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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के 250 MBBS सीटों पर लगा ब्रेक:5 नए सरकारी मेडिकल-कॉलेजों को NMC की मंजूरी नहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की कमी बनी बड़ी वजह

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों को नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता नहीं मिली है। आयोग ने सभी कॉलेजों के आवेदन रिजेक्ट कर दिए हैं। इससे इस साल एमबीबीएस की 250 नई सीटें शुरू नहीं हो पाएंगी।

ये मेडिकल कॉलेज कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, दंतेवाड़ा और कुनकुरी में प्रस्तावित हैं। हर कॉलेज में 50-50 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव था।

छात्रों को मिलता बड़ा फायदा

अगर इन कॉलेजों को मंजूरी मिल जाती तो प्रदेश में एमबीबीएस की 250 सीटें बढ़ जातीं। इससे नीट यूजी में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा कुछ कम होती और कटऑफ पर भी असर पड़ सकता था।

फिलहाल छत्तीसगढ़ के 10 सरकारी और 5 निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 2330 एमबीबीएस सीटें हैं।

शिक्षा विभाग की तैयारी पर उठे सवाल

जानकारी के मुताबिक, नए मेडिकल कॉलेजों में जरूरी तैयारियां पूरी नहीं हो सकीं। कई जगह न पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर है, न फैकल्टी और न ही जरूरी मेडिकल सुविधाएं। इससे NMC के तय मानकों पर कॉलेज खरे नहीं उतर पाए।

बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने फिलहाल सिर्फ डीन और अस्पताल अधीक्षक की प्रभार नियुक्तियां की हैं। नियमित फैकल्टी की भर्ती नहीं हुई।

जिला अस्पतालों के कुछ डॉक्टरों को असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रेजिडेंट के तौर पर पदस्थ करने के आदेश जरूर दिए गए, लेकिन यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी गई।

प्रमोशन नहीं होने से भी बढ़ी परेशानी

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में काम कर रहे कई डॉक्टर लंबे समय से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। करीब 296 डॉक्टर प्रमोशन के पात्र बताए जा रहे हैं, जबकि 73 असिस्टेंट प्रोफेसरों का प्रोबेशन पीरियड भी पूरा नहीं किया गया है।

अगर समय पर प्रमोशन होते तो नए कॉलेजों के लिए प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर उपलब्ध हो सकते थे, जिससे मान्यता मिलने की संभावना बढ़ जाती।

अधिकारियों का ओवर कॉन्फिडेंस पड़ा भारी

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भरोसा था कि सरकारी मेडिकल कॉलेज होने के कारण मान्यता मिल जाएगी। लेकिन NMC साल 2023 से तय पैरामीटर के आधार पर ही मंजूरी दे रहा है। इसी वजह से इस बार सभी कॉलेजों के आवेदन खारिज हो गए।

एफिलिएशन सर्टिफिकेट तक नहीं भेजा गया

जानकारी यह भी सामने आई है कि जिन पांच कॉलेजों के आवेदन रिजेक्ट हुए, उनमें से दो-तीन कॉलेजों ने हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी का एफिलिएशन सर्टिफिकेट तक आवेदन के साथ संलग्न नहीं किया। जबकि इस दस्तावेज के बिना मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं किया जा सकता।

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कोरबा

एसईसीएल मुख्यालय में 62वीं कंपनी स्तरीय द्विपक्षीय सुरक्षा समिति की बैठक संपन्न

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‘सुरक्षा सर्वोपरि, सुरक्षा से समृद्धि’ के संकल्प के साथ अधिकारियों एवं श्रमिक प्रतिनिधियों ने ली सुरक्षा शपथ

बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) मुख्यालय स्थित वसंत क्लब, बिलासपुर में बुधवार को 62वीं कंपनी स्तरीय द्विपक्षीय सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों एवं श्रमिक प्रतिनिधियों ने “सुरक्षा सर्वोपरि, सुरक्षा से समृद्धि” के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए सुरक्षित कार्य संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा “शून्य दुर्घटना” के लक्ष्य की दिशा में सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया। द्विपक्षीय सुरक्षा समिति एसईसीएल में सुरक्षा संबंधी विषयों पर प्रबंधन एवं श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच संवाद का सर्वोच्च मंच है।

बैठक की अध्यक्षता निदेशक (तकनीकी/संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार ने की। इस अवसर पर निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) रमेश चन्द्र महापात्र, सभी क्षेत्रों के महाप्रबंधक, मुख्यालय के विभागाध्यक्ष, द्विपक्षीय सुरक्षा समिति के सदस्य तथा विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं बचाव) प्रकाश राय के स्वागत संबोधन से हुआ।

निदेशक (तकनीकी/संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार ने सभी प्रतिभागियों को सुरक्षा शपथ दिलाते हुए कहा कि सुरक्षित कार्य संस्कृति केवल नियमों के पालन से नहीं, बल्कि प्रत्येक कर्मचारी की जागरूकता, अनुशासन और जिम्मेदारी से विकसित होती है। उन्होंने सभी से सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सामूहिक प्रयासों से “शून्य दुर्घटना” के लक्ष्य को प्राप्त करने का आह्वान किया।

अपने संबोधन में निदेशक (तकनीकी/योजना एवं परियोजना) रमेश चन्द्र महापात्र ने कहा कि आधुनिक तकनीकों, सतत प्रशिक्षण तथा सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से ही सुरक्षित एवं उत्पादक कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। उन्होंने सुरक्षा मानकों के प्रभावी अनुपालन और निरंतर सुधार पर विशेष बल दिया।

बैठक में कंपनी के विभिन्न क्षेत्रों के सुरक्षा प्रदर्शन, वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था तथा भावी कार्ययोजना की समीक्षा की गई। विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए, जिन पर विस्तार से चर्चा करते हुए कार्यस्थलों पर जोखिम न्यूनीकरण, बेहतर समन्वय तथा सुरक्षा जागरूकता को और प्रभावी बनाने पर सहमति व्यक्त की गई।

इस अवसर पर निदेशक (तकनीकी/संचालन) एन. फ्रैंकलिन जयकुमार को नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक पद पर मनोनीत होने पर उपस्थित सदस्यों ने हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। साथ ही द्विपक्षीय सुरक्षा समिति के सदस्य एवं एससीकेएमसी के प्रतिनिधि कमलेश शर्मा के सेवानिवृत्त होने पर उनके दीर्घ एवं समर्पित सेवाकाल के लिए सम्मानपूर्वक शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।

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कोरबा

62nd Company-Level Bipartite Safety Committee Meeting Held at SECL Headquarters

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Officials and Workers’ Representatives Take Safety Pledge, Reaffirm Commitment to “Safety First, Prosperity Through Safety”

Bilaspur/Korba. The 62nd Company-Level Bipartite Safety Committee Meeting of South Eastern Coalfields Limited (SECL) was held at Vasant Club, SECL Headquarters, Bilaspur, on Wednesday. During the meeting, officials and workers’ representatives reaffirmed their commitment to strengthening the culture of workplace safety by taking the pledge of “Safety First, Prosperity Through Safety” and collectively resolving to work towards the goal of Zero Accidents. The Bipartite Safety Committee serves as SECL’s highest forum for dialogue between the management and workers’ representatives on matters related to occupational safety.

The meeting was chaired by Shri N. Franklin Jayakumar, Director (Technical/Operations), in the presence of Shri Ramesh Chandra Mohapatra, Director (Technical/Planning & Projects). General Managers of all Areas, Heads of Departments, members of the Bipartite Safety Committee, and representatives of various trade unions participated in the meeting. The programme commenced with the welcome address by Shri Prakash Rai, General Manager (Safety & Rescue).

Administering the Safety Pledge to all participants, Shri N. Franklin Jayakumar emphasised that a strong safety culture is built not merely through compliance with rules but through the awareness, discipline, and responsibility of every employee. He urged all stakeholders to accord the highest priority to safety and work collectively towards achieving the goal of Zero Accidents.

Addressing the gathering, Shri Ramesh Chandra Mohapatra stated that a safe and productive work environment can be ensured only through the adoption of modern technologies, continuous training, and active participation of all stakeholders. He stressed the need for strict adherence to safety standards and their continual improvement.

The meeting reviewed the company’s current safety performance, safety initiatives across different Areas, and the roadmap for further strengthening workplace safety. Representatives of various trade unions shared valuable suggestions, and detailed discussions were held on risk mitigation, enhanced coordination, and measures to further improve safety awareness across operations.

On the occasion, members of the Committee congratulated Shri N. Franklin Jayakumar on his appointment as Chairman-cum-Managing Director of Northern Coalfields Limited (NCL). The Committee also extended its best wishes to Shri Kamlesh Sharma, Bipartite Safety Committee Member and representative of SCKMC, on his superannuation, appreciating his long and dedicated service.

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ का मोस्ट वांटेड नक्सली मिसिर बेसरा झारखंड में गिरफ्तार:55 जवानों का हत्यारा, डेढ़ करोड़ का इनामी था, बीजापुर में 8 नक्सलियों का सरेंडर

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जगदलपुर/बीजापुर, एजेंसी। बस्तर में माओवादी नेटवर्क को फैलाने वाले और झारखंड में 55 जवानों की शहादत से जुड़े IED ब्लास्ट का आरोपी नक्सली मिसिर बेसरा पकड़ा गया है। मंगलवार (28 जुलाई) को झारखंड के सारंडा के जंगल में सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर उसे और 2 साथियों को गिरफ्तार किया है।

मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है। वह नक्सलियों के पोलित ब्यूरो का मेंबर और ERB इंचार्ज था। माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो सदस्य और संगठन के शीर्ष नेताओं में शामिल रहा है।

बताया जा रहा है कि अगला टारगेट नक्सली गणपति है, जिसके नेपाल में छिपे होने की खबर है, उसने सरेंडर नहीं किया है। बसवा राजू से पहले वो ही संगठन का महासचिव था। बसवा राजू नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का मेंबर था। 21 मई 2025 को एनकाउंटर में मारा गया।

इधर मिसिर बेसरा के पकड़े जाने के बाद झारखंड में एक्टिव रहे 8 नक्सलियों ने बीजापुर पुलिस के सामने सरेंडर किया है। इनमें 5 महिला माओवादी भी शामिल हैं। इन सभी नक्सलियों पर कुल 49 लाख रुपए का इनाम घोषित है।

इनपुट मिलने के बाद चलाया सर्च ऑपरेशन

सुरक्षा एजेंसियों को इनपुट मिला था कि मिसिर बेसरा अपने साथियों के साथ सारंडा के गिरिडीह और पारसनाथ की पहाड़ियों के रास्ते नए ठिकाने की तलाश में निकल रहा है। इसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान घेराबंदी में वह भाग नहीं सका और पकड़ा गया।

20 साल से नक्सली संगठन से जुड़ा था

नक्सली मिसिर बेसरा झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड थाना क्षेत्र के मदनडीह गांव का रहने वाला है। वह पिछले 20 साल से झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में एक्टिव रहा है। माओवाद संगठन के बड़े ऑपरेशनों में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उसके खिलाफ हत्या, IED विस्फोट, पुलिस बलों पर हमले और आर्म्स एक्ट समेत 100 से अधिक मामले दर्ज हैं।

इन वारदातों में रहा शामिल

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सारंडा, कोल्हान, पारसनाथ और झारखंड-ओडिशा-पश्चिम बंगाल उसका प्रमुख कार्यक्षेत्र रहा है। साल 2003-04 में पश्चिम सिंहभूम जिले के बिटकिलसोय और बलिबा क्षेत्र में हुए IED ब्लास्ट की साजिश रचने का आरोप भी उस पर है। इन हमलों में 55 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे।

इसके अलावा साल 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर में नक्सलियों के किए गए हमले के दौरान उसे पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया गया था। तब से वह लगातार फरार चल रहा था।

बस्तर और छत्तीसगढ़ से गहरा कनेक्शन

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मिसिर बेसरा छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भी एक्टिव था। वह माओवादी संगठन के केंद्रीय नेतृत्व का हिस्सा होने के कारण दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी और पूर्वी क्षेत्रीय ब्यूरो के बीच समन्वय का काम करता था।

सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से नजर रखे हुए थीं

बस्तर में नक्सलियों के नेटवर्क को बढ़ाने, कैडरों को ट्रेनिंग देने, हथियार आपूर्ति और बड़े ऑपरेशनों की प्लानिंग करने में उसकी भूमिका को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से नजर रखे हुए थीं। संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ उसने नियमित बैठकों के जरिए बस्तर, अबूझमाड़, दक्षिण बस्तर और महाराष्ट्र सीमा से लगे नक्सल इलाकों में कई बड़ी प्लानिंग की थीं।

सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसकी गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह माओवादी संगठन की शीर्ष निर्णय लेने वाली इकाई का मेंबर था और उसे संगठन के संचालन, फंडिंग के साथ ही कई राज्यों में फैले नक्सली नेटवर्क की विस्तृत जानकारी है।

बीजापुर में 8 नक्सलियों का सरेंडर

सीआरपीएफ के उपमहानिरीक्षक (DIG) बी.एस. नेगी ने बताया कि एक दिन पहले झारखंड में माओवादी संगठन के अंतिम बचे केंद्रीय समिति (CC) सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार किया गया। इसके अगले ही दिन बीजापुर में 8 नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड और छत्तीसगढ़ में सक्रिय बड़े नक्सली लगभग खत्म हो चुके हैं।

सरेंडर नक्सलियों में ये शामिल

आत्मसमर्पण करने वालों में अश्विन उर्फ लच्छू, रंगा उर्फ सोहन और दोबा माड़वी उर्फ राहत पर 8-8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। वहीं, फगनी पोयम उर्फ रजनी, सूरज मुन्नी चम्पिया उर्फ सुबनी, हिड़मे कड़ती उर्फ रीता, बुधरी कुंजाम उर्फ अनुषा और सलमी चम्पिया उर्फ जिलानी पर 5-5 लाख रुपए का इनाम घोषित था।

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