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बम फटा, बेटा मरा, नहीं पता मालेगांव का गुनहगार कौन

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प्रज्ञा समेत 7 आरोपी बरी, विक्टिम फैमिली बोलीं- फिर अजहर-फरहीन को किसने मारा

मुंबई,एजेंसी। महाराष्ट्र के मालेगांव में रहने वाले सैयद निसार का बेटा अजहर नमाज पढ़ने निकला था। शाम को लौटते वक्त वह भीकू चौक पहुंचा। अजहर एक बाइक के बगल से गुजर रहा था, तभी ब्लास्ट हो गया। 19 साल के अजहर के अलावा 5 और लोग मारे गए। जवान बेटे की मौत पर सैयद उस दिन खूब रोए। उस दिन तारीख थी 29 सितंबर 2008

17 साल बाद सैयद निसार की आंखों में फिर आंसू हैं। 31 जुलाई, 2025 को मालेगांव ब्लास्ट पर कोर्ट का फैसला आया। NIA की स्पेशल कोर्ट ने ब्लास्ट के सभी सातों आरोपियों; साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी, को बरी कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ मामला साबित नहीं कर सका। अब 80 साल के हो चुके सैयद निसार कहते हैं, ‘कोर्ट के फैसले ने बेटे की मौत का दर्द फिर से ताजा कर दिया। यह फैसला नाइंसाफी है, बिल्कुल गलत है।’

विक्टिम बोले- इंसाफ के लिए हर कोर्ट जाएंगे

कांपती आवाज और नम आंखों के साथ सैयद उस दिन को याद करते हैं। वे बताते हैं, ‘मेरा बेटा नमाज पढ़कर मस्जिद से निकला था। वह कोई आवारा लड़का नहीं था। हमेशा वहां जाता था। उसका उस रास्ते से गुजरना, एक बाइक के पास पहुंचना और उसी पल उस बाइक में धमाका हो जाना, यह सब एक पल में हो गया।’

ये सैयद निसार हैं। कहते हैं, यहां इंसाफ नहीं मिला, तो हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इंशाअल्लाह, हम न्याय के लिए लड़ेंगे।

ये सैयद निसार हैं। कहते हैं, यहां इंसाफ नहीं मिला, तो हम सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इंशाअल्लाह, हम न्याय के लिए लड़ेंगे।

सैयद निसार आगे कहते हैं, ‘मेरे बेटे की उम्र उस वक्त सिर्फ 19 साल थी। 17 साल बीत गए। मैं इंसाफ के लिए इंतजार करता रहा। आज अदालत ने हमें यह दिन दिखाया। फिर भी हम चुप नहीं बैठेंगे।’

वे सरकार से अपील करते हुए कहते हैं,

हम बस यही चाहते हैं कि असली गुनहगारों को पकड़ा जाए और उन्हें सख्त सजा दी जाए। हम इंसाफ के लिए हर अदालत तक जाने के लिए तैयार हैं।

10 साल की फरहीन वड़ा पाव लेने निकली थी, ब्लास्ट में मौत

सैयद निसार जैसा ही दर्द मालेगांव के लियाकत शेख का भी है। उनकी 10 साल की बेटी फरहीन वड़ा पाव लेने निकली थी। ब्लास्ट में उसकी मौत हो गई। लियाकत कहते हैं, ‘हमने इंसाफ के लिए 17 साल गवां दिए। अब यह फैसला आया है। यह बिल्कुल गलत है। हम इसे नहीं मानते।’

बेटी की मौत के बारे में लियाकत बताते हैं, ‘मेरी बच्ची घर से वड़ा पाव लेने निकली थी। अचानक जोरदार धमाके की आवाज आई। मैं घबराकर बाहर भागा, तो चारों तरफ अंधेरा और धुआं था। मैं घर लौट आया। मेरी बीवी ने कहा कि फरहीन अब तक वापस नहीं आई। मैंने उसे दिलासा दिया कि आ जाएगी। कुछ ही देर में कोई भागता हुआ आया और बोला कि घायलों में एक छोटी बच्ची भी है।’

‘यह सुनते ही हम फौरन फरहान हॉस्पिटल भागे। वहां मैंने अपनी बच्ची को देखा। मुझसे उसकी पहचान के लिए आईडी मांगी गई। सदमे की हालत में मुझे कुछ दिखाई-सुनाई नहीं दे रहा था।’

ये लियाकत शेख हैं। उनका सवाल है कि अगर बरी आरोपी गुनहगार नहीं हैं, तो सरकार बताए कि असली गुनहगार कौन है।

ये लियाकत शेख हैं। उनका सवाल है कि अगर बरी आरोपी गुनहगार नहीं हैं, तो सरकार बताए कि असली गुनहगार कौन है।

लियाकत आगे कहते हैं, ‘पहले ATS ने जांच की थी, उसका नतीजा गलत था। उसके बाद हेमंत करकरे ने सबूतों के साथ असली गुनहगारों को पकड़ा था। आज अदालत कह रही है कि वे गुनहगार नहीं हैं। अगर वे बेगुनाह हैं, तो फिर असली गुनहगार कौन हैं। उन्हें हमारे सामने लाओ।’

उस्मान का भतीजा चाय पीने रुका, तभी ब्लास्ट हो गया

मालेगांव ब्लास्ट ने जिनका सब कुछ खत्म कर दिया, उनमें उस्मान खान भी शामिल हैं। उन्हें पता था कि कोर्ट का फैसला आने वाला है। वे सुबह से ही बार-बार घड़ी देख रहे थे। कोर्ट ने जैसे ही फैसला सुनाया, उनकी आंखों से आंसू बहने लगे।

उस्मान कहते हैं, ‘मैं इस फैसले से बिल्कुल खुश नहीं हूं। फैसला तो हुआ ही नहीं है। हमारा सवाल ये है कि आखिर मुजरिम है कौन। मसला तो मुजरिम को सजा दिलाने का था।’

ब्लास्ट में उस्मान खान के भतीजे की मौत हुई थी। केस में उस्मान की गवाही भी शामिल की गई थी।

ब्लास्ट में उस्मान खान के भतीजे की मौत हुई थी। केस में उस्मान की गवाही भी शामिल की गई थी।

वे बताते हैं, ‘मेरा भतीजा ऑटो चलाता था। रमजान का मुबारक महीना था। त्योहार की वजह से खरीदारी चल रही थी। मेरे भतीजे ने चाय पीने के लिए ऑटो खड़ा किया था।’

उस्मान एक पल के लिए खामोश हो जाते हैं। फिर कहते हैं, ‘जैसे ही वह चाय पीने गया, धमाका हो गया। उसके जिस्म का पिछला हिस्सा पूरी तरह खत्म हो चुका था। हम उसे लेकर भागे। पहले हम फरहान हॉस्पिटल पहुंचे। उन्होंने नासिक ले जाने को कहा। हम नासिक ले गए। वहां से उसे मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं उसकी मौत हो गई।’

क्या सरकार या पुलिस ने आपसे कॉन्टैक्ट किया? उस्मान जवाब देते हैं, ‘हां, पुलिस आई थी। उसके कपड़े वगैरह लेकर गई थी। बाद में जमीयत उलेमा ए हिंद ने बहुत मदद की। उन्होंने ही हमें गवाही देने के लिए तैयार किया। हम 6 लोग बॉम्बे हाईकोर्ट गए थे। बयान दर्ज कराए। कोर्ट की तरफ से हमें मालेगांव तक का किराया और दूसरे खर्चे भी दिए गए थे।’

कोर्ट ने कहा- आरोपियों के खिलाफ सबूत नहीं

कोर्ट ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ मामला साबित नहीं कर सका। धमाके में इस्तेमाल बाइक का मालिकाना हक साबित नहीं हुआ। RDX लाने या रखने का कोई सबूत नहीं मिला। साजिश की बैठकों के भी पुख्ता सबूत नहीं मिले।

323 गवाहों में से करीब 40 गवाह बयान से पलट गए। अदालत ने माना कि जांच में गंभीर चूकें हुईं। ब्लास्ट वाली जगह का पंचनामा ठीक से नहीं हुआ। मेडिकल सर्टिफिकेट में हेरफेर पाया गया। रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय से संगठन अभिनव भारत को आतंकी संगठन साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं मिला।

केस की जांच पहले महाराष्ट्र ATS ने की थी। हेमंत करकरे की अगुआई में साध्वी प्रज्ञा और बाकी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। ATS ने इस ब्लास्ट को अभिनव भारत संगठन की साजिश बताया था। 2011 में जांच NIA को सौंप दी गई। NIA ने ATS की जांच पर सवाल उठाए। मकोका की धाराएं हटाईं। कहा कि ATS ने RDX प्लांट किया और गवाहों पर दबाव डाला। इससे अभियोजन पक्ष की कहानी कमजोर हो गई।

दो जांचें और दोनों में कई अंतर

मालेगांव ब्लास्ट केस में महाराष्ट्र ATS और फिर NIA ने जांच की थी। दोनों एजेंसियों की जांच में बड़ा अंतर है। ATS ने दावा किया कि धमाके की साजिश अभिनव भारत संगठन के सदस्यों ने रची थी। इसमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित, रमेश उपाध्याय, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और अजय राहिरकर को मुख्य आरोपी बनाया गया।

ATS ने कहा कि धमाके में प्रज्ञा की बाइक का इस्तेमाल हुआ। बाइक का चेसिस और इंजन नंबर मिटाया गया था। सुधाकर द्विवेदी के लैपटॉप से कथित बैठकों की रिकॉर्डिंग भी मिली। ATS ने आरोपियों पर MCOCA, UAPA और IPC के तहत केस दर्ज किया। एजेंसी ने दावा किया कि धमाके का मकसद मुस्लिम बहुल इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैलाना था।

ATS की जांच पर सवाल भी उठे। आरोप लगे कि गवाहों पर दबाव डाला गया और सबूतों को गलत तरीके से पेश किया गया।

2011 में NIA ने जांच संभाली। एजेंसी ने साध्वी प्रज्ञा, शिवनारायण कलसांगरा, श्याम बावरलाल साहू और प्रवीण तक्कलकी के खिलाफ आरोप हटा दिए। लोकेश शर्मा और धन सिंह को आरोपी बनाया गया, लेकिन 2008 के धमाके में उनकी भूमिका साबित नहीं हुई।

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एमपी-राजस्थान में 3 दिनों से बारिश,कई जगह बाढ़ जैसे हालात:नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में पानी भरा, काशी में 100 मंदिर डूबे

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश के मध्य और पूर्वी हिस्से में मानसून एक्टिव है। मध्यप्रदेश, राजस्थान के कई इलाकों में लगातार तीसरे दिन भारी बारिश से हालात खराब हैं। इसकी वजह तीन मानसूनी सिस्टम हैं। इनके कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी आ रही है।

भोपाल में बुधवार को लगातार तीसरे दिन स्कूलों में छुट्टी है। यहां दो दिनों में 8.57 इंच बारिश हुई। करीब 200 मकानों में ढाई फीट तक पानी भर गया। रतलाम, झाबुआ, धार, बड़वानी और इंदौर में अगले 24 घंटे में यहां 4 इंच से ज्यादा बारिश का अनुमान है।

उधर, राजस्थान में खोखी बांध की दीवार टूटने से 300 बीघा फसल खराब हो गई है। कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की टनल के एक हिस्से में दो-तीन फीट तक पानी भरा हुआ है।

वहीं, उत्तर प्रदेश में पिछले 2 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार को पानी भर गया था। इसका वीडियो आज सामने आया है। वाराणसी में घाटों की सीढ़ियों तक पानी पहुंच गया है। 100 से ज्यादा छोटे मंदिर डूब गए हैं।

सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है। वहीं, शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। इससे काफी देर तक जाम लगा रहा। प्रदेश में अब तक 19.6 इंच बारिश हो चुकी है।

मध्य प्रदेश में पिछले तीन दिनों से बारिश हो रही है। वहीं, शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। इससे काफी देर तक जाम लगा रहा। प्रदेश में अब तक 19.6 इंच बारिश हो चुकी है।

राजस्थान में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल में पानी भर गया है। इस वजह से बुधवार सुबह से यहां लंबा जाम लगा हुआ है। पिछले दो दिनों से ट्रैफिक रेंग-रेंगकर चल रहा है।

राजस्थान में पिछले 3 दिनों से भारी बारिश हो रही है। इसके चलते कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे की टनल में पानी भर गया है। इस वजह से बुधवार सुबह से यहां लंबा जाम लगा हुआ है। पिछले दो दिनों से ट्रैफिक रेंग-रेंगकर चल रहा है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बारिश के बाद पानी भर गया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इससे फ्लाइट ऑपरेशन और यात्रियों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।

उत्तर प्रदेश के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बारिश के बाद पानी भर गया था। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, इससे फ्लाइट ऑपरेशन और यात्रियों की आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ा। घटना मंगलवार की है, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है।

मुंबई में कुर्ला के अशोक नगर इलाके में बुधवार सुबह 3 बजे गौसिया चॉल के पास बारिश की वजह से मिट्टी का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसकी चपेट में दो-तीन घर आ गए। महाराष्ट्र के कई इलाकों में 24 घंटे से बारिश हो रही है।

मुंबई में कुर्ला के अशोक नगर इलाके में बुधवार सुबह 3 बजे गौसिया चॉल के पास बारिश की वजह से मिट्टी का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसकी चपेट में दो-तीन घर आ गए। महाराष्ट्र के कई इलाकों में 24 घंटे से बारिश हो रही है।

उत्तराखंड के चमोली की नीति घाटी में दो दिन पहले बादल फटने से तमक नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव में 17 टन स्टील से बना वैली ब्रिज बह गया। अब नाले पर अस्थायी ब्रिज बनाने का काम किया जा रहा है।

उत्तराखंड के चमोली की नीति घाटी में दो दिन पहले बादल फटने से तमक नाला उफान पर आ गया था। तेज बहाव में 17 टन स्टील से बना वैली ब्रिज बह गया। अब नाले पर अस्थायी ब्रिज बनाने का काम किया जा रहा है।

हिमाचल के शिमला-धर्मशाला NH-205 पर भराड़ीघाट के पास मंगलवार को चलती कार पर बड़ी चट्टान गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग घायल हो गए। राज्य में लैंडस्लाइड से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।

हिमाचल के शिमला-धर्मशाला NH-205 पर भराड़ीघाट के पास मंगलवार को चलती कार पर बड़ी चट्टान गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 2 लोग घायल हो गए। राज्य में लैंडस्लाइड से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।

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टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा:फरवरी 2027 तक जिम्मेदारी संभालते रहेंगे, नोएल टाटा से मतभेद, ट्रस्ट में खींचतान बनी वजह

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मुंबई, एजेंसी। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने आज 12 अगस्त को इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की एजीएम से ठीक पहले आया है। हालांकि, वे फरवरी 2027 तक पद पर बने रहेंगे।

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के साथ सहमति नहीं बन पाई थी। नए कारोबारों में भारी निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस के भविष्य को लेकर मतभेद इस फैसले की बड़ी वजह बने।

एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर के बाद टाटा ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गिरावट है। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर के शेयर 3% तक नीचे हैं।

चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देते हुए क्या कहा

चंद्रशेखरन ने कहा कि, “टाटा संस के चेयरमैन के रूप में मेरा मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके मेरे अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की थी।

इसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमेटी और बोर्ड ने दर्ज किया था और आगे बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद, यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस बोर्ड के सामने रखा गया था।

हालांकि, यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका क्योंकि बोर्ड के एक सदस्य ने इसका समर्थन नहीं किया। सर्वसम्मत समर्थन न मिलने की वजह से मैंने इस फैसले को टालने का विकल्प चुना। उस बोर्ड मीटिंग को हुए 6 महीने बीत चुके हैं और आज तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।

टाटा संस एक बहुत बड़ा संस्थान है और कई बड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट्स अभी अहम मोड़ पर हैं। फरवरी 2027 के बाद ग्रुप की अगुआई करने के लिए न सिर्फ एक लीडर का होना जरूरी है, बल्कि कर्मचारियों, निवेशकों, पार्टनर्स और बाकी स्टेकहोल्डर्स के लिए लीडरशिप को लेकर स्पष्टता होना भी बहुत जरूरी है।”

इस्तीफे की 4 बड़ी वजह

चंद्रशेखरन का कार्यकाल बढ़ाने पर मतभेद

फरवरी 2026 में टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले 5 साल के कार्यकाल की सिफारिश की थी। बाद में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया और सिर्फ 2 साल का कार्यकाल देने की वकालत की।

24 फरवरी 2026 को 5 साल के विस्तार का प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया। एक सदस्य के समर्थन न देने से इस पर सहमति नहीं बन सकी है।

नए कारोबारों के प्रदर्शन पर सवाल

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा ग्रुप ने एविएशन, डिजिटल कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इनमें से कुछ कारोबार अभी घाटे में हैं।

एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस को FY26 में कुल रू.22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि टाटा डिजिटल का घाटा रू.4,974 करोड़ रहा। इन्हीं मुद्दों पर नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई थी।

टाटा संस की लिस्टिंग हो या नहीं

टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट किया जाए या निजी कंपनी ही रखा जाए, इस पर टाटा ट्रस्ट्स के अंदर अलग-अलग राय सामने आई। नोएल टाटा लिस्टिंग के पक्ष में नहीं बताए जाते हैं, जबकि कुछ ट्रस्टी लिस्टिंग की वकालत कर चुके हैं।

टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच तालमेल

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए दोनों के बीच बड़े फैसलों पर सहमति बेहद अहम है। नए कारोबारों की रणनीति, निवेश और चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर मतभेदों से दोनों के बीच तालमेल का सवाल भी सामने आया।

चंद्रशेखरन का 9 साल का सफर: रेवेन्यू रू.16.24 लाख करोड़ पहुंचा

चंद्रशेखरन के 2017 में कमान संभालने के बाद टाटा ग्रुप का दायरा काफी बढ़ा है। चंद्रशेखरन ने ग्रुप को एविएशन, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी और डिजिटल बिजनेस जैसे नए क्षेत्रों में उतारा।

  • रेवेन्यू: वित्त वर्ष 2020 में ग्रुप का रेवेन्यू रू.7.89 लाख करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर रू.16.24 लाख करोड़ हो गया।
  • मुनाफा: ग्रुप का मुनाफा रू.32,000 करोड़ से बढ़कर रू.1.71 लाख करोड़ हो गया।
  • मार्केट कैप: लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 2020 के रू.9.31 लाख करोड़ से बढ़कर 2026 में रू.24.39 लाख करोड़ पहुंच गया।

टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में फर्क

  • टाटा ग्रुपः टाटा नाम से चलने वाली अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों को मिलाकर टाटा ग्रुप बनता है। जैसे- टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और एअर इंडिया।
  • टाटा संसः टाटा संस, टाटा ग्रुप की मुख्य कंपनी है। यह ग्रुप की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और बड़े फैसलों में अहम भूमिका निभाती है।
  • टाटा ट्रस्ट्सः टाटा ट्रस्ट्स सामाजिक और परोपकारी काम करने वाले ट्रस्टों का समूह है। इसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।

कैसे चुना जाएगा नया चैयरमैन

टाटा संस के चेयरमैन को चुनने की प्रक्रिया में पहले चयनसमिति उम्मीदवारों पर विचार करती है। इस समिति में टाटा ट्रस्ट्स की ओर से नामित सदस्य, टाटा संस बोर्ड का एक सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य शामिल होते हैं।

समिति उम्मीदवार के नाम की सिफारिश टाटा संस के बोर्ड से करती है। बोर्ड उम्मीदवार की योग्यता और ग्रुप की जरूरतों को देखते हुए अंतिम नियुक्ति का फैसला करता है। अगर मौजूदा चेयरमैन को ही जारी रखना हो, तो उनके कार्यकाल के विस्तार पर भी इसी प्रक्रिया के तहत फैसला होता है।

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खुदरा महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी, खाने-पीने की चीजें महंगी:जुलाई में 4.45% रही, दूसरे महीने RBI के 4% के अनुमान से ज्यादा

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मुंबई, एजेंसी। आलू-प्याज जैसे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से रिटेल महंगाई लगातार सातवें महीने बढ़ी है। जुलाई में यह 4.45% रही। एक महीने पहले जून में यह 4.38% पर थी। आज 12 अगस्त को रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी किए गए हैं।

खाने-पीने के सामानों की महंगाई यानी फूड इंफ्लेशन जुलाई में बढ़कर 5.52% पर पहुंच गई है। जून में यह आंकड़ा 5.32% पर था।

RBI के 4% टारगेट से लगातार दूसरे महीने ऊपर

रिजर्व बैंक ने रिटेल महंगाई दर का लक्ष्य 4% तय किया है। यह लगातार दूसरा महीना होगा जब रिटेल महंगाई आरबीआई के तय कम्फर्ट जोन 4% से ऊपर दर्ज की गई है।

महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।

4.45% महंगाई दर का क्या मतलब है?

1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल)

जब हम कहते हैं कि जूलाई 2026 में महंगाई 4.45% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना जुलाई 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 4.45% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं:

  • किसी चीज के दाम बहुत ज्यादा बढ़े होंगे।
  • किसी चीज के दाम घटे भी होंगे।
  • जब इन सबको एक साथ मिलाया गया, तो औसतन खर्च 4.45% बढ़ गया।

2. रू.100 की चीज अब रू.104.45 की हो गई

इसका गणित बहुत सीधा है। अगर जुलाई 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन रू.100 में खरीदा था, तो वही सामान जुलाई 2026 में रू.104.45 का हो गया है।

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