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Accenture ने बदला सैलरी इंक्रीमेंट का नियम, कर्मचारियों को ऐसे मिलेगा फायदा
मुंबई, एजेंसी। वैश्विक आईटी सर्विस कंपनी Accenture ने मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए अपने सैलरी इंक्रीमेंट सिस्टम में बदलाव किया है। नए नियम के तहत कर्मचारियों को मिलने वाली वेतन वृद्धि का केवल 50% हिस्सा उनकी बेसिक सैलरी में जोड़ा जाएगा, जबकि बाकी 50% राशि एकमुश्त (Lump Sum) भुगतान के रूप में दी जाएगी।
जून 2026 के सैलरी रिवीजन से लागू हुआ नया सिस्टम
कंपनी के एक डॉक्यूमेंट के अनुसार, इस साल जून के मेन सैलरी रिवीजन साइकल में ये नया सिस्टम लागू किया गया है। इसके तहत, टैलेंट और ग्रुप लीड पात्र कर्मचारियों के लिए कुल सैलरी इंक्रीमेंट का प्रतिशत तय करेंगे, जिसे बाद में दो बराबर-बराबर हिस्सों में बांटा जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी को 10 प्रतिशत का सैलरी इंक्रीमेंट मिलता है, तो 5 प्रतिशत उसके बेसिक सैलरी में जोड़ा जाएगा और बाकी का 5 प्रतिशत उसे एकमुश्त भुगतान के रूप में सैलरी के साथ ही दे दिया जाएगा।
कंपनी ने बताया बदलाव का उद्देश्य
Accenture का कहना है कि इस मॉडल से कर्मचारियों को तुरंत अतिरिक्त नकद राशि (Immediate Cash Benefit) मिलेगी, जिसे कई कर्मचारी प्राथमिकता देते हैं। साथ ही, बेसिक वेतन पर दीर्घकालिक वित्तीय भार सीमित रहने से कंपनी अधिक कर्मचारियों को वेतन वृद्धि का लाभ दे सकेगी।
प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों पर नहीं होगा लागू
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह 50:50 मॉडल प्रमोशन पाने वाले कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा। ऐसे कर्मचारियों की पूरी वेतन वृद्धि पहले की तरह उनकी बेसिक सैलरी में ही जोड़ी जाएगी।
बोनस पर नहीं पड़ेगा असर
Accenture ने यह भी साफ किया है कि जून में मिलने वाला एकमुश्त भुगतान दिसंबर में दिए जाने वाले वार्षिक बोनस का विकल्प नहीं होगा। बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी और एकमुश्त भुगतान- दोनों को वित्त वर्ष 2025-26 की पात्र आय (Eligible Earnings) का हिस्सा माना जाएगा और इन्हीं के आधार पर बोनस की गणना की जाएगी।
इसके अलावा, Voluntary Equity Investment Program (VEIP) और Employee Share Purchase Plan (ESPP) से जुड़े कर्मचारियों के लिए एकमुश्त भुगतान पर भी सामान्य नियमों के अनुसार आवश्यक कटौतियां लागू होंगी।
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जून तिमाही में रियल एस्टेट क्षेत्र में सौदे तिगुना होकर 2.3 अरब डॉलर परः रिपोर्ट
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान 2.3 अरब डॉलर के 39 सौदे हुए, जो पिछली तिमाही की तुलना में लगभग तीन गुना है। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। सलाहकार फर्म ग्रांट थॉर्नटन भारत की रियल एस्टेट क्षेत्र से संबंधित तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक, जून तिमाही में कुल 39 सौदों में निजी इक्विटी (पीई) का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिसने कुल सौदा मूल्य का लगभग आधा हिस्सा दिया। सार्वजनिक बाजार गतिविधियां भी मजबूत रहीं। रिपोर्ट के मुताबिक, विलय एवं अधिग्रहण (एमएंडए) खंड में अप्रैल-जून के दौरान 36.7 करोड़ डॉलर के 22 सौदे हुए, जो पिछले साल की समान अवधि के 33.5 करोड़ डॉलर से 10 प्रतिशत अधिक हैं।
वहीं, पीई एवं उद्यम पूंजी (वीसी) क्षेत्र में 13 सौदे 115.7 करोड़ डॉलर के रहे, जो एक साल पहले की समान अवधि के 45.8 करोड़ डॉलर से काफी अधिक है। इसके अलावा, जून तिमाही में दो आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) और दो पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) के जरिये कुल 78.2 करोड़ डॉलर जुटाए गए, जिसमें आईपीओ से 38.1 करोड़ डॉलर और क्यूआईपी से 40.1 करोड़ डॉलर शामिल हैं।
बैगमाने प्राइम ऑफिस रीट ने 35.5 करोड़ डॉलर के निर्गम के साथ आईपीओ गतिविधियों का नेतृत्व किया, जबकि ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट और बैगमाने प्राइम ऑफिसेज रीट ने क्यूआईपी के जरिये धन जुटाने में प्रमुख भूमिका निभाई। इस तिमाही का सबसे बड़ा सौदा माइंडस्पेस बिजनेस पार्क्स रीट और 360 वन अल्टरनेट्स एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड द्वारा रेडियल आईटी पार्क लिमिटेड में संयुक्त रूप से 32.3 करोड़ डॉलर का निवेश रहा। ग्रांट थॉर्नटन भारत में साझेदार भाविक वोरा ने कहा, ”ये आंकड़े भारत के वाणिज्यिक रियल एस्टेट क्षेत्र में संस्थागत निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाते हैं। उच्च गुणवत्ता वाली आय-सृजन करने वाली परिसंपत्तियों की ओर पूंजी का प्रवाह तेज हुआ है, जिससे पीई निवेश और पूंजी बाजार गतिविधियों में तेजी आई है।”
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उच्चतम न्यायालय वीडियोकॉन समूह की दो कंपनियों की अलग दिवाला कार्यवाही पर सुनवाई को तैयार
नई दिल्ली, एजेंसी। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को वीडियोकॉन समूह के संस्थापक वेणुगोपाल धूत की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई, जिसमें समूह की दो कंपनियों वीआईएल और वीओवीएल के लिए अलग-अलग दिवाला कार्यवाही को बरकरार रखने के एनसीएलएटी के आदेश को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने धूत की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को तय की।
धूत ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के 14 मई के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पहले के आदेश को निरस्त कर दिया था। एनसीएलटी ने दोनों कंपनियों की दिवाला कार्यवाहियों को एक साथ चलाने का निर्देश दिया था। यह आदेश वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वीआईएल) और वीडियोकॉन ऑयल वेंचर्स लिमिटेड (वीओआईएल) से जुड़ा था।
एनसीएलएटी ने कहा था कि इन दोनों कंपनियों के ऋणदाताओं की मंशा अलग-अलग समाधान प्रक्रिया चलाने की है, क्योंकि उनके कारोबार की प्रकृति अलग है। वीआईएल जहां उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में है वहीं वीओवीएल तेल एवं गैस कारोबार से जुड़ी है। ऐसे में एक ही इकाई द्वारा दोनों का प्रभावी पुनर्गठन व्यावहारिक नहीं है। बीपीसीएल की अनुषंगी भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड (बीपीआरएल) ने ‘पहले खरीद के अधिकार’ का इस्तेमाल करते हुए वीओवीएल का अधिग्रहण किया और जून, 2024 में इसे एनसीएलटी की मंजूरी भी मिल गई। वहीं, वीआईएल की दिवाला प्रक्रिया अभी लंबित है।
एनसीएलएटी ने यह भी कहा था कि ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) के व्यावसायिक निर्णय में न्यायाधिकरण को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। साथ ही, दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का उद्देश्य परिसंपत्तियों के समाधान के साथ कंपनी को चालू स्थिति में बनाए रखना भी है। यह मामला 2012 से जुड़ा है, जब वीडियोकॉन समूह की दोनों कंपनियों ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से संयुक्त रूप से कर्ज लिया था। बाद में 2016-17 में वीआईएल को सह-ऋणी से हटाकर कॉरपोरेट गारंटर बनाया गया था, ताकि विदेशी तेल-गैस परिसंपत्तियों को घरेलू कारोबार की समस्याओं से अलग रखा जा सके।
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12 अरब डॉलर का सोना बेचने की खबरों पर सरकार का जवाब, 880.52 टन का गोल्ड रिजर्व बरकरार
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा के लिए किसी भी प्रकार का सोना नहीं बेचा है। लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने उन खबरों को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच आरबीआई ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है।
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि यह दावा पूरी तरह गलत है। आरबीआई पहले ही 3 जून 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट कर चुका है कि सोने की बिक्री संबंधी खबरें भ्रामक और तथ्यहीन हैं। केंद्रीय बैंक ने मीडिया के एक वर्ग में प्रकाशित और प्रसारित रिपोर्टों का भी खंडन किया था।
सरकार के अनुसार, 29 मई 2026 तक आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल सोने का भौतिक भंडार 880.52 टन पर यथावत बना हुआ है। इसमें किसी प्रकार की कमी या बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचने के दावों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।
इस बीच, संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। पहले ही दिन विभिन्न मुद्दों को लेकर दोनों सदनों में हंगामा देखने को मिला, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
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