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बाजार में जल्द ही नजर आएंगे रू.10 और रू.20 के प्लास्टिक नोट, जानें- कागज़ी नोटों का क्या होगा?

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय बाजार में जल्द ही आप प्लास्टिक यानि पॉलीमर करेंसी नोट इस्तेमाल कर सकते हैं। हाल ही में सरकार ने सोमवार को संसद को बताया कि उसने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) को फ़ील्ड ट्रायल के लिए 2 अरब पॉलीमर बैंकनोट का शुरुआती बैच छापने की मंज़ूरी दे दी है। RBI ने हाल ही में पॉलीमर बैंकनोट के लिए मटीरियल खरीदने के लिए टेंडर जारी किया है, जिससे लगभग दो दशकों से विचाराधीन प्रस्ताव को फिर से शुरू किया गया है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा को बताया कि RBI 10 रुपये के एक अरब नोट और 20 रुपये के एक अरब नोट छापेगा। इन मूल्यवर्ग के नोटों की अक्सर कमी रहती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कागज़ी मुद्रा को पूरी तरह से पॉलीमर बैंकनोट से बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है, और दोनों तरह की मुद्राएँ एक साथ चलन में रहेंगी। अगर इसे लागू किया जाता है, तो यह भारत में पॉलीमर बैंकनोट का पहला इस्तेमाल होगा, जहाँ लगभग एक सदी से विशेष कागज़ पर मुद्रा छापी जा रही है।

RBI के प्लास्टिक नोट: क्यों है ज़रूरी?
पॉलीमर नोट, जो कागज़ के बजाय टिकाऊ प्लास्टिक फ़िल्म का उपयोग करके बनाए जाते हैं, आम तौर पर ज़्यादा समय तक चलते हैं और उन्हें कम बार बदलने की ज़रूरत होती है क्योंकि वे टूट-फूट के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। पॉलीमर बैंकनोट भारतीय मुद्रा के लिए वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले विशेष कागज़ के बजाय एक गैर-रेशेदार, गैर-छिद्रपूर्ण प्लास्टिक सब्सट्रेट पर छापे जाते हैं।

नए नोटों का इस्तेमाल पहले फ़ील्ड ट्रायल के लिए किया जाएगा, उसके बाद ही उन्हें नियमित चलन में लाया जाएगा। इस योजना को देश के मुद्रा छपाई बुनियादी ढाँचे के विस्तार के साथ मंज़ूरी दी गई थी, जो क्षमता की सीमाओं का सामना कर रहा था। चौधरी ने संसद को बताया, “RBI ने सूचित किया है कि अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, पॉलीमर बैंकनोट का जीवनकाल कागज़ी बैंकनोट की तुलना में काफी अधिक है। पॉलीमर बैंकनोट की शुरुआत अभी शुरुआती चरण में है।”

अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इसे लागू करने में कई महीने लग सकते हैं, क्योंकि सरकार और RBI दोनों यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सुरक्षा मानकों को पूरी तरह से पूरा किया जाए और उपयोग किए जाने वाले मटीरियल का चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को की जाने वाली आपूर्ति से कोई संबंध न हो।

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब RBI का करेंसी छापने का खर्च कम हो गया है। सेंट्रल बैंक की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में नोट छापने का खर्च पिछले साल की तुलना में लगभग एक-चौथाई घटकर 4,875 करोड़ रुपये रह गया, जिसका मुख्य कारण कम नोटों की छपाई थी।

प्रिंटिंग की लागत में यह कमी तब आई है जब मार्च 2026 के आखिर में चलन में मौजूद करेंसी की कुल वैल्यू 12% बढ़कर 41.23 लाख करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 36.86 लाख करोड़ रुपये थी। इससे पता चलता है कि कैश की मांग लगातार बनी हुई है।

ये देश करते है प्लास्टिक नोटों का इस्तेमाल 
दुनिया की पांच सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद, भारत अभी भी पॉलीमर करेंसी लाने पर विचार कर रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने लगभग तीन दशक पहले ही प्लास्टिक के नोटों की पूरी सीरीज़ जारी कर दी थी। आज, लगभग 60 देश किसी न किसी रूप में पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल करते हैं। सरकार का हालिया फ़ैसला 2012 में घोषित एक प्रस्ताव को फिर से शुरू करता है। 13 दिसंबर, 2012 को प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की एक विज्ञप्ति में कहा गया था कि RBI ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर कई विकल्पों पर विचार किया था, जिसमें नोट छापने के लिए पॉलीमर सब्सट्रेट का इस्तेमाल भी शामिल था। उस समय, पांच शहरों में पायलट आधार पर 10 रुपये के एक अरब पॉलीमर नोट लाने का फ़ैसला किया गया था।

ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा समेत कई देशों ने मज़बूत प्लास्टिक फ़िल्म से बने पॉलीमर नोट अपना लिए हैं। आम कागज़ी नोटों की तुलना में, पॉलीमर करेंसी ज़्यादा समय तक चलती है, टूट-फूट को बेहतर ढंग से झेलती है और समय के साथ बदलने की लागत को कम करने में मदद करती है। ऑस्ट्रेलिया 1988 में पॉलीमर नोट लाने वाला पहला देश बना। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में, UK, कनाडा और न्यूज़ीलैंड ने पॉलीमर नोट अपनाए हैं। एशिया में, थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देश भी पॉलीमर नोटों का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि ज़रूरी नहीं कि सभी मूल्यवर्ग (डिनोमिनेशन) के लिए ऐसा हो। बैंक ऑफ़ कनाडा ने कागज़ी और प्लास्टिक नोटों के उत्पादन के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने के बाद 2011 में पॉलीमर करेंसी की ओर बढ़ना शुरू किया।

RBI के टेंडर नियम
भारतीय रिज़र्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने योग्य निर्माताओं से 18 अगस्त तक बोलियां जमा करने को कहा है। इस टेंडर का मकसद ऐसे सप्लायर की पहचान करना है जो नोटों के लिए ज़रूरी सुरक्षा सुविधाओं वाली ओपेसिफ़ाइड पॉलीमर सब्सट्रेट शीट बना सकें।

टेंडर में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सख़्त सुरक्षा उपाय शामिल हैं। संभावित सप्लायर्स को सरकार से सिक्योरिटी क्लीयरेंस लेना होगा, चीन या पाकिस्तान में चल रहे अपने किसी भी काम को भारत के कॉन्ट्रैक्ट से अलग रखना होगा, यह पक्का करना होगा कि भारत के लिए पॉलीमर बैंकनोट सब्सट्रेट बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल इन देशों से न आए, और यह वादा करना होगा कि भारत के लिए खास तौर पर बनाया गया सब्सट्रेट किसी तीसरे देश को सप्लाई नहीं किया जाएगा। इसके लिए योग्य होने के लिए, बोली लगाने वालों ने पिछले कम से कम तीन सालों में सेंट्रल बैंकों या बैंकनोट छापने वाली संस्थाओं को सिक्योरिटी फीचर्स वाले पॉलीमर बैंकनोट सब्सट्रेट की सप्लाई की हो।

सप्लायर्स को यह भी साबित करना होगा कि वे कम से कम 20,400 रीम सप्लाई कर सकते हैं, जो अनुमानित ज़रूरत का 30% है। BRBNMPL ने शुरुआती ज़रूरत 68,000 रीम बताई है, जो दो अलग-अलग मूल्यवर्ग (डिनॉमिनेशन) के लिए लगभग 34,000 रीम है। लेकिन, उन्होंने साफ़ किया कि यह ज़रूरत सिर्फ़ पहले चरण के लिए है, और सफल फ़ील्ड ट्रायल के बाद बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है।

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शुभेंदु अधिकारी के PA की मां नंदीग्राम से उम्मीदवार:बंगाल चुनाव नतीजे के 2 दिन बाद चंद्रनाथ रथ की हत्या हुई थी, CM ने ये सीट छोड़ी

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कोलकाता, एजेंसी। भाजपा ने पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने नंदीग्राम से हसीरानी रथ और रेजीनगर से शाश्वर सरकार को टिकट दिया है।

हसीरानी रथ CM शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की मां हैं। 6 मई की देर रात मध्यमग्राम के पास चंद्रनाथ को गोली मार दी गई थी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई।

इस साल अप्रैल-मई में हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 207 सीटें जीती थीं। तृणमूल कांग्रेस को 80 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थीं। इन नतीजों के बाद ममता बनर्जी 15 साल बाद सत्ता से बाहर हो गईं।

नंदीग्राम में TMC के दो गुट भी आमने-सामने

उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट भी आमने-सामने हैं। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउज्जमान शेख को मैदान में उतारा है। वहीं ममता वाले गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है।

दोनों गुट खुद को असली TMC बताते हुए ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से अतिरिक्त दस्तावेज मांगे हैं और 16 सितंबर तक जवाब देने को कहा है। अगर उपचुनाव से पहले आयोग इस विवाद पर फैसला नहीं कर पाता है, तो मौजूदा चुनाव चिह्न फ्रीज किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में दोनों गुटों को अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना पड़ सकता है।

कांग्रेस ने नंदीग्राम से मिलन प्रधान और रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी को उम्मीदवार बनाया है। CPI(M) ने रेजीनगर से अधिवक्ता सैयद असद अली को और CPI ने नंदीग्राम से शांति गोपाल गिरी को टिकट दिया है।

नंदीग्राम से शुभेंदु ने ममता को हराया, लगातार दो बार से भाजपा जीत रही

नंदीग्राम लंबे समय से TMC और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

2021 में ममता बनर्जी ने यहीं से बंगाल के मौजूदा सीएम शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की।

बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नंदीग्राम सीट खाली हुई।

बंगाल सहित 4 राज्यों की 6 सीटों पर उपचुनाव

तमिलनाडु में 2 सीट: मदुरांतकम और धारापुरम- ये दोनों विधानसभा सीटें मरागथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा के इस्तीफे के बाद खाली हुई थीं। दोनों सीटों की फाइनल वोटर लिस्ट 23 फरवरी को जारी की गई।

पुडुचेरी की थट्टानचावड़ी सीट: यह सीट एन. रंगासामी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। सीट की मतदाता सूची 14 फरवरी को पब्लिश हुई।

पश्चिम बंगाल की रेजीनगर-नंदीग्राम सीट: रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर और नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई। इन सीटों की अंतिम वोटर लिस्ट 28 फरवरी को जारी की गई।

असम की नगांव लोकसभा सीट: असम की नागांव लोकसभा प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। इस सीट की अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को जारी की गई थी।

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केदारनाथ यात्रा फिर शुरू, बिना हेलमेट एंट्री नहीं:यूपी-राजस्थान समेत 5 राज्यों में बारिश का अलर्ट, बिहार में 5 नदियां खतरे के निशान के ऊपर

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नई दिल्ली, एजेंसी। केदारनाथ यात्रा फिर से शुरू हो गई है। चीरवासा के पास क्षतिग्रस्त रास्ते से अब 200-200 यात्रियों को सुरक्षित आगे भेजा जा रहा है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए बिना हेलमेट किसी को भी आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। चीरवासा में करीब 100 मीटर का क्षेत्र डेंजर जोन में आता है। यहां कभी भी लैंडस्लाइड होने का खतरा बना हुआ है।

वहीं, बिहार में 15 जिलों में 49.67 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। राज्य की 5 नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। मौसम विभाग ने आज प्रदेश के 22 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग ने यूपी के 72 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। राजस्थान में 17 सितंबर तक बारिश का अलर्ट जारी किया है। हिमाचल प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में हल्की बारिश हो सकती है। हरियाणा के 8 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट है। पंजाब के 18 जिलों में आज बारिश की संभावना है।

सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

नैनीताल के पाटकोट में उफनते नाले में कार बहने लगी। ड्राइवर ने मुस्तैदी से सुरक्षित निकाली।

नैनीताल के पाटकोट में उफनते नाले में कार बहने लगी। ड्राइवर ने मुस्तैदी से सुरक्षित निकाली।

बिहार के दरभंगा में सोमवार शाम 11 हजार वोल्ट के बिजली तार पर बिजली गिरने से तार टूट गया।

बिहार के दरभंगा में सोमवार शाम 11 हजार वोल्ट के बिजली तार पर बिजली गिरने से तार टूट गया।

बिहार के खगड़िया में सोमवार को दो भाइयों की डूबने से मौत हो गई।

बिहार के खगड़िया में सोमवार को दो भाइयों की डूबने से मौत हो गई।

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर रास्ते में जगह-जगह घोड़े-खच्चरों के शव पड़े हुए हैं।

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर रास्ते में जगह-जगह घोड़े-खच्चरों के शव पड़े हुए हैं।

सिक्किम में लैंडस्लाइड के बाद 128 लोगों को सुरक्षित जगह भेजा गया

सिक्किम के ग्यालशिंग जिले के रिंबी इलाके में भारी बारिश और लैंडस्लाइड के बाद 28 घरों के 128 लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया है। सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) के मुताबिक, 14 सितंबर को भारी बारिश और बाढ़ के बाद इलाके का दोबारा जायजा लिया गया।

इसके बाद लोगों को रिंबी ग्राम पंचायत केंद्र में शिफ्ट किया गया। सिंगलिटाम में सात प्रभावित परिवारों के लिए राहत केंद्र बनाया गया है। यहां 33 से ज्यादा लोग रह रहे हैं, जिनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं।

हिमाचल: 3 दिन होगी बारिश, 18 से कमजोर पड़ेगा मानसून

हिमाचल प्रदेश में अगले तीन दिन मानसून सक्रिय रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के ज्यादातर हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। राहत की बात यह है कि किसी भी जिले में भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। बारिश के चलते अगले 72 घंटे में प्रदेश के अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट आ सकती है।

पंजाब: 18 जिलों में बारिश के आसार

पंजाब के 18 जिलों में आज बारिश की संभावना है। चंडीगढ़ में आसमान बादलों से घिरा रहेगा। बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के अधिकतम तापमान में 1.3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। अब यह सामान्य के करीब बना हुआ है। राज्य में सबसे अधिक तापमान 36 डिग्री बठिंडा में दर्ज किया गया।

यूपी: अगले 3 दिन हल्के बारिश का अलर्ट

यूपी में मानसून अभी एक्टिव मोड में है। मंगलवार को प्रदेश के 72 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, मानसूनी बारिश से नदियां उफान पर हैं। 26 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं और 4 लाख की आबादी प्रभावित है। फर्रुखाबाद में गंगा-रामगंगा की बाढ़ से 111 गांव चपेट में हैं। कई गांव टापू बन गए हैं। सड़कों पर नाव चल रही है।

मध्य प्रदेश: राज्य में 88% बारिश, 37 जिलों में कोटा फुल नहीं

मानसूनी सीजन को अब 15 दिन बाकी बचे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में 88% बारिश ही हुई है। इंदौर, उज्जैन-जबलपुर समेत 37 जिलों में कोटा फुल नहीं हुआ है। भोपाल, ग्वालियर सहित 18 जिले ही आगे निकले हैं। आलीराजपुर में तो कोटे की आधी बारिश भी नहीं हुई, जबकि निवाड़ी में 49% पानी ज्यादा गिर चुका है।

बिहार: 15 जिले बाढ़ से घिरे, 49.67 लाख लोग प्रभावित

बिहार में बाढ़ की स्थिति अब भी बनी हुई है। 15 जिलों के 575 पंचायतों में करीब 49.67 लाख की आबादी अभी भी बाढ़ के पानी से घिरी हुई है। राज्य की 5 नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं।

उत्तराखंड: केदारनाथ यात्रा पर तीसरे दिन भी ब्रेक, 500 यात्री फंसे

उत्तराखंड में केदारनाथ पैदल मार्ग पर चीरबासा के पास पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण यात्रा तीसरे दिन भी बंद है। सुरक्षा बलों के जवानों ने करीब 7 हजार यात्रियों को सुरक्षित निकालकर गौरीकुंड की ओर भेजा। अभी केदारनाथ यात्रा मार्ग पर 500 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं और रास्ते में जगह-जगह घोड़े-खच्चरों के शव पड़े हुए दिख रहे हैं।

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CJI बोले- राजपाल यादव एक्टिंग में माहिर, भरोसा करना मुश्किल:चेक बाउंस मामले में आखिरी मौका दिया, कहा-दो हफ्ते में रु.2 करोड़ जमा करें

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मुंबई, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में 2 करोड़ रुपए जमा करने के लिए आखिरी बार 2 हफ्ते का समय दिया है। यह रकम सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करनी होगी। यह मामला वित्तीय विवाद से जुड़ा है।

कोर्ट ने अभिनेता को अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने उनके पुराने रवैये को देखते हुए भरोसा जताने में भी संदेह जाहिर किया।

CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘उनके पुराने रवैये को देखते हुए। कोई उन पर भरोसा कैसे कर सकता है? वे बॉलीवुड में ड्रामा और एक्टिंग करने में माहिर हैं। कोर्ट में भी वही कर रहे हैं।’

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजपाल यादव को अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से मिली राहत जारी रखी है। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

यह विवाद 2010 का है। राजपाल यादव ने अपनी पहली फिल्म डायरेक्ट करने के लिए दिल्ली की एक कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स से करीब 5 करोड़ रुपए का लोन लिया था।

इस फिल्म का नाम ‘अता पता लापता’ था। कॉमेडी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी।

रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म इतनी कमाई नहीं कर पाई कि उसका खर्च निकल सके। इसके बाद राजपाल यादव को लोन चुकाने में दिक्कत हुई।

ब्याज और दूसरे चार्ज जुड़ने से बकाया रकम कई साल में बढ़ती गई। यह रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपए हो गई।

राजपाल यादव के वकील पीएस पाटवालिया ने मंगलवार को अदालत से कहा कि राजपाल यादव और उनकी मां के पास कुछ प्रॉपर्टी है, जिसे बेचकर वे रुपए इकट्ठा कर लेंगे। दो हफ्ते की मोहलत दे दी जाए। अभी उनके पास पैसे नहीं हैं, पर वे पैसे देना चाहते हैं।

2012 में मुरली प्रोजेक्ट्स ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था

विवाद बढ़ने के बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने 2012 में फिल्म को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फिल्म के अधिकारों में तीसरे पक्ष का हित बनाने से रोक दिया था। इसके बाद सात चेक बाउंस होने पर एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत सात शिकायतें दर्ज की गईं।

यादव की ओर से बाद में हुए 21 अप्रैल 2013 के सहमति समझौते पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत दोनों पक्षों ने 10.40 करोड़ रुपए के पूर्ण और अंतिम समझौते पर सहमति जताई थी, जिसमें 40 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए पहले ही दिए जा चुके थे। समझौते की सुरक्षा के लिए चार नए पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे।

यादव की याचिका के मुताबिक, इस समझौते के तहत पहले जारी किए गए आठ सिक्योरिटी चेक वापस किए जाने थे, लेकिन मुरली प्रोजेक्ट्स ने बाउंस हुए चेक के मामलों को आगे बढ़ाया।

सुप्रीम कोर्ट में यादव ने कहा कि बाद के समझौते के बाद मूल शिकायतें जारी नहीं रह सकतीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘जिम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम मनोज गोयल’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि समझौता होने के बाद पुराने चेक के बाउंस से जुड़ी शिकायत खत्म हो जाती है और नए समझौते के तहत जारी चेक बाउंस होने पर ही नया मामला बन सकता है।

2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल को दोषी ठहराया था

ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में सातों मामलों में यादव और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। शुरुआत में यादव को हर मामले में छह महीने की जेल और 1.60 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

बाद में सजा कम की गई। 22 मई 2019 को उन्हें सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया।

सेशंस कोर्ट ने 2024 में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए तीन महीने की सजा और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए का जुर्माना कायम रखा। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 के फैसले में सजा में दखल देने से इनकार कर दिया।

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