Connect with us

छत्तीसगढ़

झीरम घाटी में नक्सली हमले के 10 दोषियों को मृत्युदंड:2013 में छत्तीसगढ़ कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला हुआ था, 29 मारे गए थे

Published

on

जगदलपुर/ रायपुर, एजेंसी। 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं समेत 29 लोगों की हत्या के मामले में जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। इनमें 2 महिला और 8 पुरुष शामिल हैं।

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सली हमला हुआ था। इसमें कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।

करीब 13 साल चली सुनवाई में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेज दर्ज किए गए। यह सजा हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही लागू होगी। तब तक सभी दोषी केंद्रीय जेल जगदलपुर में रहेंगे। 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं। अभियोजन पक्ष ने फांसी की मांग की थी, जबकि बचाव पक्ष ने दलील में सजा कम करने की मांग की थी।

परिजन बोले- कोसा नक्सली नहीं था

दोषी ठहराए गए कोसा के ममेरे भाई ने कहा कि कोसा नक्सली नहीं था। क्या नक्सली गांव में रहते हैं। जिस समय कोसा को पकड़ा गया, वह घर में खाना बना रहा था। मौत की सजा की जानकारी मिली है। वकील ने बताया है कि 30 दिन के अंदर हाईकोर्ट जाना पड़ेगा।

NIA के दिए दस्तावेज कोर्ट ने सही पाए

वहीं अभियोजन पक्ष के वकील ने परिजनों के आरोपों पर कहा कि कोर्ट आरोपों से नहीं सबूतों से चलती है। NIA के दिए दस्तावेजों को कोर्ट ने सही पाया, इसलिए मौत की सजा सुनाई गई है। 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे।

FIR में और बहुत सारे लोगों के नाम थे। उनमें अज्ञात और नामजद लोग भी हैं। उनकी पहचान की जाएगी। 11 लोग पकड़े गए थे। ट्रायल के दौरान एक की मौत हो गई। 10 लोगों की सजा सुनाई गई है।

25 मई 2013 को हुआ था झीरम नक्सली हमला

13 साल पहले बस्तर में कांग्रेस अपनी परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी। 25 मई 2013 की शाम यह यात्रा सुकमा की ओर से लौट रही थी। काफिला जब दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था, तभी माओवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया।

हमले की शुरुआत IED विस्फोट से हुई। इसके बाद सड़क पर पेड़ गिराकर रास्ता बंद किया गया और जंगल से काफिले पर गोलियां बरसाई गई। कुछ ही देर में पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा। नक्सलियों ने नेताओं और सुरक्षाकर्मियों को अलग-अलग किया।

माओवादियों का खास निशाना महेंद्र कर्मा थे। नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कई अन्य लोगों की भी हत्या कर दी गई। एक ही हमले में कांग्रेस की उस समय की प्रदेश की शीर्ष नेतृत्व पंक्ति लगभग खत्म हो गई थी।

2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।

2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।

जान गंवाने वाले कांग्रेस नेताओं के नाम

नंदकुमार पटेल (तत्कालीन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष) महेंद्र कर्मा (पूर्व नेता प्रतिपक्ष), विद्याचरण शुक्ल (पूर्व केंद्रीय मंत्री), दिनेश पटेल, उदय मुदलियार, भागीरथी पालिया, राजकुमार, गोपीचंद माधवानी, अल्लानूर, योगेंद्र शर्मा, राजेश चंद्राकर, मनोज जोशी, अभिषेक गोलचा, गनपथ नाग, सदा सिंह, चंद्रहास ध्रुव, दीपक उपाध्याय, तरुण देशमुख, प्रहलाद, चंदर राम मांझी, पैतृक खलखो, पवन कोंद्रा, सियाराम सिंह, पुलिसकर्मी- प्रधान आरक्षक प्रफुल्ल शुक्ला, अशोक कुमार, राहुल प्रताप सिंह और इमैनुअल केरकेट्टा।

हमला खत्म करने के बाद हथियार भी लूटकर ले गए

नक्सलियों ने काफिले की गाड़ियों और मारे गए सुरक्षाकर्मियों के हथियारों को भी अपने कब्जे में लिया था। 25 सितंबर 2014 को NIA की चार्जशीट के मुताबिक हमले के बाद एक 9 एमएम पिस्टल के साथ 2 मैगजीन और 20 कारतूस, दो AK-47 राइफलें, 14 मैगजीन और 455 कारतूस और 10 हैंड ग्रेनेड और वॉकी टॉकी और अन्य डिवाइस लूटे थे।

इसके साथ ही घटनास्थल से मिले विस्फोटकों की फोरेंसिक जांच में अमोनियम नाइट्रेट, PETN और अमाटोल जैसे पदार्थों का इस्तेमाल सामने आया था।

भूपेश बघेल ने कहा था- मेरी जेब में साजिश के सबूत

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लंबे समय से इसे सिर्फ नक्सली हमला नहीं, बल्कि बड़ी साजिश बताते रहे हैं। वे यह भी कहते रहे हैं कि झीरम की साजिश के सबूत उनकी जेब में हैं। सीनियर जर्नलिस्ट सुनील कुमार इसी सवाल को सबसे अहम मानते हैं।

उनका कहना है कि भूपेश बघेल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और मुख्यमंत्री भी रहे हैं। जिस पार्टी ने झीरम में अपनी पूरी टॉप लीडरशिप का बड़ा हिस्सा खो दिया, उस पार्टी के एक जिम्मेदार नेता के तौर पर अगर उनके पास साजिश के सबूत हैं तो उन्हें सामने रखना चाहिए।

क्या 10 लोवर कैडर ही पूरी साजिश के जिम्मेदार थे?

झीरम का हमला कोई सामान्य नक्सली वारदात नहीं थी। निशाना कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा थी और हमले में प्रदेश कांग्रेस की शीर्ष राजनीतिक लीडरशिप खत्म हो गई। ऐसे में दूसरा बड़ा सवाल है कि क्या इतने बड़े हमले की पूरी योजना सिर्फ उन 10 लोगों तक सीमित थी, जिन्हें कोर्ट ने दोषी ठहराया है?

सीनियर जर्नलिस्ट सुदीप ठाकुर का कहना है कि पहली नजर में जिन 10 लोगों को दोषी ठहराया गया है, वे नक्सली संगठन के लोअर कैडर के लोग दिखाई देते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इतने बड़े राजनीतिक हमले की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के पीछे इससे बड़ा नेटवर्क था या नहीं?

मास्टर प्लान किस स्तर पर बना था? किसने टारगेट तय किया?

अगर हमला इतना बड़ा था तो स्वाभाविक सवाल है कि इसका मास्टर प्लान किस स्तर पर बना था? किसने टारगेट तय किया? काफिले की जानकारी कैसे मिली? इतने बड़े नेताओं की मौजूदगी की सूचना नक्सलियों तक कैसे पहुंची? हमले की पूरी तैयारी किस स्तर पर हुई?

NIA ने मामले में प्रतिबंधित CPI (माओवादी) के अलग-अलग कैडर और सैन्य इकाइयों की भूमिका की जांच की थी। लेकिन मौजूदा फैसला ट्रायल में शामिल 10 आरोपियों की दोषसिद्धि तक पहुंचा है। यहीं से सवाल उठता है कि क्या हमले के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क की तस्वीर सामने आई है?

इंटेलिजेंस सिस्टम कहां फेल हुआ?

वरिष्ठ पत्रकार सुदीप ठाकुर के मुताबिक झीरम मामले में सिर्फ नक्सलियों की भूमिका देखना पर्याप्त नहीं है। एक बड़ा सवाल इंटेलिजेंस फेलियर और सिस्टम की जिम्मेदारी का भी है।

इतना बड़ा राजनीतिक काफिला बस्तर के बेहद संवेदनशील इलाके से गुजर रहा था। नक्सलियों ने इतनी बड़ी संख्या में हमला किया। ऐसे में सवाल है कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई? क्या पहले से कोई इनपुट था? अगर था तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अगर इनपुट नहीं था तो इंटेलिजेंस सिस्टम कहां फेल हुआ? जो फैसला आया है उससे यह कही भी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं हई है?

सुदीप ठाकुर का कहना है कि मौजूदा फैसला सिस्टम के लैप्स और उसकी जिम्मेदारी की तस्वीर साफ नहीं करता है।

बड़े नक्सली नेताओं नहीं हुई पूछताछ

झीरम में मारे गए महेंद्र कर्मा के परिवार की ओर से भी जांच को लेकर सवाल उठते रहे हैं। सीनियर जर्नलिस्ट सुदीप ठाकुर के कहा कि महेंद्र कर्मा की बेटी ने भी सवाल उठाया है कि घटना के सबसे पहले वे घटनास्थल पर पहुंची थी। लेकिन NIA ने उनसे भी पूछताछ नहीं की है। इसके साथ ही कई ऐसे लोगों को और गवाह थे जिनसे जांच के दौरान NIA ने पूछताछ के लिए कभी बुलाया ही नहीं।

4,184 पेज की जांच आयोग की रिपोर्ट, अब तक सार्वजनिक नहीं

झीरम की कहानी में सबसे दिलचस्प और अब तक अनसुलझे अध्यायों में से एक है न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट। 2013 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में जांच आयोग बनाया था। आयोग ने कई साल तक सुनवाई की। 2021 में करीब 4,184 पेज की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी गई।

लेकिन रिपोर्ट पेश होने के बाद नया विवाद शुरू हो गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि रिपोर्ट अधूरी है, इसलिए इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

इसके बाद आयोग को नए अध्यक्ष और सदस्य के साथ आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। जस्टिस सतीश के. अग्निहोत्री को नया अध्यक्ष और जस्टिस जी. मिन्हाजुद्दीन को सदस्य बनाया गया। जांच के दायरे में नए बिंदु भी जोड़े गए। लेकिन इसके खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंच गया।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2022 में पुनर्गठित जांच आयोग के कामकाज पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी। यानी झीरम की एक जांच NIA के स्तर पर चली, दूसरी न्यायिक आयोग के स्तर पर। दोनों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी चलते रहे। लेकिन आम लोगों के सामने पूरी तस्वीर अब भी साफ नहीं है।

10 को सजा, लेकिन 33 अब भी फरार

कोर्ट ने प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा पुनेम, मोडियम मुक्का, मंडवी कोसा कवासी उर्फ कोसाराम, आयाता मरकाम, मड़ाकामी देवा, जोगा मड़ाकामी, बंजामी सन्ना उर्फ चामरू उर्फ डेंगा और महादेव नाग को दोषी माना है।

मामले में नामजद कई अन्य आरोपी अब भी फरार हैं। करीब 33 आरोपी अदालत की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे आरोपी भी हैं, जिन्होंने बाद में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और तेलंगाना में सरेंडर कर दिया।

जांच रिकॉर्ड के मुताबिक, थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी घटना के समय माओवादी संगठन की क्षेत्रीय कमान (SRUC) में सीनियर कमांडर था। वहीं, बारसे सुक्का उर्फ देवा दरभा डिवीजन कमेटी का सचिव रहा और बाद में बटालियन-1 का कमांडर बना। जांच में दोनों की भूमिका झीरम हमले से जुड़ी बताई गई है।

NIA ने 23 दिसंबर 2023 को जारी वांटेड इश्तहार में देवजी और देवा समेत 19 नक्सलियों की जानकारी सार्वजनिक की थी। इसमें देवजी का नाम और फोटो भी शामिल था। देवजी ने 24 फरवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर किया, जबकि देवा ने 2 जनवरी 2026 को तेलंगाना में सरेंडर किया। सरेंडर के बाद थिप्पिरी तिरुपति देवजी ने मई में इंटरमीडिएट सेकंड ईयर की तेलुगु परीक्षा भी दी थी। आरोप है कि इस मामले में पुलिस ने अब तक उससे पूछताछ नहीं की है।

मई 2026 में देवजी ने 12वीं की परीक्षा दी थी।

मई 2026 में देवजी ने 12वीं की परीक्षा दी थी।

इस मामले में कट्कम सुदर्शन को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन 2023 में उसकी मौत हो गई। वहीं, सबसे बड़ा वांछित आरोपी मुपल्ला लक्ष्मणा राव उर्फ गणपति अब तक पकड़ से बाहर है। घटना के समय वह CPI (माओवादी) का महासचिव था।

Continue Reading

कोरबा

रबी सीजन में टोकन और क्यूआर कोड से उर्वरक वितरण शुरू

Published

on

नई डिजिटल व्यवस्था से खाद की उपलब्धता और बिक्री पर रहेगी निगरानी

कोरबा 05 नवंबर 2026। रबी सीजन 2026-27 में रासायनिक उर्वरकों का पारदर्शी और सुव्यवस्थित वितरण सुनिश्चित करने के लिए जिले में आज से ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ (एफएफएस) सॉफ्टवेयर के माध्यम से टोकन आधारित व्यवस्था शुरू की गई है। इसके तहत किसान मोबाइल ऐप से खाद की प्री-बुकिंग कर ई-टोकन प्राप्त कर सकते हैं। दुकान पर टोकन का क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद उर्वरक दिया जाएगा।

नई व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को समय पर उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना, वितरण में पारदर्शिता बढ़ाना और कालाबाजारी पर रोक लगाना है। एफएफएस सॉफ्टवेयर के जरिए विक्रेताओं के स्टॉक, उर्वरक की प्राप्ति, दैनिक बिक्री और शेष उपलब्धता का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। यूरिया, डीएपी, एसएसपी, एमओपी, एनपीके सहित अन्य उर्वरकों की बिक्री और स्टॉक की जानकारी के आधार पर अधिकारी मांग, आपूर्ति और वितरण की नियमित समीक्षा कर सकेंगे।
जिले के किसान आधार कार्ड या फार्मर आईडी की सहायता से ऐप में लॉगिन कर सकते हैं। ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। किसान घर बैठे खाद की प्री-बुकिंग कर सकते हैं। बुकिंग के बाद 48 घंटे के भीतर संबंधित दुकान पर टोकन का क्यूआर कोड स्कैन कराना जरूरी होगा। निर्धारित समय में स्कैन नहीं कराने पर बुकिंग स्वतः निरस्त हो जाएगी। किसान कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से भी टोकन प्राप्त कर सकते हैं।
आज मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-टोकन जारी किए गए। नई प्रक्रिया के तहत उर्वरक प्राप्त करने वाले किसानों ने व्यवस्था को सहज बताया। इसके सुचारू संचालन के लिए कृषि विभाग और सहकारी समितियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है तथा किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
उप संचालक कृषि ने जिले के किसानों से एफएफएस ऐप के माध्यम से ही खाद की बुकिंग और खरीदी करने की अपील की है। ऐप पर टोकन बनाने में किसी प्रकार की समस्या आने पर किसान नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या सहकारी समिति के अधिकारियों-कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं।

Continue Reading

कोरबा

सेवा सेतु से बढ़ी शासकीय सेवाओं तक पहुंच, नागरिकों को मिल रही सुविधा

Published

on

आवेदन के तीन दिन में मिला आय प्रमाण पत्र, सेवा सेतु से आसान हुई राह

समय और धन दोनों बचे, तीन दिन में मिल गया प्रमाण पत्र” – सुश्री पायल नेटी

कोरबा  05 नवम्बर 2026। आवश्यक शासकीय दस्तावेज बनवाने के लिए पहले नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने, बार-बार आने-जाने और अपना समय व धन खर्च करने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। छत्तीसगढ़ शासन की सेवा सेतु पहल से शासकीय सेवाओं तक पहुंच आसान हो रही है। अब च्वाइस सेंटर के माध्यम से आवेदन कर आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक बन रही है।
पाली तहसील अंतर्गत ग्राम नांनबांका निवासी सुश्री पायल नेटी, पुत्री भगवान सिंह नेटी, को भी इस सुविधा का लाभ मिला। उन्होंने 30 सितंबर को आवश्यक दस्तावेजों के साथ ग्राम सुतर्रा स्थित अशोक च्वाइस सेंटर के माध्यम से आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। आवेदन के महज तीन दिन बाद, 3 अक्टूबर को उनका आय प्रमाण पत्र जारी हो गया। कम समय में प्रमाण पत्र मिलने से उन्हें अनावश्यक भागदौड़ और कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली।
पायल नेटी अपने अनुभव साझा करते हुए बताती हैं, “पहले आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कार्यालयों में जाना पड़ता था। आने-जाने में समय लगता था और पैसे भी खर्च होते थे। अब च्वाइस सेंटर के माध्यम से आवेदन करने पर मुझे केवल तीन दिन में आय प्रमाण पत्र मिल गया। इसके लिए न तो अनावश्यक भागदौड़ करनी पड़ी और न ही बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। इससे मेरे समय और धन दोनों की बचत हुई है।”
पायल के अनुसार, सेवा सेतु के माध्यम से जरूरी शासकीय दस्तावेज प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले से अधिक आसान हुई है। च्वाइस सेंटर के जरिए आवेदन की सुविधा मिलने से लोगों को अपने आवश्यक कार्यों के लिए बार-बार कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे शासकीय सेवाओं तक आम नागरिकों की पहुंच बढ़ रही है और उनका समय भी बच रहा है।
सेवा सेतु की इस पहल की सराहना करते हुए पायल नेटी एवं उनके पिता भगवान नेटी ने बताया सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से शासकीय सेवाओं का लाभ लेना पहले की तुलना में काफी सरल हुआ है। आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करने पर महज तीन दिनों में आय प्रमाण पत्र जारी होना उनके लिए सुखद अनुभव रहा। उन्होंने इस सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताते हुए कहा, “सरकार की इस पहल से आम नागरिकों को बड़ी राहत मिल रही है। कम समय में जरूरी प्रमाण पत्र मिल जाने से भागदौड़ कम हुई है और समय व धन की बचत भी हो रही है। मैं चाहती हूं कि ऐसी सुविधाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे। जनसुविधा को प्राथमिकता देने वाली इस पहल के लिए उन्होंने  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।

Continue Reading

कोरबा

आयुष्मान योजना में अनियमितता पर हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल का पंजीयन एक वर्ष के लिए निलंबित

Published

on

अस्पताल को नए मरीज भर्ती नहीं करने और योजना से संबंधित प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश

कोरबा 05 नवंबर 2026। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत मरीजों को गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा अस्पतालों की नियमित निगरानी एवं जांच की जा रही है। इसी क्रम में 30 सितंबर 2026 को कटघोरा स्थित हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल ( HOSP22P147364) का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान जांच दल ने अस्पताल में कई अनियमितताएं पाईं। इनमें मरीजों के परिजनों से नगद राशि लिए जाने संबंधी बयान, भर्ती अभिलेखों में गलत मोबाइल नंबर दर्ज होना, भर्ती फाइलों में दर्ज 68 मोबाइल नंबरों का गलत अथवा उपयोग में नहीं होना, नवजात शिशुओं के उपचार से संबंधित अनियमितताएं तथा पैथोलॉजी और अल्ट्रासोनोग्राफी से जुड़े अभिलेख उपलब्ध न होना शामिल है।
इन अनियमितताओं के संबंध में अस्पताल को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया था। अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक एवं तथ्यों के अनुरूप नहीं पाया गया। मरीजों से संबंधित अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आईं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस. एन. केशरी ने बताया कि अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा जुलाई 2026 में जारी दिशा-निर्देशों की कंडिका 6.4.1 के तहत कार्रवाई की गई है। इसके अंतर्गत हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल, कटघोरा का आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पंजीयन एक वर्ष के लिए निलंबित किया गया है। इस अवधि में अस्पताल को योजना के तहत नए मरीज भर्ती नहीं करने तथा अस्पताल एवं परिसर से योजना से संबंधित प्रचार-प्रसार सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

Continue Reading

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677