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CNG Price Hike: फिर बढ़े CNG के दाम, अडानी गैस ने 2.25 रुपए प्रति किलो महंगा किया ईंधन

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मुंबई, एजेंसी। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब सीएनजी उपभोक्ताओं को भी महंगाई का झटका लगा है। अडानी गैस ने सीएनजी की कीमत में 2.25 रुपए प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी कर दी है। नई दर लागू होने के बाद कंपनी के नेटवर्क में सीएनजी की कीमत बढ़कर 86.02 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है।

इससे पहले सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ईंधन कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों में भी सीएनजी के दाम बढ़ाए गए हैं। नई कीमतों के अनुसार दिल्ली में सीएनजी 79.09 रुपए प्रति किलो और मुंबई में 84 रुपए प्रति किलो हो गई है। हालांकि, पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

एक्सपर्ट की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन कीमतों में लगातार वृद्धि से महंगाई पर असर पड़ सकता है। DBS बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी से मांग में कमी आ सकती है और महंगाई दर पर 15 से 25 बेसिस पॉइंट तक का प्रभाव पड़ सकता है।

वहीं, इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 105 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी रहती हैं, तो मौजूदा मूल्य वृद्धि तेल विपणन कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं होगी। इक्रा के अनुसार, तेल कंपनियां अभी भी पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG की बिक्री पर प्रतिदिन करीब 500 करोड़ रुपए का नुकसान उठा रही हैं।

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कोरबा

डिमर्जर के बाद वेदांता एल्युमिनियम ने दिखाया दम, पहले ही Q1 में मुनाफा 34% बढ़ा, शेयर प्राइस में 5% से ज़्यादा की तेज़ी

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मुंबई। वेदांता एल्युमिनियम ने बताया कि पहली तिमाही के दौरान उसका नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 5,629 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी के रेवेन्यू में भी 12 प्रतिशत की तेज़ी देखने को मिली. रिजल्ट पेश करते ही कंपनी के शेयर प्राइस में तेज़ी देखने को मिली.

वेदांता लिमिटेड से अलग होकर बनी नई कंपनी Vedanta Aluminium Metal ने डिमर्जर के बाद पहली बार अपना क्वार्टर रिजल्ट अलग पेश किया. गुरुवार को रिजल्ट पेश करने से पहले तक कंपनी का शेयर लाल निशान पर ट्रेड कर रहा था, लेकिन रिजल्ट आते ही कंपनी के स्टॉक ने तेज़ी पकड़ ली. कंपनी को रेवेन्यू और प्रॉफिट दोनों के फ्रंट पर कामयाबी हासिल हुई, जिससे शेयर प्राइस में 5 प्रतिशत से ज़्यादा की तेज़ी देखने को मिली.

Vedanta Aluminium का Q1 रिजल्ट

वेदांता एल्युमिनियम मेटल ने जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया. पिछली तिमाही की तुलना में कंपनी का नेट प्रॉफिट 33.8% बढ़कर 4,207 करोड़ रुपये से 5,629 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी के रेवेन्यू में भी 11.9% की ग्रोथ दर्ज की गई, जो 19,124 करोड़ रुपये से बढ़कर 21,393 करोड़ रुपये हो गया.

ऑपरेटिंग परफॉरमेंस रहा शानदार

वेदांता एल्युमिनियम मेटल के ऑपरेटिंग परफॉरमेंस में भी इस तिमाही में सुधार हुआ है. इसका EBITDA पिछली तिमाही के मुकाबले 23.3% बढ़कर 8,352 करोड़ रुपये से 10,299 करोड़ रुपये हो गया. साथ ही, EBITDA मार्जिन 43.68% से बढ़कर 48.14% हो गया, जिसका मतलब है कि कंपनी ने पिछली तिमाही की तुलना में रेवेन्यू के प्रत्येक 100 रुपये पर अधिक ऑपरेटिंग मुनाफा कमाया है. इससे पता चलता है कि बिजनेस अधिक लाभदायक और अधिक कुशल हो गया है.

एल्युमिनियम का प्रोडक्शन

कंपनी द्वारा जारी एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, वेदांता एल्युमिनियम मेटल ने जून तिमाही में रिकॉर्ड प्रोडक्शन हासिल किया. इसने 632 किलोटन एल्युमिनियम का अब तक का सबसे अधिक प्रोडक्शन किया, जो पिछली तिमाही से 3% और पिछले वर्ष की तुलना में 5% अधिक है. कंपनी ने वैल्यू एडिड एल्युमिनियम प्रोडक्ट का भी अब तक का सबसे अधिक प्रोडक्शन 389 KT दर्ज किया, जिसमें पिछली तिमाही की तुलना में 4% और पिछले वर्ष की तुलना में 14% की ग्रोथ हुई. इसके अलावा, एल्युमिना का प्रोडक्शन पिछले वर्ष की तुलना में 41% बढ़कर 826 KT हो गया.

स्थिति मजबूत कर रही कंपनी

कंपनी ने कहा कि वह पूरी तरह से इंटीग्रेटिड एल्युमीनियम कारोबार स्थापित करके भारत की सबसे बड़ी एल्युमीनियम प्रोडक्शन कंपनी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रही है. सरल शब्दों में कहें तो, इसका मतलब है कि वेदांता कच्चे माल की खरीद से लेकर अंतिम प्रोडक्ट बनाने तक, एल्युमीनियम प्रोडक्शन के हर प्रमुख फैज़ को खुद संभालने का प्रयास कर रही है. इससे कंपनी को सप्लायर्स पर निर्भरता कम करने, ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने, लागत को कंट्रोल करने और कच्चे माल की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने में मदद मिलती है.

कंपनी के सीईओ ने क्या कहा?

परिणामों पर टिप्पणी करते हुए, वेदांता एल्युमिनियम के होल टाइम डायरेक्टर और सीईओ राजेश कुमार ने कहा कि कंपनी ने मजबूत वित्तीय और ऑपरेशन परफॉरमेंस के साथ एक स्वतंत्र बिजनेस के रूप में अपनी यात्रा शुरू की है. उन्होंने आगे कहा कि कंपनी कच्चे माल की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने, अपने ऑपरेशन को अधिक कुशल बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है.

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सुप्रीम कोर्ट बोला-पैलेट गन से घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज कराएं:दिल्ली सरकार को आदेश, केंद्र जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में इस्तेमाल हथियारों का रिकॉर्ड रखे

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नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली सरकार को आदेश दिया कि 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च में बैलेट गन से घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज कराया जाए।

वहीं कोर्ट ने केंद्र से कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तैनात RAF के हथियारों और गोला-बारूद के इस्तेमाल का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस विशेष स्थितियों में इसका इस्तेमाल कर सकती है।

कोर्ट ने कहा कि जब तक पैलेट गन के इस्तेमाल की परमिशन देने वाले पुलिस नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक इस पर रोक लगाने का आदेश देना मुश्किल है। कोर्ट ने इसके इस्तेमाल से जुड़ी गाइडलाइन पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी (दोनों पीड़ित) ने याचिका में पैलेट गन पर बैन लगाने की मांग की थी। उन्होंने दावा किया था कि संसद मार्च में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने छात्रों पर पैलेट गन चलाई थी।

संसद मार्च में 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए

  • कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला था। सुबह 8 से शाम 5 बजे तक प्रदर्शन में कई बार प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी।
  • कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, संसद की ओर मार्च किया। ये लोग जंतर-मंतर से संसद मार्ग, जनपथ चौराहा, वॉर मेमोरियल, कर्तव्य पथ, विजय चौक से संसद के करीब पहुंच गए थे।।
  • इन लोगों ने संसद में घुसने की कोशिश की थी। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े थे। दावा किया गया कि छात्रों पर पैलेट गन भी चलाई गई। देर शाम को पथराव की तस्वीरें भी सामने आईं।

राहुल गांधी का आरोप- पैलेट गन से छात्र की आंख की रोशनी गई

  1. राहुल गांधी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि अमित शाह ने छात्रों पर फायरिंग और पैलेट गन चलाने का आदेश दिया। एक छात्र की आंख की रोशनी चली गई।
  2. राहुल गांधी ने 24 जुलाई को अपने आवास 10 जनपथ पर संसद मार्च में घायल स्टूडेंट के हाथ, पीठ और छाती में लगे घाव दिखाए। उन्होंने कहा, ‘मैं यह बताना चाहता हूं कि यहां खड़ा मेरा भाई उस समय पैलेट गन से घायल हो गया था, जब वह तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन कर रहा था।’

भाजपा ने आरोप खारिज किए

वहीं राहुल गांधी के आरोपों को भाजपा ने संसद में और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खारिज किया। सरकार ने कहा कि संसद मार्च में गोली नहीं चली। मंत्री फायरिंग का आदेश नहीं दे सकता। यह अधिकार मजिस्ट्रेट का होता है।

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खड़गे बोले– शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति को मानने वाले बढ़े:शूद्र से पढ़ने का अधिकार छिना, नड्डा बोले- सबूत दें, सभापति ने रिकॉर्ड से हटाया

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नई दिल्ली, एजेंसी। राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़े परीक्षा संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे के ‘मनुस्मृति’ बयान पर हंगामा हुआ। वे शैक्षणिक संस्थाओं पर RSS के दखल पर बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों में मनुस्मृति मानने वाले बढ़ गए हैं, इससे शूद्र को पढ़ने का अधिकार छिन गया है। इस पर सदन में हंगामा शुरू हो गया।

जेपी नड्डा ने टोकते हुए कहा कि खड़गे का बयान तथ्यों से परे है। इससे अशांति फैल सकती है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि मनुस्मृति वाला बयान रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।

यह पूरी बहस पेपर लीक से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान हुई।

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़ा बिल पेश किया। लोकसभा में बुधवार को करीब 7 घंटे बहस के बाद पेपर लीक से जुड़ा बिल पारित हुआ था।

फैक्ट चैक: खड़गे ने जो सजाएं बताईं, वे मूल मनुस्मृति में नहीं, बल्कि ‘गौतम धर्मसूत्र’ (अध्याय 12, श्लोक 4-6) में लिखी हैं। हालांकि, खड़गे ने बाद में कहा कि गौतम ऋषि ने लिखा है।

सुधांशु त्रिवेदी ने जवाब में कहा- मैं उन्हें बताना चाहूंगा कि विलियम जोन्स कलकत्ता हाईकोर्ट के जज थे। उन्होंने 1790 मनु स्मृति का अनुवाद किया। आधुनिक युग के शेड्यूल कास्ट का मनु काल के वैदिक शूद्र के साथ कोई कनेक्शन नहीं है। विलियम जोन्स से पहले की 2 और मनुस्मृति कहीं अवेलेबल नहीं हैं।

मासिर-ए-आलमगीरी, शाहनामा, जहांगीरनामा, तुज़ुक-ए-बाबरी, फुतूहात-ए-फिरोजशाही और तहकीके हिंद भी उपलब्ध हैं। इसलिए मैंने कहा कि मुझे प्रमाण चाहिए, क्योंकि जो खड़गे ने कहा- उसे अंग्रेजों ने बनाया है। विलियम जोन्स से पहले का कोई टेक्स्ट अवेलेबल नहीं हैं।

फैक्ट चेक: विलियम जोन्स ने मनुस्मृति का पहला अंग्रेजी अनुवाद 1794 में ‘Institutes of Hindu Law, or the Ordinances of Menu’ नाम से पब्लिश किया था। यह किताब आज भी सार्वजनिक डोमेन में है। इसे गूगल बुक्स, इंटरनेट आर्काइव और ब्रिटिश लाइब्रेरी की वेबसाइटों पर मुफ्त में पढ़ा जा सकता है।

सुधांशु त्रिवेदी ने आगे कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर कि किताब ‘हू वर द शुद्राज’ के चैप्टर के पहले पेज के पैराग्राफ 3 में लिखा है कि आधुनिक अनुसूचित जातियों और प्राचीन वैदिक काल के शूद्रों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।

फैक्ट चेक: अंबेडकर ने लिखा है कि आधुनिक शूद्र और प्राचीन वैदिक काल के शूद्र एक ही वर्ग नहीं थे। प्राचीन शूद्र मूल रूप से क्षत्रिय थे, जिन्हें ब्राह्मणों से विवाद के बाद ‘उपनयन संस्कार’ से वंचित कर दिया गया, जिससे वे चौथे वर्ण में गिर गए। वे आज की अनुसूचित जातियों से अलग थे।

प्रमोद तिवारी ने एक किताब दिखाते हुए कहा कि यह इनके कार्यकाल में छपी है, चल रही है, प्रतिबंधित नहीं है। अगर ये कह रहे हैं, दिखा रहे हैं, तो गलती इनकी है।12 साल से इनकी सरकार है।

जेपी नड्डा ने कहा कि ब्रिटिश टाइम से पहले का ओरिजिनल टेक्स्ट लाइए। सबूत दीजिए।

सरकार दबाव में झुकी

सरकार को छात्रों के आंदोलन और जनदबाव के आगे झुकना पड़ा। धर्मेंद्र प्रधान को हटाना और संशोधन बिल लाना छात्रों के हित में नहीं, बल्कि सरकार की कुर्सी बचाने की मजबूरी थी।

सिर्फ सजा बढ़ाने से नहीं रुकेगा पेपर लीक

जुर्माना 1 करोड़ से 10 करोड़ करना, सजा कड़ी करना, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाना पर्याप्त नहीं है। असली जरूरत परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने की है।

152 परीक्षाओं के पेपर लीक

कुछ सालों में 152 परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, लेकिन किसी दोषी को सजा नहीं मिली। NTA के कई पद खाली हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बजाय RSS से जुड़े लोगों की नियुक्तियां की जा रही हैं।

अमित शाह जवाब दें

शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। अगर गृह मंत्री अमित शाह इस पर जवाब नहीं दे सकते तो इस्तीफा दें।

शूद्र वाले बयान पर हंगामा

नए सिलेबस में ऐसे संदर्भ जोड़े जा रहे हैं, जिनमें शूद्रों के वेदपाठ सुनने या बोलने पर कठोर दंड का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच रखने वालों को शिक्षा व्यवस्था से बाहर किया जाना चाहिए। इस बयान पर सत्ता पक्ष ने जोरदार हंगामा किया।

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