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विदेश

गाजा में खाना बांटते समय फिर गोलीबारी, 32 मौतें:232 लोग घायल, अस्पतालों में जगह कम पड़ी; इजराइली सेना पर आरोप

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गाजा, एजेंसी । दक्षिणी गाजा में रविवार को खाना बांटने के दौरान फिर से गोलीबारी हुई जिसमें 32 फिलिस्तीनी लोगों की मौत हो गई है।

गाजा के सरकारी मीडिया ऑफिस ने कहा है कि दक्षिणी गाजा के राफा शहर में रविवार को एक सहायता वितरण केंद्र के पास इजराइली सेना ने गोलीबारी की।

इसमें 31 लोगों की मौत हो गई वहीं, 200 लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा मध्य गाजा के नेत्जारिम कॉरिडोर में भी एक सहायता केंद्र पर गोलीबारी की गई।

इसमें 1 फिलिस्तीनी शख्स की मौत हो गई है, जबकि 32 लोग घायल हैं। गाजा में खाना बांटने का काम एक अमेरिकी एजेंसी GHF चला रही है।

हालांकि इजराइली सेना ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि सहायता वितरण केंद्र के पास उनके सैनिकों की गोलीबारी से कोई घायल हुआ हो। सेना ने कहा कि इस मामले की जांच की जा रही है।

वहीं, अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक गाजा में 27 मई से 1 जून तक खाना बांटने के दौरान हुई गोलीबारी में 49 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

गाजा में खाना लेते समय हुई भगदड़ की 3 तस्वीरें देखें…

गाजा में खाना बांटने के दौरान गोलीबारी हुई, जिसके कारण भगदड़ मच गई।

गाजा में खाना बांटने के दौरान गोलीबारी हुई, जिसके कारण भगदड़ मच गई।

गोलाबारी के बाद घायलों को लेकर जाते लोग। गाजा में अब तक खाना लेते समय 49 लोगों की मौत हो चुकी है।

गोलाबारी के बाद घायलों को लेकर जाते लोग। गाजा में अब तक खाना लेते समय 49 लोगों की मौत हो चुकी है।

लोगों के घायल होने से इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू में जगह की कमी हो गई है।

लोगों के घायल होने से इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू में जगह की कमी हो गई है।

घायल को एम्बुलेंस से अस्पताल से जाते लोग।

घायल को एम्बुलेंस से अस्पताल से जाते लोग।

खाना लेते समय भूखे फिलिस्तीनियों पर गोलीबारी, अस्पतालों में जगह कम पड़ी

फिलिस्तीन रेड क्रिसेंट के एक स्वास्थ्यकर्मी ने अल जजीरा को बताया कि जब गोलीबारी हुई, उस वक्त बड़ी संख्या में लोग राफा इलाके में खाना लेने के लिए जमा हुए थे।

वहीं, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कुल 179 लोग घायल हुए हुए हैं, जिनमें 30 की हालत गंभीर है।

इतने लोगों के घायल होने से अस्पतालों में काफी भीड़ हो गई है और इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर और आईसीयू में जगह की कमी हो गई है।

यूनाइटेड नेशन- GHF लोगो को खतरे में डाल रहा

GHF नाम की इस संस्था को अमेरिका और इजराइल का समर्थन मिला हुआ है। यह संगठन तब शुरू किया गया जब इजराइल ने यह आरोप लगाया कि हमास गाजा में आने वाली मदद को चुरा रहा है और बेच रहा है।

मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इस बात का कोई पक्का सबूत नहीं है और इजराइल ने भी कोई प्रमाण सार्वजनिक रूप से नहीं दिया है। संयुक्त राष्ट्र की सहायता एजेंसियों ने GHF की मदद पहुंचाने के तरीके की आलोचना की है।

उनका कहना है कि यह तरीका मानवीय नियमों का उल्लंघन करता है और फिलिस्तीनियों को खतरे में डालता है। हाल के दिनों में जब हजारों भूखे लोग GHF के वितरण केंद्रों पर पहुंचे, तो अफरातफरी मच गई और इसके चलते इजराइल और GHF की आलोचना और बढ़ गई।

GHF का दावा है कि उसने पिछले छह दिनों में लगभग 4.7 मिलियन भोजन के पैकेट उपलब्ध कराए हैं और रविवार को ही 16 ट्रकों के जरिए 887,000 से ज्यादा भोजन के पैकेट बांटे गए। उन्होंने कहा कि यह सब बिना किसी परेशानी के किया गया और मौतों या घायल होने की खबरें झूठी और बनाई हुई हैं।

हजारों लोग खाद्य सामग्री के लिए फेंसिंग को लांघकर सेंटर की तरफ दौड़े।

हजारों लोग खाद्य सामग्री के लिए फेंसिंग को लांघकर सेंटर की तरफ दौड़े।

राफा में फिलीस्तीनी लोग खाने का सामान और जरूरी मदद से भरे डिब्बे उठाकर घर ले जा रहे हैं।

राफा में फिलीस्तीनी लोग खाने का सामान और जरूरी मदद से भरे डिब्बे उठाकर घर ले जा रहे हैं।

बीते 1 हफ्ते में 500 से ज्यादा लोगों की मौत

इजराइल ने गाजा पट्टी में हमास के खिलाफ अपना सैन्य अभियान तेज कर दिया था। शनिवार और रविवार (24-25 मई 2025) को इजराइली हवाई हमलों में कम से कम 182 फिलिस्तीनी मारे गए, जिनमें बच्चे और महिलाएं शामिल हैं।

इजराइल सेना के हमले में बीते एक हफ्ते में 500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। 7 अक्टूबर 2023 से शुरू इजराइल-हमास जंग में अब तक 55,000 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें हजारों बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं।

4 पाॅइंट में समझिए हमास-इजराइल जंग…

  • हमास-इजराइल के बीच संघर्ष का सिलसिला साल 1948 से जारी है। इसने भीषण रूप 7 अक्टूबर 2023 को लिया जब हमास ने इजराइल पर हमला किया। जिसमें 815 नागरिकों सहित 1,195 इजराइली और विदेशी नागरिक मारे गए।
  • हमास ने 251 इजराइली लोगों को बंधक बनाया। हमास ने इस हमले को इजराइल के कब्जे, गाजा की नाकाबंदी और हजारों फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई की मांग के लिए किया।
  • इजराइल ने जवाब में गाजा पर बमबारी शुरू की और 27 अक्टूबर 2023 को जमीनी हमला शुरू किया। इजराइल का कहना है कि उसका मकसद हमास को खत्म करना और बंधकों को रिहा कराना है।
  • इस युद्ध में 55 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे। इजराइल में 1,200 से ज्यादा लोग मारे गए। गाजा में 80% लोग विस्थापित हो चुके हैं और ज्यादातर पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तबाह हो चुका है।
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बिज़नस

AliExpress पर EU का सख्त एक्शन, लगा रू.5,500 करोड़ का जुर्माना, जानें क्यों?

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ब्रसेल्स, एजेंसी। चीन की दिग्गज टेक कंपनी अलीबाबा के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीएक्सप्रेस पर यूरोपीय यूनियन (EU) ने 550 मिलियन यूरो (करीब 5,500 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर नकली, गैरकानूनी और असुरक्षित उत्पादों की बिक्री रोकने में विफल रही।

यूरोपीय यूनियन के अधिकारियों के अनुसार, अलीएक्सप्रेस पर ऐसे कई उत्पाद बेचे जा रहे थे जो यूरोप के सुरक्षा और पर्यावरण मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इनमें खिलौने, कॉस्मेटिक और अन्य उपभोक्ता उत्पाद शामिल हैं। जांच में यह भी पाया गया कि जिन उत्पादों को नियमों का उल्लंघन करने पर हटाया गया था, उनमें से कई बाद में दोबारा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो गए। कुछ मामलों में ऐसे उत्पादों की ग्राहकों को सिफारिश भी की गई।

मार्च 2024 में शुरू हुई थी जांच 

यह कार्रवाई यूरोपीय यूनियन के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत की गई है। वर्ष 2022 में लागू इस कानून का उद्देश्य बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करना है। अलीएक्सप्रेस के खिलाफ जांच मार्च 2024 में शुरू हुई थी। ईयू का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वे अपने सिस्टम में मौजूद जोखिमों की पहचान करें और समय रहते उन्हें दूर करें, ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना

बताया जा रहा है कि किसी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर लगाया गया यह अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना है। इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 120 मिलियन यूरो और चीनी ई-कॉमर्स कंपनी Temu पर 200 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया गया था।

हालांकि, अलीएक्सप्रेस ने यूरोपीय आयोग के फैसले का विरोध किया है। कंपनी का कहना है कि जुर्माने की राशि अत्यधिक है और हाल के वर्षों में किए गए सुधारों को नजरअंदाज किया गया है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगी।

यूरोप अलीएक्सप्रेस का सबसे बड़ा बाजार

यूरोप फिलहाल अलीएक्सप्रेस का सबसे बड़ा बाजार है, जहां उसके लगभग 19.3 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। तुलना में Shein के करीब 15.6 करोड़ और Temu के लगभग 13 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। यूरोपीय यूनियन ने कंपनी को 20 अक्टूबर तक जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय तक भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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विदेश

ब्रिटिश PM स्टार्मर ने सौंपा इस्तीफा; बोले-‘मेरा काम पूरा हो गया’, नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने संभाली सत्ता

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लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। केअर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। 10 डाउनिंग स्ट्रीट से अपने अंतिम संबोधन में उन्होंने कहा, “मेरा काम पूरा हो गया है।” इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। अब लेबर पार्टी के नए नेता एंडी बर्नहम ने ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाल लिया है।  प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले केअर स्टार्मर ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वह जिम्मेदारी एंडी बर्नहम को सौंप रहे हैं और उन्हें अपना पूरा समर्थन देते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल को देश की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया 
संवैधानिक परंपरा के अनुसार स्टार्मर ने बकिंघम पैलेस जाकर राजा चार्ल्स तृतीय को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद लेबर पार्टी के नवनिर्वाचित नेता एंडी बर्नहम को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया। राजा से मुलाकात के बाद बर्नहम ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की और फिर 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचकर राष्ट्र को अपना पहला संबोधन दिया।

एंडी बर्नहम का परिचय
7 जनवरी 1970 में जन्मे  एंडी बर्नहम का पूरा नाम एंड्रयू मरे बर्नहम (Andrew Murray Burnham) है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के फिट्जविलियम कॉलेज से अंग्रेजी (English) में स्नातक की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही उनकी राजनीति और सामाजिक मुद्दों में रुचि रही। 56 वर्षीय एंडी बर्नहम लंबे समय से लेबर पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।  वह ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर भी रह चुके हैं और स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण तथा क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारत-ब्रिटेन के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों में निरंतरता बनी रह सकती है।

बर्नहम का राजनीतिक सफर

  • वर्ष 2001 में पहली बार ली (Leigh) संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए।
  • टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
  • 2008 से 2009 तक संस्कृति, मीडिया और खेल मंत्री रहे।
  • 2009 से 2010 तक ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री (Health Secretary) रहे।
  • 2017 से 2026 तक ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहे, जहां उन्होंने परिवहन, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास के क्षेत्र में कई पहल कीं।
  • जुलाई 2026 में लेबर पार्टी के नेता चुने गए और इसके बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने।
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विदेश

टूटने की कगार पर पाकिस्तानः बलूचिस्तान से PoK तक भड़की बगावत की आग, देश के हो सकते 4 टुकड़े

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इस्लामाबाद,एजेंसी।पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा संकटों में से एक का सामना कर रहा है। एक ओर बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमले तेज हो गए हैं, तो दूसरी ओर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) खैबर पख्तूनख्वा में लगातार सुरक्षा बलों को निशाना बना रही है। इसके साथ ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विरोध प्रदर्शन और अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान के साथ बढ़ते तनाव ने इस्लामाबाद की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के “चार टुकड़े होने” या “तत्काल गृहयुद्ध” जैसी बातें अभी दावे और अटकलें हैं। मौजूदा हालात गंभीर जरूर हैं, लेकिन ऐसा होने की पुष्टि किसी आधिकारिक या स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था ने नहीं की है।

बलूचिस्तान में हमले
बलूचिस्तान में बीएलए लगातार पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले कर रही है। हाल के महीनों में कई सैन्य काफिलों, पुलिस चौकियों और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। बलूच संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान ने दशकों से क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया है और स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी की है। वहीं पाकिस्तान सरकार इन संगठनों को आतंकवादी संगठन मानती है।

खैबर पख्तूनख्वा में TTP का खूनी अभियान
खैबर पख्तूनख्वा और पूर्व कबायली इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार पुलिस और सेना पर हमले कर रही है। हाल के महीनों में कई पुलिस चौकियों पर हमले, आत्मघाती विस्फोट और घात लगाकर किए गए हमलों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी को अफगानिस्तान की सीमा पार से समर्थन मिल रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।

PoK में भी बढ़ रहा असंतोष
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में महंगाई, बिजली संकट और प्रशासनिक नीतियों के विरोध में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं।
कुछ स्थानीय संगठनों ने अधिक स्वायत्तता और कुछ समूहों ने पाकिस्तान से अलग होने की मांग भी उठाई है। हालांकि पूरे क्षेत्र में अलगाववाद की एक जैसी स्थिति नहीं है और हालात अलग-अलग इलाकों में अलग हैं।

अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव
डूरंड लाइन पर पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार हमलों और आतंकियों को संरक्षण देने के आरोप लगाते रहे हैं। कई बार सीमा पर गोलीबारी और ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 के अनुसार पाकिस्तान में वर्ष 2025 के दौरान आतंकवादी घटनाओं और मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान अब एक साथ कई सुरक्षा मोर्चों पर लड़ रहा है, जिससे सेना और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक टिप्पणियों में पाकिस्तान के चार टुकड़े होने के दावे किए जा रहे हैं। पाकिस्तान गंभीर सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक संकट से जरूर गुजर रहा है, लेकिन उसके तत्काल विघटन या गृहयुद्ध की घोषणा जैसी कोई विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार इन आंतरिक चुनौतियों का समाधान नहीं कर पाती तो अस्थिरता और बढ़ सकती है।

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