रायपुर, एजेंसी। झीरम घाटी हमले के 13 साल बाद 16 सितंबर को जगदलपुर की विशेष NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। इस मामले की सुनवाई के दौरान दर्ज गवाहियों में हमले से पहले और घटना के दौरान की कई घटनाक्रम की जानकारी सामने आई हैं।
कोर्ट के आदेश में दर्ज नंदकुमार पटेल के ड्राइवर दशाराम सिदार की गवाही में कवासी लखमा के मोबाइल पर बार-बार फोन आने और गोंडी में बातचीत का जिक्र है। दशाराम के बयान के मुताबिक, बातचीत के दौरान लखमा 10-15 कह रहे थे। तब नंदकुमार ने कहा कि, हिंदी में बात करो। 10-15 क्या है, पूछने पर लखमा ने इसे डीजल-डीजल बताया था।
दशाराम की गवाही के अनुसार, हमले के दौरान नक्सलियों ने नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल और कवासी लखमा को सड़क के किनारे बैठाया और चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद लखमा और नक्सली विनोद के बीच गोंडी में बातचीत हुई। करीब एक घंटे बाद नंदकुमार पटेल और दिनेश पटेल के हाथों को बांधकर उन्हें गोली मार दी गई।
हालांकि, कोर्ट के आदेश में लखमा के फोन कॉल या गोंडी में बातचीत को उनकी साजिश में भूमिका साबित करने वाला अलग निष्कर्ष नहीं बताया गया है। लखमा इस मामले में घायल गवाह के तौर पर पेश हुए थे। उनकी गवाही में उन्होंने बताया था कि नक्सलियों ने नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल, उनका और ड्राइवर का परिचय पूछा था। इसके बाद उन्हें और ड्राइवर को छोड़ दिया, तो दोनों बाइक से दरभा थाने आ गए।
घटना के दौरान मौके पर मौजूद ट्रक ड्राइवर की गवाही में महेंद्र कर्मा की बेहरमी से की गई हत्या का भी जिक्र है। गवाह के मुताबिक नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा को हाथ ऊपर करवाकर सड़क पर खड़ा किया और फिर जंगल की तरफ ले गए। गवाह ने दावा किया कि उसने कुछ नक्सलियों को कर्मा को पत्थर, बंदूक और लात-घूंसों से मारते देखा था।
2013 में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा रैली के दौरान नक्सलियों ने जंगल में हमला किया था।
लखमा ने अपनी गवाही में क्या बताया?
कवासी लखमा इस मामले में घायल गवाह के तौर पर कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने बताया कि सुकमा में दोपहर करीब 12 बजे से 2 बजे तक कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की रैली थी। इसमें वे, नंद कुमार पटेल, अजीत जोगी, विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।
रैली खत्म होने के बाद सभी को केशलूर में सभा में शामिल होना था। खाना खाने के बाद करीब 3:25 बजे वे केशलूर के लिए रवाना हुए। झीरम घाटी के पास पहुंचने पर ऊपर की तरफ से बम फटने की आवाज आई। उनकी गाड़ी के आगे फॉलोगार्ड की गाड़ी और उसके आगे एक ट्रक फंसा था, इसलिए काफिला आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
इसी दौरान गोली या विस्फोट के छर्रे से उनकी गाड़ी का कांच टूट गया और कांच का टुकड़ा उनके दाहिने कान में लगा। इसके बाद लखमा, नंद कुमार पटेल, उनके बेटे और ड्राइवर गाड़ी से उतरकर घाटी की तरफ जाकर छिप गए। तभी नक्सलियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
लखमा के मुताबिक, नक्सली गोंडी में चिल्लाकर कह रहे थे कि वहां क्यों छिपे हो और पुलिस वाले हथियार छोड़ दें। लखमा ने भी गोंडी में जवाब दिया कि वहां कोई पुलिस वाला नहीं है, फिर बंदूक कौन छोड़ेगा।
महिला नक्सली और विनोद
लखमा ने आगे अपने बयान में बताया कि इसके बाद नक्सली चारों को पकड़कर ऊपर की तरफ ले गए। वहां मौजूद एक महिला नक्सली कह रही थी कि ऊपर से आदेश आने और विनोद दादा के कहने के बाद ही उन्हें छोड़ा जाएगा।
करीब 15-20 मिनट बाद एक नक्सली वहां आया और सबसे पहले नंद कुमार पटेल से उनका परिचय पूछा। पटेल ने बताया कि वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। इसके बाद उनके बेटे, लखमा और ड्राइवर से भी परिचय पूछा गया।
लखमा ने बताया कि नीचे सड़क पर उनके काफिले की तरफ लगातार गोलियां चल रही थीं। करीब 15 मिनट बाद विनोद नाम का नक्सली वहां आया। उसने पूछा कि क्या वे उसे जानते हैं। जब सभी ने मना किया तो उसने अपना नाम विनोद बताया और कहा कि वहां से भागने की कोशिश न करें, वरना नक्सली उन्हें मार देंगे।
लखमा ने नक्सलियों को गोंडी में जवाब दिया कि वहां कोई पुलिस वाला नहीं है, फिर बंदूक कौन छोड़ेगा।
लखमा और ड्राइवर को छोड़ दिया, नंद कुमार पटेल और दिनेश को नहीं
लखमा के बयान के अनुसार इसके बाद नंद कुमार पटेल ने विनोद से पूछा कि वह कौन है। इस पर विनोद नाराज हो गया और उसने एक नक्सली से कहा कि इन्हें बांध दो। इसके बाद नंद कुमार पटेल और उनके बेटे को रस्सी से बांध दिया गया। विनोद वहां से उस तरफ चला गया, जहां गोलियां चल रही थीं।
लखमा के अनुसार, करीब एक घंटे तक गोलीबारी होती रही। इसके बाद 40-50 नक्सली वहां आए और सभी को उठाकर ऊपर ले जाने लगे। करीब 10 कदम चलने के बाद उन्हें फिर बैठा दिया गया।
कुछ देर बाद नक्सलियों ने लखमा और ड्राइवर को वहां से जाने के लिए कहा। लखमा ने कहा कि वे चारों साथ जाएंगे। लेकिन नक्सलियों ने मना कर दिया और उन पर बंदूक तान दी। डर के कारण लखमा और ड्राइवर वहां से सड़क की तरफ आ गए।
सड़क पर पहुंचने के बाद उन्हें फिर गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद दोनों सड़क पर पड़ी एक मोटरसाइकिल लेकर दरभा थाने पहुंचे, जहां पहले से काफी भीड़ जमा थी।
महेंद्र ने कहा- हम सरेंडर कर रहे
झीरम की गवाहियों में महेंद्र कर्मा की हत्या का विवरण भी है। मलकीत सिंह गेंदू ने बताया कि गोलीबारी के बीच महेंद्र कर्मा ने लोगों से नीचे लेटने को कहा। बाद में जब माओवादियों ने गोलीबारी रोककर लोगों को बाहर आने के लिए कहा तो कर्मा ने अपनी पहचान बताते हुए कहा कि वे महेंद्र कर्मा हैं और गोलीबारी बंद करने की बात कही।
गवाहों के मुताबिक, माओवादियों ने उन्हें पकड़ लिया और जंगल की ओर ले गए। गवाह फूलोदेवी नेताम ने बताया कि उन्होंने गोलीबारी रोकने के लिए आवाज लगाई थी। इसके बाद कर्मा ने भी सामने आकर कहा कि वह आत्मसमर्पण कर रहे हैं। गवाह के अनुसार, माओवादियों ने कर्मा के हाथ ऊपर करवाए और उन्हें जंगल की तरफ ले गए थे। और उनकी बेरहमी से हत्या की और उनके शव के सामने नाचते रहे।
झीरम में हमले के दौरान फंसे ट्रक ड्राइवर की गवाही में महेंद्र कर्मा की बेरहमी से की गई हत्या का जिक्र है।
ट्रक में बैठे लोगों ने भी देखा घटनाक्रम
फाल्गुन सिंह ठाकुर ने गवाही में बताया कि वह ट्रक से झीरम घाटी से गुजर रहा था। फायरिंग में ट्रक के टायर और केबिन पर गोलियां लगीं। कुछ लोगों को गोली लगी। इसके बाद नक्सली ट्रक के पास आए और पूछा कि वे पुलिस वाले हैं या नहीं। मोबाइल छीनने के बाद उन्हें जमीन पर लेटने को कहा।
गवाही के मुताबिक बाद में नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा को हाथ ऊपर करवाकर सड़क पर खड़ा किया और फिर जंगल की तरफ ले गए। गवाह ने दावा किया कि उसने कुछ नक्सलियों को कर्मा को पत्थर, बंदूक और लात-घूंसों से मारते देखा था।
नाले किनारे रिहर्सल, वायरसेट पर सूचना मिलते ही शुरू हुई फायरिंग
झीरम घाटी हमले की सुनवाई के दौरान अदालत में दर्ज बयानों में नक्सलियों की तैयारी, टीमों की तैनाती और हमले के दौरान की गई कार्रवाई का सिलसिलेवार जिक्र आया है। अभियुक्त चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना के बयान में दावा किया गया है कि घटना से करीब एक सप्ताह पहले नक्सली टीमों ने नाले के किनारे सुबह-शाम रिहर्सल की थी। वहीं दूसरे बयान में टीसीओसी की बैठक में अलग-अलग इलाकों की जिम्मेदारी बांटे जाने की बात सामने आई है।
टीसीओसी बैठक में बांटी गई थी जिम्मेदारी
बयान के मुताबिक झीरम घटना से पहले टीसीओसी की बैठक हुई थी। इसमें देवजी, श्याम, रमेश, वेंकटेश, मेनक्का, माधवी, हिड़मा और सुरेंदर समेत अन्य लोग शामिल हुए थे। बैठक में भर्ती, ट्रेनिंग, हमला, एजुकेशन डिप्लॉयमेंट और दक्षिण क्षेत्र की जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई।
इसमें तय किया गया कि किस इलाके में कौन-सी कंपनी जाएगी। वेंकटेश को गंगालूर और श्याम व सुरेंदर को दरभा डिविजन की जिम्मेदारी दी गई। दरभा डिविजन में सीआरसी की प्लाटून, कंपनी-02 के दो सेक्शन और दरभा डिविजन के लोगों को मिलाकर हमले के लिए टीम बनाई गई।
इसकी जिम्मेदारी सुरेंदर, जयलाल, देवा, विनोद और श्याम को दी गई थी। हालांकि, जिस साक्षी ने यह जानकारी दी, उसने प्रतिपरीक्षण में स्वीकार किया कि वह झीरम घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था।
पीडिया के जंगल से दरभा घाटी तक पहुंचे
अभियुक्त चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना के बयान के अनुसार, मई 2013 के पहले सप्ताह में नक्सली पीडिया के जंगल में मौजूद थे। वहां प्लाटून कमांडर हेमला मासा ने बताया कि गणेश अन्ना के कहने पर सभी को दरभा घाटी जाना है।
चैतु के मुताबिक वह अपनी इंसास राइफल के साथ, ज्योति प्रमिला 12 बोर बंदूक और हेमला मासा एके-47 लेकर निकले। रीता तेलाम के पास हैंड ग्रेनेड था। अन्य लोग भी अपने हथियारों के साथ पीडिया से निकले और गम्पुर पहुंचे।
वहां जयलाल कंपनी कमांडर दक्षिण बस्तर की दो प्लाटून लेकर आया, जिनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल थे। इसके बाद टीम डेंगुर, पालनार, गरियुम, ताड़बोड़ा होते हुए कुसुम गांव पहुंची। यहां ओडिशा और दरभा घाटी की नक्सली पार्टी के करीब 150 लोग मौजूद थे।
गांव वालों को चावल लेकर मीटिंग में बुलाने का बयान
रामू बघेल के बयान में भी नक्सलियों की गतिविधियों और ग्रामीणों को उनके लिए काम करने के लिए बुलाने का जिक्र है। उसने बताया कि उसके गांव में सोनाधर, विनोद, सुमित्रा, फूलो और लक्ष्मण ने बैठक लेकर चावल और पैसे की मांग की थी। इसके बाद गांव से चावल लेकर लोग कांदानार में महादेव के पास पहुंचे। फिर उन्हें भडरीमडु की बैठक में वही चावल लेकर आने को कहा गया।
रामू के मुताबिक जंगल में सोनाधर, विनोद, डोकरा, लक्ष्मण, कांदानार का महादेव और चांदामेटा का बोटी मौजूद थे। बाद में उसे और दूसरे ग्रामीणों को एलंगनार के पहले रोककर खाना बनाने के लिए कहा गया। नक्सली सड़क की ओर चले गए।
कर्मा के शरीर पर कम से कम 69 घाव दर्ज किए गए
कोर्ट के आदेश में दर्ज पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, महेंद्र कर्मा के शरीर पर कई गंभीर चोटें थीं। सिर पर धारदार हथियार के घाव, शरीर पर चाकू के घाव, चेहरे पर चोट, पसलियों और अंदरूनी अंगों को नुकसान और पीठ में गोली लगने के निशान मिले।
पोस्टमॉर्टम में दोनों गोली के घाव पीठ की तरफ बताए गए। गोली लगने से पसलियों और फेफड़ों को नुकसान हुआ था। इसके अलावा शरीर के कई हिस्सों में धारदार हथियार और दूसरी चोटों के निशान थे।।
पोस्टमॉर्टम में कर्मा के शरीर पर कम से कम 69 घाव दर्ज किए गए थे। गवाह ने यह भी बताया कि माओवादियों ने कर्मा को मारने के बाद उनके शव पर चाकू से वार किए और उनके आसपास नारे लगाए।
नंदकुमार पटेल को 2 गोलियां मारी गई थी
तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दो गोली के घाव मिले। एक गोली बाएं कंधे की तरफ से लगी और अंदर जाकर पसलियों, फेफड़े और दिल के आसपास के हिस्से को नुकसान पहुंचा।
दूसरी गोली बाएं पेट की तरफ लगी और अंदर आंत, पेट और लीवर तक पहुंची थी। रिपोर्ट में मौत का कारण गोली लगने से हुए शॉक और अधिक रक्तस्राव को बताया गया था।
दिनेश पटेल को सिर पर धारदार हथियार और पीठ में गोली
नंदकुमार पटेल के बेटे दिनेश पटेल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सिर पर कई धारदार हथियार के घाव मिले थे। सिर की हड्डी टूटने और मस्तिष्क को गंभीर नुकसान का जिक्र है। इसके अलावा पीठ में गोली का घाव था, जिससे पसली और दायां फेफड़ा प्रभावित हुआ था। जांघ पर भी चाकू से चोट के निशान मिले। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, सिर और गोली की चोटें मौत के लिए पर्याप्त थीं।
गाड़ियों पर 206 गोलियों के निशान
जांच में वाहनों पर करीब 206 गोलियों के निशान मिलने की बात भी कोर्ट के आदेश की रिपोर्टिंग में सामने आई है। हमले में बड़ी संख्या में हथियार भी लूटे गए थे, जिनमें AK-47, INSAS, 9 एमएम पिस्टल और SLR शामिल थे।
रायपुर, 20 सितंबर 2026। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जापान में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे भारतीय दल के सभी खिलाडि़यों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
श्री चौधरी ने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करना प्रत्येक खिलाड़ी के लिए गौरव का विषय है। भारतीय खिलाड़ी अपनी प्रतिभा, मेहनत, अनुशासन और खेल भावना के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का गौरव बढ़ाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने भारतीय दल के सभी खिलाडि़यों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि वे पूरे आत्मविश्वास के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लें और अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देश का नाम रोशन करें।
BMC छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव-2026 में वित्त मंत्री ने कहा-विकसित भारत के लक्ष्य के लिए स्वस्थ युवा आबादी सबसे बड़ी ताकत
नवा रायपुर में देशभर से आए कैंसर विशेषज्ञों का किया स्वागत, चिकित्सा क्षेत्र में शोध और विशेषज्ञ सेवाओं को बढ़ावा देने पर दिया जोर
रायपुर, 20 सितम्बर 2026। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी आज नवा रायपुर में बाल्को मेडिकल सेंटर, eCancer तथा टाटा मेमोरियल सेंटर द्वारा आयोजित चतुर्थ वार्षिक BMC छत्तीसगढ़ कैंसर कॉन्क्लेव-2026 में शामिल हुए। कॉन्क्लेव की थीम “Restoring Balance to Cancer Care” पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कैंसर केयर, स्वास्थ्य सेवाओं की भविष्य की चुनौतियों और देश की युवा आबादी को स्वस्थ बनाए रखने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है। देश की औसत आयु करीब 29 वर्ष है, जबकि छत्तीसगढ़ की औसत आयु करीब 24 वर्ष है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यह युवा आबादी भारत की आर्थिक प्रगति की सबसे बड़ी ताकत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इस युवा शक्ति का स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि आने वाले 10-20 वर्षों में भारत की जनसांख्यिकी में तेजी से बदलाव होगा और आबादी की औसत आयु बढ़ेगी। ऐसे में स्वास्थ्य क्षेत्र के सामने बड़ी चुनौती होगी कि देश आर्थिक रूप से विकसित होने से पहले अस्वस्थ न हो जाए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मानव संसाधन किसी भी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की बुनियादी जरूरत है। इसलिए स्वास्थ्य क्षेत्र में समय रहते तैयारी, बेहतर चिकित्सा सुविधाओं, विशेषज्ञ सेवाओं और शोध को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है।
स्वस्थ आबादी विकसित भारत की आधारशिला
श्री चौधरी ने कहा कि आर्थिक विकास की गति के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की आर्थिक विकास यात्रा की रीढ़ है, लेकिन इस आबादी को स्वस्थ रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के साथ-साथ जागरूकता, समय पर जांच, शुरुआती पहचान और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता पर निरंतर काम किया जाना चाहिए।
वित्त मंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के गठन के शुरुआती वर्षों में पूरे प्रदेश में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। उन्होंने बताया कि लगभग 25-26 वर्ष पहले राज्य पीएमटी में करीब 50वीं रैंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए भी मेडिकल सीट प्राप्त करना कठिन होता था, क्योंकि पूरे राज्य में रायपुर में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। उन्होंने कहा कि उस स्थिति से आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ ने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार किया है और आने वाले दो वर्षों में प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 20 से अधिक होने की दिशा में राज्य आगे बढ़ रहा है।
नवा रायपुर में देशभर से आए विशेषज्ञों का स्वागत
श्री चौधरी ने बाल्को मेडिकल सेंटर और सर्जिकल रिसर्च फाउंडेशन की ओर से छत्तीसगढ़ तथा आसपास के क्षेत्रों के लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकों और संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. यशवंत कश्यप, डॉ. दिवाकर पांडे, डॉ. आलोक कुमार स्वाइन और डॉ. अभिनव इंगले सहित आयोजन से जुड़े चिकित्सकों को धन्यवाद दिया तथा देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों का नवा रायपुर में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर छत्तीसगढ़ की ग्रीन कैपिटल सिटी है और यह एक ग्रीनफील्ड सिटी के रूप में विकसित की जा रही है। नवा रायपुर के नियोजित विकास, हरित क्षेत्र और मनोरंजन सुविधाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने देशभर से आए चिकित्सकों से कॉन्क्लेव के साथ-साथ शहर को भी देखने और समझने का आग्रह किया।
वित्त मंत्री ने कहा कि नवा रायपुर के विकास में स्वास्थ्य, शिक्षा, अनुसंधान और आधुनिक संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे आयोजन प्रदेश में चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करते हैं तथा कैंसर उपचार के क्षेत्र में नई तकनीकों और बेहतर उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं।
कॉन्क्लेव में देश के विभिन्न हिस्सों से आए चिकित्सक, कैंसर विशेषज्ञ और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर चिकित्सा क्षेत्र में कैंसर केयर को अधिक प्रभावी, संतुलित और मरीज-केंद्रित बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रशिक्षक सौरभ कुमार जैन एवं कल्पना सिंह ने शिक्षकों को सिखाए प्रभावी कक्षा प्रबंधन के गुण
कोरबा, 20 सितंबर 2026। खरहरकुड़ा, मडवारानी स्थित नितेश कुमार मेमोरियल लायंस पब्लिक स्कूल में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), भुवनेश्वर के उत्कृष्टता केंद्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 19 और 20 सितंबर को आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य विषय ‘प्रभावी कक्षा प्रबंधन’ (Classroom Management) रहा, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में सैनिक स्कूल अंबिकापुर के संस्कृत शिक्षक सौरभ कुमार जैन एवं डीपीएस की प्राचार्या श्रीमती कल्पना सिंह ने मुख्य स्रोत व्यक्ति (Resource Persons) के रूप में शिरकत की। दोनों विशेषज्ञों ने अपने व्यावहारिक अनुभवों और गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण और कक्षा प्रबंधन की बारीकियों से अवगत कराया।
सौरभ कुमार जैन ने विभिन्न गतिविधियों और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए बताया कि कक्षा प्रबंधन केवल अनुशासन बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए एक अनुकूल और सकारात्मक वातावरण तैयार करने की सतत प्रक्रिया है। उन्होंने शिक्षकों को विद्यार्थियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझते हुए विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों, समय प्रबंधन और संसाधनों के सही उपयोग के गुर सिखाए।
वहीं, श्रीमती कल्पना सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कक्षा में सकारात्मक वातावरण निर्मित करने, विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के व्यावहारिक उपाय साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के चेयरमैन पीएमजेएफ़ लायन डॉ. राजकुमार अग्रवाल तथा प्राचार्या शोमा सोनी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए इस तरह के आयोजनों को शिक्षकों के पेशेवर विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और आए हुए स्रोत व्यक्तियों व प्रतिभागी शिक्षकों का मार्गदर्शन व उत्साहवर्धन किया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने विभिन्न interactive गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया और कक्षा प्रबंधन से जुड़े व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किए। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।