रायपुर। रायपुर में दो दिन से जारी जनजातीय गौरव दिवस और अंतरराज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव का समापन हुआ। इस दौरान सीएम ने प्रदेश की बैगा, गुनिया, सिरहा जनजातियों को प्रति वर्ष पांच-पांच हजार रुपए सम्मान निधि के रूप में देने की घोषणा की है।
जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम के लिए कई राज्यों के कलाकार रायपुर पहुंचे। कार्यक्रम में सभी राज्यों के जनजातीय रंग देखने को मिले लेकिन त्रिपुरा के दल ने अपने ब्रू रियांग डांस से सभी को हैरान किया।
बोतल लेकर किया युवतियों ने डांस।
जबरदस्त बैलेंस का दिखाया हुनर
ब्रू-रियांग डांस के दौरान एक लड़की पीठ की दिशा में मुड़कर हाथों और पैरों से बैलेंस बना रही थी। इसके बाद उस लड़की पर एक और लड़की चढ़ गई। वह अपने पूरे भार से उस पर खड़ी थी। इतना ही नहीं ऊपर चढ़ी लड़की सिर पर बोतल और हाथों में थालियों को बैलेंस करते हुए डांस कर रही थी।
त्रिपुरा के जनजाति समुदाय के लोग वहां शादी के मौके पर नव वर वधु के सामने ये डांस करते हैं। इस नृत्य में प्रकृति की पूजा करने उसका आदर करने का संदेश नव दंपति को दिया जाता है।
CM साय ने की बड़ी घोषणाएं।
छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए बड़ी घोषणा
मुख्यमंत्री ने इस समापन कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य के जनजातीय समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बैगा, गुनिया, सिरहा लोगों के लिए मुख्यमंत्री सम्मान निधि दिए जाने की घोषणा की। इसके तहत उन्हें प्रति वर्ष 5 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने जनजातीय गांवों में धार्मिक और मांगलिक कार्य के लिए गांव-गांव में सरकारी खर्च से अखरा निर्माण विकास योजना शुरू करने का भी ऐलान किया। साथ ही जनजातीय समुदाय के शहीदों की प्रतिमाएं चिन्हित स्थलों पर स्थापित किए जाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री जनजातीय समुदाय के विभूतियों और शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। वन अधिकार अधिनियम से संबंधित ‘‘एटलस‘‘, कैलेंडर ‘‘शौर्यांजलि‘‘ और ‘‘हल्बा जनजातीय की वाचिक परंपराएं‘‘ पुस्तक का विमोचन किया।
त्रिपुरा के कलकारों की प्रस्तुति।
मुझे इस मंच पर श्रेष्ठ भारत दिखा-अरूण सिंह
कार्यक्रम में आए राज्यसभा सांसद अरूण सिंह ने कहा कि, अंतरराज्यीय नृत्य महोत्सव समारोह में आकर ‘‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत‘‘ का दर्शन हुआ है। जनजातीय समुदाय के महापुरुषों को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि वही देश और समाज जागृत रहता है, जो अपनी संस्कृति और अपने महापुरुषों को याद रखता है।
PM मोदी बिहार से वर्चुअली जुड़े
इस कार्यक्रम में बिहार के जमुई से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी वर्चुअली जुड़े। कार्यक्रम में सभी लोगों ने PM मोदी का सम्बोधन सुना। वर्चुअल कार्यक्रम में PM मोदी ने 6600 करोड़ की लागत वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
तस्वीरों में देखिए जनजातीय रंग-
हिमाचल का दल जिन्होंने कायांग डांस किया
हिमाचल का कायांग नृत्य
हिमाचल प्रदेश के लोक कलाकारों ने मनमोहक कायांग नृत्य की प्रस्तुति दी, जो हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय नृत्यों में से एक है। इस नृत्य में नर्तक दल एक दूसरे की भुजाओं को बुनकर माला जैसा पैटर्न बनाते हैं। धीर-धीरे कदमताल करते हुए प्रतीकात्मक रूप से माला की मोती जैसे बिखरते हुए फिर जुड़ते हुए नृत्य करते हैं।
कश्मीर का दल जिन्होंने गोजरी नृत्य की प्रस्तुति दी।
कश्मीर का गोजरी नृत्य
आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव में जम्मू कश्मीर के गुज्जर नजातीय समुदाय के नर्तक दल द्वारा गोजरी नृत्य की प्रस्तुति दी गई। गोजरी नृत्य जम्मू और कश्मीर के प्रसिद्ध नृत्य में से एक है, जो खानाबदोश गुज्जर जनजाति द्वारा किया जाता है। सर्दियों में मैदानी इलाकों में रहते हैं और गर्मियों में पहाड़ों पर चले जाते हैं। यह नृत्य गुज्जर जनजाति के पुरुषों और महिलाओं द्वारा किया जाता है, जिनकी अपनी विशिष्ट भाषा, पोशाक और संगीत है।
गौर माड़िया नृत्य छत्तीसगढ़ राज्य के बस्तर संभाग में गौर माड़िया जनजाति द्वारा किया जाता है।
मध्यप्रदेश के डिंडौरी से आए गोंड जनजाति द्वारा सैला-रीना नृत्य की प्रस्तुति दी गई।
कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत आम नागरिकों तक विभिन्न शासकीय सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नगरीय निकाय एवं जनपद पंचायत क्षेत्रों में 01 अक्टूबर से विशेष शिविर आयोजित किए जा रहें। इसी क्रम में 02 अक्टूबर को नगर पालिका परिषद दीपका कार्यालय एवं नगर पंचायत छुरीकला अंतर्गत बस स्टैंड छुरी के समीप शिविर आयोजित किए जाएंगे। आम नागरिकों से अपील की गई है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर शिविर का लाभ उठायें।
पीएम जनमन के अंतर्गत लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से अटल चौक से जंगल पारा तक बना 2.38 किलोमीटर मार्ग कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। विकासखंड पाली के दूरस्थ ग्राम डोंगानाला के जंगल पारा में रहने वाले बिरहोर परिवारों के लिए बारिश का मौसम बड़ी परेशानी लेकर आता था। अटल चौक से बस्ती तक जाने वाला कच्चा रास्ता कीचड़ से भर जाता था। पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता था और बच्चे स्कूल जाने से कतराते थे। अब प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत बनी पक्की सड़क ने उनकी रोजमर्रा की यात्रा आसान कर दी है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अटल चौक से जंगल पारा तक लगभग 2.38 किलोमीटर सड़क का निर्माण लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है। मार्ग में सीसी सड़क के साथ डामर सड़क भी बनाई गई है। इससे बस्ती में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय के लगभग 40 परिवारों को आवागमन में सुविधा मिल रही है। बस्ती के सुनहर सिंह बिरहोर बताते हैं कि पक्की सड़क बनने से अब आने-जाने में आसानी होती है। गीता बाई के अनुसार उन्हें रास्ते में पहले जैसी परेशानी नहीं होती और बच्चे भी आसानी से स्कूल आ-जा सकते हैं। गाँव के किसान पुनो राम पटेल पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि बारिश में रास्ते पर घुटनों तक कीचड़ हो जाता था। अब पक्की सड़क बनने से उस परेशानी से राहत मिली है। जंगल पारा के परिवारों के लिए यह सड़क स्कूल और आवश्यक सेवाओं तक पहुँचने का सुगम रास्ता बन गई है। बारिश के दिनों में जिस मार्ग से गुजरना कठिन था, उसी पर अब ग्रामीण अधिक आसानी से आ-जा रहे हैं।
उद्यानिकी विभाग की सहायता से अपनाई ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और उन्नत खेती कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नगौई बछेरा निवासी किसान गुरुचरण मरार पहले परंपरागत तरीके से धान की खेती करते थे। वर्ष में एक ही फसल लेने के कारण खेती से होने वाली आय सीमित थी। सिंचाई का साधन नहीं था और कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर व अन्य मशीनें किराये पर लानी पड़ती थीं। ऐसे में छह सदस्यीय परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन होता था। गांव के भ्रमण के दौरान उद्यानिकी विभाग के कर्मचारियों ने श्री मरार को विभागीय योजनाओं और आधुनिक खेती की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने शासकीय उद्यान रोपणी, नगौई में आवेदन किया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली, प्लास्टिक मल्चिंग तथा ग्राफ्टेड बैंगन रोपण के लिए कुल 46 हजार रुपये का विभागीय अनुदान मिला। इन संसाधनों और विभागीय मार्गदर्शन की मदद से श्री मरार ने खेती के तरीके में बदलाव किया। अब वे वर्ष में दो से तीन फसलें लेते हैं और वर्तमान में भिंडी की खेती से भी आय अर्जित कर रहे हैं। विभाग को दी गई जानकारी के अनुसार, उनकी अनुमानित वार्षिक आय पहले लगभग 45 हजार रुपये थी, जो अब लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आय से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। वे गांव के अन्य किसानों को भी खेती से जुड़ी जानकारी देते हैं। श्री मरार कहते हैं कि उद्यानिकी विभाग से योजनाओं की जानकारी मिलने पर उनका आधुनिक खेती के प्रति उत्साह बढ़ा। वे आगे भी विभागीय मार्गदर्शन लेकर खेती करना चाहते हैं और मिली सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हैं।