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सिंहदेव बोले- मंदिरों से हटाया जाए RSS का कब्जा:कहा-सुप्रीम कोर्ट एक्शन ले, जमीन घोटाले से लेकर अब तक जांच की मांग की

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सरगुजा, एजेंसी। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चंदे में कथित गड़बड़ी देश की आस्थावान जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि राम मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों की प्रबंधन समितियों से आरएसएस से जुड़े लोगों को तत्काल हटाया जाए।

सिंहदेव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले का स्वतः संज्ञान ले, क्योंकि प्रबंधन समिति का गठन अदालत के आदेश से हुआ था। उन्होंने जमीन खरीद से लेकर चंदे में कथित अनियमितताओं तक की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की।

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए टीएस सिंहदेव ने कहा कि पिछले तीन-चार दशकों से राम मंदिर को लेकर एक विशेष राजनीतिक अभियान चलाया गया। उस समय संसद में भाजपा की केवल दो सीटें थीं।

बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत के फैसले में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की अनुमति देते हुए एक स्वतंत्र प्रबंधन समिति गठित करने का निर्देश दिया गया, ताकि मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन का कार्य निष्पक्ष रूप से किया जा सके।

पूर्व डिप्टी सीएम बोले- संत, पुजारियों को बाहर कर RSS ने कब्जा किया

टीएस सिंहदेव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए एक स्वतंत्र प्रबंधन समिति बनाई गई। उनका आरोप है कि पहले रामलला की सेवा और देखरेख करने वाले संतों और पुजारियों को समिति में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई, जबकि प्रबंधन में आरएसएस से जुड़े लोगों को शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि आरएसएस कोई संवैधानिक संस्था नहीं, बल्कि व्यक्तियों का एक समूह है।

सिंहदेव ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से चंदा जुटाया गया, लेकिन चंदे की कुल राशि को लेकर भाजपा और आरएसएस से जवाब मांगे जाने पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर परिसर के विस्तार और जमीन खरीद में कथित करोड़ों रुपए के घोटाले का मुद्दा उठाया था, जिसे राजनीतिक बताकर खारिज कर दिया गया। राम मंदिर निर्माण के नाम पर जुटाए गए चंदे में गड़बड़ी हुई।

आस्था के साथ खिलवाड़ का आरोप

टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि देश के शंकराचार्यों ने मंदिर का शिखर और निर्माण कार्य पूरा नहीं होने का हवाला देते हुए उस समय प्राण प्रतिष्ठा नहीं करने की बात कही थी, लेकिन चुनावी लाभ के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया।

सिंहदेव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में गड़बड़ी कर लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया। उन्होंने दावा किया कि 40 दिनों में 70 बार वित्तीय अनियमितताएं हुईं और लाखों रुपये की हेराफेरी सामने आई।

उनके अनुसार, प्रबंधन समिति से जुड़े चंपत राय सहित कुछ पदाधिकारियों ने जवाबदेही स्वीकार करते हुए इस्तीफा दिया, लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

राम मंदिर ट्रस्ट की जांच और प्रबंधन में बदलाव की मांग

टीएस सिंहदेव ने कहा कि राम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। उनका आरोप है कि राम मंदिर सहित कई प्रमुख मंदिरों की प्रबंधन समितियों में आरएसएस से जुड़े लोगों का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन से जुड़े व्यक्ति को ऐसे धार्मिक न्यासों की प्रबंधन समिति का सदस्य नहीं होना चाहिए।

सिंहदेव ने कहा कि यदि उनकी व्यक्तिगत छवि भी अच्छी मानी जाती है, तब भी उन्हें ऐसी समिति में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, प्रबंधन समिति में चारों शंकराचार्यों के प्रतिनिधियों और बेदाग छवि वाले प्रतिष्ठित लोगों को स्थान मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक जन आंदोलन होना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति को धार्मिक न्यासों की प्रबंधन समिति में जगह नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस पूरी तरह राजनीतिक संगठन की तरह कार्य कर रही है।

सिंहदेव ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले का स्वतः संज्ञान लेकर राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए चंदे और कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराए। उन्होंने कहा कि चूंकि प्रबंधन समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी थी, इसलिए जांच की जिम्मेदारी भी सुप्रीम कोर्ट को उठानी चाहिए।

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सक्ती में खुलेगा कृषि विज्ञान केंद्र:छत्तीसगढ़ के लिए 3.65 लाख नए पीएम आवास मंजूर, 2 लाख परिवारों का एकसाथ गृह प्रवेश

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सक्ती। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण आवास योजना को बड़ा विस्तार मिला है। केंद्र सरकार ने प्रदेश के लिए ‘प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण’ (पीएमएवाय-जी) के तहत 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की मंजूरी दी है। सक्ती जिले में आयोजित ‘प्रधानमंत्री आवास गृह प्रवेश’ और ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह घोषणा की और स्वीकृति पत्र मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को सौंपा।

इस अवसर पर प्रदेश भर में नवनिर्मित 2 लाख आवासों में हितग्राहियों का एक साथ गृह प्रवेश कराया गया और उन्हें चाबियां सौंपी गईं। चौहान ने सक्ती जिले में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने तथा बस्तर संभाग में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के सर्वे की समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाने की घोषणा भी की।

चौहान ने कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक पीएम आवास बनकर तैयार हो रहेहैं। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में आवास के साथ सड़क, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है।

गरीब का पक्का घर सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे: शर्मा

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है। गांवों में शिक्षा, स्वच्छता और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत बनाने की दिशा में भी तेजी से कार्य हो रहा है।

कका और कांग्रेस ने राज्य को तबाह किया: चौहान

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस और ‘कक्का’(कका) ने मिलकर छत्तीसगढ़ को तबाह कर दिया। उन्होंने सक्ती जिले में शामिल होने से पहले रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा के दौरान यह बात कही।

चौहान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के आवास के लिए भेजी गई राशि को कांग्रेस सरकार ने दबाकर रखा और प्रदेश के जरूरतमंदों को पक्के मकानों से वंचित किया। उन्होंने याद दिलाया कि गरीबों के हक के लिए भाजपा ने ‘मोर आवास मोर अधिकार’ आंदोलन चलाया था, जिसमें कार्यकर्ताओं ने लाठियां तक खाईं।

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CGPSC केस, भूपेश के OSD रहे एडिशनल कलेक्टर गिरफ्तार:दावा- उत्कर्ष चंद्राकर के साथ वॉट्सऐप चैट मिली, ED को 6 दिन की रिमांड

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने चेतन बोरघारिया को 6 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया है।

ED ने कोर्ट में CGPSC घोटाले के आरोपी उत्कर्ष चंद्राकर के साथ चेतन बोरघारिया की वॉट्सऐप चैट मिलने की जानकारी दी। इसी आधार पर कोर्ट ने पूछताछ के लिए ED को उनकी 6 दिन की रिमांड दी है। अब ED उनसे CGPSC गड़बड़ी मामले में पूछताछ करेगी। चेतन बोरघरिया पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD के रूप में काम कर चुके हैं।

बता दें कि 6 दिन पहले ED ने घोटाले में आरोपी कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को कोर्ट में पेश किया था। ED ने आरोपी उत्कर्ष की रिमांड बढ़ाने के लिए आवेदन नहीं दिया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी उत्कर्ष को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

ED ने बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया।

ED ने बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया को गिरफ्तार किया।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 10 दिन पहले ही धमतरी और बलरामपुर में कार्रवाई की थी। धमतरी में एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघरिया के अमलतास पुरम स्थित घर पर टीम ने छापा मारा गया, जबकि बलरामपुर में भी उनसे पूछताछ की गई थी।

इधर, CGPSC घोटाले की जांच में कैंडिडेट्स को परीक्षा के पेपर उपलब्ध कराने के नाम पर लाखों रुपए लेने की बात सामने आई है। ED के वकील सौरभ पांडेय के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार उत्कर्ष चंद्राकर की भूमिका अभ्यर्थियों तक प्रीलिम्स और मेन्स के पेपर पहुंचाने से जुड़ी थी।

10 दिन पहले ईडी ने एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया के ठिकानों पर रेड मारी थी।

10 दिन पहले ईडी ने एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघारिया के ठिकानों पर रेड मारी थी।

नौकरी दिलाने का दावा, 3 करोड़ से ज्यादा वसूली

जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का कथित नेटवर्क तैयार किया था।

अभ्यर्थियों को परीक्षा के अलग-अलग चरणों में मदद और प्री परीक्षा से इंटरव्यू तक सफलता की गारंटी देने का दावा किए जाने की बात सामने आई है। इसके बदले कैंडिडेट्स से 3 करोड़ रुपए से अधिक रकम वसूले जाने का दावा किया गया है।

ED ने इससे पहले कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को अरेस्ट किया गया था।

ED ने इससे पहले कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर को अरेस्ट किया गया था।

पूर्व CM के PA और OSD के नाम का इस्तेमाल

जांच एजेंसी का दावा है कि, उत्कर्ष चंद्राकर ने कैंडिडेट्स से पैसे जुटाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री के निजी सहायक (PA) और अपने मामा के.के. चंद्रवंशी के नाम, पद और प्रभाव का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में पदस्थ रहे OSD के नाम और प्रभाव का भी इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को प्रभावित करने की बात सामने आई है।

जानिए क्या है CGPSC घोटाला

यह मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता को दरकिनार कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया।

इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का खेल हुआ। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं।

इस घोटाले में सीबीआई ने तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, चार चयनित अभ्यर्थियों और एक निजी व्यक्ति को पहले ही गिरफ्तार किया था। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी इस मामले की जांच में जुटी है।

एजेंसी ने कथित कैश सिंडिकेट की पड़ताल के लिए करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया था। इनमें विवादित अभ्यर्थियों के साथ एनजीओ, एक बड़ी कंपनी और रिसार्ट संचालकों से जुड़े लोग भी शामिल हैं। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से वसूली गई रकम कहां से आई और किन लोगों तक पहुंचाई गई।

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छत्तीसगढ़ कांग्रेस के 3 नेताओं को दिल्ली बुलाया गया:राष्ट्रीय सचिव की रेस में कोको पाढ़ी, नरेश ठाकुर और दीपक मिश्रा, तीनों का हुआ इंटरव्यू

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के 3 नेता कोको पाढ़ी, नरेश ठाकुर और दीपक मिश्रा को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में राष्ट्रीय सचिव पद के चयन की प्रक्रिया के तहत दिल्ली बुलाया गया है। तीनों नेताओं के इंटरव्यू राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से लिए जा रहे हैं।

दिल्ली बुलाए जाने के बाद अब नजर इस बात पर है कि इनमें से किसे राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी मिलती है। हालांकि अभी किसी नेता की नियुक्ति तय नहीं हुई है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।

राहुल-प्रियंका समेत राष्ट्रीय नेतृत्व ले रहा इंटरव्यू

जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय सचिवों के चयन की प्रक्रिया में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की भूमिका है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समेत राष्ट्रीय नेतृत्व इस प्रक्रिया से जुड़ा है।

छत्तीसगढ़ से 3 नेताओं को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे प्रदेश के नेताओं की राष्ट्रीय संगठन में भूमिका बढ़ने की संभावना बनी है।

कोको पाढ़ी, नरेश ठाकुर और दीपक मिश्रा को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में राष्ट्रीय सचिव पद के चयन की प्रक्रिया के तहत दिल्ली बुलाया गया है।

कोको पाढ़ी, नरेश ठाकुर और दीपक मिश्रा को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में राष्ट्रीय सचिव पद के चयन की प्रक्रिया के तहत दिल्ली बुलाया गया है।

चयन हुआ तो प्रदेश से राष्ट्रीय संगठन में बढ़ेगी हिस्सेदारी

तीनों नेताओं के पास युवा कांग्रेस, प्रदेश कांग्रेस और राष्ट्रीय संगठन में काम करने का अनुभव है। ऐसे में राष्ट्रीय सचिव के लिए इंटरव्यू तक पहुंचना ही प्रदेश कांग्रेस के भीतर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

अगर इनमें से किसी नेता का चयन होता है तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस को राष्ट्रीय संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने के साथ प्रदेश के युवा नेताओं की राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका भी बढ़ सकती है। फिलहाल सभी की नजर दिल्ली में चल रही चयन प्रक्रिया और उसके नतीजे पर है।

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