कोरबा। बुधवारी के खुशबू इलेक्ट्रॉनिक शॉप के स्टोर रूम में सामान हटाने के दौरान सांप की केचुली मिलने से लोगों में हड़कंप मच गया,केचुली देखकर स्टोर रूम में कोबरा सांप होने की संभावना जताई गई, जिसके चलते सामान हटाने का काम तत्काल रोक दिया गया। आसपास मौजूद लोगों में भी सांप को लेकर चिंता बढ़ गई, जिसके बाद अभिषेक ने इसकी जानकारी वाइल्डलाइफ रेस्क्यु टीम प्रमुख (नोवा नेचर) एवं वन विभाग सदस्य जितेंद्र सारथी को दिया गया, जिस पर उन्होंने थोड़ी देर में पहुंचने की बात कही, फिर मौके स्थल पर पहुंच कर सांप की मौजूदगी की आशंका के बीच रेस्क्यू टीम एवं स्थानीय लोगों ने सावधानीपूर्वक स्टोर रूम का सामान हटाना शुरू किया, एक-एक कर सामान हटाने के दौरान आखिरकार वही हुआ जिसका अंदाजा लगाया जा रहा था, करीब 6 फीट लंबा विशालकाय कोबरा सामने दिखाई दिया।
कोबरा दिखाई देने के बाद वह अचानक पाइप के अंदर घुस गया, इससे रेस्क्यू अभियान और चुनौतीपूर्ण हो गया, टीम ने धैर्य और सावधानी के साथ रेस्क्यू कार्य जारी रखा।
पाइप में छिपे कोबरा को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए करीब एक घंटे तक कड़ी मेहनत की गई, पानी की सहायता से सांप को पाइप के दूसरे सिरे से बाहर निकाला गया, जिसके बाद रेस्क्यू टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया।
जितेंद्र सारथी की टीम ने आवश्यक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए करीब 6 फीट लंबे कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे थैले में रखा, सांप के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद आसपास मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।
रेस्क्यू के बाद कोबरा को सुरक्षित तरीके से उसके प्राकृतिक रहवास जंगल में पुनः छोड़ दिया गया,इस दौरान वन्यजीव को किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा गया।
कोरबा। कोरबा के सीतामढ़ी में नहर में कूदे सतीश रजक का तीन दिन बाद भी पता नहीं चल सका है। गोताखोरों की टीम लगातार उसकी तलाश कर रही है, लेकिन नहर में पानी का बहाव तेज होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में परेशानी आ रही है। युवक के नहीं मिलने से परेशान परिजन और बस्ती के लोग गुरुवार सुबह कोतवाली थाना पहुंचे और युवक की तलाश तेज करने की मांग की।
सतीश रजक हमाली का काम करता है। उसके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं, जिनकी उम्र 11 साल और 3 साल है। परिजनों के मुताबिक, तीन दिन पहले दोपहर करीब 3 बजे सतीश ने बच्चों को खाना खिलाया और खुद भी खाना खाया। इसके बाद वह घर के पास स्थित नहर की तरफ एक व्यक्ति के साथ गया था। इसी दौरान वह सीतामणी बसोड़ मोहल्ले के सामने से गुजर रही नहर में कूद गया।
साथ गए व्यक्ति ने इसकी जानकारी परिजनों को दी। इसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलने पर डायल 112 और कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने जिला नगर सेना की गोताखोर टीम को बुलाकर तलाश शुरू कराई।
तीन दिन से तलाश, अब तक नहीं मिला सुराग
नहर में पानी का बहाव तेज होने के कारण गोताखोरों को युवक की तलाश करने में काफी दिक्कत हो रही है। तीन दिनों से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है, लेकिन अब तक सतीश का कोई सुराग नहीं मिला है। इससे परिवार के लोग परेशान हैं।
परिजनों और बस्ती के लोगों ने मांग की है कि नहर में पानी का स्तर कम कराया जाए। साथ ही नहर किनारे बसे गांवों में मुनादी कराई जाए, ताकि लोगों को युवक के बारे में जानकारी मिल सके और उसकी तलाश में मदद मिल सके।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
इस मामले में सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि सतीश रजक के नहर में कूदने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। मामले में गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज की गई है। साथ ही भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 143 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। गोताखोरों और अन्य माध्यमों से युवक की तलाश लगातार जारी है।
सीएसपी ने लोगों से अपील की है कि वे नहर के पास नहाने न जाएं। फिलहाल नहर में पानी का बहाव तेज है, ऐसे में हादसा होने का खतरा बना हुआ है।
कोरबा। कोरबा में सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पथरीपारा में संतोष (40-45) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सूचना मिलने पर सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि संतोष की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और उसका इलाज भी चल रहा था। वहीं, उसकी पत्नी लंबे समय से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
मार्च में मेन्टल हॉस्पिटल में कराया गया था भर्ती
सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि पुलिस को पथरीपारा में संतोष की आत्महत्या की सूचना मिली थी। इसके बाद सिविल लाइन पुलिस मौके पर पहुंची। जांच में सामने आया कि संतोष ने फांसी लगाकर जान दी है। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
सीएसपी के अनुसार, संतोष की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। मार्च महीने में उसे सेंदरी स्थित मानसिक चिकित्सालय में भी भर्ती कराया गया था, जहां उसका इलाज चल रहा था।
पत्नी के इलाज के खर्च से परिवार आर्थिक परेशानी में
जानकारी के अनुसार, संतोष की पत्नी लंबे समय से कैंसर से पीड़ित है। उसके इलाज पर लगातार खर्च होने के कारण परिवार आर्थिक तंगी से भी गुजर रहा था। पुलिस की जांच में संतोष की मानसिक बीमारी और पारिवारिक परिस्थितियों से जुड़े पहलू सामने आए हैं। हालांकि, आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच
सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में पारिवारिक परिस्थितियों और आर्थिक स्थिति से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
गंभीर ब्रेन स्ट्रोक के बाद बंद हो गई थी आवाज, शरीर का बायां हिस्सा पड़ गया था सुन्न, समय पर उपचार और पुनर्वास से लौटी जिंदगी की रफ्तार
डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा टीम के प्रयास और फिजियोथेरेपी से मिली नई उम्मीद
कोरबा। कभी-कभी जिंदगी अचानक ऐसी परीक्षा लेती है कि परिवार की खुशियां पलभर में चिंता और डर में बदल जाती हैं। आंखों के सामने अपना प्रियजन असहाय हो जाए, बोलना बंद कर दे और शरीर का एक हिस्सा काम करना छोड़ दे, तो परिवार के लिए हर पल किसी सदमे से कम नहीं होता। लेकिन ऐसे कठिन समय में सही फैसला, समय पर चिकित्सा और अपनों का हौसला उम्मीद की नई किरण बन सकता है।
कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल में सामने आई 63 वर्षीय श्रीमती लक्ष्मी सोरी की कहानी कुछ ऐसी ही है। 14 मई 2026 की सुबह अचानक तेज चक्कर, उल्टियां और बेहोशी ने उनके परिवार को चिंता में डाल दिया। शरीर का बायां हिस्सा सुन्न और कमजोर पड़ गया था। बोलने की क्षमता प्रभावित हो गई थी और याददाश्त पर भी असर दिखाई दे रहा था। परिवार ने बिना देर किए उन्हें न्यू बस स्टैंड, टी.पी. नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल पहुंचाया। जांच में गंभीर इस्कीमिक ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति सामने आई।
परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी अपने प्रियजन को इस गंभीर संकट से बाहर निकालना। ऐसे समय में हर मिनट की अहमियत थी और तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी थी।
डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में शुरू हुआ उपचार
शिवाय हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन एवं डायरेक्टर डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने तत्काल आपातकालीन उपचार शुरू किया। मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बाधित होने से उत्पन्न गंभीर स्थिति को देखते हुए मरीज की चिकित्सा देखभाल पर विशेष ध्यान दिया गया।
स्ट्रोक के मामलों में समय पर अस्पताल पहुंचना और शीघ्र चिकित्सकीय मूल्यांकन बेहद महत्वपूर्ण होता है। लक्ष्मी सोनी के परिवार ने बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचकर उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया।
उस समय परिवार के मन में कई सवाल थे, लेकिन डॉक्टरों की देखरेख और उपचार की प्रक्रिया के साथ उम्मीद कायम रही कि हालात बेहतर हो सकते हैं।
इलाज के बाद पुनर्वास ने बढ़ाई स्वस्थ होने की उम्मीद
गंभीर स्थिति के बाद मरीज को दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटाना भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। लक्ष्मी सोरी की रिकवरी में चिकित्सा देखभाल के साथ फिजियोथेरेपी की भूमिका रही। फिजियोथेरेपिस्ट अमन श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में कमजोर अंगों की कार्यक्षमता और चलने-फिरने की क्षमता में सुधार के लिए प्रयास किए गए।
इसके साथ स्पीच थेरेपी और मेडिसिन विभाग के समन्वय से बोलने तथा याददाश्त से जुड़ी परेशानियों में सुधार की दिशा में काम किया गया। लगातार देखभाल, पुनर्वास और परिवार के सहयोग ने उनकी रिकवरी के सफर को आगे बढ़ाने में मदद की।
यह सफर केवल बीमारी से उबरने का नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सुधारों के साथ आत्मविश्वास दोबारा हासिल करने का भी था। परिवार के लिए लक्ष्मी जी की बेहतर होती स्थिति राहत और खुशी का कारण बनती गई।
गंभीर हालत से स्वस्थ होकर घर वापसी, परिवार के लिए भावुक पल
जिस लक्ष्मी सोरी को परिवार गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचा था, उपचार और पुनर्वास के बाद वह होश में आईं, सामान्य रूप से बातचीत करने लगीं और अपने पैरों पर चलने की स्थिति में स्वस्थ होकर घर लौटीं।
यह परिवार के लिए भावुक कर देने वाला पल था। जिस घर में कभी अनहोनी की आशंका ने चिंता बढ़ा दी थी, वहां फिर से मुस्कान और राहत लौट आई। लक्ष्मी सोनी की रिकवरी ने उनके परिजनों को नई उम्मीद दी और इस बात को रेखांकित किया कि गंभीर बीमारी के बाद भी उचित चिकित्सा और पुनर्वास से सुधार की संभावनाएं बनी रहती हैं।
शिवाय हॉस्पिटल के लिए चिकित्सा सेवा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि
लक्ष्मी सोरी की रिकवरी शिवाय हॉस्पिटल, कोरबा की चिकित्सा टीम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आई है। गंभीर स्ट्रोक के उपचार से लेकर आगे की देखभाल और पुनर्वास तक, इस मामले में चिकित्सा सेवाओं के समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
डॉ. दिविक मित्तल के नेतृत्व में चिकित्सा देखभाल, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और मेडिसिन विभाग के प्रयासों ने मरीज को स्वस्थ जीवन की ओर लौटने में सहयोग दिया। यह कहानी अस्पताल में उपलब्ध उपचार सेवाओं के साथ-साथ स्ट्रोक के बाद पुनर्वास की अहमियत भी सामने लाती है।
विश्व स्ट्रोक दिवस पर शिवाय हॉस्पिटल का संदेश: लक्षण दिखें तो देर न करें
ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसके लक्षणों को पहचानकर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना बेहद जरूरी है। अचानक चेहरा टेढ़ा होना, एक हाथ या पैर में कमजोरी अथवा सुन्नपन, बोलने या समझने में परेशानी और अचानक संतुलन बिगड़ना स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं।
ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत एंबुलेंस या आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें। स्ट्रोक के उपचार में देरी से मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
शिवाय हॉस्पिटल, न्यू बस स्टैंड, टी.पी. नगर, कोरबा की ओर से संदेश है कि जागरूकता, समय पर उपचार और उचित पुनर्वास मरीज की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लक्ष्मी सोरी की कहानी एक परिवार की चिंता से राहत तक के सफर की कहानी है। यह उस उम्मीद की कहानी है, जो मुश्किल समय में भी बनी रहती है। और यह संदेश भी कि स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानकर समय पर उठाया गया कदम किसी की जिंदगी में फिर से मुस्कान लौटाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।