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कोरबा

इरकॉन व राइट कंपनी और रेलवे प्रबंधन की वादाखिलाफी से कृष्णा नगर के वार्डवासियों में आक्रोश, आंदोलन की दी चेतावनी

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कोरबा/दीपका। दीपका, गेवरा-पेंड्रा रेल लाइन से जोड़ने वाली कृष्णा नगर में एसईसीएल के कोयला लदान (कोल लोडिंग) हेतु बिछाई जा रही रेल लाइन के निर्माण कार्य में इरकॉन व राइट कंपनी और रेलवे प्रबंधन द्वारा की जा रही वादाखिलाफी को लेकर वार्डवासियों में भारी नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है ।

पूर्व में कृष्णा नगर के निवासियों और राजस्व विभाग के समक्ष अधिकारी की उपस्थिति में मौखिक रूप से रेलवे प्रबंधन के बीच यह स्पष्ट समझौता व भरोसा दिलाया गया था कि वार्ड की मूलभूत सुविधाओं जैसे पक्की सड़क, नाली, मंदिर एवं सांस्कृतिक स्टेज भवन का निर्माण कार्य पहले पूरा किया जाएगा, उसके बाद ही रेल लाइन बिछाने के काम को प्राथमिकता दी जाएगी, परंतु इरकॉन व राइट कंपनी द्वारा समझौते और वार्डवासियों के मौलिक अधिकारों की खुलेआम अनदेखी कर निर्माण कार्य तेजी से कराया जा रहा है ।

इसी संदर्भ में कृष्णा नगर वार्ड क्रमांक 07 के निवासियों की एक विशेष एवं आवश्यक बैठक आहुत की गई। बैठक में वार्ड की लंबित समस्याओं और अधूरे पड़े विकास कार्यों पर गहन चर्चा-परिचर्चा की गई ।

बैठक में उठाई गईं प्रमुख समस्याएँ

  1. अधूरा सड़क व ब्रिज निर्माण:- शासकीय माध्यमिक शाला से दीपका की ओर जाने वाली रेल लाइन के बीच आवागमन हेतु अंडरग्राउंड ब्रिज का निर्माण तो किया गया है, परंतु स्कूल से लेकर ब्रिज तक की सड़क का निर्माण कार्य इरकॉन व राइट कंपनी द्वारा आधा-अधूरा छोड़ दिया गया है ।
  2. नालियों का निर्माण शून्य:- वार्ड में जल निकासी हेतु नालियों का निर्माण कार्य अब तक शुरू ही नहीं किया गया है, जिससे वार्ड में गंदगी और जलजमाव की समस्या बनी हुई है ।
  3. दीपका बस्ती मार्ग पर उपेक्षा:- कृष्णा नगर को दीपका बस्ती से जोड़ने वाले रास्ते (ट्रांसफार्मर के समीप) स्थित दूसरे अंडर ब्रिज का कार्य भी पूरा हो गया है, लेकिन इरकॉन व राइट कंपनी के द्वारा सड़क का काम अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों का आवागमन बेहद जोखिमभरा हो गया है ।

ज्ञापन सौंपने एवं आंदोलन का निर्णय

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि इन सभी जनसमस्याओं व मौलिक अधिकारों की पुर्नबहाली हेतु रेलवे प्रबंधन एवं संबंधित जिम्मेदार विभागों को जल्द ही एक ज्ञापन सौंपा जाएगा ।

वार्डवासियों ने शासन-प्रशासन और रेलवे प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इरकॉन व राइट कंपनी द्वारा कृष्णा नगर की मूलभूत व्यवस्थाओं को शीघ्र सुनिश्चित नहीं किया गया तो वे आंदोलन के लिए मजबूरन विवश होना पड़ेगा। आंदोलन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति विधि-व्यवस्था व व्यवधान की संपूर्ण जिम्मेदारी रेलवे प्रबंधन एवं इरकॉन व राइट कंपनी की होगी ।

इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रमुख रूप से मूलचंद, मो. मंसूर, ललित महिलांगे , लक्ष्मण गुप्ता, मो. सरताज कुरैशी, कन्हैया, पवन गुप्ता, प्रभाष तांती, सोहन पंडित, मो. शमीम अंसारी, राधे बरेठ, सुनील शर्मा, शंभू लोहार, मो. अशरफ दुलार बेक, छोटेलाल, मीना थापा, गीता महंत, जगत बाई चौहान, उमा महंत, सोना गोस्वामी, सती देवी महंत, सीमा देवी शर्मा, बालमती बारिया, इफाना कुरैशी सहित बड़ी संख्या में कृष्णा नगर के वार्डवासी उपस्थित थे l

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कोरबा

दूरस्थ गांव में रोशनी की नई व्यवस्था, बरपाली में रात का आवागमन हुआ सहज

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सोलर लाइट से गांव की रातें रोशन हुईं, रात में आवागमन सुविधाजनक हुआ – ग्रामीण
कोरबा 03 अक्टूबर 2026। गांव में शाम ढलते ही जब अंधेरा रास्तों को घेर लेता है, तब छोटी दूरी तय करना भी सावधानी का काम बन जाता है। कोरबा जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में रात के समय प्रकाश की इसी जरूरत को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की राशि से सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था विकसित की जा रही है। कोरबा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम बरपाली के चौक में क्रेडा विभाग द्वारा सोलर हाईमास्ट लाइट स्थापित की गई है।
सोलर हाईमास्ट की सुविधा मिलने से पहले बरपाली चौक और आसपास का क्षेत्र शाम के बाद अंधेरे में डूब जाता था। जरूरी काम से निकलने वाले ग्रामीणों को रास्ता देखने में परेशानी होती थी। खेतों और घरों के आसपास जाने में सांप-बिच्छू तथा अन्य जीव-जंतुओं को लेकर भी सतर्क रहना पड़ता था। रात में आने-जाने का समय ग्रामीणों के लिए असुविधा वाला रहता था।
अब सोलर हाईमास्ट से चौक और आसपास के रास्तों में पर्याप्त रोशनी रहती है। सड़क स्पष्ट दिखाई देने से ग्रामीणों के लिए रात में आवागमन सुविधाजनक हुआ है। सौर ऊर्जा से चलने वाली इस व्यवस्था के लिए नियमित बिजली आपूर्ति की जरूरत नहीं होती और बिजली बिल का खर्च भी नहीं आता। बैटरी बैकअप के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर भी प्रकाश उपलब्ध रहने में मदद मिलती है।
ग्रामीणों ने  अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि, “पहले शाम होते ही चौक पर अंधेरा छा जाता था। अगर रात में किसी काम से बाहर निकलना पड़े तो मोबाइल की रोशनी या टॉर्च के सहारे रास्ता देखना पड़ता था। खेत की तरफ जाना हो तो हर कदम संभलकर रखना पड़ता था, क्योंकि घास और अंधेरे में सांप-बिच्छू दिखाई नहीं देते थे। अब चौक पर हाईमास्ट की रोशनी रहती है तो दूर से ही रास्ता साफ दिखाई देता है। घर से चौक तक आने-जाने में अब पहले जैसी परेशानी नहीं होती। बच्चों या परिवार के किसी सदस्य को रात में बाहर भेजना पड़े तो मन में भी ज्यादा चिंता नहीं रहती। सौर ऊर्जा से रोशनी मिलने से गांव की रातें काफी सुविधाजनक हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  का हम दिल से आभार व्यक्त करते हैं कि दूरस्थ गांव में हमारी जरूरत को समझकर रोशनी की यह सुविधा उपलब्ध कराई गई।”

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कोरबा

केज मछली पालन से रामलाल की आजीविका को मिला नया आधार

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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत डीएमएफ से मिले पांच केज, अब 87 हजार रुपये तक की कमाई
कोरबा, 03 अक्टूबर 2026। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम छातापखना निवासी रामलाल, पिता सुकलाल को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) से केज कल्चर के लिए पांच केज उपलब्ध कराए गए। पहले उनके पास रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं था और आय भी सीमित थी।

केज मिलने के बाद रामलाल ने मछली पालन शुरू किया। अब इस कार्य से उन्हें 87 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है। मछली पालन से मिली आय ने उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने और परिवार की आजीविका को बेहतर बनाने में मदद की है। रामलाल ने इस सहायता के लिए शासन और संबंधित विभागों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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असंगठित महतारी जतन योजना से मनतोसी चौहान को मिली 20 हजार रुपये की सहायता

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प्रसव के बाद बच्चे के पालन-पोषण में मिली आर्थिक मदद, महतारी वंदन योजना का भी मिल रहा लाभ
कोरबा, 03 अक्टूबर 2026। कोहड़िया के चारपारा निवासी मनतोसी चौहान को श्रम विभाग की असंगठित महतारी जतन योजना के अंतर्गत पहले बच्चे के जन्म पर 20 हजार रुपये की सहायता राशि मिली। इस राशि का उपयोग उन्होंने प्रसव के बाद बच्चे के पालन-पोषण में किया।
मनतोसी चौहान का असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल के अंतर्गत घरेलू कर्मकार के रूप में पंजीयन है। उनके पति वाहन चालक हैं। मनतोसी ने बताया कि उन्हें श्रम विभाग से योजना की जानकारी मिली थी। योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता से उन्हें बच्चे की देखभाल में मदद मिली। साथ ही, उन्हें महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है।
मनतोसी ने सहायता के लिए श्रम विभाग कोरबा और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि शासन की योजनाएं जरूरतमंद परिवारों को कठिन समय में संबल देती हैं।

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