विदेश
बांग्लादेश में बस नदी में गिरी, 26 की मौत:6 लोगों की जान बचाई, बस को बड़ी नाव पर चढ़ाते समय हुआ हादसा
ढाका,एजेंसी। बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले में हुए बस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है। यह हादसा तब हुआ जब यात्रियों से भरी बस दाउलतदिया घाट पर फेरी (बड़ी नाव) में चढ़ते समय पद्मा नदी में गिर गई।
फायर सर्विस के मुताबिक, 23 शव बस के अंदर से निकाले गए, जिनमें 11 महिलाएं, 8 पुरुष और 5 बच्चे शामिल हैं।

इसके अलावा 8 लोगों को जिंदा बचाया गया था, लेकिन उनमें से 3 लोगों की बाद में अस्पताल में मौत हो गई। कुछ लोगों की तलाश जारी है। वहीं, 22 मृतकों के शव उनके परिवारों को सौंप दिए गए हैं।
हादसे से जुड़ी तस्वीरें…

बस को फेरी पर चढ़ाके वक्त ड्राइवर का कंट्रोल छूट गया।

ड्राइवर के कंट्रोल छूटते ही कुछ ही सेकंड में बस नदी में जा गिरी।

बस नदी में गिरने के बाद कई लोगों ने तैरकर बाहर निकलने की कोशिश की।
PM रहमान ने जांच के आदेश दिए
बस में करीब 40 लोग सवार थे। हादसा बुधवार शाम को हुआ। तब सिर्फ 2 लोगों की मौत की खबर आई थी।
बांग्लादेश में बसों और गाड़ियों को नदी पार कराने के लिए फेरी का इस्तेमाल होता है। यह एक बड़ी नाव या जहाज जैसा होता है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली और जांच के आदेश दिए।
रेस्क्यू ऑपरेशन में फायर सर्विस की चार टीमें शामिल थीं
रेस्क्यू ऑपरेशन में फायर सर्विस की चार टीमें और 10 गोताखोर शामिल रहे। इनके साथ सेना, पुलिस, कोस्टगार्ड, BIWTC और लोकल प्रशासन ने भी मिलकर काम किया। कुल 25 मृतकों में से 22 शव फायर सर्विस ने निकाले, 2 लोगों को स्थानीय लोगों ने बचाया लेकिन बाद उनकी मौत हो गई, जबकि 1 शव नौसेना के गोताखोरों ने बरामद किया।
मरने वालों में ज्यादातर की पहचान कर ली गई है, जिनमें महिलाएं, पुरुष और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसे के बाद प्रशासन ने जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बना दी है।
इस कमेटी की अगुवाई एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट उचेन मेय कर रहे हैं और इसमें पुलिस, फायर सर्विस और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हैं। कमेटी को 3 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया है।
6 घंटे के बाद बस निकाली गई
रेस्क्यू टीम ने ‘हमजा’ नाम के जहाज की मदद से करीब 6 घंटे की मशक्कत के बाद आधी रात को बस को बाहर निकाला। फायर सर्विस और कोस्टगार्ड के गोताखोर सेना और पुलिस की मदद से लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि बस ढाका जा रही थी। इसमें सवार कई यात्री ईद की छुट्टियां खत्म कर राजधानी लौट रहे थे, जिनमें बच्चे भी शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस में सवार कई लोग एक ही परिवार के थे। कुछ लोग बाहर खड़े होने की वजह से बच गए, जबकि उनके परिजन बस के अंदर फंसे रह गए।
विदेश
इजराइल बोला- होर्मुज बंद करने वाले ईरानी कमांडर को मारा:ईरान की बाब-अल-मंदेब पर हमले की धमकी, यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शिपिंग रूट
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। इजराइल ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के नौसेना चीफ अलिरेजा तंगसीरी को मारने का दावा किया है। इजराइल के रक्षा मंत्री काट्ज ने कहा कि ईरान के बंदर अब्बास इलाके में हुई एयरस्ट्राइक में तंगसीरी मारे गए।
इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, तंगसीरी वही कमांडर थे जिन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने की प्लानिंग की थी। हालांकि ईरान ने अभी तक तंगसीरी के मौत की पुष्टि नहीं की है।

अलिरेजा तंगसीरी को 2018 में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौसेना का चीफ नियुक्त किया था।
ईरान की होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब पर हमले की धमकी
इसी बीच खबरें हैं कि अमेरिका, ईरान के खार्ग द्वीप पर जमीनी हमला (ग्राउंड इनवेजन) कर सकता है। इसके जवाब में ईरान ने बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी दी है।
बाब-अल-मंदेब रेड सी का एंट्री प्वाइंट है। यह रेड सी को अरब सागर से जोड़ता है। स्वेज नहर तक जाने वाले जहाज इसी रास्ते से गुजरते हैं। दुनिया के करीब 12 प्रतिशत तेल की सप्लाई यहीं से गुजरती है। यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शिपिंग रूट है।

बाब-अल-मंदेब अफ्रीकी देश जिबूती में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस इस स्ट्रेट से सिर्फ 30 किमी दूर है। अगर बाब-अल-मंदेब में भी रुकावट आती है, तो मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष और बढ़ सकता है।
ईरान की मदद कर सकते हैं हूती विद्रोही
यह यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट को जोड़ने वाला अहम समुद्री रास्ता है। हर साल करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 94 लाख करोड़ रुपये) का सामान इस रास्ते से गुजरता है। रोजाना लगभग 45 लाख बैरल तेल यहां से ट्रांसपोर्ट होता है।
हालांकि, इसे बंद करना ईरान के लिए आसान नहीं है, क्योंकि यह स्ट्रेट ईरान से करीब 2500 किमी दूर है। हालांकि यह यमन के पास स्थित है, जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोही मौजूद हैं। पहले भी गाजा युद्ध के दौरान हूती ने ड्रोन और मिसाइल से जहाजों को निशाना बनाया था, जिससे रेड सी का ट्रैफिक प्रभावित हुआ था।
ईरान की मदद कर सकते हैं हूती विद्रोही
यह यूरोप, एशिया और मिडिल ईस्ट को जोड़ने वाला अहम समुद्री रास्ता है। हर साल करीब 1 ट्रिलियन डॉलर (करीब 94 लाख करोड़ रुपये) का सामान इस रास्ते से गुजरता है। रोजाना लगभग 45 लाख बैरल तेल यहां से ट्रांसपोर्ट होता है।
हालांकि, इसे बंद करना ईरान के लिए आसान नहीं है, क्योंकि यह स्ट्रेट ईरान से करीब 2500 किमी दूर है। हालांकि यह यमन के पास स्थित है, जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोही मौजूद हैं। पहले भी गाजा युद्ध के दौरान हूती ने ड्रोन और मिसाइल से जहाजों को निशाना बनाया था, जिससे रेड सी का ट्रैफिक प्रभावित हुआ था।
ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

इजराइल पर ईरानी मिसाइल के हमले के बाद एक कार हवा में उड़ गई।

ईरान ने बुधवार को इजराइल के हदेरा में पावर प्लांट को निशाना बनाया।

ईरान ने बुधवार को कुवैत में इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला किया।
विदेश
ईरान बोला-अमेरिका के पास ताकत होती तो जीत चुका होता:अपनी हार को समझौते का नाम नहीं दें, उनके खोखले वादों का दौर खत्म हुआ
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन,एजेंसी। डीसी ईरान ने ट्रम्प की युद्धविराम कोशिशों का मजाक उड़ाया है। ईरान के एक सैन्य प्रवक्ता ने बुधवार को अमेरिका के युद्धविराम दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका दरअसल खुद से ही बातचीत कर रहा है।
ईरानी सेना के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम जोलफघारी ने यह बयान सरकारी टीवी पर प्रसारित एक रिकॉर्डेड वीडियो में दिया।

उन्होंने कहा, “आप जिस ताकत की बात करते थे, वह अब नाकामी में बदल गई है। आप खुद को दुनिया की महाशक्ति कहते हैं, लेकिन अगर यह ताकत आपके पास होती तो अब तक इस हालात से बाहर निकल चुके होते। अपनी हार को समझौते का नाम मत दीजिए। आपके खोखले वादों का दौर अब खत्म हो चुका है।”
जोलफघारी ने आगे तंज कसते हुए कहा, “क्या आपके अंदरूनी हालात इतने खराब हो गए हैं कि आप खुद से ही बातचीत कर रहे हैं?”
जोलफघारी का यह बयान उस वक्त आया जब ट्रम्प प्रशासन ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 बिंदुओं वाला युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने साफ कहा, “पहले दिन से हमारा रुख एक ही रहा है और आगे भी रहेगा। हम जैसे लोग आप जैसे लोगों के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे। न अभी किया है, न आगे करेंगे।”
ईरान में हमलों का असर…
अब तक करीब 1,500 लोगों की मौत, 18,551 घायल।
मरने वालों में 8 महीने के बच्चे से लेकर 88 साल तक के बुजुर्ग।
जंग में अब तक करीब 200 महिलाओं की मौत हुई।
28 फरवरी को स्कूल पर हमले में 168 बच्चों की मौत हुई।
जंग में 55 हेल्थ वर्कर्स घायल, जिनमें 11 की मौत।
ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

इराक के एक होटल पर मंगलवार रात ड्रोन हमला हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक होटल की जिस मंजिल को निशाना बनाया गया वहां अमेरिकी कर्मचारी ठहरे हुए थे।

ईरानी ने मंगलवार को इजराइल की राजधानी तेल अवीव पर मिसाइल हमला किया, जिससे कई कार के परखच्चे उड़ गए।

ईरान ने मंगलवार को इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को टारगेट करके मिसाइल दागीं।
विदेश
किम जोंग बोले- परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था:ईरान पर हमले ने हमें सच साबित किया, जीत मजबूत ताकत से तय होती है
प्योंगयांग,एजेंसी। नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने देश के पास परमाणु हथियार होने को लेकर खुशी जताई है। सरकारी मीडिया के मुताबिक उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर किए गए हमले साबित करते हैं, कि उनके देश का परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था।
किम ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध दिखाता है कि आज की दुनिया में सिर्फ मजबूत सैन्य ताकत ही किसी देश को सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने यह बयान सोमवार को संसद में लंबे भाषण के दौरान दिया।

अपने भाषण में किम ने दक्षिण कोरिया के प्रति सख्त रुख दोहराया और कहा कि वह अपने देश की परमाणु ताकत को और मजबूत करेंगे, ताकि अमेरिका को रोका जा सके।

किम जोंग उन की यह तस्वीर नॉर्थ कोरिया की सरकारी मीडिया ने जारी की है। इसमें वह सोमवार को सुप्रीम पीपल्स असेंबली में कार्यक्रम में नजर आ रहे हैं।
किम जोंग बोले- और ज्यादा परमाणु हथियार बनाएंगे
किम जोंग उन का यह भाषण मंगलवार को लिखित रूप में जारी हुआ है। इसमें उन्होंने कहा कि 2019 में ट्रम्प के साथ बातचीत टूटने के बाद परमाणु हथियार बढ़ाने का फैसला उनका सबसे सही कदम था।
किम ने कहा कि नॉर्थ कोरिया अब अमेरिका के खिलाफ एकजुट मोर्चे में और ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएगा। हालांकि उन्होंने ट्रम्प का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन यह जरूर कहा कि उनके विरोधी टकराव चाहते हैं या शांति, यह उन पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि नॉर्थ कोरिया हर स्थिति के लिए तैयार है।
किम ने देश को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने, ज्यादा परमाणु हथियार और उन्हें ले जाने वाली मिसाइलें बनाने पर जोर दिया। किम ने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों की वजह से नॉर्थ कोरिया अब ज्यादा सुरक्षित है और इसी वजह से वह अपने संसाधनों का इस्तेमाल आर्थिक विकास के लिए भी कर पा रहा है।

किम जोंग उन एक लॉन्चर पर रखी ह्वासोंग-17 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के पास चलते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह तस्वीर 24 मार्च 2022 की है।
किम जोंग उन के भाषण की अहम बातें…
- अमेरिका दुनियाभर में जो आक्रामक कदम उठा रहा है, उससे साफ होता है कि उनका परमाणु हथियार बढ़ाने का फैसला गलत नहीं है।
- आज की स्थिति साफ दिखाती है कि दुश्मनों की बातों में न आकर परमाणु हथियार सुरक्षित रखने का फैसला भी सही था।
- नॉर्थ कोरिया को अब कोई भी खतरा नहीं है। जरूरत पड़ी तो हम दूसरे देशों के लिए खतरा बन सकते हैं।
- किसी देश की प्रतिष्ठा, हित और जीत सिर्फ सबसे मजबूत ताकत से ही तय होती है। हम अपने देश को एक परमाणु शक्ति के रूप में और मजबूत करते रहेंगे।

नॉर्थ कोरिया ने दिसंबर 2023 में एक अज्ञात जगह से इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) को लॉन्च किया था।
साउथ कोरिया को दुश्मन देश का दर्जा देंगे किम
साउथ कोरिया को लेकर उन्होंने कहा कि हम उसे सबसे बड़ा दुश्मन मानेंगे और पूरी तरह नजरअंदाज करेंगे। अगर साउथ कोरिया कोई भी कदम उठाता है जो उनके देश को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी।
कई दशकों से अमेरिका और उसके सहयोगी देश, प्रतिबंध और बातचीत के जरिए नॉर्थ कोरिया को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन अब तक सभी प्रयास असफल रहे हैं।
व्हाइट हाउस में दोबारा आने के बाद ट्रम्प ने किम से फिर बातचीत करने की इच्छा जताई है। हालांकि, किम का कहना है कि बातचीत तभी हो सकती है, जब अमेरिका आधिकारिक तौर पर नॉर्थ कोरिया को परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता दे।
नॉर्थ कोरिया लंबे समय से यह कहता रहा है कि अगर लीबिया के मुअम्मर गद्दाफी और इराक के सद्दाम हुसैन के पास परमाणु हथियार होते तो उनका अंत इस तरह नहीं होता।
2019 में अमेरिका-नॉर्थ कोरिया की बातचीत टूटी थी
अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को लेकर साल 2018 में बातचीत शुरू हुई थी। इसे लेकर जून 2018 में सिंगापुर में पहली बार ट्रम्प और किम जोंग उन की ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी।
इसके बाद फरवरी 2019 में वियतनाम के हनोई में दूसरी बैठक हुई, लेकिन यहीं बातचीत टूट गई, क्योंकि दोनों पक्ष शर्तों पर सहमत नहीं हो पाए।
इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने कहा था कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और सुरक्षा के लिए उसे अपनी सैन्य ताकत बढ़ानी होगी।
इसी सोच के तहत उसने अपने परमाणु हथियार और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का फैसला किया। नॉर्थ कोरिया का मानना है कि मजबूत परमाणु क्षमता ही उसे बाहरी हमलों से बचा सकती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने जून 2019 को नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन से नॉर्थ और साउथ कोरिया की सीमा पर स्थित DMZ (डिमिलिटराइज्ड जोन) में मुलाकात की थी।
नॉर्थ कोरिया के पास अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं
इसके बाद नॉर्थ कोरिया ने धीरे-धीरे अपनी पुरानी रणनीति पर वापसी कर ली। उसने मिसाइल टेस्टिंग बढ़ा दी और अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ाने लगा। कई बार लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का भी परीक्षण किया गया।
फिलहाल नॉर्थ कोरिया के पास कुल कितनी मिसाइलें हैं, इसका सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक नॉर्थ कोरिया के पास सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनमें शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और और लंबी दूरी (ICBM) की मिसाइलें शामिल हैं।
ICBM यानी लंबी दूरी की मिसाइलें ऐसी हैं, जो अमेरिका तक पहुंचने की क्षमता रखती हैं। नॉर्थ कोरिया ने ह्वासोंग-15, ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी मिसाइलों की टेस्टिंग की है। इन मिसाइलों की रेंज लगभग 10,000 से 15,000 किलोमीटर तक मानी जाती है।
इसका मतलब है कि ये अमेरिका के बड़े हिस्से तक पहुंच सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स यह भी मानती हैं कि नॉर्थ कोरिया के पास करीब 50–100 के आसपास परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें हो सकती हैं, लेकिन यह पक्का आंकड़ा नहीं है।
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