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छत्तीसगढ़

CG के मंत्रियों ने किया योग : खेला बैडमिंटन, IIM रायपुर में मैनेजमेंट गुरुओं ने सिखाया जनता के लिए कैसे काम करें

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रायपुर ,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने एक जैसी टी-शर्ट और लोवर पहनकर योग करते दिखाई दिए। खेल मंत्री टंक राम वर्मा बैडमिंटन खेलने दिखाई दिए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय योगा टीचर के साथ पोज़ दे रहे थे। सोमवार की सुबह कुछ ऐसा ही अंदाज सभी नेताओं का दिखा रायपुर के आईआईएम में।

दरअसल रायपुर के इस मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में चिंतन शिविर का आयोजन किया गया है। यहां सरकार के मंत्री जनता से जुड़े कामकाज के गुर मैनेजमेंट एक्सपर्ट से सीख रहे हैं। सोमवार को चिंतन शिविर का अंतिम दिन था । दो दिन के लिए यह शिविर आयोजित किया गया था।

मुख्यमंत्री ने योग को स्वस्थ जीवनशैली का आधार बताते हुए कहा कि योग न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मन को भी शांत करता है और हमें प्रकृति के अधिक समीप लाता है। यह योगाभ्यास न केवल एक प्रेरणादायक पहल थी, बल्कि प्रदेश में स्वास्थ्य एवं संतुलित जीवनशैली को प्रोत्साहित करने का भी सशक्त संदेश था।

मुख्यमंत्री साय के साथ इस योग सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और आईआईएम रायपुर के निदेशक प्रो. रामकुमार काकानी भी शामिल हुए।

चिंतन शिविर में बोले मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह शिविर आत्मनिरीक्षण और ज्ञान के आदान-प्रदान का अनूठा अवसर है, जो छत्तीसगढ़ को सुशासन के नए आयामों तक ले जाएगा। उन्होंने पिछले चिंतन शिविर से प्राप्त सुझावों को लागू कर आम जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की बात कही। साय ने बताया कि डेढ़ वर्षों में 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार किए गए, जिनमें ई-ऑफिस प्रणाली ने फाइलों के मैनुअल ढेर को समाप्त कर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की है। अब फाइलें ऑनलाइन मूव होती हैं, और हर कार्य की समय-सीमा निर्धारित है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हुई है।

छत्तीसगढ़ के रजत जयंती वर्ष को अटल निर्माण वर्ष के रूप में मनाते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अटल जी के सुशासन के सिद्धांतों को धरातल पर उतारना इस वर्ष का मुख्य लक्ष्य है। डिजिटल गवर्नेंस को अपनाकर रजिस्ट्री प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिसमें अब घर बैठे मिनटों में रजिस्ट्री और स्वतः नामांतरण हो रहा है। यह तकनीकी नवाचार भ्रष्टाचार को समाप्त करने की दिशा में क्रांतिकारी कदम है।

नई उद्योग नीति के तहत सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस ने निवेश को प्रोत्साहन दिया है। खनिज संसाधनों से समृद्ध छत्तीसगढ़ में कोर सेक्टर की अपार संभावनाओं को देखते हुए विशेष अनुदान की व्यवस्था की गई है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर और होम स्टे उद्यमियों के लिए अनुदान शुरू कर प्राकृतिक सौंदर्य को आर्थिक अवसरों में बदला जा रहा है। इसके अलावा, एआई और क्लाइमेट चेंज से जुड़े उद्यमों को प्रोत्साहन, नवा रायपुर में देश का पहला एआई डाटा सेंटर पार्क और सेमीकंडक्टर यूनिट का शुभारंभ छत्तीसगढ़ को तकनीकी क्रांति का अग्रदूत बना रहा है।

यह हुआ चिंतन शिविर में

शिविर के पहले दिन परिवर्तनकारी नेतृत्व और दूरदर्शी शासन’, ‘संस्कृति, सुशासन और राष्ट्र निर्माण’ और ‘सक्षमता से सततता तक: सार्वजनिक वित्त पर पुनर्विचार’ जैसे विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। डॉ. विनय सहस्रबुद्धे, प्रो. हिमांशु राय, डॉ. रविंद्र ढोलकिया, संजीव सान्याल, उदय माहुरकर और डॉ. राजेंद्र प्रताप गुप्ता जैसे प्रख्यात विशेषज्ञ अपने विचार साझा किए।

मुख्यमंत्री ने बस्तर के विकास पर विशेष जोर देते हुए कहा कि माओवाद पर प्रभावी कार्रवाई ने क्षेत्र में शांति और प्रगति की राह खोली है। बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और बस्तर डायलॉग जैसे आयोजनों ने युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा है। हाल ही में बोधघाट परियोजना को मंजूरी मिलने से 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई और 125 मेगावाट बिजली उत्पादन संभव होगा, जिससे हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। नियद नेल्ला नार योजना से शासकीय योजनाओं का सेचुरेशन सुनिश्चित किया गया है।

सुशासन तिहार के तहत 41 लाख से अधिक आवेदनों में से 99 प्रतिशत का गुणवत्तापूर्ण निराकरण कर जनसमस्याओं का समाधान किया गया। समाधान शिविरों में जनता से सीधा संवाद और शासकीय योजनाओं का पात्र लोगों को लाभ मिला। मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल और जनप्रतिनिधियों ने गांव-गांव जाकर विकास कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। साय ने कहा कि छोटे कस्बों में स्कूल, अस्पताल और मल्टीप्लेक्स जैसी सुविधाओं के लिए अनुदान की व्यवस्था से पलायन रुकेगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। महतारी वंदन योजना और कृषक उन्नति योजना ने बड़े तबके की आर्थिक ताकत बढ़ाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को आत्मसात करते हुए विजन डाक्यूमेंट 2047 तैयार किया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास का रोडमैप है।

मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ उल्लेख किया कि जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बने विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे ब्रिज में छत्तीसगढ़ का स्टील उपयोग हुआ है। उन्होंने सुशासन एवं अभिसरण विभाग और आईआईएम रायपुर को इस आयोजन के लिए बधाई दी और कहा कि चिंतन शिविर में प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की ठोस नींव रखेंगे।

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कोरबा

कोरबा में शहर सौदंर्यीकरण को मिल रहा नित नया आयाम

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उद्योेग मंत्री एवं महापौर ने कोलमैन की प्रतिमा का किया अनावरण, मिनी गार्डन का लोकार्पण, सड़क डिवाईडर प्लांटेशन जनसेवा में हुआ समर्पित

कोरबा। कोरबा शहर में सौदंर्यीकरण को नित नया आयाम दिया जा रहा है। आज प्रदेश के उद्योग , वाणिज्य, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखनलाल देवांगन एवं महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने दर्री बराज पुल के समीप कोलमैन की प्रतिमा का अनावरण किया, तो वहीं सिविल लाईन में मिनी गार्डन का लोकार्पण भी किया गया, इसी प्रकार पुष्पलता उद्यान के सामने सड़क डिवाईडर प्लांटेशन जनसेवा में समर्पित हुआ। इस मौके पर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, सभापति नूतन सिंह ठाकुर, वरिष्ठ पार्षद अशोक चावलानी, अजय गोंड़, पंकज देवांगन, वैभव शर्मा, नरेन्द्र पाटनवार, आकाश श्रीवास्तव, मनोज सिंह राजपूत, अनिल यादव, उद्यान अधीक्षक आनंद सिंह राठौर, सहायक अभियंता राहुल मिश्रा, अरूण मिश्रा आदि के साथ अन्य अधिकारी कर्मचारीगण व जनप्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा शहर की व्यवस्थाओं का सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ शहर का सौदंर्यीकरण कर इसे संजाने, संवारने की दिशा में नित नये आयाम स्थापित किये जा रहे हैं, एक ओर जहॉ शहर की स्वच्छता पर पूरा फोकस रखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर थीम आधारित पेंटिंग, चित्रकारी, लघु उद्यानिकी थीम आधारित रोड साईड प्लांटेशन पर कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में निगम द्वारा दर्री बराज पुल के समीप कोलमैन की प्रतिमा स्थापित कराई गई है, जिसका अनावरण आज उद्यान मंत्री श्री देवांगन एवं श्रीमती राजपूत के हाथों किया गया। इसी प्रकार निगम द्वारा सिविल लाईन में निगम आयुक्त के बंगले के समीप मिनी गार्डन बनाया गया है, जिसका लोकार्पण भी उद्योग मंत्री व महापौर के करकमलों से सम्पन्न हुआ। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा शहर के रोड डिवाईडरों में मल्टीकलर फूलों के पौधे रोपित कर डिवाईडरों को मल्टीकलर फूलों से सजाने संवारने का कार्य भी हो रहा है, इस कड़ी में निगम द्वारा सुभाष चौक पुष्पलता उद्यान से  कोसाबाड़ी की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित रोड डिवाईडर में इमोजी थीम के अंडाकार गमलों में वोगनबेलिया तथा यूफारविया मल्टीकलर फूलों के पौधे लगाये गये हैं, इन्हें भी आज जनसेवा में समर्पित  किया गया।
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कोरबा

श्रीराम नवमी पर नरेंद्र मोदी सरकार का तोहफा: पेट्रोल-डीजल की एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती – गोपाल मोदी

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कोरबा। पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम जनता को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में की गई भारी कटौती का भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार स्वागत किया है। भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने इस निर्णय के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से आभार व्यक्त करते हुए इसे ऐतिहासिक और जनहितकारी फैसला बताया हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ईंधन पर उत्पाद शुल्क में अभूतपूर्व कमी की है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती कर इसे मात्र 3 रुपये कर दिया गया है, वहीं डीजल पर उत्पाद शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर शून्य कर दिया गया है।

वैश्विक संकट में भी जनता को राहत

गोपाल मोदी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक संकट के बावजूद केंद्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उन्होंने कहा कि यह कदम इस बात का प्रमाण है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनहित को सर्वोपरि रखकर कार्य कर रही है।

मोदी सरकार हर संकट में जनता के साथ

जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने यह साबित किया है कि वह हर परिस्थिति में जनता के साथ खड़ी है। उन्होंने इस फैसले के लिए केंद्र सरकार को पुनः बधाई देते हुए कहा कि यह निर्णय आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।

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कोरबा

ढपढप में उमड़ा आस्था का सागर: 21 हजार महिलाओं की भव्य कलश यात्रा से गूंज उठा पूरा क्षेत्र

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दिव्य श्री हनुमंत कथा के शुभारंभ पर पीले वस्त्रों में सजी श्रद्धालु महिलाओं ने रचा भक्ति, अनुशासन और संस्कृति का अद्भुत संगम

ढपढप क्षेत्र में दिव्य श्री हनुमंत कथा का शुभारंभ
करीब 21 हजार महिलाओं ने निकाली भव्य कलश यात्रा
पीले वस्त्रों में सजी महिलाओं ने प्रस्तुत किया भक्ति का अनुपम दृश्य
जय श्री राम और हनुमान जी के जयकारों से गूंजा पूरा क्षेत्र
आयोजन में दिखी आस्था, अनुशासन, नारी शक्ति और सामाजिक एकता

कोरबा/ढपढप। कोरबा जिले के समीप स्थित ढपढप क्षेत्र में शुक्रवार का दिन आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया, जब दिव्य श्री हनुमंत कथा के शुभारंभ के उपलक्ष्य में करीब 21 हजार महिलाओं ने एक साथ भव्य कलश यात्रा निकालकर पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में बदल दिया। यह दृश्य इतना अलौकिक और मनोहारी था कि जहां तक नजर गई, वहां सिर्फ श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति की झलक दिखाई दी।

पीले वस्त्रों में सुसज्जित महिलाओं ने सिर पर पवित्र कलश धारण कर जैसे ही यात्रा प्रारंभ की, पूरा ढपढप क्षेत्र “जय श्री राम”, “बोलो पवनपुत्र हनुमान की जय” और “जय बजरंगबली” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धा और अनुशासन के साथ आगे बढ़ती इस विराट यात्रा ने हर किसी के मन में भक्ति का संचार कर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा क्षेत्र किसी दिव्य आध्यात्मिक महोत्सव का साक्षी बन गया हो।

कलश यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा भर नहीं रही, बल्कि यह आस्था, नारी शक्ति, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के गौरव का भी भव्य प्रतीक बनकर उभरी। हजारों महिलाओं की एक साथ उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि जब समाज की मातृशक्ति धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए एकजुट होती है, तब पूरा वातावरण दिव्यता से भर उठता है।

इस ऐतिहासिक यात्रा में दूर-दराज के गांवों और क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों ने भी बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत, पुष्पवर्षा और सेवा की झलक देखने को मिली, जिससे आयोजन की भव्यता और भी बढ़ गई। हर चेहरा उत्साह, श्रद्धा और आनंद से दमकता नजर आया।

आयोजन के दौरान सुरक्षा, यातायात और व्यवस्थाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया, जिससे इतनी विशाल संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बावजूद कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और सफल रहा। आयोजन समिति, स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों की सजगता ने इस भव्य आयोजन को और भी अनुकरणीय बना दिया।

दिव्य श्री हनुमंत कथा के शुभारंभ से पहले निकली यह कलश यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक रही, बल्कि इसने यह भी साबित कर दिया कि कोरबा की धरती पर सनातन संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी और मजबूत हैं। ढपढप क्षेत्र में उमड़ी यह आस्था आने वाले दिनों में होने वाली कथा को लेकर लोगों के उत्साह और श्रद्धा का जीवंत प्रमाण बन गई है।

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