छत्तीसगढ़
बिलासपुर मिशन अस्पताल अतिक्रमण…सुप्रीम कोर्ट से स्टे:निगम ने 50 से अधिक मकान ढहाए, कार्रवाई के विरोध में मसीही समाज ने किया प्रदर्शन
बिलासपुर,एजेंसी। बिलासपुर में मिशन अस्पताल परिसर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रोक दी गई। हालांकि, इससे पहले निगम प्रशासन ने 50 से अधिक मकानों को ढहा दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिए हैं।
यह कार्रवाई मिशन अस्पताल के लीज नवीनीकरण मामले में शुरू हुई थी। सोमवार को हाईकोर्ट की ओर से याचिका खारिज किए जाने के बाद निगम प्रशासन ने अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया था। इसी बीच ईसाई महिला मिशन बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई की और मिशन बोर्ड को अंतरिम राहत प्रदान की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निर्माण और कब्जे को लेकर मौजूदा स्थिति बरकरार रहेगी। साथ ही आदेश की कॉपी फौरन बिलासपुर कलेक्टर को भेजने का निर्देश दिए।
वहीं आज (बुधवार) अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में मसीही समाज के लोग मौके पर पहुंचे और दिन भर प्रदर्शन करते रहे। इस दौरान मौके पर भारी पुलिस बल तैनात था, लेकिन लोगों और पुलिस के बीच बार-बार झड़प की स्थिति बनती रही।
विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें…

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में मसीही समाज के लोग मौके पर पहुंचे।

विरोध प्रदर्शन के दौरान मौके पर पुलिस बस तैनात रही।
स्टे ऑर्डर के बावजूद की गई कार्रवाई
पीड़ित पक्ष अरशद हुसैन ने बताया कि कार्रवाई के बाद हमने सुप्रीम कोर्ट में स्टे के लिए याचिका लगाई थी। 12 बजे मौखिक रूप से आदेश आ चुका था, लेकिन कॉपी आने में टाइम लग रहा था। मैंने प्रशासन से रिक्वेस्ट भी किया कि थोड़ी देर के लिए कार्रवाई रोक दी जाए। जैसे ही उन्हें स्टे की जानकारी मिली तो 4-5 बुलडोजर बुलाकर कार्रवाई तेज कर दी।

ये स्टे आदेश की कॉपी है।
क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, क्रिश्चियन वीमेंस बोर्ड ऑफ मिशन के डायरेक्टर नितिन लॉरेंस और उनके सहयोगियों ने मिशन अस्पताल की जमीन की लीज बढ़ाने के लिए आवेदन पेश किया था। जिसे नजूल अधिकारी ने खारिज कर दिया।
दोबारा लीज न बढ़ाने के प्रशासन के फैसले के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनकी तर्कों को खारिज करते हुए जिला प्रशासन के फैसले को सही ठहराया था।

मिशन अस्पताल कैंपस पर बुलडोजर चला दिया गया था।
सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील
सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील की थी। इसमें तर्क दिया कि बिलासपुर के चांटापारा स्थित प्लॉट नंबर 20 और 21 उन्हें 1959 की भूमि राजस्व संहिता की धारा 158(3) के तहत दिया गया था। वे सालों से धार्मिक, शैक्षिक और धर्मार्थ कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने 1882 से संचालित अपने मिशन का इतिहास, अस्पताल, नर्सिंग स्कूल और चैपल का विवरण देते हुए कहा कि सरकार ने उन्हें बेदखल करने की कोशिश की है, जबकि वे लगातार सेवा कार्य कर रहे हैं। लेकिन हाईकोर्ट ने तर्क नामंजूर करते हुए अपील खारिज कर दी।
27 साल तक नहीं की लीज रिन्युअल की मांग
हाईकोर्ट ने कहा कि, न केवल रिन्युअल की मांग 27 साल तक नहीं की गई, बल्कि इस दौरान लगातार शर्तें तोड़ी गईं। नोटिस को भी किसी अन्य फोरम में चुनौती नहीं दी गई। ऐसे में न तो इनके पास कोई वैध टाइटल है, न ही ओरिजिनल अलॉटी का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार।
लीज की शर्तों का उल्लंघन, नोटिस भी नहीं चुनौती
दूसरी ओर रिकॉर्ड में सामने आया कि, 16 अगस्त 2024 को बिलासपुर नजूल तहसीलदार ने अवैध निर्माण हटाने और गलत गतिविधियां बंद करने का नोटिस जारी किया था। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन से जुड़े एक व्यक्ति ने स्वेच्छा से जमीन का बड़ा हिस्सा सरकार को सौंप भी दिया। सरकार ने इसे विधिसम्मत तरीके से वापस ले लिया है और कब्जा अब भी सरकार के पास है।
2014 में खत्म हो गई है लीज की अवधि
मिशन अस्पताल की स्थापना साल 1885 में हुई थी। मिशन अस्पताल को लीज पर दिया गया। था। लीज साल 2014 में खत्म हो गई है। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने लीज का नवीनीकरण नहीं कराया है। नवीनीकरण के लिए पेश किए गए आवेदन को नजूल न्यायालय ने वर्ष 2024 में खारिज कर दिया। नजूल न्यायालय के खिलाफ मिशन प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।
लीज की जमीन का किया जा रहा था व्यावसायिक उपयोग
क्रिश्चियन वुमन बोर्ड का मिशन के डायरेक्टर डॉ. रमन जोगी ने मिशन अस्पताल परिसर की जमीन पर कब्जा कर अस्पताल परिसर की जमीन का व्यावसायिक उपयोग करते हुए उसे किराए पर दे दिया था। वहीं, मिशन अस्पताल को भी अस्थाई रूप से बंद कर न्यू वंदना अस्पताल के नाम पर संस्था का संचालन किया जा रहा था।
इस बीच रजन जोगी ने कलेक्टर को पत्र लिखकर कहा था कि अस्पताल के ओपीडी, इक्विपमेंट,लेबर रूम, आईसीयू, नवजात शिशु केंद्र, नर्सिंग स्कूल, हॉस्टल, क्लासरूम लैबोरेट्री और रेजिडेंशियल आवासीय डॉक्टर्स कॉलोनी और स्टाफ क्वॉर्टर को प्रशासन को सौंप देगा।
कोरबा
होली खेलें पर जरा संभलकर, त्वचा और बालों का रखें खास ध्यान- त्वचा रोग विशेषज्ञ
कोरबा। होली रंगों का त्योहार है। इसे बड़े ही उत्साह और हर्ष के साथ मनाया जाता है। पहले पारंपरिक होली फूलों, सूखे गुलाल, और पानी के साथ मनाई जाती थी, लेकिन अब सिंथेटिक रंगों ने इसकी जगह ले ली है। जिसका दुष्प्रभाव न केवल हमारी त्वचा तथा बाल, आंखों में भी पड़ता हैं यह हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। होली की मस्ती के साथ-साथ उत्सव के दौरान अपनी त्वचा और बालों की देखभाल करना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस होली में कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह एनकेएच के त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जय बावने देतें हैं।
डॉ. जय बताते हैं कि होली से एक दिन पहले अपनी त्वचा को ढेर सारे मॉइस्चराइजर से हाइड्रेट करें। अच्छी तरह से हाइड्रेटेड त्वचा नाजुक नहीं होती है जो आसानी से क्षतिग्रस्त नहीं होगी। होली के दिन अपने बालों में नारियल का तेल, शरीर पर बेबी ऑयल और होंठों पर लिप बाम लगाएं एवं अपनी त्वचा को सुरक्षित रखें। तेल लगाने के बाद सनस्क्रीन लगाना न भूलें। कपड़े पूरी बाजू के पहनें ताकि त्वचा को नुकसान कम से कम हो। अपने नाखूनों की सुरक्षा के लिए नेल पॉलिश लगाएं। होली के दिन भी खूब पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें।
होली के बाद त्वचा और बालों की देखभाल के टिप्स देते हुए डॉ. जय बतातें हैं कि एक बार जब रंग थोड़ा फीका हो जाए, तो त्वचा को हाइड्रेट और मॉइस्चराइज करने के लिए मेडिकल फेशियल करवाना चाहिए। यह आपको आकर्षक लुक वापस पाने में मदद करेगा। अगर आपको लगता है कि आपकी त्वचा हल्की फट रही है, तो एलोवेरा जेल या लैक्टोकैलेमाइन लोशन लगाएं, लेकिन अगर दाने बने रहते हैं, तो बिना किसी देरी के त्वचा विशेषज्ञ से मिलें। बालों को धोने से पहले सप्ताह में एक बार प्राकृतिक हेयर मास्क का उपयोग करें। डॉ. जय सुझाव देते हैं कि होली खेलने में अधिक पानी, फूलों की पंखुड़ियों और ऑर्गेनिक रंग का उपयोग करना बेहतर है। डॉ. जय बावने त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट विशेषज्ञ एडीसी लैब निहारिका और न्यू कोरबा हॉस्पिटल में नियमित रूप से उपलब्ध रहते है।
छत्तीसगढ़
रायपुर : रंगों में घुले प्रेम और सौहार्द का त्योहार है होली : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने दी होली की शुभकामनाएँ
रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने संदेश में कहा है कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व हमारे जीवन में नई ऊर्जा, उल्लास और सकारात्मकता का संचार करता है तथा भेदभाव मिटाकर सभी को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देता है।उन्होंने कामना की कि यह होली सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। साथ ही उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि त्योहार मनाते समय प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, जल संरक्षण का ध्यान रखें तथा पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने में अपना सक्रिय सहयोग दें।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाई गई होली ही सच्चे अर्थों में आनंद और सौहार्द का उत्सव बनती है तथा समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी विश्वास को और अधिक मजबूत करती है।
छत्तीसगढ़
रायपुर : प्रकृति संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश देता है होली का पर्व : मंत्री केदार कश्यप
प्रदेशवासियों से प्राकृतिक रंगों के उपयोग और जल संरक्षण की अपील
रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। मंत्री श्री कश्यप ने अपने संदेश में कहा है कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व जीवन में नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का संचार करता है तथा सभी भेदभावों को भुलाकर एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कामना की कि यह होली सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।
वन मंत्री श्री कश्यप ने प्रदेशवासियों से अपील की कि होली का पर्व प्राकृतिक एवं हर्बल रंगों के साथ मनाएँ, जल संरक्षण का विशेष ध्यान रखें तथा पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने में अपना सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाई गई होली ही सच्चे अर्थों में आनंद और सौहार्द का पर्व बनती है। साथ ही उन्होंने सभी से प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके।
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