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बाइडेन मर चुके…अमेरिका में घूम रहा उनका डुप्लीकेट! ट्रंप की फिर सनसनीखेज थ्योरी

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न्यूयॉर्क,एजेंसी। अमेरिका के  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर एक बार विवादों का तूफ़ान खड़ा कर दिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social  पर दावा किया है कि जो बाइडेन की 2020 में हत्या कर दी गई थी, और अब अमेरिका को एक रोबोटिक क्लोन चला रहा है। ट्रंप ने यह दावा एक कॉन्सपिरेसी थ्योरी  को रीपोस्ट कर किया, जिसमें लिखा था- “बाइडेन की 2020 में हत्या हो चुकी है। जो आज दिख रहे हैं, वो क्लोन, डुप्लीकेट या रोबोट हैं। उनके अंदर न आत्मा है, न दिमाग।”

 
कैंसर की खबर के बाद आया यह बयान 
कुछ दिन पहले ही राष्ट्रपति बाइडेन ने स्वीकार किया था कि उन्हें “आक्रामक प्रोस्टेट कैंसर” है। इसके बाद ट्रंप की यह टिप्पणी सामने आई। अभी तक व्हाइट हाउस ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।ट्रंप इससे पहले भी दक्षिण अफ्रीका में गोरे किसानों के नरसंहार की झूठी खबर फैला चुके हैं, जिसे वहां की सरकार और फैक्ट चेकर्स ने खारिज किया था। उन्होंने कई बार बाइडेन के मानसिक स्वास्थ्य और निर्णय क्षमता पर सवाल उठाए हैं।
 

झूठ फैलाने का इतिहास 
न्यूयॉर्क टाइम्स  की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के पहले कार्यकाल में उन्होंने करीब  30,573 झूठे या भ्रामक दावे  किए । औसतन हर दिन 21 झूठ। 2024 के चुनाव अभियान के दौरान भी उन्होंने सैकड़ों साजिशों को बढ़ावा दिया। उनके हालिया दावों में FBI पर उनकी हत्या की साजिश रचने और  6 जनवरी कैपिटल दंगे के पीछे अमेरिकी सरकार का हाथ होने की बातें भी शामिल हैं।

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सिर्फ अमेरिका नहीं पूरी दुनिया से चीन की ट्रेड वॉर, भारत से लेकर यूरोप तक ड्रैगन की व्यापार नीति पर उठे सवाल

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बीजिंग, एजेंसी। चीन और अमेरिका के बीच चल रही व्यापारिक तनातनी को अक्सर दो महाशक्तियों की सीधी लड़ाई के तौर पर देखा जाता है, लेकिन एक नए विश्लेषण में इससे कहीं बड़ी तस्वीर सामने रखी गई है। दावा है कि मामला केवल वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच टैरिफ युद्ध का नहीं है, बल्कि चीन की व्यापार नीतियों को लेकर दुनिया के कई देश अलग-अलग स्तर पर चिंता जता रहे हैं। चीन के विशाल व्यापार अधिशेष, सरकारी सहायता और सस्ते निर्यात को लेकर भारत से लेकर अमेरिका और यूरोप तक कई अर्थव्यवस्थाएं अपने कदम सख्त कर रही हैं।  ऑस्ट्रेलियन फाइनेंशियल रिव्यू में प्रकाशित रॉस बैबेज के विश्लेषण में तर्क दिया गया है कि चीन की मौजूदा व्यापार रणनीति को केवल अमेरिका के साथ द्विपक्षीय संघर्ष के रूप में देखना अधूरा होगा। उनके मुताबिक, चीन और दुनिया की कई दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार असंतुलन अब व्यापक बहस का विषय बन चुका है।

विश्लेषण में चीन के विनिर्माण क्षेत्र की तेजी का उदाहरण दिया गया है। इसके अनुसार, वर्ष 2004 में चीन का विनिर्माण उत्पादन अमेरिका के करीब आधे स्तर पर था, जबकि लगभग दो दशक बाद यह अमेरिकी स्तर के करीब दोगुने तक पहुंच गया। बैबेज इस बदलाव के पीछे चार प्रमुख संरचनात्मक कारण बताते हैं। पहला, करीब 1.4 अरब लोगों का विशाल घरेलू बाजार, जिसने चीनी कंपनियों को बड़े पैमाने पर उत्पादन करने का अवसर दिया। दूसरा, सरकारी सहायता और सब्सिडी, जिनके स्तर को लेकर आर्थिक सहयोग और विकास संगठन ने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच बड़े अंतर की बात कही है।तीसरा मुद्दा चीन की मुद्रा का मूल्यांकन है। विश्लेषण में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आकलन का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि चीनी मुद्रा अपने वास्तविक मूल्य से 20 से 40 प्रतिशत तक कम आंकी गई हो सकती है। इससे चीनी निर्यात अपेक्षाकृत सस्ता और विदेशी वस्तुओं का चीन में प्रवेश महंगा हो सकता है।

चौथा आरोप चीन के व्यापक सरकारी तंत्र से जुड़ा है। विश्लेषण में औद्योगिक खुफिया गतिविधियों, बौद्धिक संपदा की चोरी, साइबर गतिविधियों, सूचना अभियानों और विदेशों में प्रभाव बढ़ाने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों का उल्लेख किया गया है। इन दावों की प्रकृति को लेकर अलग-अलग देशों और संस्थानों के आकलन अलग हो सकते हैं। इस पूरी तस्वीर का सबसे बड़ा आर्थिक आंकड़ा चीन का व्यापार अधिशेष बताया गया है। विश्लेषण के अनुसार, यह करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसे ऐतिहासिक रूप से किसी एक देश का सबसे बड़ा वार्षिक व्यापार अधिशेष बताया गया है। चीन की इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों के बढ़ते निर्यात ने कई देशों को अपनी व्यापार नीतियों पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया है। विश्लेषण में अमेरिका, भारत, थाईलैंड, पाकिस्तान, मिस्र, कनाडा और इंडोनेशिया सहित कई देशों में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर लगाए गए या प्रस्तावित शुल्क और प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है। यूरोपीय संघ में भी चीन से इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते आयात को लेकर चिंता है। विश्लेषण के मुताबिक, दो वर्षों में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों के यूरोपीय निर्यात में लगभग दस गुना वृद्धि हुई है। इसके बाद यूरोप में शुल्क और आयात सीमा जैसे उपायों पर चर्चा तेज हुई है।

विश्लेषण में हाल की G20 वित्त मंत्रियों की बैठक का भी उल्लेख किया गया है। इसमें अत्यधिक और लगातार बने रहने वाले बाहरी व्यापार अधिशेष वाले देशों से उन नीतिगत विकृतियों को हटाने का आह्वान करने वाले संयुक्त बयान का प्रस्ताव रखा गया था। दावे के मुताबिक, 19 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि चीन ने अकेले इसका विरोध किया। यह घटनाक्रम वैश्विक व्यापार असंतुलन को लेकर चीन और कई दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच मौजूद मतभेद को दिखाता है। चीन की व्यापार नीति का असर केवल अमेरिका और यूरोप तक सीमित नहीं है। विश्लेषण में ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि महामारी के दौरान चीन द्वारा ऑस्ट्रेलियाई उत्पादों पर लगाए गए प्रतिबंधों ने व्यापारिक निर्भरता से पैदा होने वाले दबाव को सामने ला दिया था।

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नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1453 हुई, लगभग 5300 लोग अब भी लापता

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काठमांडू, एजेंसी। नेपाल में पिछले महीने अचानक आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,453 हो गई है और 5285 लोग अब भी लापता हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने शनिवार को यह जानकारी दी। एनडीआरआरएमए ने बताया कि अब तक 1,451 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि दो अन्य लोगों की इलाज के दौरान मौत हुई। उसने बताया कि अब तक कुल 13,795 लोगों को बचाया गया है। बचाए गए लोगों में से 1,113 लोग वर्तमान में 21 अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं। इनमें नुवाकोट के 187, रसुवा के 805 और धादिंग जिले के 121 लोग शामिल हैं।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के शहरों तथा गांवों में भारी तबाही मचाई थी। चीनी मीडिया के अनुसार, इस आपदा में तिब्बत में भी 43 लोगों की मौत हुई, जबकि 500 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। एनडीआरआरएमए के अनुसार, नेपाल में सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक बाढ़ प्रभावित करीब 11,000 लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई है। उसने बताया कि बाढ़ में घायल सात लोगों का अभी इलाज चल रहा है। आपदा के एक महीने बाद भी मृतकों की पहचान करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

एनडीआरआरएमए के अनुसार, अब तक बरामद 1,453 शवों में से 112 की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया है। पुलिस ने बताया कि बरामद शवों और अवशेषों से 1,329 डीएनए नमूने एकत्र किए गए हैं, जबकि लापता लोगों के परिजनों से 2,060 अन्य नमूने लिये गए हैं।

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पाकिस्तान : डेरा इस्माइल खान में धमाका, 12 लोगों की मौत, 18 अन्य घायल

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इस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में शनिवार को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के एक आत्मघाती हमलावर ने पुलिस चौकी को निशाना बनाया, जिसमें दो महिलाओं और दो बच्चों समेत कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई तथा 18 अन्य घायल हो गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

पाकिस्तान की राष्ट्रीय आपातकालीन प्रतिक्रिया सेवा रेस्क्यू 1122 के अनुसार, यह घटना डेरा इस्माइल खान जिले की दराजिंदा तहसील में हुई, जो अशांत खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों की सीमा के पास स्थित है। क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी खान मुबाशिर मलिक ने बताया कि आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली को अमन मेला पुलिस चौकी से टकरा दिया। उन्होंने बताया कि हमले में 12 लोगों की मौत हुई और 18 अन्य घायल हुए हैं।

पुलिस के अनुसार, मारे गए लोगों में सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क विभाग के दो अधिकारी भी शामिल हैं। घायलों को इलाज के लिए जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया, जबकि मृतकों के शव भी वहीं पहुंचाए गए हैं। पुलिस ने बताया कि हमले में इस्तेमाल किए गए विस्फोटकों की प्रकृति का पता लगाने के लिए बम निरोधक दस्तों को घटनास्थल पर भेजा गया है। सुरक्षा बलों ने हमले के बाद इलाके की घेराबंदी करके तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। मामले की आगे जांच की जा रही है। 

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