22 फरवरी को थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार का दीक्षांत समारोह प्रयागराज में
कोरबा/बिलासपुर/प्रयागराज। थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार का दीक्षांत समारोह 22 फरवरी 2026 को प्रयागराज में आयोजित किया जा रहा है। कोरबा जिले के पाली ब्लाक मुख्यालय में स्थित क्षेत्र का उत्कृष्ट विद्यालय छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल पाली के डायरेक्टर एवं प्राचार्य तथा जानेमाने शिक्षाविद, कैरियर काऊंसलर डॉ. गजेन्द्र तिवारी को उक्त समारोह में डी.लिट (विद्या सागर) की उपाधि दी जाएगी। इस समारोह में भारतीय सांख्यिकी से सेवानिवृत्त (आईएसएस) रमेश चंद्र श्रीवास्तव को पीएचडी (विद्या वाचस्पति) की डिग्री प्रदान की जाएगी। उक्ताश्य की जानकारी थावे विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. पीएस दयाल यति ने दी।
एक नजर:डॉ. गजेन्द्र तिवारी
डा.गजेंद्र तिवारी को डी.लिट की उपाधि उन्हें कोयला एवं वनांचल क्षेत्र में कार्यरत आदिवासी महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक स्थिति का एक समाजशास्त्रीय अध्ययन चिरमिरी के संदर्भ विषय पर दिया जा रहा है। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, समाज एवं उनके शुभचिंतकों में हर्ष व्याप्त है।
डॉ. गजेंद्र तिवारी को आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा के लोकव्यापीकरण में सुशिक्षा के लिए पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह द्वारा 25 जून 2018 को सुशिक्षा के लिए सम्मानित किया गया था। 07 अगस्त 2019 को आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा के माध्यम से मानव संसाधन के विकास में अनुकरणीय योगदान के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा पुन: सम्मानित किया गया। 13 दिसंबर 2020 को कोरोना संक्रमण कोविद-19 के दौर में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में शिक्षा की सतत प्रक्रिया से छात्र-छात्राओं को जोड़कर अविरल रूप से शिक्षा प्रदान करने के लिए तात्कालीन राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल छत्तीसगढ़ शासन द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। डॉ गजेंद्र तिवारी द्वारा नि:शुल्क आदिवासी बालिका शिक्षा का बीड़ा उठाया है और वह अपनी संस्था में आदिवासी बालिकाओं को नि:शुल्क शिक्षा दे रहे हैं, जो अपने आप में अद्वितीय पहल एवं अनुकरणीय प्रयास है। शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित डॉ. गजेन्द्र तिवारी को डी.लिट (विद्या सागर की उपाधि) से सम्मानित करना उनके लिए एक और बड़ी उपलब्धि है।
एक नजर:रमेश चंद्र श्रीवास्तव
रमेश चंद्र श्रीवास्तव को दिव्यांग विमर्श: चुनौतियां एवं समाधान विषय पर पीएचडी दी जा रही है। रमेश चंद्र श्रीवास्तव केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों में लगभग 35वर्ष सेवारत होने के बाद सेवानिवृत्त हुए। वर्तमान में वे भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय लेबर ब्यूरो में छत्तीसगढ़ राज्य के जेडीई के रूप में दो वर्ष के लिए संविदा पर शासकीय सेवा में कार्यरत हैं।
समाजिक-आर्थिक सांख्यिकी, कृषि सांख्यिकी, डब्ल्यू पी आई, सीपीआई और वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण, सांख्यिकी के सर्वेक्षण, पर्यवेक्षण और निरीक्षण में रमेश चंद्र श्रीवास्तव को विशेज्ञता हासिल है।
वे वर्ष 2022 से स्वतंत्र लेखन का भी कार्य कर रहे हैं। रमेश चंद्र श्रीवास्तव वर्तमान में शुभम विहार बिलासपुर में निवासरत हैं।
कृतित्व
विकलांग विमर्श समग्र अनुशीलन (प्रकाशनाधीन)
पद्य एवं गद्य कृतियों पर समीक्षा-
सृजन काव्य-संग्रह
काव्य-प्रसून
काव्यांजलि
गोमाता भाग्य विधाता
दीपक-संदेश
गद्य कृतियों की समालोचना-
मेरी अंतहीन यात्रा
समर्पण
सहित शोधपत्र एवं आलोचना, धार्मिक रचनाएं आदि शामिल हैं।
उन्हें कई क्षेत्रों में सम्मान और पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है। प्रमुख पुरस्कारों में कोरोना कर्मवीर सम्मान, काव्य कला निधि सम्मान, कायस्थ रत्न सम्मान, साहित्य सेवा सम्मान, रामविलास सिंह सम्मान, साहित्य काव्य कला शिरोमणि सम्मान, सरस्वती सम्मान सहित कई सम्मान एवं प्रमाण पत्र शामिल हैं।
दोनों विभूतियों को यह डिग्री मिलने पर शुभचिंतकों ने अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए अग्रिम बधाई दी है और उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।