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BJP विधायक खुशवंत की गाड़ी पर हमला…:पथराव से सामने का शीशा टूटा, MLA के हाथ में लगी चोट, कांग्रेस बोली-न जनता सुरक्षित, न नेता-मंत्री

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बेमेतरा,एजेंसी। बेमेतरा जिले में ​​​​​​आरंग से बीजेपी विधायक और अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब की गाड़ी पर हमला हुआ है। उनकी कार में असामाजिक तत्वों ने पथराव किया है, जिससे कार का शीशा टूट गया है। विधायक हाथ में चोट भी लगी है।

खुशवंत साहेब ने बताया कि सतनामी समाज के कार्यक्रम में शामिल होने गया था। सामाजिक बैठक के बाद रायपुर के लिए लौट रहा था। इसी वक्त कांच पर पत्थर आकर लगा। कांच के चूरे इधर-उधर बिखर गए। हाथ से खून निकल गया। हमला है या कुछ और पुलिस जांच के बाद पता चलेगा।

वहीं छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि प्रदेश में न जनता सुरक्षित है, न नेता-मंत्री। एक जिम्मेदार व्यक्ति अडानी की सेवा में व्यस्त है, दूसरा चंदा इकट्ठा करने में।

बेमेतरा जिले में आरंग से बीजेपी विधायक गुरु खुशवंत साहेब की गाड़ी पर हमला हुआ है।

बेमेतरा जिले में आरंग से बीजेपी विधायक गुरु खुशवंत साहेब की गाड़ी पर हमला हुआ है।

अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब की गाड़ी पर हमले के बाद पुलिस मौके पर पहुंची।

अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गुरु खुशवंत साहेब की गाड़ी पर हमले के बाद पुलिस मौके पर पहुंची।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

जानकारी के अनुसार, शनिवार को विधायक खुशवंत साहेब बेमेतरा के नवागढ़ में एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल हो गए थे, जहां से शाम 7 बजे के आसपास रायपुर स्थित निवास लौट रहे थे। इसी दौरान चारभांठा ढोलिया और भोइनाभांठा के बीच बाईपास रोड पर अचानक गाड़ी पर जबरदस्त पत्थरबाजी की गई।

आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

बताया जा रहा है कि, गाड़ी की रफ्तार अधिक होने के कारण पत्थर सीधा कांच तोड़ते हुए अंदर नहीं आ सका, नहीं तो हादसा गंभीर हो सकता था। पत्थर खुशवंत साहेब को लग सकती थी। उनके स्टाफ ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी।

पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आसपास के इलाके में संदेहास्पद गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।

न जनता सुरक्षित है, न नेता-मंत्री

वहीं पथराव को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहब के काफिले पर हमला हुआ है। उनकी कुशलक्षेम की कामना करता हूं। आखिर इस प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को ना जाने किसकी नजर लग गई।

उन्होंने आगे लिखा कि न जनता सुरक्षित है, न नेता-मंत्री। एक जिम्मेदार व्यक्ति अडानी की सेवा में व्यस्त है, दूसरा चंदा इकट्ठा करने में।

बीजेपी विधायक गुरु खुशवंत साहेब की तस्वीर है, जानिए उनके बारे में कौन हैं ?

बीजेपी विधायक गुरु खुशवंत साहेब की तस्वीर है, जानिए उनके बारे में कौन हैं ?

कौन हैं गुरु खुशवंत साहेब?

खुशवंत साहब धार्मिक नेता बाल दास के बेटे हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान ही वे भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने कांग्रेस के पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया को हराया था। खुशवंत साहब के पिता सतनामी समाज के धार्मिक गुरू हैं।

वर्तमान में खुशवंत आरंग विधानसभा से भाजपा विधायक हैं। 2024 में खुशवंत साहब को अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ज़िम्मेदारी दी गई है। इसके जरिए सरकार उनके समाज में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है।

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अनुज शर्मा की सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर हाईकोर्ट सख्त:मॉर्फ फोटो और अश्लील पोस्ट हटाने के आदेश, विधायक बोले- छवि खराब करने की साजिश

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धरसीवां विधायक और छालीवुड अभिनेता अनुज शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर चल रही कथित ट्रोलिंग को लेकर सख्ती दिखाई है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने पहली नजर में मामला गंभीर मानते हुए अनुज शर्मा और उनके परिवार की मॉर्फ फोटो, एडिटेड वीडियो, अश्लील कमेंट, कैरिकेचर और अन्य आपत्तिजनक पोस्ट तुरंत हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह कंटेंट पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स और संबंधित प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

याचिका में विधायक अनुज शर्मा ने बताया कि फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पहले ट्विटर) और यूट्यूब पर फर्जी और बेनाम अकाउंट्स से उन्हें निशाना बनाया गया। उनके नाम और पहचान का इस्तेमाल कर मॉर्फ वीडियो, एडिटेड फोटो, अश्लील कैरिकेचर और आपत्तिजनक कमेंट वायरल किए गए।

उनकी मूवी और गानों के हिस्सों को भी एडिट कर गलत तरीके से फैलाया गया, ताकि उनकी सामाजिक और सार्वजनिक छवि खराब हो। याचिका में कहा गया है कि यह सिर्फ राजनीतिक आलोचना का मामला नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश के तहत उनकी छवि और परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।

अनुज शर्मा ने बताया कि सोशल मीडिया पर फर्जी और बेनाम अकाउंट्स से उन्हें निशाना बनाया गया। (फाइल फोटो)

अनुज शर्मा ने बताया कि सोशल मीडिया पर फर्जी और बेनाम अकाउंट्स से उन्हें निशाना बनाया गया। (फाइल फोटो)

व्यक्तित्व और सम्मान से जुड़ा मामला

सुनवाई के दौरान अनुज शर्मा की ओर से कहा गया कि किसी व्यक्ति की फोटो, आवाज, पहचान या व्यक्तित्व का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल करना उसके व्यक्तित्व अधिकार (पर्सनैलिटी राइट्स) का उल्लंघन है। यह संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत मिले सम्मान और निजता के अधिकार का भी उल्लंघन है।

हाईकोर्ट को बताया गया कि अनुज शर्मा धरसीवां के विधायक होने के साथ पद्मश्री सम्मानित कलाकार भी हैं। उनकी लोकप्रियता का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर ज्यादा व्यूज, क्लिक और राजनीतिक फायदा लेने के लिए उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल किया।

हाईकोर्ट ने यह कंटेंट पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स और संबंधित प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

हाईकोर्ट ने यह कंटेंट पोस्ट करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स और संबंधित प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और मामले से जुड़े लोगों को निर्देश दिया कि अनुज शर्मा और उनके परिवार से जुड़ी सभी आपत्तिजनक पोस्ट, मॉर्फ वीडियो, एडिटेड फोटो और कैरिकेचर तुरंत हटाए जाएं।

कोर्ट ने संबंधित अकाउंट चलाने वालों, कंटेंट बनाने वालों और चैनल एडमिन्स को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही बिना अनुमति किसी व्यक्ति की फोटो, पहचान या अन्य निजी चीजों का इस्तेमाल करने और मॉर्फ कंटेंट बनाने को लेकर भी जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

अनुज शर्मा बोले- अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में निजी हमले ठीक नहीं

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अनुज शर्मा ने कहा कि वे मुख्यधारा और डिजिटल मीडिया के साथ अपने क्षेत्र की जनता का सम्मान करते हैं, लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी व्यक्ति और उसके परिवार की गरिमा, निजता और सम्मान पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उन्हें हाईकोर्ट का सहारा लेना पड़ा। अनुज शर्मा ने साफ कहा कि मीडिया या जनता से उन्हें कोई शिकायत नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल कर निजी और राजनीतिक फायदे के लिए किसी की छवि खराब करने वालों पर कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

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छत्तीसगढ़ में 7 IFS अफसरों के तबादले:संजीता गुप्ता को लघु वनोपज संघ का प्रभार, अमरनाथ प्रसाद को राज्य वन विकास निगम का अतिरिक्त प्रभार

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ सरकार ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 7 अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापना के आदेश जारी किए हैं। प्रशासनिक आधार पर जारी आदेश के तहत कई अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई है, जबकि कुछ को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

आदेश के मुताबिक, संजीता गुप्ता को छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ का प्रभारी प्रबंध संचालक बनाया गया है। वहीं एस. वेंकटाचलम को कार्यकारी संचालक, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के पद पर प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है।

अमरनाथ प्रसाद को वन विकास निगम के MD का अतिरिक्त प्रभार

अमरनाथ प्रसाद सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पद पर बने रहेंगे। उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। इसके अलावा अभिषेक कुमार सिंह को प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख कार्यालय में वन संरक्षक बनाया गया है।

टाइगर रिजर्व में गुरुनाथन और प्रणय मिश्रा को नई जिम्मेदारी

गुरुनाथन एन. को उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व का प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्र संचालक नियुक्त किया गया है। वहीं प्रणय मिश्रा को गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व का प्रभारी मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं क्षेत्र संचालक तथा प्रोजेक्ट एलीफैंट का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

रमेश जांगड़े बने क्षेत्रीय महाप्रबंधक

रमेश कुमार जांगड़े को छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम में क्षेत्रीय महाप्रबंधक का प्रभारी बनाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सूची में पहले तीन अधिकारियों की नई पदस्थापना 31 जुलाई 2026 से प्रभावी होगी।

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छत्तीसगढ़

CGPSC भर्ती घोटाले में 500 करोड़ के भ्रष्टाचार की आशंका:47 लाख CSR के नाम पर खपाने का आरोप, मनी लॉन्ड्रिंग के मिले सबूत

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की साल 2021 की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब मनी लॉन्ड्रिंग तक पहुंच गई है। पूर्व PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के खिलाफ चल रही जांच के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी वित्तीय लेनदेन की पड़ताल शुरू कर दी है।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का दायरा 500 करोड़ रुपए से अधिक हो सकता है। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर, DSP समेत अन्य प्रशासनिक पदों पर चयन के लिए अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए की वसूली की गई।

वहीं, CBI की अब तक की जांच में 47 लाख रुपए की कथित मनी लॉन्ड्रिंग और करीब 1.3 करोड़ रुपए की वसूली से जुड़े सबूत मिलने का दावा किया गया है। जांच के अनुसार रकम का कुछ हिस्सा कैश लिया गया, जबकि बाकी राशि परिवार के नियंत्रण वाली संस्था के जरिए CSR दान के नाम पर खपाई गई।

47 लाख संस्था के खाते में ट्रांसफर

जांच एजेंसी के अनुसार, एक पावर प्लांट के डायरेक्टर के बेटे और बहू के चयन के एवज में 47 लाख रुपए ग्रामीण विकास समिति नाम की संस्था के खाते में ट्रांसफर किए गए थे। आरोप है कि इस संस्था के अधिकांश सदस्य तत्कालीन PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के परिजन या करीबी थे।

संस्था की चेयरपर्सन उनकी पत्नी पद्मनी सिंह सोनवानी थीं। जांच में यह भी दावा किया गया है कि इस रकम को एक ऐसे कॉलेज के लिए CSR दान के रूप में दर्शाया गया, जिसका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं है। जांच एजेंसियां इस पूरे वित्तीय लेनदेन की मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर रही हैं।

मेंस पेपर और चयन के नाम पर 1.3 करोड़ की वसूली

CBI चार्जशीट के मुताबिक, कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने अभ्यर्थियों से मुख्य परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर करीब 1.3 करोड़ रुपए वसूले। मामले में नाम सामने आने के बाद से उत्कर्ष फरार बताया जा रहा है। हाईकोर्ट उसकी अग्रिम जमानत भी रद्द कर चुका है। अब ED भी उसकी तलाश कर रही है।

12 से ज्यादा भर्ती परीक्षाएं जांच के घेरे में

जांच एजेंसियों के मुताबिक टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल में CGPSC, सहायक प्रोफेसर समेत 12 से ज्यादा भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच की जा रही है। CGPSC-2021 में 171 पदों के लिए भर्ती परीक्षा हुई थी।

13 फरवरी 2022 को हुई प्रारंभिक परीक्षा में 2,565 अभ्यर्थी पास हुए। 26 से 29 मई 2022 तक हुई मुख्य परीक्षा में 509 अभ्यर्थी सफल हुए।

170 अभ्यर्थियों का हुआ चयन

इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की चयन सूची जारी की गई। आरोप है कि डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे पदों के लिए 75 लाख से 1 करोड़ रुपए प्रति पोस्ट तक लिए गए। यह भी आरोप है कि टामन सिंह सोनवानी ने अपने रिश्तेदारों, कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों के 18 रिश्तेदारों को बड़े पदों पर चयनित कराया।

29 लोगों को बनाया गया आरोपी

तत्कालीन PSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, सचिव जेके ध्रुव, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, उनके बेटे शशांक गोयल, बहू भूमिका कटियार, टामन के बेटे नितेश सोनवानी, रिश्तेदार साहिल सोनवानी, निशा कोसले, दीपा आदिल, जेके ध्रुव के बेटे सुमित ध्रुव और उत्कर्ष चंद्राकर समेत कुल 29 लोगों को आरोपी बनाया गया है। मामले में CBI और ED की जांच जारी है।

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