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कोरबा

स्थानीय प्रतिभाओं के साथ बालको लिख रहा है आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की इबारत

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बालकोनगर। आज के समय में बेहतर करियर के लिए युवाओं को अक्सर अपने परिवार, गाँव-शहर और जड़ों से दूर जाना पड़ता है। करियर के अवसर और अपनों के साथ रहने के बीच चयन करना आज के युवाओं के लिए एक आम दुविधा बन गया है। छत्तीसगढ़ की एकमात्र एल्यूमिनियम उत्पादक कंपनी बालको इस धारणा को बदलते हुए राज्य में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही है। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को बिना अपने राज्य से बाहर गए, अपने घर के पास रहते हुए आगे बढ़ने का अवसर मिला है।

बालको ने विस्तार परियोजना, आधुनिक तकनीक और कौशल विकास में लगातार निवेश किया है। इससे इंजीनियरिंग, प्रचालन, रखरखाव, सुरक्षा, प्रशासन, सामुदायिक विकास और अन्य क्षेत्रों में अच्छे रोजगार के अवसर बने हैं। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को राज्य से बाहर जाए बिना ही बड़े और वैश्विक स्तर के काम करने का मौका मिल रहा है।

युवाओं के लिए बालको में नौकरी सिर्फ एक रोजगार नहीं, बल्कि परिवार के सपनों की पूर्ति है। इन्हीं में से एक रायगढ़ के रिशोरा गांव की रहने वाली स्मिता प्रधान, जो बालको में जूनियर एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, वे कहती हैं कि जब मैंने अपने माता-पिता को बताया कि मेरा चयन बालको में हो गया है, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनके लिए यह सपना सच होने जैसा था कि उनकी बेटी छत्तीसगढ़ में रहकर ही अपना भविष्य बना रही है। तीन साल के अनुभव को साझा करते हुए स्मिता बताती हैं कि मुझे कभी नहीं लगा कि मेट्रो शहर में काम न करने से मैं कुछ खो रही हूं। मैं यहां लगातार सीखते हुए आगे बढ़ रही हूं, इसके लिए मैं कंपनी की बेहद आभारी हूं।

इसी तरह रायगढ़ की मिथिला प्रधान, जो पॉटलाइन में जूनियर एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं। वे बताती हैं कि रसायन विज्ञान में मास्टर्स करते समय मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे इतना आधुनिक और औद्योगिक वातावरण मिलेगा। यहाँ हर दिन कुछ नया सीखने को मिलता है, जो मेरे भविष्य को आकार दे रहा है। साथ ही अपने जड़ों से जुड़े रहते हुए आगे बढ़ना मेरे लिए बेहद संतोषजनक है।


फाउंड्री में शिफ्ट इंचार्ज देवाशीष पटेल के लिए बालको का माहौल उनके कॉलेज के दिनों की याद दिलाता है। वे कहते हैं कि यहां सीखने का तरीका बहुत सहयोगात्मक और व्यावहारिक है। काम के बाद टाउनशिप के खुले और हरित वातावरण में समय बिताना उन्हें सुकून देता है। बालको अस्पताल के बारे में वे बताते हैं कि मेरे माता-पिता को नियमित स्वास्थ्य सुविधा मिलती है, इससे मुझे बहुत मानसिक शांति मिलती है।

बेक ओवन में कार्यरत पीजीटी मनीष कुमार पटेल बताते हैं कि बालको छत्तीसगढ़ के कॉलेजों से युवाओं को अवसर देता आ रहा है। वे कहते हैं कि जो अवसर पहले दूर लगते थे, वे आज हमारे अपने राज्य में ही मिल रहे हैं। हाल ही में शादी के बाद मनीष कहते हैं कि बालको ने संयंत्र के वातावरण को लेकर मेरी सोच बदल दी है। यहां हरा-भरा परिसर, परिवार के लिए आवास और अच्छा कार्य-जीवन संतुलन मिलता है। आज जब जूनियर मुझसे सलाह लेते हैं, तो मैं गर्व से अपने काम और संगठन दोनों के बारे में बताता हूं।

ऐसे समय में जब अवसर अक्सर दूरी की मांग करते हैं, बालको एक स्थायी और समावेशी विकल्प प्रस्तुत करती है, ऐसी प्रगति, जो अपनी जड़ों में पनपती है और समुदाय को भीतर से सशक्त बनाती है। बालको के 70 प्रतिशत से अधिक प्रत्यक्ष कर्मचारी और 80 प्रतिशत से ज्यादा अप्रत्यक्ष कर्मचारी छत्तीसगढ़ से ही हैं। कंपनी स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने का मंच देती है।

शॉपफ्लोर से लेकर तकनीकी, सुपरवाइजरी और प्रबंधन स्तर तक, बालको योग्यता और क्षमता के अनुसार अवसर प्रदान करता है। इस तरह बालको न सिर्फ छत्तीसगढ़ के विकास में योगदान दे रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के सपने को भी साकार कर रहा है। यही कारण है कि बालको आज भारत की एक प्रतिष्ठित और भरोसेमंद एल्यूमिनियम कंपनी के रूप में पहचानी जाती है।

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कोरबा

कोरबा में दो गुटों में मारपीट:आरोपियों की पहचान करने में जुटी पुलिस, व्यापारियों ने की पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग

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कोरबा। कोरबा शहर के घंटाघर कॉम्प्लेक्स में रविवार देर रात युवकों के दो गुटों के बीच जमकर मारपीट हुई। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र की बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, घंटाघर कॉम्प्लेक्स स्थित टी-बार पर बड़ी संख्या में युवक-युवतियां देर रात तक चाय पीने और धूम्रपान करने के लिए एकत्रित रहते हैं। किसी बात को लेकर दो गुटों में विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया।

वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दोनों गुटों के युवक एक-दूसरे पर लात-घूंसे और हाथों से हमला कर रहे हैं। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है।

व्यापारियों ने पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग की

स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों का कहना है कि देर रात तक टी-बार और अन्य दुकानों के खुले रहने से असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे आए दिन विवाद और मारपीट की स्थिति बनती है। उन्होंने पुलिस से क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाने और मारपीट करने वाले युवकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस ने कार्रवाई का दिया आश्वासन

घंटाघर स्थित पान ठेला सहित शहर के अन्य चौक-चौराहों पर भी देर रात तक दुकानें खुली रहने का मुद्दा उठाया गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। सिविल लाइन थाना प्रभारी नवीन पटेल ने इस घटना पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

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कोरबा

इंस्टाग्राम दोस्ती के विवाद में पत्नी ने खाया जहर:पति ने मोबाइल हैक कर पकड़ी बातचीत, हालत गंभीर, इधर बच्ची ने भी कीटनाशक पिया

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ की रहने वाली महिला ने पति से इंस्टाग्राम पर दोस्ती को लेकर हुए विवाद के बाद जहर खा लिया। जिसे गंभीर हालत में कोरबा जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एडमिट किया गया है। उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।

वहीं, कोरबा के सिविल लाइन में रहने वाली दो साल की बच्ची ने खेल-खेल में कीटनाशक पी ली। उसे भी जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, अब बच्ची की हालत स्थिर है।

इंस्टाग्राम दोस्ती विवाद में पत्नी ने खाया जहर

पहला मामला जिला अस्पताल पुलिस चौकी का है। दरअसल, चमेली विश्वास और सुमित विश्वास रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ के रहने वाले हैं। दोनों ने 5 साल पहले लव मैरिज की थी। उनके दो बच्चे हैं। चमेली का इंस्टाग्राम पर एक युवक से जान-पहचान हुई। दोनों बातचीत करने लगे।

जब पति को इस बारे में जानकारी मिली तो दपंती में विवाद शुरू हो गया। इसके बाद पत्नी अपने मायके चली गई। लेकिन सामाजिक बातचीत के बाद पत्नी वापस आ गई और दपंती साथ रहने लगे। सके बावजूद चमेली ने युवक से बात करना जारी रखा।

इस बीच पति ने चमेली का मोबाइल हैक कर लिया, ताकि वह उनकी बातचीत जान सके। इसके बाद फिर से विवाद हुआ, जिसके बाद चमेली ने जान देने की नीयत से जहर का सेवन कर लिया। परिजनों ने उसे धरमजयगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।

लेकिन डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक इलाज के बाद उसे कोरबा जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। जहां महिला का इलाज जारी है। फिलहाल, जिला अस्पताल पुलिस चौकी मामले की जांच पड़ताल कर रही है।

खेल-खेल में बच्ची ने पिया कीटनाशक

दूसरी घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक, कन्हैया शर्मा गोकुलनगर स्थित जिला जेल के पीछे परिवार के साथ रहते हैं। उनकी दो साल की बेटी ने खेल-खेल में घर में रखे कीटनाशक उठाकर ली।

काम पर गए पिता को घर से सूचना मिलते ही वे तुरंत बच्ची को लेकर जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि दवा केवल बच्ची के शरीर के अंगों पर लगी थी और उसने इसका सेवन नहीं किया था।

डॉक्टरों ने बच्ची का प्राथमिक उपचार किया। कन्हैया शर्मा ने बताया कि बच्ची की हालत अब स्थिर है और उसे कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ है।

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कोरबा

जिले में अब तक किसानों से 2134220 क्विंटल धान की हुई खरीदी

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कोरबा। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा खरीफ वर्ष 2025-26 में जिले के 65 धान उपार्जन केन्द्रों में किसानों से धान की खरीदी की जा रही है। शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर धान खरीदी होने से किसानों में हर्ष व्याप्त है। धान खरीदी केंद्रों में जिला प्रशासन द्वारा किसानों की उपज खरीदी के लिए ऑनलाइन टोकन वितरण, बारदाने की उपलब्धता, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन से तौलाई, शीघ्रता से भुगतान आदि की समुचित व्यवस्था की गई है। जिले में 52 हजार से अधिक किसान धान विक्रय के लिए पंजीकृत है। जिले में धान खरीदी की शुरूआत से अब तक 2134220 क्विंटल गुणवत्तायुक्त धान पंजीकृत किसानों से खरीदी की गई है। कोरबा जिले में अब तक कुल 1413970 क्विंटल धान का उठाव हो चुका है। ’जिला प्रशासन द्वारा  जारी डीओ अंतर्गत हाथी प्रभावित क्षेत्रों एवं संवेदनशील उपार्जन केंद्रों से प्राथमिकता से धान का उठाव किया जा रहा है। जिससे किसानों को धान बेचने में परेशानी न हो। साथ ही किसानो की सुविधा को ध्यान में रखते हुए संग्रहण केन्द्रों की व्यवस्था एवं समितियों में धान की स्टैकिंग कराकर स्थान बनाया गया है।

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