रायपुर,एजेंसी। रायपुर में गर्मी बढ़ते ही चलती और खड़ी गाड़ियों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। पिछले एक महीने में ही 6 से ज्यादा हादसे दर्ज हुए हैं। इनमें रिंग रोड-2 पर चलती टाटा एस, कलेक्ट्रेट के पास खड़ी कार, खमतराई में स्कॉर्पियो और अवंति विहार की घटना शामिल हैं।
हालांकि, राहत की बात यह रही कि ज्यादातर मामलों में समय रहते लोग सुरक्षित बाहर निकल गए। कोई जनहानि नहीं हुई, सिर्फ गाड़ियां जलकर खाक हो गईं। इन घटनाओं ने वाहन ड्राइवरों की चिंता बढ़ा दी है।
ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गर्मियों में कार के अंदर का तापमान 60°C तक पहुंच सकता है, जिससे इंजन, वायरिंग और फ्यूल सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ओवरहीटिंग, फ्यूल लीकेज और इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट जैसी तकनीकी खामियां अचानक आग लगने की बड़ी वजह बन रही हैं। वहीं कार में रखी ज्वलनशील चीजें भी खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन हादसों के पीछे बड़ी वजह लापरवाही और समय पर मेंटेनेंस न होना है। नियमित सर्विसिंग, कूलिंग सिस्टम की जांच, वायरिंग की देखभाल और सतर्कता से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। थोड़ी सी सावधानी ही गर्मियों में आपकी और आपके वाहन की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
आग में पूरी तरह जलने के बाद यार्ड में खड़ी कार।
कुछ महीनों में हुई 4 बड़ी घटनाएं
चलती कार में अचानक उठने लगा धुआं
3 अप्रैल 2026 को रिंग रोड-2 पर चलती टाटा एस में अचानक आग लग गई थी। आग लगते ही वाहन से धुआं और लपटें उठने लगीं, जिसके बाद ड्राइवर ने तुरंत गाड़ी रोककर बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। देखते ही देखते आग ने पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया।
सूचना मिलने पर दमकल टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गया।
3 अप्रैल 2026 को रिंग रोड-2 पर चलती टाटा एस में अचानक आग लग गई थी।
कलेक्ट्रेट के पास खड़ी कार में लगी आग
रायपुर में 24 फरवरी को कलेक्ट्रेट के पास खड़ी एक कार में अचानक आग लग गई। कार से धुआं और लपटें उठने लगी। हालांकि, समय रहते आग पर काबू पा लिया गया। जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। आग किस वजह से लगी, इसकी जांच जारी है।
रायपुर कलेक्ट्रेट के पास खड़ी एक कार में अचानक आग लग गई।
खमतराई में चलती स्कॉर्पियो में आग लगी
2 महीने पहले खमतराई इलाके में चलती स्कॉर्पियो में आग लग गई थी। स्कॉर्पियो ड्राइवर की सूझबूझ से गाड़ी में सवार 4 लोगों की जान बच गई। तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगने की आशंका जाहिर की गई।
बताया जा रहा है कि, परिवार बेमेतरा से रायपुर एक रिश्तेदार के इलाज के लिए डीकेएस अस्पताल रायपुर आया था। अस्पताल में भर्ती कराने के बाद वे अन्य साथियों के साथ वापस बेमेतरा लौट रहे थे। तभी हादसा हो गया।
2 महीने पहले खमतराई इलाके में चलती स्कॉर्पियो में आग लग गई थी।
अवंति विहार में आग का गोला बनी कार
रायपुर के अवंति विहार इलाके में भी कुछ महीने पहले एक कार अचानक आग का गोला बन गई थी। देखते ही देखते कार पूरी तरह जलकर राख हो गई। लोगों ने पुलिस और दमकलकर्मियों को सूचना दी। पुलिस की पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची, कुछ ही समय बाद फायर ब्रिगेड की टीम भी आ गई और आग को बुझा दिया। जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
अवंति विहार इलाके में भी एक कार अचानक आग का गोला बन गई थी।
क्या कहते हैं ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट
मैक मोटर्स के संचालक अमित बताते हैं कि अधिकांश घटनाएं लापरवाही या समय पर मेंटेनेंस न होने की वजह से होती हैं। उनका कहना है कि अगर वाहन की नियमित सर्विसिंग कराई जाए और छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज न किया जाए, तो ऐसी घटनाओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।
गर्मियों में कार में आग लगने की घटनाएं एक गंभीर समस्या बनती जा रही हैं, लेकिन थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से इनसे बचा जा सकता है। नियमित मेंटेनेंस, सही आदतें और सतर्कता ही आपकी और आपके वाहन की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं।
गर्मी में खतरा क्यों बढ़ जाता है?
कैपिटल मोटर संचालक दीपक चावला के मुताबिक अधिक तापमान के कारण इंजन और बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। फ्यूल जल्दी वाष्पित (evaporate) हो जाता है। इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर असर पड़ता है। ज्वलनशील वस्तुएं जल्दी प्रतिक्रिया करती हैं। यही वजह है कि गर्मियों में आग लगने की घटनाएं अधिक देखने को मिलती हैं।
भारत सरकार ने पुराने वाहनों को लेकर क्या नियम तय किए हैं?
15 साल पुरानी पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल कारें दिल्ली-NCR जैसे क्षेत्रों में बैन हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 20 साल पुरानी निजी गाड़ियों और 15 साल पुरानी कॉमर्शियल वाहनों को फिटनेस टेस्ट में पास होना जरूरी है।
इस टेस्ट में फेल होने पर गाड़ी स्क्रैप के लिए जब्त की जा सकती है। इसलिए अगर वाहन ज्यादा पुराना है और उसकी नियमित देखभाल नहीं की गई है तो सिर्फ कानूनी रूप से नहीं, सुरक्षा के लिहाज से भी वह खतरनाक हो सकता है।
क्या CNG या इलेक्ट्रिक कारों में आग लगने का जोखिम ज्यादा होता है?
अगर CNG किट ठीक से नहीं लगाई गई हो या गाड़ी की सही देखभाल ना हो रही हो तो आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, अगर CNG या इलेक्ट्रिक कार की समय पर सर्विस कराई जाए और भरोसेमंद (ऑथराइज्ड) सर्विस सेंटर से देखभाल कराई जाए तो आग लगने का खतरा बहुत कम हो जाता है।
जांजगीर। सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक को लेकर नगरीय निकायों में अभियान चलाया जाएगा। अभियान के दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक के साथ 120 माइक्रोन से कम मोटाई वाले प्लास्टिक कैरी बैग के उपयोग पर भी विशेष नजर रखी जाएगी।
अब अभियान में फील्ड अधिकारियों को एसयूपी (फील्ड इंस्पेक्शन मोबाइल एप) के माध्यम से निरीक्षण करना होगा। इसे जिले के 11 नगरीय निकायों में लागू किया जाएगा। टीम द्वारा शहर में हुए निरीक्षण की रिपोर्ट तत्काल पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। पोर्टल पर विक्रेताओं, उपयोगकर्ताओं, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही आम नागरिकों से एसयूपी एप के माध्यम से फीडबैक भी लिया जाएगा। इसके जरिए सिंगल यूज प्लास्टिक से जुड़ी शिकायतें भी दर्ज की जा सकेंगी। संबंधित स्थानीय निकाय को उनका निराकरण करना होगा।
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में तीज पर्व पर मायके जाने की तैयारी कर रही महिलाओं और दूसरे यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में उरकुरा स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग का काम किया जाएगा।
इसके चलते 13 और 14 सितंबर को रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, गेवरा रोड और इतवारी के बीच चलने वाली 10 ट्रेनें रद्द रहेंगी। वहीं 2 मेमू ट्रेनों का परिचालन बिलासपुर तक सीमित रहेगा। रेलवे के मुताबिक यह काम उरकुरा-रायपुर स्टोर डिपो के बीच दोहरीकरण परियोजना के तहत उरकुरा स्टेशन के यार्ड रीमॉडलिंग के लिए किया जा रहा है।
यात्रियों के लिए जरूरी बात
तीजा पर्व के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार मायके आने-जाने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में 13 और 14 सितंबर को यात्रा से पहले ट्रेन नंबर जरूर चेक कर लें। रद्द ट्रेन से यात्रा की योजना है तो वैकल्पिक ट्रेन या बस की व्यवस्था पहले कर लेना बेहतर होगा।
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया। भाजपा सरकार में मंत्री खुशवंत साहेब के बड़े भाई और सतनामी समाज के धर्मगुरु गुरु बालदास के बड़े बेटे ढाल दास ने कांग्रेस ज्वॉइन कर ली। रायपुर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीजा-पोरा कार्यक्रम के दौरान उन्हें कांग्रेस में प्रवेश कराया।
ढाल दास ने कहा कि जनता भी जानती है कि भाजपा क्या कर रही है। अगर कांग्रेस मुझे मौका देती है तो मैं मुंगेली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहूंगा। पार्टी जहां से मुझे चुनाव लड़ने के लिए चयनित करेगी, मैं वहां से चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं।
उन्होंने कहा कि पार्टी में शामिल होने से पहले मैंने अपने भाई और पिताजी से बातचीत की थी और उन्हें इस बारे में बताया था। दोनों ने अपनी सहमति दे दी। वहीं उनके भाई मंत्री खुशवंत साहेब ने कहा कि कांग्रेस हमेशा तोड़ने की नीति से काम करती है।
रायपुर में पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने ढाल दास को कांग्रेस में प्रवेश कराया।
सामाजिक-राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है परिवार
ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनका परिवार सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली माना जाता है। ऐसे में एक ही परिवार के एक सदस्य के भाजपा सरकार में मंत्री होने और दूसरे के कांग्रेस में शामिल होने को सियासी तौर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
गुरु बालदास के 4 बेटे, ढाल दास सबसे बड़े
सतनामी समाज के प्रमुख धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब का परिवार बाबा गुरु घासीदास की वंश परंपरा से जुड़ा हुआ है। गुरु बालदास के चार बेटे हैं- ढाल दास, सोमेश दास, खुशवंत दास और सौरभ दास। उनकी एक बेटी भी है। इनमें ढाल दास सबसे बड़े बेटे हैं।
गुरु परिवार का सतनामी समाज में धार्मिक और सामाजिक प्रभाव माना जाता है। गिरौधपुरी धाम और भंडारपुरी धाम से जुड़े प्रमुख आयोजनों में परिवार की सक्रिय भूमिका रहती है।
मंत्री के भाई का कांग्रेस में जाना क्यों अहम?
ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने को सिर्फ एक राजनीतिक ज्वाइनिंग के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। वे मंत्री खुशवंत साहब के बड़े भाई हैं और गुरु बालदास के परिवार से आते हैं। ऐसे में उनके कांग्रेस में जाने से एक ही परिवार के राजनीतिक रूप से अलग-अलग दलों में होने का समीकरण सामने आया है।
ढाल दास ने मुंगेली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। मुंगेली विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित है और इसे भाजपा के मजबूत प्रभाव वाली सीट माना जाता है। यहां भाजपा के पुन्नूलाल मोहले लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक चेहरा हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की थी।
2023 के चुनाव में पुन्नूलाल मोहले को 85,429 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी संजीत बनर्जी को 73,648 वोट मिले थे। दोनों के बीच जीत का अंतर 11,781 वोट रहा था। ऐसे में अगर भविष्य में कांग्रेस ढाल दास को मुंगेली से अपना प्रत्याशी बनाती है, तो चुनावी समीकरण कुछ बदले हुए नजर आ सकते हैं।
कांग्रेस तोड़ने के नीयत से काम करती है- मंत्री खुशवंत
मंत्री खुशवंत साहेब ने भाई के कांग्रेस प्रवेश को लेकर कहा कि वह मेरे भाई हैं। सुख-दुख हो या किसी तरह का तीज-त्योहार, हम हमेशा एक-दूसरे के साथ मिलते हैं और आगे भी मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीयत ही समाज और परिवार को तोड़ने की रही है।
उन्होंने कहा कि एक धर्म को दूसरे धर्म से, एक समाज को दूसरे समाज से और एक परिवार को दूसरे परिवार से लड़ाने की कांग्रेस कितनी भी कोशिश कर ले, वह कभी सफल नहीं होगी।