत का कटघोरा डीएफओ बनते ही तानाशाही और भ्रष्टाचार से नाता रहा। कटघोरा डीएफओ रहते कैम्पा मद में भारी गड़बड़ी की शिकायत रही और विधानसभा तक इसकी गूंज रही। एक विधायक के सवाल के जवाब में छत्तीसगढ़ के उन आईएफएस अधिकारियों का नाम वनमंत्री केदार कश्यप ने बताया, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत और जांच चल रही है, जिनमें कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत का नाम शामिल है। भ्रष्टाचार की शिकायत और जांच चलने के बाद भी कुमार निशांत को सालों तक अभयदान मिलता रहा और काफी समय कटघोरा डीएफओ के रूप में बिताने के बाद 08 अगस्त को उनका स्थानांतरण मरवाही वनमंडल में डीएफओ के रूप में हुआ है। भ्रष्टाचार में जहां वे चर्चा में रहे, वहीं वे तानाशाही के लिए भी चर्चित रहे। जब जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा-कटघोरा डीएफओ कार्यालय में जा कर लेंगे बैठक उनकी हिटलरशाही आम जनता के लिए तो चर्चा का विषय रहा ही, वे जनप्रतिनिधियों के निर्देशों की भी अवहेलना करने में भी चर्चित रहे। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को एक साल से अधिक हो गए। एक साल में जिला पंचायत की सामान्य सभा जितनी बार हुई, उसमें एक बार भी कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत नहीं पहुंचे। जिला पंचायत सीईओ एवं अध्यक्ष डॉ. पवन के निर्देशों को भी वे हवा में उड़ा देते रहे और अपने अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच कहते-फिरते रहे कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता। हुआ भी यही, वे राजा की तरह दम्भ के साथ कटघोरा में अपना पूरा कार्यकाल बिताया और अब 08 अगस्त को शासन स्तर पर हुए तबादला आदेश में वे मरवाही जा रहे हैं।
एक साल की एक भी सामान्य सभा में डीएफओ कुमार निशांत की उपस्थिति न होने पर कई बार कटघोरा डीएफओ को नोटिस दिया गया, लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा, इससे खिन्न हो कर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने कहा कि अबकी बार कटघोरा डीएफओ उपस्थित नहीं होते, तो वे सभी सदस्यों के साथ कटघोरा वनमंडल कार्यालय में डीएफओ की बैठक लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं कर सके। सीएम तक हुई शिकायत, लेकिन नौकरशाही हावी रही डॉ. पवन सिंह सहित जिला पंचायत सदस्यों, भाजपा नेताओं ने कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत की तानाशाही एवं भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास पहुंचे, लेकिन महीनों-महीनों बीत गए, लेकिन उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिला पंचायत सीईओ के आदेश को मानने के लिए वे अपने आपको बाध्य नहीं मानते थे, क्योंकि वे फ्रेश आईएफएस हैं, जबकि जिला पंचायत सीईओ प्रमोटिव एडीएम/जिला पंचायत सीईओ थे।
कोरबा। कोरबा जिले के मिनीमाता बांगो जलाशय में बारिश के साथ ही जलभराव में वृद्धि हुई है। बांगो जलाशय के कार्यपालन अभियंता एस.के.भारती से प्राप्त जानकारी के अनुसार आज की स्थिति में बांगो जलाशय में जलभराव 89.55 प्रतिशत है। जलाशय में पानी की आवक बढ़ने पर कभी भी मिनीमाता जलाशय का गेट खोलकर पानी बहाया जा सकता है।
बाढ़ क्षेत्र से परिसम्पतियां हटाने की सूचना जारी
वर्षाकाल 2026 के दौरान आवश्यकता होने पर मिनी माता बांगो बांध माचाडोली से हसदेव नदी में पानी प्रवाहित किया जायेगा। कार्यपालन अभियंता एस.के.भारती मिनीमाता हसदेव बांगो बांध संभाग क्रमांक 03 माचाडोली ने सर्व साधारण एवं कार्य संबंधितों को सूचित किया है कि मिनीमाता बांगो जलाशय में बारिश के साथ ही जलभराव में वृद्धि हुई है। आज की स्थिति में बांगो जलाशय में जल भराव मीटर 89.55 प्रतिशत है।
उक्त बांध से नीचे, हसदेव नदी के किनारे, बाढ़ क्षेत्र में स्थापित चल-अचल सम्पत्ति सुरक्षित स्थानों पर ले जायें। बाढ़ क्षेत्र में स्थापित खनिज खदान ठेकेदार, औद्योगिक इकाईयां, संस्थानों आदि को भी सूचित किया गया है कि वे अपनी परिसम्पत्तियों को बाढ़ क्षेत्र से बाहर कर लेवें। कार्यपालन अभियंता मिनीमाता बांगो बांध ने कहा है कि अकस्मात बाढ़ से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए जल संसाधन विभाग उत्तरदायी नहीं होगा। कार्यपालन अभियंता मिनीमाता बांगो बांध ने बाढ़ क्षेत्र में आने वाले गांवों में बाढ़ चेतावनी की मुनादी करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
कार्यपालन अभियंता ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में आने वाले संभावित गांवो में बांगो, चर्रा, पोड़ी उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट, छिनमेर, कछार, कलमीपारा, सिलीयारीपारा, जूनापारा, तिलाईडाड, डुगुपारा, टुंगुमांड़ा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेलगांव, झाबू, नवागांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ी, कोडा, हथमार, झोरा, सिरकीकला आदि शामिल हैं।
कोरबा। कोरबा के कटघोरा विधानसभा क्षेत्र में बुंदेली से चांदनी चौक तक जर्जर पीएमजीएसवाई सड़क और क्षतिग्रस्त खोलार नदी के पुल को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी (जेसीपी) ने शुक्रवार, 7 अगस्त को चांदनी चौक पर चक्काजाम किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण भी शामिल हुए। इससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। पुलिस और जिला प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं और बारिश का पानी भर गया है। इसके कारण सड़क तालाब जैसी हो गई है। ग्रामीणों, किसानों और स्कूली बच्चों को रोज जान जोखिम में डालकर इस रास्ते से गुजरना पड़ रहा है।
जेसीपी ने बताया कि सड़क और पुल की समस्या को लेकर पहले प्रशासन को 15 दिन का समय दिया गया था। समय पूरा होने के बाद भी कोई ठोस काम शुरू नहीं हुआ। इसके बाद पार्टी ने चांदनी चौक पर चक्काजाम कर विरोध जताया।
पुल के लिए 5.36 करोड़ का प्रस्ताव
जेसीपी के जिला सचिव महावीर यादव ने बताया कि खोलार नदी पर नए पुल के निर्माण के लिए सीजीआरआरडीए कोरबा ने डीएमएफटी मद से 536.01 लाख रुपए का प्राक्कलन तैयार कर जिला प्रशासन को भेजा है। यह प्रस्ताव कई महीनों से मंजूरी के इंतजार में है।
घोषणा और शिकायत के बाद भी काम शुरू नहीं
महावीर यादव ने कहा कि उपमुख्यमंत्री की घोषणा और सीएम हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी मौके पर काम शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने इसे प्रशासन की लापरवाही बताया। उनका कहना है कि खराब सड़क और पुल के कारण रोजाना स्कूली बच्चों, किसानों और आम लोगों को परेशानी हो रही है।
अस्पताल और मंडी जाने में भी परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार, यह सड़क कई गांवों को शहर से जोड़ती है। पुल टूटने और सड़क खराब होने से मरीजों को अस्पताल ले जाने, बच्चों को स्कूल पहुंचाने और किसानों को अपनी फसल मंडी तक ले जाने में काफी दिक्कत हो रही है।
काम शुरू होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
जेसीपी ने कहा है कि सड़क की मरम्मत और खोलार नदी पर नए पुल का निर्माण शुरू होने तक आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी ने किसानों, युवाओं और आम लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की थी, जिसे स्थानीय लोगों का समर्थन मिला।
नियमित नौकरी की मांग को लेकर ग्रामीणों ने राखड़ डैम बंद किया
कोरबा में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत गृह के राखड़ बांध से प्रभावित ग्रामीणों ने शुक्रवार को डैम बंद कर विरोध प्रदर्शन किया। गोढ़ी, बेन्द्रकोना और पडरीपानी के ग्रामीण 2007 में अधिग्रहित जमीन के बदले अब तक नियमित नौकरी नहीं मिलने से नाराज हैं।
ग्रामीण राखड़ डैम पंडोपानी पहुंचे और डैम का काम बंद कराकर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों के अनुसार, करीब 46 परिवार ऐसे हैं, जिन्हें जमीन अधिग्रहण के बाद अब तक स्थायी नौकरी नहीं मिली है।
प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें नियमित नौकरी देने के बजाय सिर्फ तीन साल की संविदा नौकरी का प्रस्ताव दिया जा रहा है। कुछ लोगों ने यह नौकरी स्वीकार कर ली है, जबकि कई ग्रामीणों ने इसे लेने से इनकार कर दिया है।
2010 में नियमित नौकरी देने की हुई थी घोषणा
ग्रामीणों के अनुसार, 29 नवंबर 2010 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि राखड़ बांध के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले 308 प्रभावित परिवारों के एक-एक सदस्य को CSPGCL में नियमित नौकरी दी जाएगी। इस घोषणा को संचालक मंडल से भी मंजूरी मिलने की बात ग्रामीणों ने कही है।
308 में से आधे से ज्यादा परिवारों को मिली नौकरी
प्रभावितों का कहना है कि 308 परिवारों में से आधे से ज्यादा को ही अब तक नौकरी मिल पाई है। बाकी परिवारों को नियमित पद देने के बजाय तीन साल की संविदा नौकरी दी जा रही है। इसमें हर साल अनुबंध बढ़ाने की बात है, लेकिन तीन साल बाद नियमित नौकरी देने की कोई गारंटी नहीं है।
जमीन गई, अब रोजगार भी नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि 2007 में उनकी पुश्तैनी जमीन अधिग्रहित की गई थी। यही जमीन उनके परिवार की आय का मुख्य साधन थी। जमीन जाने के बाद परिवारों के सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना है कि उन्हें भी पहले नौकरी पा चुके प्रभावित परिवारों की तरह नियमित पद दिया जाए।
15 साल से सिर्फ आश्वासन मिलने का आरोप
किसानों ने कहा कि वे पिछले 15 साल से नौकरी के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। कई बार ज्ञापन दिए गए और बैठकें भी हुईं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने नियमित नौकरी नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।