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छत्तीसगढ़

रायपुर : पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन ही विकसित छत्तीसगढ़ का आधार है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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डिजिटल सुशासन से छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान बना रहा है : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

नागरिक केंद्रित शासन व्यवस्था ही सुशासन की वास्तविक पहचान है: मुख्यमंत्री

प्रशासनिक सुधारों से बदल रहा छत्तीसगढ़: प्रशासनिक सुधारों से शासन हुआ अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित

डिजिटल सुशासन के मॉडल के रूप में उभर रहा छत्तीसगढ़

उत्कृष्ट भूमि सुधार एवं एग्रीस्टैक के लिए केंद्र सरकार ने दिए रू.598 करोड़

रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में एक नए परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में शासन की पारंपरिक कार्यप्रणाली को बदलते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिसमें नागरिक सुविधाओं का केंद्र हो, प्रक्रियाएं सरल हों, निर्णय समयबद्ध हों और शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक-सक्षम बने। सरकार द्वारा अब तक लागू किए गए 435 प्रशासनिक सुधार केवल कार्यालयीन प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक बदलाव लाते हुए आम नागरिक, किसान, उद्यमी, निवेशक और युवाओं तक सरकारी सेवाओं की पहुंच को अधिक सहज, पारदर्शी और प्रभावी बनाया है। यही कारण है कि आज छत्तीसगढ़ डिजिटल गवर्नेंस, सेवा वितरण और प्रशासनिक नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में तेजी से अपनी पहचान स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुशासन को केवल नीति का विषय नहीं, बल्कि शासन की मूल कार्यशैली बनाया है। भूमि प्रबंधन से लेकर राजस्व प्रशासन, शिकायत निवारण से लेकर ऑनलाइन नागरिक सेवाओं तक, औद्योगिक निवेश से लेकर पंजीयन व्यवस्था तक और डिजिटल कृषि से लेकर ई-गवर्नेंस तक अनेक क्षेत्रों में व्यापक सुधार लागू किए गए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य नागरिकों का समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बचत करना, सरकारी प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना तथा तकनीक के माध्यम से शासन और जनता के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करना है। यही सोच आज विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य ऐसा प्रशासन विकसित करना है, जिसमें नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें, सेवाएं समयबद्ध रूप से उपलब्ध हों और शासन की प्रत्येक प्रक्रिया पारदर्शी एवं जवाबदेह बने। डिजिटल तकनीक का उपयोग केवल सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। प्रशासनिक सुधारों की पूरी प्रक्रिया इसी सोच के साथ आगे बढ़ रही है कि शासन नागरिकों के और अधिक निकट पहुंचे तथा प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और बिना किसी अनावश्यक बाधा के सरकारी सेवाओं का लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक सुधारों का दायरा केवल ई-गवर्नेंस तक सीमित नहीं है। शिकायत निवारण, भूमि प्रबंधन, राजस्व प्रशासन, निवेश, पंजीयन, डिजिटल कृषि, ऑनलाइन सेवाएं, औद्योगिक अनुमतियां तथा सेवा वितरण के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं। इन सुधारों का सकारात्मक प्रभाव आम नागरिकों से लेकर किसानों, उद्यमियों, उद्योगों और निवेशकों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। इससे शासन की कार्यक्षमता बढ़ी है, निर्णय प्रक्रिया तेज हुई है तथा सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सुशासन सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जब प्रशासन सरल, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम होगा, तभी विकास की गति भी तेज होगी। इसी उद्देश्य से प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं, एकीकृत नागरिक सेवा व्यवस्था और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को लगातार मजबूत किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि शासन का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे और नागरिकों का विश्वास सरकार की सबसे बड़ी ताकत बने।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासनिक सुधारों की यह सतत प्रक्रिया छत्तीसगढ़ को देश में सुशासन और डिजिटल प्रशासन के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी। पारदर्शिता, तकनीक और संवेदनशील प्रशासन के प्रभावी समन्वय से प्रदेश में विकास को नई गति मिलेगी, निवेश का बेहतर वातावरण बनेगा, नागरिक सेवाएं और अधिक सुलभ होंगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।

डिजिटल गवर्नेंस ने बदली शासन की कार्यशैली

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने डिजिटल गवर्नेंस को शासन का अभिन्न हिस्सा बनाया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग के गठन के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग और समन्वय की नई व्यवस्था विकसित की गई है। 25 दिसंबर 2023 को सुशासन दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से राज्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं की ऑनलाइन समीक्षा की जा रही है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन की गति और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार आया है।

इसी दिशा में ई-ऑफिस प्रणाली, मुख्यमंत्री कार्यालय ऑनलाइन पोर्टल और स्वागतम पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं। इन प्रणालियों ने फाइलों के निस्तारण को अधिक तेज, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाया है। अब प्रशासनिक निर्णयों की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से हो रही है तथा विभागों के बीच समन्वय भी मजबूत हुआ है। तकनीक आधारित इन सुधारों ने शासन की कार्य संस्कृति में व्यापक परिवर्तन लाते हुए पारंपरिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आधुनिक, दक्ष और नागरिक-केंद्रित बनाया है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 बनी जनता और सरकार के बीच विश्वास का सेतु

सुशासन की सबसे बड़ी पहचान नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की शुरुआत की, जिसने शासन और आम जनता के बीच संवाद का एक नया और भरोसेमंद माध्यम स्थापित किया है। अब प्रदेश का कोई भी नागरिक घर बैठे टोल-फ्री नंबर 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है, सुझाव दे सकता है अथवा सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं के संबंध में फीडबैक साझा कर सकता है। यह व्यवस्था केवल शिकायत दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान को भी सुनिश्चित करती है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से वर्तमान में राज्य शासन के 42 विभागों के लगभग 8 हजार अधिकारी जुड़े हुए हैं तथा 1195 श्रेणियों की शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक शिकायत को एक विशिष्ट आईडी प्रदान की जाती है, जिससे आवेदक उसकी ऑनलाइन स्थिति स्वयं देख सकता है। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता, तो प्रकरण स्वतः उच्च स्तर पर पुनः परीक्षण के लिए पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री सचिवालय से लेकर विभागीय सचिव स्तर तक इसकी नियमित समीक्षा की जाती है। सप्ताह के सातों दिन और चौबीसों घंटे संचालित यह व्यवस्था सरकार की संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित कार्यशैली का प्रभावी उदाहरण बन चुकी है।

सेवा सेतु ने सरकारी सेवाओं को बनाया घर-घर तक सुलभ

राज्य सरकार ने नागरिक सेवाओं को एकीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘सेवा सेतु’ को विकसित किया है, जो आज प्रदेशवासियों के लिए सरकारी सेवाओं का प्रमुख डिजिटल प्रवेश द्वार बन चुका है। अलग-अलग विभागों के कार्यालयों में जाने की आवश्यकता को कम करते हुए यह प्लेटफॉर्म नागरिकों को एक ही स्थान पर अनेक सेवाओं का लाभ उपलब्ध करा रहा है। वर्तमान में इस पोर्टल पर 36 विभागों की 520 सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड और 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16,726 सेवा2 केंद्रों के माध्यम से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नागरिकों तक सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। 1 अप्रैल 2025 से अब तक 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफल निराकरण किया जा चुका है। लगभग 94.3 प्रतिशत सफलता दर इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाती है। क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ई-चालान, ट्रेजरी और डीबीटी भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाओं ने सेवा वितरण को अधिक विश्वसनीय, 
सुरक्षित और पारदर्शी बनाया है।

औद्योगिक निवेश के लिए बना सरल और पारदर्शी वातावरण

राज्य सरकार ने निवेशकों के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 लागू किया है। इस नई व्यवस्था के माध्यम से उद्योग स्थापना के लिए आवश्यक विभिन्न विभागों की अनुमतियां एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। आवेदन की ऑनलाइन ट्रैकिंग, समयबद्ध अनुमोदन और डिजिटल पारदर्शिता ने निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल, विश्वसनीय और उद्योग-अनुकूल बनाया है।
इसी दिशा में राज्य कर मुख्यालय, रायपुर में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कक्ष की स्थापना की गई है, जहां नए उद्यमियों को जीएसटी पंजीयन सहित विभिन्न प्रक्रियाओं में मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य सरकार द्वारा दुकानों को 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन संचालित करने की अनुमति देने का निर्णय भी व्यापार, सेवा क्षेत्र और रोजगार को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को और अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से एमएसएमई मंत्रालय के गठन की घोषणा भी इसी व्यापक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।

पंजीयन व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव

संपत्ति पंजीयन प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक सुधार लागू किए हैं। ऑनलाइन भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेज़ खोज, डिजिटल नकल सुविधा तथा ‘सुगम’ एप जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से नागरिक अब घर बैठे संपत्ति संबंधी अनेक सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। इससे समय की बचत के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक हुई है।
राज्य सरकार ने 28 अप्रैल 2026 से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त कर आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। लगभग 150 करोड़ रुपये के संभावित राजस्व का त्याग करते हुए सरकार ने जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला अत्याधुनिक स्मार्ट पंजीयन कार्यालय प्रारंभ किया गया है, जहां मकान, दुकान अथवा भूमि की रजिस्ट्री मात्र 12 से 15 मिनट में पूरी हो रही है। अगले एक वर्ष में प्रदेश के सभी 117 पंजीयन कार्यालयों को इसी प्रकार आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा गया है।

भूमि सुधारों ने बढ़ाया पारदर्शिता और नागरिकों का भरोसा

भूमि प्रबंधन के क्षेत्र में भी राज्य सरकार ने तकनीक आधारित व्यापक सुधार लागू किए हैं। डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत भू-अभिलेखों का पूर्ण कंप्यूटरीकरण, राजस्व न्यायालयों का डिजिटलीकरण, आधुनिक रिकॉर्ड रूम की स्थापना तथा नक्शों का डिजिटल रूपांतरण किया गया है। भूमि विवादों के समाधान के लिए जियो-रेफ्रेंसिंग तकनीक को अपनाया गया है, जिससे सीमांकन और अभिलेखों की शुद्धता में उल्लेखनीय सुधार आया है।

शहरी क्षेत्रों में नक्शा परियोजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से संपत्तियों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर डिजिटल संपत्ति कार्ड वितरित किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण नागरिकों को उनकी संपत्तियों का विधिक अधिकार प्राप्त हुआ है तथा भूमि विवादों में कमी आने लगी है। भूमि सुधारों और एग्रीस्टैक के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को ₹598 करोड़ का विशेष सहायता अनुदान प्रदान किया जाना इन प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सराहना का प्रमाण है।

विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप छत्तीसगढ़ सुशासन, डिजिटल प्रशासन और नवाचार आधारित विकास का एक प्रभावी मॉडल बनकर उभर रहा है। प्रशासनिक सुधारों की यह यात्रा केवल प्रक्रियाओं के सरलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन और नागरिकों के बीच विश्वास को और अधिक मजबूत करने का अभियान है। यही सुशासन की संस्कृति विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति दे रही है और प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ा रही है।

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कोरबा

SECL और प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ भू-विस्थापितों ने आज अंडीकछार में महासम्मेलन कर कई अहम निर्णय व प्रस्ताव पारित किये

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40 वर्षों बाद भी रोजगार और मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे सुवाभोड़ी सिरकी खुर्द चैनपुर झाबर और बेलटिकरी के ग्रामीण

ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के बैनर तले संपन्न हुआ महासम्मेलन

कोरबा/दीपका। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड SECL और स्थानीय प्रशासन की तानाशाहीपूर्ण नीतियों के कारण दीपका क्षेत्र के भू-विस्थापित परिवारों का जीवन संकट में आ पड़ा है भूमि अर्जन और विस्थापन के 40 वर्ष बीत जाने के बाद भी विस्थापितों की समस्याओं का अंत नहीं हो सका है और रोजगार व पुनर्वास की मांगें आज भी अधर में लटकी हुई हैं एसईसीएल प्रबंधन की इस वादाखिलाफी और उपेक्षा के विरोध में ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के तत्वाधान में आज 22 अक्टूबर 2026 गुरुवार को प्रातः 11:00 बजे ग्राम पंचायत अंडीकछार स्थित टिनठिकिया स्थान पर एक विशाल भू-विस्थापित महासम्मेलन का आयोजन किया गया ।

इस महासम्मेलन में दीपका क्षेत्र के अर्जित एवं पुनर्वासित गांवों सुवाभोड़ी सिरकी खुर्द चैनपुर झाबर और बेलटिकरी के प्रभावित ग्रामीण युवा बुजुर्ग और महिलाएं एकजुट होकर एसईसीएल प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरें ।

महासम्मेलन के मुख्य मुद्दे

ग्राम सुवाभोड़ी की प्रमुख मांगें पर लंबित मुआवजा एवं परिसंपत्तियों का अविलंब भुगतान 5 लाख की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि बसाहट पात्रता दस्तावेजों में व्याप्त नाम व जाति संबंधी त्रुटियों का तत्काल सुधार स्थानीय युवाओं एवं महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार का अधिकार के विषयों पर विशेष चर्चा पर प्रस्ताव पारित किया गया !

इसके साथ ही पुनर्वासित क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाएं सिरकी खुर्द चैनपुर झाबर बेलटिकरी ग्रामीणों को भूमि पट्टे का आवंटन पक्की सड़कें नाली पुल-पुलिया गार्डन सामुदायिक भवन मुक्तिधाम तालाब और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं लंबित मुआवजा व पुनर्वास नीति के तहत सभी पात्रताओं का पारदर्शी निपटारा भू-विस्थापित कोटा टेंडर व स्वरोजगार अधिकार वैकल्पिक स्वरोजगार हेतु निर्धारित 5 लाख की टेंडर सीमा को बढ़ाकर 20 लाख स्थानीय भू-विस्थापित ठेकेदारों के साथ किए जा रहे भेदभाव को तुरंत समाप्त के संबंध में भी निर्णय व प्रस्ताव पारित किये गये !

संगठन का आह्वान

ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने दीपका क्षेत्र के समस्त प्रभावित ग्रामों के निवासियों माताओं-बहनों बुजुर्गों और विशेष रूप से युवाओं से अपील की है कि वे अपने हक और अधिकार की इस निर्णायक लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने कहा वर्षों से अपनी जमीन देकर देश को रोशन करने वाले किसान आज अपने ही हक के लिए तरस रहे हैं एसईसीएल की इस तानाशाही रवैये को अब बर्दाश्त नहीं की जायेगा और महासम्मेलन में अन्य समस्याओं का भी ऐतिहासिक निर्णय व प्रस्ताव लिया गया तथा इसी मंच से एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ आगामी लड़ाई व संघर्ष की तैयारी की जाएगी !

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कोरबा

टी.पी. नगर स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में शाम 3 बजे होगी बैठक, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल करेंगे संबोधित

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कोरबा। कांग्रेस संगठन द्वारा जिले में चल रही संगठनात्मक गतिविधियों एवं आगामी कार्यक्रमों को लेकर 23 अक्टूबर, शुक्रवार को शाम 3 बजे टी.पी. नगर स्थित जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय, कोरबा में जिला स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है।
बैठक को छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल संबोधित करेंगे। बैठक में जिले में संगठन की गतिविधियों, सेक्टर, मंडल, वार्ड एवं बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय एवं मजबूत बनाने तथा आगामी संगठनात्मक कार्ययोजना को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा सभी मंडल अध्यक्षों, सेक्टर प्रभारियों, वार्ड अध्यक्षों, बूथ पदाधिकारियों सहित कांग्रेस के समस्त पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।
कांग्रेस संगठन द्वारा विभिन्न वार्डों में सेक्टर स्तर की बैठकों का आयोजन भी किया जा रहा है। इसी क्रम में 23 अक्टूबर को अलग-अलग क्षेत्रों में सेक्टर बैठकों के पश्चात जिला स्तर पर यह महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है।
जिला कांग्रेस कमेटी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से निर्धारित समय पर बैठक में उपस्थित होकर संगठनात्मक चर्चा में भाग लेने की अपील की है।
दिनांक 29 अक्टूबर को AICC द्वारा नियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षक नवज्योत पटनायक और पी.सी.सी. पर्यवेक्षक एवं प्रदेश के पूर्व मंत्री व् खरसिया विधायक उमेश पटेल द्वरा कोरबा जिला के कांग्रेस पदाधिकारियों एवं कांग्रेस पार्टी के संगठन एवं मोर्चा से सम्बंधित समस्त पधिकारी एवं कार्यकर्ताओं को बैठक में उपस्थित रहना अनिवार्य रहेगा.

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कोरबा

वोट बचाओ–देश बचाओ अभियान को गति देने बिहार जाएंगे जयसिंह अग्रवाल

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शिवहर, सीतामढ़ी एवं मधुबनी पूर्व-पश्चिम जिलों के कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ करेंगे संगठनात्मक बैठक
कोरबा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा चलाए जा रहे दो माह के राष्ट्रव्यापी “वोट बचाओ–देश बचाओ” अभियान को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को बिहार के शिवहर, सीतामढ़ी तथा मधुबनी पूर्व एवं मधुबनी पश्चिम संगठनात्मक जिलों का केंद्रीय पर्यवेक्षक (AICC Observer) नियुक्त किया गया है।
AICC के निर्देशानुसार श्री अग्रवाल शीघ्र ही बिहार के इन जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान वे प्रत्येक जिले में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों, वरिष्ठ पदाधिकारियों, ब्लॉक अध्यक्षों, बूथ लेवल एजेंटों (BLA), फ्रंटल संगठनों एवं अभियान से जुड़े प्रमुख कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग बैठक कर अभियान की तैयारियों की समीक्षा करेंगे तथा आगामी कार्यक्रमों की जिम्मेदारियां तय करेंगे।
बैठकों में विशेष रूप से मतदाता सूची के सत्यापन, SIR के माध्यम से हटाए गए या प्रभावित मतदाताओं की पहचान, “Vote Rakshak” पोर्टल के उपयोग, बूथ स्तर पर सत्यापन, ग्राम स्तरीय चौपालों तथा जनजागरूकता अभियान को प्रभावी बनाने पर चर्चा की जाएगी। श्री अग्रवाल यह भी सुनिश्चित करेंगे कि AICC द्वारा निर्धारित कार्यक्रम प्रत्येक जिले में निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी गंभीरता और सक्रियता के साथ संचालित हों।
अभियान के आगामी चरण में 25 अक्टूबर से “वोट बचाओ–देश बचाओ चौपाल” का आयोजन प्रस्तावित है। इसके अंतर्गत जिला मुख्यालयों पर संयुक्त प्रेस वार्ता, ब्लॉक स्तर की बैठकें, बूथ लेवल एजेंटों एवं “Vote Rakshak” कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण तथा बूथवार मतदाता सूची का सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद गांव-गांव चौपाल आयोजित कर प्रभावित एवं हटाए गए मतदाताओं की जानकारी एकत्रित की जाएगी।
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि मतदाता सूची केवल कागज का दस्तावेज नहीं, बल्कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक के अधिकार और उसकी राजनीतिक भागीदारी का आधार है। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है अथवा चुनावी प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता होती है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। कांग्रेस पार्टी का उद्देश्य प्रत्येक पात्र मतदाता के मताधिकार की रक्षा करना है।
उन्होंने कहा कि AICC द्वारा उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारी को वे पूरी गंभीरता के साथ निभाएंगे तथा बिहार के संबंधित जिलों में कांग्रेस संगठन के सभी स्तरों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर “वोट बचाओ–देश बचाओ” अभियान को बूथ और गांव के स्तर तक मजबूत एवं प्रभावी बनाने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे आपसी समन्वय, अनुशासन और पूरी सक्रियता के साथ अभियान में जुटें तथा हर पात्र मतदाता के मताधिकार की रक्षा को अपना संगठनात्मक दायित्व समझकर कार्य करें।

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