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विदेश

नेपाल में फिर कांपी धरती, 5.0 तीव्रता के भूकंप से दहशत, कई जिलों में महसूस हुए झटके

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काठमांडू, एजेंसी। नेपाल के लुंबिनी प्रांत के पूर्वी रुकुम (East Rukum) जिले में रविवार शाम 5.0 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप के झटके आसपास के कई जिलों में भी महसूस किए गए, जिससे लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। नेपाल के राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र (National Earthquake Monitoring and Research Center – NEMRC) के अनुसार, भूकंप स्थानीय समयानुसार शाम 4:30 बजे आया। इसका केंद्र पूर्वी रुकुम जिले के कोल क्षेत्र में था, जो राजधानी काठमांडू से लगभग 400 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है।

भूकंप के झटके केवल पूर्वी रुकुम तक सीमित नहीं रहे। रोल्पा, बागलुंग और म्याग्दी जिलों के लोगों ने भी कंपन महसूस होने की जानकारी दी। झटके महसूस होते ही कई लोग एहतियातन घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। एनईएमआरसी के वरिष्ठ भूकंप विज्ञानी लोक विजय अधिकारी ने बताया कि अब तक भूकंप से किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान या हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और स्थानीय अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

नेपाल हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने के कारण अक्सर भूकंप आते रहते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार नेपाल दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र (Seismic Zone IV और V) में शामिल है। इसी वजह से यहां हर वर्ष छोटे-बड़े कई भूकंप दर्ज किए जाते हैं। वर्ष 2015 में आए विनाशकारी 7.8 तीव्रता के भूकंप में करीब 9,000 लोगों की मौत हुई थी और लाखों लोग प्रभावित हुए थे। इसके बाद से नेपाल में भूकंप निगरानी और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।

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देश

ब्रिटेन में बर्नहैम का नया PM बनना भारत के लिए बड़ी खुशखबरी, पुराना दोस्त बदल सकता दोनों देशों के बीच समीकरण

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लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहैम सोमवार को औपचारिक रूप से देश के नए प्रधानमंत्री का पद संभालेंगे। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और शैक्षणिक संबंध पहले की तरह मजबूत बने रहेंगे, बल्कि इनमें और तेजी आने की संभावना है। 56 वर्षीय एंडी बर्नहैम शुक्रवार को लेबर पार्टी के निर्विरोध नेता चुने गए। वह प्रधानमंत्री केयर स्टार्मर का स्थान लेंगे। हालांकि बर्नहैम ने घरेलू नीतियों में कई बदलावों के संकेत दिए हैं, लेकिन भारत के साथ सहयोग को लेकर उनकी नीति में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं जताई जा रही है।

मैनचेस्टर में भारत की महावाणिज्यदूत विशाखा यदुवंशी ने कहा कि पिछले एक वर्ष में ग्रेटर मैनचेस्टर प्रशासन और एंडी बर्नहैम के साथ भारत का सहयोग बेहद सकारात्मक रहा है। उन्होंने भारत और उत्तरी इंग्लैंड के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यदुवंशी ने बताया कि मार्च 2025 में मैनचेस्टर में भारतीय महावाणिज्य दूतावास की स्थापना दोनों देशों के रिश्तों में एक ऐतिहासिक कदम थी। बर्नहैम ने 2019 में भारत का दौरा किया था। इसके बाद उन्होंने दिसंबर 2025 में तत्कालीन भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोरईस्वामी से मुलाकात की और मार्च 2026 में इंडिया-नॉर्थ इंग्लैंड ऑपर्च्युनिटी समिट में भी हिस्सा लिया।

एंडी बर्नहैम पहले भी कह चुके हैं कि भारत ग्रेटर मैनचेस्टर की अंतरराष्ट्रीय रणनीति का प्रमुख साझेदार है। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, विश्वविद्यालयों के सहयोग और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। ‘लेबर फ्रेंड्स ऑफ इंडिया’ के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि बर्नहैम दीर्घकालिक साझेदारी में विश्वास रखते हैं। उनके कार्यकाल में भारत-मैनचेस्टर सीधी उड़ान, व्यापारिक सहयोग और विश्वविद्यालयों के बीच संबंधों को लगातार बढ़ावा मिला।विशेषज्ञों का कहना है कि एंडी बर्नहैम विकेंद्रीकरण (Decentralisation) के समर्थक हैं। भारत भी संघीय व्यवस्था वाला देश है, इसलिए संभावना है कि वह केवल केंद्र सरकार ही नहीं बल्कि विभिन्न भारतीय राज्यों के साथ भी आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देंगे।

लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के वरिष्ठ फेलो राहुल रॉय चौधरी का कहना है कि पिछले एक दशक में भारत-ब्रिटेन संबंध सबसे मजबूत दौर में हैं। हाल ही में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की यात्राओं और इस सप्ताह लागू हुए सीईटीए (Comprehensive Economic and Trade Agreement) से व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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विदेश

अब अदन की खाड़ी में खतरा बढ़ाः समुद्री डाकुओं ने हाईजैक किया जहाज, तेल सप्लाई पर मंडराया नया संकट

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सना, एजेंसी। यमन के तट के निकट एक तंजानिया के ध्वज वाले तेल टैंकर के संदिग्ध सोमाली समुद्री डाकुओं द्वारा अपहरण किए जाने की खबर सामने आई है। सुरक्षा सूत्रों और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, घटना के बाद टैंकर को सोमालिया के अर्ध-स्वायत्त पंटलैंड क्षेत्र के बारी (Bari) तट के पास ले जाया गया है। इस घटना ने एक बार फिर अदन की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

जानकारी के अनुसार, सामान्य श्रेणी का तेल टैंकर ‘एमटी असाना (MT Asana)’ शुक्रवार को यमन के मुकल्ला (Mukalla) बंदरगाह से रवाना हुआ था। यात्रा शुरू होने के कुछ समय बाद ही संदिग्ध सोमाली समुद्री डाकुओं ने जहाज पर कब्जा कर लिया। सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, अपहरण के बाद टैंकर को सोमालिया के पंटलैंड प्रांत के कालूला (Caluula) तट के समीप समुद्र में ले जाकर रोक दिया गया।  प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लगभग सात हथियारबंद सोमाली समुद्री डाकुओं ने इस अपहरण को अंजाम दिया। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि टैंकर पर चालक दल के कितने सदस्य मौजूद थे और घटना के दौरान कोई घायल हुआ या नहीं।

चालक दल की राष्ट्रीयता और जहाज में मौजूद तेल की मात्रा के बारे में भी फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अब तक सोमालिया, तंजानिया या संबंधित समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इस घटना पर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, जहाज के मालिक और प्रबंधन कंपनी ने भी घटना पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। बता दें कि पिछले कुछ महीनों में लाल सागर, अदन की खाड़ी और सोमालिया के तटीय क्षेत्रों में समुद्री सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय नौसेना की गश्त के बावजूद समुद्री डाकुओं की गतिविधियों में फिर से बढ़ोतरी देखी जा रही है।

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बिज़नस

Tech जगत में हाहाकार: इस मशहूर कंपनी ने अमेरिका में की बड़ी छंटनी, चली गई सैकड़ों कर्मचारियों को नौकरी

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न्यू जर्सी, एजेंसी। दुनिया की दिग्गज इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन निर्माता कंपनी सैमसंग ने अमेरिका में अपने कर्मचारियों की संख्या में बड़ी छंटनी करने का ऐलान किया है। कंपनी ने अपने मोबाइल, डिस्प्ले, टेलीविजन और होम अप्लायंसेज (कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स) विभागों से जुड़े कई कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इस छंटनी का सबसे बड़ा असर अमेरिका के न्यू जर्सी और टेक्सास राज्यों में काम करने वाले कर्मचारियों पर पड़ा है। टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक वैश्विक मंदी और चीनी कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच यह फैसला लिया गया है।

बता दें कि कंपनी ‘सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स अमेरिका’ (SEA) के अपने मुख्य मुख्यालय (हेडक्वार्टर) को न्यू जर्सी से हटाकर टेक्सास शिफ्ट कर रही है। इस बड़े बदलाव के कारण कंपनी ने न्यू जर्सी के कर्मचारियों को टेक्सास ट्रांसफर होने का विकल्प दिया था।

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जो कर्मचारी पारिवारिक या अन्य कारणों से टेक्सास जाने को तैयार नहीं हुए कंपनी ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं। आंकड़ों के मुताबिक न्यू जर्सी के एंगलवुड क्लिफ्स कार्यालय में 739 पदों पर सीधा असर पड़ा है। वहीं टेक्सास के प्लानो कार्यालय में मोबाइल डिवीजन के करीब 100 कर्मचारियों की छुट्टी कर दी गई है।

वहीं सैमसंग के अलग-अलग विभागों का आर्थिक गणित इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्रांति के कारण सैमसंग के सेमीकंडक्टर (चिप) कारोबार का प्रदर्शन बेहद शानदार है। एआई चिप्स की बढ़ती वैश्विक मांग से कंपनी का मुनाफा तेजी से बढ़ा है और कंपनी ने नए चिप प्लांट के लिए अरबों डॉलर के निवेश की घोषणा की है।

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इसके ठीक उलट, सैमसंग का स्मार्टफोन, टीवी और घरेलू उपकरणों का बाजार काफी दबाव में है। प्रीमियम सेगमेंट में जहां ‘एप्पल’ (Apple) से सीधी टक्कर है वहीं बजट और मिड-रेंज टीवी बाजार में ‘TCL’ और ‘Hisense’ जैसी चीनी कंपनियों ने सैमसंग के शेयर पर कब्जा कर लिया है। इसके अलावा एआई के कारण चिप्स महंगे होने से उत्पादों की निर्माण लागत भी बढ़ गई है।

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जानकारी के लिए बता दें कि सैमसंग का यह कदम कोई अकेला मामला नहीं है बल्कि पूरी वैश्विक टेक इंडस्ट्री इस समय ‘कॉस्ट कटिंग’ (खर्चों में कटौती) के दौर से गुजर रही है। पिछले कुछ समय में माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), अमेजन (Amazon), मेटा (Meta), टेस्ला (Tesla) और ओरेकल (Oracle) जैसी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों ने भी हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है।

इन सभी कंपनियों का मुख्य फोकस अब पारंपरिक श्रम बल (Human Resource) को कम करके अपना पूरा निवेश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर और अत्याधुनिक तकनीकों में लगाने पर है।

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