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गुरुग्राम में लेडी बाइकर को टक्कर मारने वाला गिरफ्तार:राजस्थान से पकड़ा गया, पुलिस ने हत्या के प्रयास की धारा भी लगाई

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पलवल/गुरुग्राम, एजेंसी। गुरुग्राम में लेडी बाइकर को कार से टक्कर मारने के मामले में पुलिस ने आरोपी कल्याण बैंसला को गिरफ्तार कर लिया है। उसे एक दोस्त लवनीश के साथ राजस्थान के दौसा से पकड़ा गया है। गुरुग्राम पुलिस ने इसकी पुष्टि की।

पुलिस ने उसके खिलाफ हत्या के प्रयास की धारा BNS 109 भी जोड़ी है। पहले सेक्टर-56 थाने में लापरवाही से गाड़ी चलाने के लिए BNS 281 और चोट पहुंचाने के आरोप में BNS 125 के तहत केस दर्ज किया गया था।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने कार चलाने वाले कल्याण बैंसला के दो दोस्त निंदर और प्रमोद को हिरासत में लिया है। निंदर हादसे वाले दिन 13 सितंबर को कल्याण को पलवल से लेकर आया था, जबकि प्रमोद पर उसे गांव से भगाने का आरोप है।

कार की टक्कर से सड़क पर गिरी लेडी बाइकर शिवानी चौहान उर्फ सिया दिल्ली की रहने वाली हैं। शिवानी ने फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया है। वह साल 2022 में AAP के टिकट पर दिल्ली के कालकाजी से नगर निगम का चुनाव भी लड़ चुकी हैं। शिवानी के पिता रोशन चौहान ने मीडिया को ये बातें बताईं। रोशन भी आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए हैं।

सिया ने सोमवार रात को इंस्टाग्राम पर वीडियो अपलोड कर कहा कि उसकी जान जा सकती थी।

सिया ने सोमवार रात को इंस्टाग्राम पर वीडियो अपलोड कर कहा कि उसकी जान जा सकती थी।

राइडर सिया ने क्या कहा….

कौन किसे पिंच कर रहा था, ये साफ दिख रहा

शिवानी चौहान ने सोमवार देर रात इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर कहा- मेरा रोड एक्सीडेंट वाला वीडियो हर जगह चल रहा है। मुझे टक्कर मारने वाला इंटरव्यू देकर कह रहा है कि हम बार-बार बाइक तेज और स्लो कर रहे थे और उसे पिंच कर रहे थे। यह तो मेरे वीडियो में साफ दिख रहा है कि कौन किसे पिंच कर रहा है। अगर हम ऐसा कर भी रहे थे तो आपका हमारा पीछा करने का क्या मतलब है?

वह कह रहा है कि उसे पता नहीं था कि बाइक लड़की चला रही है। ऐसा बिल्कुल नहीं हो सकता। मेरे बहुत लंबे बाल हैं और चोटी बनी हुई थी। उसने यह देखा, फिर एक्शन किया और बाइक रोकने के लिए कहा। अब यह भी कहा जा रहा है कि हम 22-23 लोग थे।

हिट एंड रन केस में दो वीडियो काफी नहीं?

सिया ने आगे कहा- मुझे समझ नहीं आता कि हिट एंड रन के इस केस में दो वीडियो काफी नहीं हैं? एक वीडियो में साफ दिख रहा है कि वह पहली लेन से सीधे तीसरी लेन में आकर मुझे टक्कर मारता है और भाग जाता है। इसके बाद मैं सड़क पर घिसटती हुई जाती हूं। क्या ये वीडियो काफी नहीं हैं? अगर उसे मेरे लिए इतनी ही चिंता थी तो वह रुका क्यों नहीं? उसकी जिम्मेदारी थी कि टक्कर मारने के बाद रुकता।

हड्डियां टूट सकती थीं, मौके पर जान भी जा सकती थी

उन्होंने कहा- मेरी हड्डियां टूट सकती थीं। मौके पर मेरी जान भी जा सकती थी। टक्कर मारने के बाद अब वह सहानुभूति दिखाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह उस पर बिल्कुल सूट नहीं करता। वह एक सेकेंड के लिए भी यह जानने के लिए नहीं रुका कि जिसे उसने टक्कर मारी है, वह जिंदा है या नहीं।

महिलाएं गुरुग्राम-दिल्ली की सड़क पर सुरक्षित नहीं

सिया ने कहा कि मुझे शर्म आती है ऐसे लोगों पर, जो कह रहे हैं कि बात उनकी फैमिली तक पहुंच रही है। मुझे नहीं लगता कि ऐसे लोग यह सोचते हैं कि उनके घर में भी महिलाएं हैं। ऐसी घटनाओं की वजह से महिलाओं को गुरुग्राम-दिल्ली की सड़कों पर असुरक्षित महसूस होता है। हमें ऐसे लोगों को सिखाना होगा कि सड़क पर गाड़ी कैसे चलानी चाहिए।

कल्याण बैंसला पलवल के टीकरी गुर्जर गांव का रहने वाला है।-फाइल

कल्याण बैंसला पलवल के टीकरी गुर्जर गांव का रहने वाला है।-फाइल

कौन है सिया को टक्कर मारने वाला कल्याण बैंसला…

कबड्डी खेल चुका, किसान परिवार से ताल्लुक

पलवल के टिकरी गुर्जर गांव का रहने वाला 32 वर्षीय कल्याण बैंसला किसान परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता धीरज बैंसला किसान हैं और पहले नंबरदार भी रह चुके हैं। कल्याण शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। परिवार में उसका एक बड़ा भाई मंजीत है, जो पलवल में सप्लीमेंट की दुकान चलाता है।

परिवार के मुताबिक, कल्याण को बचपन से कबड्डी खेलने का शौक था। वह 12वीं कक्षा से कबड्डी खेल रहा है और स्टेट व नेशनल लेवल पर भी खेल चुका है। उसने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की है। वह इंटरनेशनल कबड्‌डी प्लेयर होने का भी दावा करता है। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

2020 में जिम शुरू किया, किराया विवाद में बंद हुआ

कल्याण ने 2020 में पलवल शहर में KBT जिम शुरू किया था और 65 हजार रुपए महीने के किराए पर फ्लोर लिया था। हालांकि, पिछले करीब दो महीने से जिम बंद है। किराया बकाया होने पर बिल्डिंग मालिक ने जिम पर ताला लगा दिया था।

बिल्डिंग मालिक सुनील डागर के मुताबिक, कल्याण के भाई मंजीत ने किराए की कुछ रकम चुका दी है। फिलहाल 2 लाख रुपए बकाया हैं। जिम को 17 सितंबर से दोबारा शुरू करने की तैयारी थी और इसके लिए अंदर रेनोवेशन का काम भी चल रहा था।

कल्याण बैंसला ने साल 2020 में पलवल में KBT नाम से जिम शुरू की थी।

कल्याण बैंसला ने साल 2020 में पलवल में KBT नाम से जिम शुरू की थी।

दो दिन पहले दोस्त की कार लेकर गया था

जिस कार से हादसा हुआ वह असावटा गांव निवासी मनीष की है। मनीष सेना में है। कल्याण और मनीष दोस्त हैं। मनीष के चाचा करतार ने बताया कि कल्याण दो दिन पहले कार मांगकर ले गया था। घटना के बाद पुलिस उनके पास पहुंची और कार के बारे में जानकारी लेकर गई। अभी तक न तो कार वापस मिली है और न ही कल्याण से संपर्क हो पा रहा है। पुलिस अब कल्याण के साथ-साथ कार की भी तलाश कर रही है।

परिवार बोला- युवती ने फॉलोअर्स के लिए मामला उछाला

कल्याण के परिवार के सदस्य नवीन बैंसला ने बताया कि कल्याण अपने भाई-बहनों के साथ दिल्ली रिश्तेदारों के पास गया था। रविवार सुबह वह गुरुग्राम होते हुए पलवल आ रहा था। उसने युवती को कोई अश्लील इशारे नहीं किए। उसने युवती को धीरे चलाने की बात कही थी। यू-टर्न पर कल्याण ने लेफ्ट लिया और युवती ने राइट ले लिया, इस वजह से हादसा हुआ। युवती राइडर है। उसे फॉलोअर्स चाहिए, इसलिए मामले को इतना उछाला जा रहा है। कल्याण सिर्फ सेल्फ डिफेंस में भागा था।

टीकरी गुर्जर गांव में कल्याण बैंसला का घर।

टीकरी गुर्जर गांव में कल्याण बैंसला का घर।

सिया बोली- इशारा किया, फिर ओवरटेक कर टक्कर मारी

सिया ने रविवार को इंस्टाग्राम पर टक्कर का वीडियो शेयर किया। उसने बताया कि वह 13 सितंबर को बाइकिंग ग्रुप के साथ गोल्फ कोर्स रोड पर Aprilia RS 457 से राइड कर रही थी। कार सवार युवक बार-बार बाइक के पास आकर गलत इशारे कर रहे थे और बाइक रोकने को कह रहे थे। युवक नशे में लग रहे थे, इसलिए उसने बाइक नहीं रोकी। कुछ दूरी तक पीछा करने के बाद कार सवारों ने ओवरटेक कर बाइक में साइड से टक्कर मार दी। हादसे के बाद कार सवार रास्ता बदलकर फरार हो गए। घटना बाइक में लगे कैमरे में रिकॉर्ड हुई।

कल्याण बोला- बाइक स्लो करने को कहा, जानबूझकर टक्कर नहीं मारी

कल्याण बैंसला ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कार में उसके अलावा उसकी दीदी, बुआ का बेटा और मौसी का बेटा था। करीब 20-22 बाइक सवार तेज रफ्तार में निकले। हमें पता नहीं था कि बाइक युवती चला रही है। उसने सिर्फ बाइक स्लो चलाने को कहा था।

कल्याण के मुताबिक, यू-टर्न के पास युवती बिना शीशे में देखे मुड़ी, जिससे कार कंट्रोल नहीं हुई और टक्कर हो गई। मैंने गलती मानी, लेकिन बाइक सवारों के गाली देने के डर से रुका नहीं। रेड लाइट पर मैंने उनसे बात करने की कोशिश की थी, लेकिन भाई ने वहां रुकने से मना किया।

सिया के पिता बोले- कार्रवाई से हम संतुष्ट

सिया के पिता रोशन चौहान ने मीडिया से बातचीत में कहा- हम लोग इस बात से संतुष्ट हैं कि पुलिस ने मामले का बहुत तेजी से संज्ञान लिया और उस व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की। पुलिस ने शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया और बहुत अच्छा काम किया।

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CJI बोले- राजपाल यादव एक्टिंग में माहिर, भरोसा करना मुश्किल:चेक बाउंस मामले में आखिरी मौका दिया, कहा-दो हफ्ते में रु.2 करोड़ जमा करें

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मुंबई, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में 2 करोड़ रुपए जमा करने के लिए आखिरी बार 2 हफ्ते का समय दिया है। यह रकम सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करनी होगी। यह मामला वित्तीय विवाद से जुड़ा है।

कोर्ट ने अभिनेता को अपना पासपोर्ट सरेंडर करने का भी आदेश दिया है। कोर्ट ने उनके पुराने रवैये को देखते हुए भरोसा जताने में भी संदेह जाहिर किया।

CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘उनके पुराने रवैये को देखते हुए। कोई उन पर भरोसा कैसे कर सकता है? वे बॉलीवुड में ड्रामा और एक्टिंग करने में माहिर हैं। कोर्ट में भी वही कर रहे हैं।’

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राजपाल यादव को अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से मिली राहत जारी रखी है। अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी।

यह विवाद 2010 का है। राजपाल यादव ने अपनी पहली फिल्म डायरेक्ट करने के लिए दिल्ली की एक कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स से करीब 5 करोड़ रुपए का लोन लिया था।

इस फिल्म का नाम ‘अता पता लापता’ था। कॉमेडी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी।

रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म इतनी कमाई नहीं कर पाई कि उसका खर्च निकल सके। इसके बाद राजपाल यादव को लोन चुकाने में दिक्कत हुई।

ब्याज और दूसरे चार्ज जुड़ने से बकाया रकम कई साल में बढ़ती गई। यह रकम बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपए हो गई।

राजपाल यादव के वकील पीएस पाटवालिया ने मंगलवार को अदालत से कहा कि राजपाल यादव और उनकी मां के पास कुछ प्रॉपर्टी है, जिसे बेचकर वे रुपए इकट्ठा कर लेंगे। दो हफ्ते की मोहलत दे दी जाए। अभी उनके पास पैसे नहीं हैं, पर वे पैसे देना चाहते हैं।

2012 में मुरली प्रोजेक्ट्स ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था

विवाद बढ़ने के बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने 2012 में फिल्म को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फिल्म के अधिकारों में तीसरे पक्ष का हित बनाने से रोक दिया था। इसके बाद सात चेक बाउंस होने पर एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत सात शिकायतें दर्ज की गईं।

यादव की ओर से बाद में हुए 21 अप्रैल 2013 के सहमति समझौते पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत दोनों पक्षों ने 10.40 करोड़ रुपए के पूर्ण और अंतिम समझौते पर सहमति जताई थी, जिसमें 40 लाख रुपए आरटीजीएस के जरिए पहले ही दिए जा चुके थे। समझौते की सुरक्षा के लिए चार नए पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे।

यादव की याचिका के मुताबिक, इस समझौते के तहत पहले जारी किए गए आठ सिक्योरिटी चेक वापस किए जाने थे, लेकिन मुरली प्रोजेक्ट्स ने बाउंस हुए चेक के मामलों को आगे बढ़ाया।

सुप्रीम कोर्ट में यादव ने कहा कि बाद के समझौते के बाद मूल शिकायतें जारी नहीं रह सकतीं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘जिम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम मनोज गोयल’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि समझौता होने के बाद पुराने चेक के बाउंस से जुड़ी शिकायत खत्म हो जाती है और नए समझौते के तहत जारी चेक बाउंस होने पर ही नया मामला बन सकता है।

2018 में ट्रायल कोर्ट ने राजपाल को दोषी ठहराया था

ट्रायल कोर्ट ने अप्रैल 2018 में सातों मामलों में यादव और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। शुरुआत में यादव को हर मामले में छह महीने की जेल और 1.60 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

बाद में सजा कम की गई। 22 मई 2019 को उन्हें सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया गया।

सेशंस कोर्ट ने 2024 में दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए तीन महीने की सजा और प्रत्येक मामले में 1.35 करोड़ रुपए का जुर्माना कायम रखा। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2026 के फैसले में सजा में दखल देने से इनकार कर दिया।

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शिमला से दतिया तक रनवे तैयार, लेकिन ‘उड़ान’ गायब:50% रूट बंद, 880 करोड़ खर्च करके बने 15 एयरपोर्ट पर फ्लाइट नहीं

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नई दिल्ली, एजेंसी। शिमला से करीब 22 किमी दूर चीड़ के जंगलों के बीच बना जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट। यहां विमानों का शोर नहीं, सन्नाटा है। पिछली फ्लाइट 27 अगस्त को उड़ी थी। इसके बाद खराब मौसम और धुंध के कारण उड़ानें बंद हैं। पहाड़ों को काटकर बनाए इस एयरपोर्ट पर अब सिर्फ स्टाफ दिखाई देता है।

उड़ान योजना के 10 साल, 1.68 करोड़ लोगों ने सफर किया

उड़ान यानी उड़े देश का आम नागरिक। इस योजना का मकसद ऐसे छोटे और दूरदराज के शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना था, जहां रेगुलर हवाई सेवा नहीं थी या बहुत कम थी। केंद्र के मुताबिक, 30 जून 2026 तक इस योजना के तहत, 95 एयरोड्रोम शामिल किए गए। इनमें 76 एयरपोर्ट, 17 हेलीपोर्ट और 2 वाटर एयरोड्रोम भी शामिल हैं। 677 रूट तय किए गए, जिन पर 3.58 लाख उड़ानों में 1.68 करोड़ लोगों ने सफर किया।

योजना का मॉडल ये था कि छोटे शहरों के कम यात्री वाले रूट पर शुरुआत में एयरलाइन को फंड दिया जाए, ताकि कंपनी को घाटा कम करने और कम किराए में सीट देने में मदद मिले। योजना में 9 ऑपरेटर ने सर्विस शुरू की। सरकार ने उन्हें 4,881 करोड़ रुपए की मदद दी।

अब 10 साल बाद योजना के तहत आने वाले 95 एयरपोर्ट में से 15 या तो बंद हैं या यहां उड़ान के तहत फ्लाइट बंद हो चुकी हैं। हम इनमें से मध्य प्रदेश के दतिया, गुजरात के भावनगर और हिमाचल प्रदेश के शिमला समेत 9 एयरपोर्ट तक पहुंचे।

गुजरात के भावनगर में बने एयरपोर्ट पर लगेज और चेकिंग की मशीनें बंद हैं।

गुजरात के भावनगर में बने एयरपोर्ट पर लगेज और चेकिंग की मशीनें बंद हैं।

शुरुआत दतिया से: 11 महीने से फ्लाइट बंद

मां पीतांबरा शक्तिपीठ के लिए प्रसिद्ध दतिया में 31 मई 2025 को नए एयरपोर्ट का उद्घाटन हुआ था। यह रेलवे स्टेशन से करीब 4 किमी दूर है। एयरपोर्ट पहुंचने के लिए मुख्य सड़क से मुड़ते ही करीब 200 मीटर का रास्ता साफ-सुथरा मिला। आगे सड़क पर गड्ढे और जगह-जगह गायें दिखीं। सफाई कर्मचारियों ने बताया- ‘जब फ्लाइट उड़ती थी, तब सब ठीक था। अब इन्हें कोई नहीं भगाता।’

दतिया एयरपोर्ट के रास्ते पर घूमती गायें। यहां अब बहुत आवाजाही नहीं है, इसलिए जानवर आ जाते हैं।

दतिया एयरपोर्ट के रास्ते पर घूमती गायें। यहां अब बहुत आवाजाही नहीं है, इसलिए जानवर आ जाते हैं।

एयरपोर्ट को सरकार ने इसे नॉन-ऑपरेशनल घोषित किया है। कभी-कभार VIP फ्लाइट जरूर आती हैं। एयरपोर्ट से करीब 2 किमी के दायरे में ज्यादातर खाली जमीन और इक्का-दुक्का दुकानें मिलीं। होटल संस्कृति पैलेस के मालिक अनुराग गगौरिया बताते हैं, ‘एयरपोर्ट बना, तो लगा कारोबार और होटल में आने-जाने वाले बढ़ेंगे, लेकिन कुछ ही दिन में फ्लाइट बंद हो गई।’

वे बताते हैं कि फ्लाइट भोपाल और खजुराहो जाती थी। भोपाल के लिए दतिया से कई ट्रेनें और बसें चलती हैं। वहीं कारोबार का बड़ा हिस्सा इंदौर से जुड़ा है, लेकिन वहां की सीधी फ्लाइट नहीं थी। यानी एयरपोर्ट बना, लेकिन लोगों की जरूरत के मुताबिक कनेक्टिविटी नहीं बनी।

एयरपोर्ट के गेट पर पुलिस के साथ CISF के जवान तैनात रहते हैं। एयरपोर्ट पर कोई आता नहीं है, इसलिए वे भी मोबाइल में व्यस्त दिखे।

एयरपोर्ट के गेट पर पुलिस के साथ CISF के जवान तैनात रहते हैं। एयरपोर्ट पर कोई आता नहीं है, इसलिए वे भी मोबाइल में व्यस्त दिखे।

एयर ट्रैफिक कंट्रोलर नितिन ठाकरान बताते हैं, ‘31 मई 2025 को फ्लाईबिग एयरलाइन ने फ्लाइट शुरू की थी। करीब पांच महीने बाद ऑपरेशन बंद हो गया। उम्मीद थी कि यात्री मिलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 19 सीटर विमान भी आधा ही भर पाता था। सिर्फ 1050 लोगों ने सफर किया।’

‘कंपनी ने अचानक उड़ानें बंद कर दीं। वजह हमें भी नहीं पता। इसके बाद स्काईहॉप एयरलाइन को कॉन्ट्रैक्ट मिलने वाला था। 7 अगस्त से ऑपरेशन शुरू करने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक शुरू नहीं हुआ।‘

भावनगर: 18 करोड़ खर्च, कमाई सिर्फ 4 करोड़

गुजरात के भावनगर में कहानी थोड़ी अलग है। यहां एयरपोर्ट ऑपरेशनल है, लेकिन उड़ान योजना की रेगुलर फ्लाइट बंद हो चुकी है। एयरपोर्ट डायरेक्टर तपन कुमार नायक के मुताबिक, उड़ान के तहत स्पाइसजेट सर्विस दे रही थी। 10 जून 2025 को आखिरी फ्लाइट उड़ी। शुरुआती तीन साल सरकार ने सब्सिडी दी। सब्सिडी खत्म होने के बाद एयरलाइन ने ऑपरेशन बंद कर दिया।

अभी एक कॉमर्शियल फ्लाइट है, लेकिन वह उड़ान के तहत नहीं है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में एयरपोर्ट के ऑपरेशन और मेंटेनेंस पर करीब 18 करोड़ रुपए खर्च हुए और कमाई सिर्फ 4 करोड़ हुई।

शिमला: यहां यात्री नहीं, मौसम सबसे बड़ी चुनौती

शिमला से उड़ान योजना की पहली फ्लाइट भले 27 अप्रैल 2017 को उड़ी, लेकिन यहां 6 साल तक हवाई सेवा शुरू नहीं हो पाई। 26 सितंबर 2022 को पहली बार दिल्ली से एलायंस एयर का विमान जुब्बड़हट्टी पहुंचा। इसके बाद भी उड़ानें रेगुलर नहीं हो पाईं।

2025 में भारी बारिश के बाद लगभग 10 महीने ऑपरेशन बंद रहा। हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश पर 10 मई 2026 को हवाई सेवा शुरू हुई, लेकिन मानसून शुरू होते ही धुंध की वजह से 24 जुलाई को फिर बंद कर दी गई। 27 अगस्त को यहां आखिरी फ्लाइट पहुंची। एयरपोर्ट डायरेक्टर ललित कुमार के मुताबिक एयरपोर्ट बंद नहीं है। मौसम साफ होने पर उड़ान शुरू की जा सकती है।

यहां चुनौती डिमांड से ज्यादा ज्योग्राफी की है। टेबल-टॉप रनवे होने की वजह से यहां बड़े विमान नहीं उतर सकते। टेबलटॉप ऐसा रनवे होता है, जो पहाड़ या ऊंची जमीन को समतल करके बनाया जाता है। रनवे के आसपास खाई होती है। इसलिए विमान के लिए टेकऑफ और लैंडिंग में अतिरिक्त सावधानी जरूरी होती है।

शिमला का जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट पहाड़ी पर बना है, इसलिए यहां लैंडिंग आसान नहीं होती। 24 मार्च 2025 को यहां इमरजेंसी लैंडिंग हुई थी। प्लेन में हिमाचल के डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री और DGP डॉ. अतुल वर्मा भी सवार थे।

शिमला का जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट पहाड़ी पर बना है, इसलिए यहां लैंडिंग आसान नहीं होती। 24 मार्च 2025 को यहां इमरजेंसी लैंडिंग हुई थी। प्लेन में हिमाचल के डिप्टी CM मुकेश अग्निहोत्री और DGP डॉ. अतुल वर्मा भी सवार थे।

जुब्बड़हट्टी एयरपोर्ट से 1998 में पहली कॉमर्शियल फ्लाइट उड़ी थी। अब तक करीब 116 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। रेनोवेशन अब भी चल रहा है।

यहां रहने वाले मोहन वर्मा बताते हैं, ‘एयरपोर्ट से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन एक ही फ्लाइट होने से फायदा नहीं हुआ। 4-5 ढाबे खुले, 8-10 टैक्सी ऑपरेटर हैं। बस इतना ही रोजगार मिला है। इनका काम भी तभी चलता है, जब फ्लाइट आती है। मानसून में हर साल ढाई से तीन महीने तक फ्लाइट नहीं उड़ पाती।

जहां डिमांड, वहां उड़ान ज्यादा कामयाब प्रयागराज में यात्री 10 लाख के पार

उड़ान की हालत हर जगह एक जैसी नहीं है। उत्तर प्रदेश का प्रयागराज इसका उदाहरण है। 2024-25 में प्रयागराज एयरपोर्ट से 10.77 लाख यात्रियों ने सफर किया। 2023-24 में यह संख्या 6.10 लाख थी, यानी एक साल में करीब 76.4% की बढ़ोतरी। एयरपोर्ट डायरेक्टर गणेश यादव इसके पीछे तीन बड़े कारण बताते हैं।

1. धार्मिक पर्यटन: प्रयागराज में हर साल माघ मेला होता है। हर छह साल में अर्द्धकुंभ और 12 साल में महाकुंभ होता है। संगम के कारण सालभर श्रद्धालु आते हैं।

2. इलाहाबाद हाईकोर्ट: देशभर से जज, वकील, अधिकारी और दूसरे लोग यहां आते-जाते हैं।

3. पॉलिटिकल एक्टिविटी: बड़े नेता और दूसरी हस्तियां लगातार शहर में आती-जाती हैं।

असली चुनौती एयरपोर्ट बनाना नहीं, उड़ान चलाते रहना

2014 में देश में 74 ऑपरेशनल एयरपोर्ट थे। 2026 में ये बढ़कर 165 हो गए। सरकार के मुताबिक इस दौरान एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर 1.4 लाख करोड़ से ज्यादा का निवेश हुआ है।

फरवरी 2026 में सरकार ने संसद में बताया कि उड़ान के तहत शुरू हुए 15 एयरपोर्ट नॉन ऑपरेशनल थे। इनमें दतिया, शिमला, भावनगर, पठानकोट, लुधियाना, पाकयोंग, कुशीनगर, अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती और मुरादाबाद जैसे एयरपोर्ट शामिल हैं। इन पर करीब 880 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।

रूट की स्थिति भी यही कहानी बताती है। उड़ान के तहत एलायंस एयर, स्पाइसजेट, इंडिगो, स्टार एयर, फ्लाईबिग, फ्लाई 91 और इंडियावन ने सर्विस शुरू की। 669 रूट्स पर कभी न कभी उड़ान शुरू हुई। इनमें से सिर्फ 336 पर उड़ानें चल रही हैं। 333 रूट, यानी करीब आधे बंद हो चुके हैं।

दिसंबर 2025 में सरकार ने बताया था कि 151 रूट तीन साल पूरे होने से पहले बंद हो गए। इसकी वजह कम यात्री, एयरक्राफ्ट की शॉर्टेज, खराब विजिबिलिटी और एयरलाइन का ऑपरेशन बंद करना बताया गया।

पूर्व पायलट और एविएशन एक्सपर्ट डॉ. विपुल सक्सेना के मुताबिक, उड़ान वाले एयरपोर्ट नॉन ऑपरेशन होने की दो वजहें समझ आती हैं।

1. छोटे शहरों से उतने लोग फ्लाइट में नहीं बैठे, जितनी उम्मीद थी। इससे एयरलाइन के लिए विमान उड़ाना महंगा हो गया।

2. उड़ान के तहत सरकार एयरलाइन कंपनी को शुरुआत के तीन साल मदद देती है। इसके बाद एयरलाइन को अपने दम पर रूट चलाना पड़ता है। सरकारी सब्सिडी खत्म होने बाद एयरलाइंस कंपनियों के लिए उड़ान जारी रखना मुश्किल हो गया।

उड़ान योजना का रिजल्ट भले सरकार के मन मुताबिक न रहा हो, लेकिन सरकार इस पर अभी भी दांव लगा रही है। एविएशन मिनिस्टर के. राम मोहन नायडू के मुताबिक, अगले 10 साल में उड़ान के तहत 120 एयरपोर्ट और बनाए जाएंगे। सरकार इन पर 28,840 करोड़ रुपए खर्च करेगी।

अमेरिका-कनाडा में भी रीजनल फ्लाइट्स को सब्सिडी

अमेरिका, कनाडा, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाले देशों में भी दूरदराज इलाकों की एयर कनेक्टिविटी के लिए सरकारी मदद मिलती है। अमेरिका में 1978 में एयरलाइन डिरेगुलेशन के बाद एसेंशियल एयर सर्विस शुरू की गई, ताकि छोटे शहरों की हवाई कनेक्टिविटी खत्म न हो।

कनाडा में सरकार एयर सर्विस सपोर्ट प्रोग्राम चलाती है। कोविड के दौरान सरकार ने 18 महीनों में 174 मिलियन कनाडियन डॉलर या करीब 1,199 करोड़ रुपए की मदद दी थी। ताकि दूरदराज वाले इलाकों में हवाई सेवा चलती रहे।

ऑस्ट्रेलिया में रिमोट एयर सर्विस सब्सिडी के तहत दूरदराज और कम आबादी वाले इलाकों में रेगुलर हवाई सेवा के लिए सीधे एयर ऑपरेटर को सब्सिडी दी जाती है। ऐसे ही ब्राजील में रीजनल एविएशन को बढ़ावा देने के लिए कानूनी तौर पर सब्सिडी का प्रावधान है।

उड़ान मॉडल भी इसी तरह है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों की मदद से लागत कम की जाती है। एयरपोर्ट ऑपरेटर लैंडिंग और पार्किंग चार्ज माफ करते हैं। AAI टर्मिनल नेविगेशन लैंडिंग चार्ज नहीं लगाता। केंद्र और राज्य सरकारें फ्यूल पर लगने वाले टैक्स में छूट देती हैं।

एविएशन एक्सपर्ट विपुल सक्सेना कहते हैं, ‘सरकार इस तरह का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू करती है, तो वह आमतौर पर तुरंत रिटर्न या मुनाफे के हिसाब से नहीं सोचती। जैसे सड़क बनाते वक्त भी नहीं सोचा जाता कि पैसा कितने साल में वापस आएगा। यह जरूर देखा जाना चाहिए कि एयरपोर्ट कहां बनाया जाए और वहां किस तरह के विमान चल सकते हैं।

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बंगाल में 252 मदरसे बंद करने का आदेश:सरकार बोली- इनके पास बुनियादी सुविधाएं नहीं, पहले मदरसों का बजट रू.3600 करोड़ घटाया था

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कोलकाता, एजेंसी। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया है। करीब 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है।

सरकार का कहना है कि जांच में इन मदरसों के पास बुनियादी सुविधाएं नहीं मिली। यह कार्रवाई अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग ने की है।

सरकार ने रविवार को ये भी बताया कि मानक पूरे करने वाले मदरसे चलते रहेंगे। जिन संस्थाओं को नोटिस दिए गए हैं, उनके जवाब की जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

इससे पहले 2026 के बजट में बंगाल सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण और मदरसा विभाग के लिए फंड रू.5,713 करोड़ से घटाकर रू.2,165.42 करोड़ कर दिया था। यानी बजट में लगभग रू.3600 करोड़ की कटौती हुई थी।

सभी जिलों में हुआ सर्वे

अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने जून की शुरुआत से पश्चिम बंगाल के सभी जिलों में जमीनी सर्वे किया। इस सर्वे में सरकारी और निजी मदरसों की बुनियादी सुविधाएं, मंजूरी की स्थिति और प्रबंधन व्यवस्था की जांच की गई।

अधिकारियों ने बताया कि संबंधित मदरसों को कारण बताओ नोटिस दिया गया है। उनके जवाबों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने यह जांच अलग-अलग जिलों में अधिकृत और अनधिकृत मदरसों की जानकारी पता करने के लिए कराई थी।

बंगाल के सभी मदरसों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत आने वाले सभी मदरसों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया है। 19 मई को जारी आदेश के मुताबिक, यह नियम सरकारी मॉडल मदरसों, सरकारी सहायता प्राप्त और बिना सहायता प्राप्त मदरसों पर तुरंत लागू होगा।

इससे पहले मदरसों में सुबह की प्रार्थना के दौरान राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और कवि गुलाम मुस्तफा की ‘अनंत असीम प्रेममय तुमी’ (बांग्ला गीत) गाया जाता था। अब सभी मदरसों को इस आदेश को लागू करने के बाद इसकी रिपोर्ट भी विभाग को सौंपनी होगी।

UP और असम सरकार ने भी मदरसों की जांच की

उत्तरप्रदेश सरकार ने भी सितंबर से नवंबर 2022 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की फंडिंग और सुविधाओं की जांच के लिए बड़ा सर्वे कराया था। साथ ही पारदर्शिता लाने के लिए ‘मदरसा पोर्टल’ शुरू किया और सिलेबस में एनसीईआरटी की किताबें, कंप्यूटर, गणित व अंग्रेजी जैसे आधुनिक विषय अनिवार्य किए।

वहीं, असम सरकार ने दिसंबर 2020 सरकारी खर्च से चलने वाले सभी मदरसों को बंद करके उन्हें सामान्य सरकारी स्कूलों में बदल दिया था। संस्थानों के नाम से ‘मदरसा’ शब्द हटाकर केवल राज्य शिक्षा बोर्ड (SEBA) का सामान्य सिलेबस लागू किया गया है।

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