सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से सरकारी स्कूल में शराब और चिकन पार्टी का वीडियो सामने आया है। वीडियो में 5 शिक्षक और 1 स्वीपर स्कूल कैंपस में शराब और चिकन पार्टी करते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाया था, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वीडियो वायरल होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कुमुदिनी द्विवेदी ने नरेंद्र कुमार लहरें (लेक्चरर), राजू कुमार साहू (लेक्चरर), राजेश धीरी (लेक्चरर), दिनेश चक्रधारी (लेक्चरर), रात्रे (स्वीपर) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
डीईओ ने कहा कि कर्मचारियों से जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामला मालखरौदा ब्लॉक के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल किरारी का है।
छुट्टी के बाद स्कूल में कर रहे थे पार्टी
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो करीब एक सप्ताह पुराना है। स्कूल की छुट्टी के बाद कुछ शिक्षक और स्वीपर परिसर में शराब और नॉनवेज के साथ पार्टी कर रहे थे। इसी दौरान कुछ ग्रामीण वहां पहुंच गए और उन्होंने पूरी घटना का वीडियो बना लिया।
वायरल वीडियो में टेबल पर शराब की बोतल और प्लेट में नॉनवेज साफ नजर आ रहा है। वहीं, गिलास में शराब का पैक भी दिखाई दे रहा है। वीडियो में कुछ शिक्षक टेबल के आसपास बैठे हुए नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों ने वीडियो बनाकर किया वायरल
ग्रामीणों ने स्कूल परिसर में पार्टी का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। इसके बाद वीडियो तेजी से वायरल हो गया। ग्रामीणों का दावा है कि इससे पहले भी शिक्षक स्कूल कैंपस में इस तरह की पार्टी कर चुके हैं।
5 शिक्षकों और स्वीपर को नोटिस
जिला शिक्षा अधिकारी कुमुदिनी द्विवेदी ने मामले में एक्शन लेते हुए वीडियो में नजर आ रहे पांच शिक्षकों और एक स्वीपर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी को तीन दिन के भीतर अपना जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षा विभाग ने संबंधित कर्मचारियों से घटना को लेकर अपना पक्ष मांगा है। जवाब मिलने के बाद मामले की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
कोरबा/कटघोरा। करीब 02 साल से अधिक समय तक कटघोरा वनमंडल में पदस्थ रहे आईएफएस कुमार निशांत का स्थानांतरण मरवाही डीएफओ के रूप में हो गया है। उनके स्थान पर शासन ने आईएफएस जितेन्द्र कुमार उपाध्याय को पोस्टिंग दी है। श्री उपाध्याय इसके पूर्व धरमजयगढ़ में डीएफओ थे। निशांत का भ्रष्टाचार और तानाशाही से रहा नाता कटघोरा में पदस्थ कुमार निशांत का कटघोरा डीएफओ बनते ही तानाशाही और भ्रष्टाचार से नाता रहा। कटघोरा डीएफओ रहते कैम्पा मद में भारी गड़बड़ी की शिकायत रही और विधानसभा तक इसकी गूंज रही। एक विधायक के सवाल के जवाब में छत्तीसगढ़ के उन आईएफएस अधिकारियों का नाम वनमंत्री केदार कश्यप ने बताया, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत और जांच चल रही है, जिनमें कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत का नाम शामिल है। भ्रष्टाचार की शिकायत और जांच चलने के बाद भी कुमार निशांत को सालों तक अभयदान मिलता रहा और काफी समय कटघोरा डीएफओ के रूप में बिताने के बाद 08 अगस्त को उनका स्थानांतरण मरवाही वनमंडल में डीएफओ के रूप में हुआ है। भ्रष्टाचार में जहां वे चर्चा में रहे, वहीं वे तानाशाही के लिए भी चर्चित रहे। जब जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा-कटघोरा डीएफओ कार्यालय में जा कर लेंगे बैठक उनकी हिटलरशाही आम जनता के लिए तो चर्चा का विषय रहा ही, वे जनप्रतिनिधियों के निर्देशों की भी अवहेलना करने में भी चर्चित रहे। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव को एक साल से अधिक हो गए। एक साल में जिला पंचायत की सामान्य सभा जितनी बार हुई, उसमें एक बार भी कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत नहीं पहुंचे। जिला पंचायत सीईओ एवं अध्यक्ष डॉ. पवन के निर्देशों को भी वे हवा में उड़ा देते रहे और अपने अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच कहते-फिरते रहे कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता। हुआ भी यही, वे राजा की तरह दम्भ के साथ कटघोरा में अपना पूरा कार्यकाल बिताया और अब 08 अगस्त को शासन स्तर पर हुए तबादला आदेश में वे मरवाही जा रहे हैं।
एक साल की एक भी सामान्य सभा में डीएफओ कुमार निशांत की उपस्थिति न होने पर कई बार कटघोरा डीएफओ को नोटिस दिया गया, लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा, इससे खिन्न हो कर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने कहा कि अबकी बार कटघोरा डीएफओ उपस्थित नहीं होते, तो वे सभी सदस्यों के साथ कटघोरा वनमंडल कार्यालय में डीएफओ की बैठक लेंगे, लेकिन ऐसा नहीं कर सके। सीएम तक हुई शिकायत, लेकिन नौकरशाही हावी रही डॉ. पवन सिंह सहित जिला पंचायत सदस्यों, भाजपा नेताओं ने कटघोरा डीएफओ कुमार निशांत की तानाशाही एवं भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास पहुंचे, लेकिन महीनों-महीनों बीत गए, लेकिन उन पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिला पंचायत सीईओ के आदेश को मानने के लिए वे अपने आपको बाध्य नहीं मानते थे, क्योंकि वे फ्रेश आईएफएस हैं, जबकि जिला पंचायत सीईओ प्रमोटिव एडीएम/जिला पंचायत सीईओ थे।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। शासन ने 24 IFS अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापनाओं के आदेश जारी किए हैं। अधिकारियों को अलग-अलग वनमंडलों और विभागीय संस्थानों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जारी आदेश के मुताबिक, गणवीर धम्मशील को वन और जलवायु परिवर्तन विभाग का विशेष सचिव बनाया गया है। जबकि उत्तम कुमार गुप्ता को इंद्रावती टाइगर रिजर्व का प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (CCF) बनाया गया है।
दुलेश्वर प्रसाद साहू को मनेन्द्रगढ़ वनमंडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंकज राजपूत को रायपुर का नया वन उप संरक्षक (DCF) बनाया गया है। प्रभाकर खलखो को सरगुजा कार्य आयोजना वनमंडल का प्रभारी वन संरक्षक बनाया गया है।
वन विकास निगम में 3 अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति
संजय यादव, गीष्मी चांद और ऋषभ जैन को छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम में प्रतिनियुक्ति दी गई है। वहीं, पंकज कुमार कमल को वन विकास निगम से वापस लेते हुए बलौदाबाजार वन उप संरक्षक बनाया गया है।
लघु वनोपज संघ और PCCF कार्यालय में भी बदलाव
अभिषेक जोगावत को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ में उप महाप्रबंधक की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं रौनक गोयल को PCCF कार्यालय में वन उप संरक्षक बनाया गया है।
रायपुर। जहां मैं खड़ा होता हूं, लाइन वहीं से शुरू होती है-फिल्म कालिया में अमिताभ बच्चन का यह संवाद तो सभी ने सुना होगा, लेकिन अब छत्तीसगढ़ में राशन की दुकानों के सामने लगने वाली लंबी कतारों की तस्वीर बदलने जा रही है। ‘अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम‘ की शुरुआत के साथ हितग्राहियों को राशन लेने के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने की जरूरत कम होगी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली एक नए, आधुनिक और सुविधाजनक दौर में प्रवेश करेगी।
सोचिए, राशन लेने के लिए दुकान खुलने का इंतजार नहीं, भीड़ में अपनी बारी आने की चिंता नहीं और न ही लंबे समय तक कतार में खड़े रहने की परेशानी। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए हितग्राही अपनी पहचान सुनिश्चित कर खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे। यानी तकनीक अब सिर्फ मोबाइल और बैंकिंग तक सीमित नहीं रही, बल्कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के राशन तक भी पहुंच रही है।
अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम केवल एक मशीन नहीं, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जनसुविधा केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। राशन वितरण में तकनीक के इस्तेमाल से व्यवस्था में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और हितग्राही को अपने हिस्से के खाद्यान्न की उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया पर अधिक भरोसा मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर से शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में राशन वितरण की तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। जिस तरह एटीएम ने बैंकिंग व्यवस्था में लाइन से सुविधा का रास्ता बनाया, उसी तरह ग्रेन एटीएम राशन वितरण में सुविधा, पारदर्शिता और समय की बचत का नया अध्याय लिखेगा।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जनसुविधा केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा तकनीक और नवाचार को पीडीएस से जोड़ते हुए प्रदेश के रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में तीन ‘अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम‘ की शुरुआत की गई है। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल द्वारा 8 अगस्त 2026 को इन ग्रेन एटीएम का ऑनलाइन शुभारंभ किया। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ देश के उत्तराखंड, मेघालय, गुजरात और ओड़िसा जैसे चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जहां तकनीक आधारित ग्रेन एटीएम के माध्यम से हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
गौरतलब है कि अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम की शुरुआत राज्य की विशाल खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रदेश में लगभग 2.73 करोड़ लोग खाद्यात्र सुरक्षा के दायरे में हैं। वर्तमान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 82.18 लाख राशन कार्ड प्रचलित हैं। इनमें 73.41 लाख प्राथमिकता वाले परिवारों को निःशुल्क चावल उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि 8.50 ताख एपीएल राशनकार्डधारियों को रियायती दर पर चावल प्रदान किया जा रहा है। इतनी बड़ी आबादी तक नियमित और सुगम खाद्यान्न पहुंचाने वाली व्यवस्था में तकनीक का समावेश पीडीएस को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम के माध्यम से राशनकार्डधारी हितग्राही अब अपनी सुविधा के अनुसार 24×7 घंटे चावल प्राप्त कर सकेंगे। मशीन की स्क्रीन पर आधार नंबर अथवा राशनकार्ड नंबर दर्ज करने तथा बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न प्राप्त किया जा सकेगा। इससे उचित मूल्य दुकानों पर लगने वाली लंबी कतार, भीड़ और समय की बाध्यता कम होगी। कामकाजी लोगों, बुजुर्गों, श्रमिकों और ऐसे हितग्राहियों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी, जिन्हें राशन लेने के लिए निर्धारित समय में दुकान तक पहुंचने में कठिनाई होती है।
इस पहल की एक महत्वपूर्ण विशेषता श्वन नेशन, वन राशनकार्ड व्यवस्था से इसका जुड़ाव है। छत्तीसगढ़ के राशनकार्डधारियों के साथ-साथ अन्य राज्यों के पात्र हितग्राही भी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से इन ग्रेन एटीएम से खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे। इससे प्रवासी श्रमिकों और दूसरे राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाले हितग्राहियों को भी राशन प्राप्त करने में सुविधा होगी। इस तरह ग्रेन एटीएम न केवल राज्य के हितग्राहियों के लिए सुविधा का माध्यम बनेगा, बल्कि पोर्टेबिलिटी आधारित राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूती देगा।
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के सहयोग से स्थापित इन ग्रेन एटीएम की भण्डारण क्षमता लगभग 2500 किलोग्राम है। मशीन में चावल की लोडिंग स्वचालित प्रणाली से होगी और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के बाद निर्धारित मात्रा में चावल वितरित किया जाएगा। इस तकनीकी व्यवस्था से खाद्यान्न वितरण की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम होने के साथ ही वितरण और निगरानी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाया जा सकेगा।
राज्य सरकार की यह पहल केवल राशन वितरण की प्रक्रिया को आसान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पीडीएस में जवाबदेही, पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक व्यापक सुधार है। खाद्यान्न वितरण में आधुनिक तकनीक के उपयोग से हितग्राही को उसके अधिकार का खाद्यान्त्र सम्मानजनक और सुविधाजनक तरीके से प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। वहीं, वितरण प्रक्रिया की बेहतर निगरानी से व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास को और मजबूती मिलेगी।