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सीपी राधाकृष्णन भारत के 15वें उपराष्ट्रपति:सितंबर 2030 तक होगा कार्यकाल, इस्तीफा देने के 53 दिन बाद दिखे जगदीप धनखड़

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नई दिल्ली,एजेंसी। नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन ने 15वें उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राधाकृष्णन को शपथ दिलाई। राधाकृष्णन का कार्यकाल 11 सितंबर 2030 तक होगा।

इस दौरान PM मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए।पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और वेंकैया नायडू भी समारोह में पहुंचे।

इस्तीफा देने के 53 दिन बाद पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। धनखड़ ने 21 जुलाई को हेल्थ इश्यू के कारण इस्तीफा दिया था।

NDA उम्मीदवार राधाकृष्णन को 9 सितंबर को भारत का 15वां उपराष्ट्रपति चुना गया। उन्हें विपक्षी उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी के मुकाबले 452 वोट मिले। राधाकृष्णन ने रेड्‌डी को 152 वोटों के अंतर से हराया है।

शपथग्रहण समारोह की तस्वीरें…

जगदीप धनखड़, पूर्व उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू के पास बैठे नजर आए।

जगदीप धनखड़, पूर्व उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू के पास बैठे नजर आए।

67 साल के सीपी राधाकृष्णन ने ईश्वर के नाम पर अंग्रेजी में शपथ ली।

67 साल के सीपी राधाकृष्णन ने ईश्वर के नाम पर अंग्रेजी में शपथ ली।

उपराष्ट्रपति शपथग्रहण समारोह का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

उपराष्ट्रपति शपथग्रहण समारोह का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

समारोह के बाद राधाकृष्णन, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मिलने भी पहुंचे।

समारोह के बाद राधाकृष्णन, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से मिलने भी पहुंचे।

राधाकृष्णन ने एक दिन पहले राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया

अपनी नई जिम्मेदारी की तैयारी में राधाकृष्णन ने गुरुवार को महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की गई है। उनके इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 सितंबर की रात सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। उन्हें उपराष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 सितंबर की रात सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। उन्हें उपराष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी थी।

राधाकृष्णन को उम्मीद से ज्यादा 14 वोट ज्यादा मिले

राज्यसभा के महासचिव और निर्वाचन अधिकारी पीसी मोदी के मुताबिक 781 में से 767 सांसदों ने वोट डाले, वोटिंग 98.2% हुई। इनमें से 752 मत वैलिड और 15 इनवैलिड थे। एनडीए को 427 सांसदों का समर्थन प्राप्त था, लेकिन YSRCP के 11 सांसदों ने भी राधाकृष्णन का समर्थन किया।

13 सांसदों ने चुनाव में मतदान से परहेज किया। इनमें बीजू जनता दल (BJD) के सात सांसद, भारत राष्ट्र समिति (BRS) के चार, शिरोमणि अकाली दल का एक सांसद और एक निर्दलीय सांसद शामिल हैं।

दिलचस्प बात यह है कि एनडीए उम्मीदवार को उम्मीद से 14 वोट ज्यादा मिले, जिससे विपक्षी खेमे में क्रॉस-वोटिंग की अटकलें हैं।

जानिए नए उपराष्ट्रपति बनने वाले सीपी राधाकृष्णन के बारे में…

16 साल की उम्र में RSS से जुड़े

सीपी राधाकृष्णन का पूरा नाम चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन है। वे 16 साल की उम्र से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए हैं। राधाकृष्णन 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य बने।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ सीपी राधाकृष्णन।‌‌ (फाइल फोटो‌‌)‌

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ सीपी राधाकृष्णन।‌‌ (फाइल फोटो‌‌)‌

2 बार कोयम्बटूर से सांसद, तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष रहे

राधाकृष्णन ने 1998 और 1999 में कोयम्बटूर लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। 1998 में उन्होंने 1.5 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। 1999 में भी वे 55,000 वोटों से जीते।

राधाकृष्णन एक बार केंद्रीय मंत्री बनने के बेहद करीब थे, लेकिन एक जैसे नाम के कारण पार्टी प्रबंधकों से चूक हुई और एक अन्य नेता पोन राधाकृष्णन को पद सौंप दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने शिकायत नहीं की और संगठन में सक्रिय रहे।

राधाकृष्णन 2004 से 2007 तक तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष रहे और 19,000 किमी लंबी रथयात्रा निकाली। इसमें नदियों को जोड़ने, आतंकवाद खत्म करने, समान नागरिक संहिता लागू करने और नशे के खिलाफ आवाज उठाई। 2020 से 2022 तक वे भाजपा के केरल प्रभारी रहे।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ सीपी राधाकृष्णन। उनके तमिलनाडु में सभी दलों से अच्छे संबंध माने जाते हैं। (फाइल फोटो‌‌)‌

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के साथ सीपी राधाकृष्णन। उनके तमिलनाडु में सभी दलों से अच्छे संबंध माने जाते हैं। (फाइल फोटो‌‌)‌

संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व किया

2004 में वे संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में शामिल हुए और ताइवान गए पहले संसदीय दल के सदस्य भी रहे। 2016 में उन्हें कोच्चि स्थित कॉयर बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया। उनके कार्यकाल में भारत का कॉयर निर्यात रिकॉर्ड 2,532 करोड़ रुपए तक पहुंचा।

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के साथ NDA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार राधाकृष्णन। (फाइल फोटो‌‌)‌

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के साथ NDA के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार राधाकृष्णन। (फाइल फोटो‌‌)‌

राधाकृष्णन का एक बेटा और एक बेटी

सीपी राधाकृष्णन की पत्नी का नाम श्रीमती आर सुमति है। उनके एक बेटा और एक बेटी हैं। हालांकि, उनके बेटे और बेटी के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है।

राधाकृष्णन बेटे-बहू और पोता-पोती के साथ रजनीकांत से मिलते हुए। (फाइल फोटो‌‌)‌

राधाकृष्णन बेटे-बहू और पोता-पोती के साथ रजनीकांत से मिलते हुए। (फाइल फोटो‌‌)‌

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Central Railway का 1 अक्टूबर से सख्त नियम, Train Ticket के साथ Original ID Card अनिवार्य

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नई दिल्ली, एजेंसी। फेस्टिव सीजन चल रहा है। इस दौरान लोग अपने घर जाने की तैयारियां करते हैं। अपने घर जाने के लिए लोग ट्रेन से जाते हैं। यदि आप अक्टूबर के महीने में ट्रेन का सफर करने वाले हैं, तो थोड़ा सावधान हो जाए। असल में सेंट्रल रेलवे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक, खास ‘टिकट चेकिंग अभियान’ चलाने जा रहा है।

आइए आपको बताते हैं रेलवे के ये नए नियम क्या हैं और आपको ट्रैवल करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी है।

कम से कम एक ओरिजिनल ID होना है जरूरी 

इस अभियान के चलते सबसे बड़ा नियम है ‘वन टिकट, वन ओरिजिनल आईडी’। रेलवे के अधिकारियों ने साफ कहा है कि अब सफर के समय सिर्फ टिकट होना ही काफी नहीं है, बल्कि आपके पास अपना ओरिजिनल पहचान पत्र होना जरुरी है।

उदाहरण के तौर पर, यदि आप अपने परिवार के चार लोगों के लिए एक ही टिकट बुक किया है, तो उन चारों में से कम से कम किसी एक व्यक्ति के पास उसका ओरिजिनल आईडी कार्ड होना बहुत जरुरी है। यदि चेकिंग के दौरान असली आईडी नहीं दिखा पाए, तो टीटीई उस पर यात्रा करने वाले सभी लोगों को बिना टिकट मान सकता है और आप पर जुर्माना लग सकता है।

कोटा और ई-पास वालों के लिए नियम सख्त

रेलवे के मुताबिक, अगर आप किसी खास कोटे या कंसेशन पर सफर कर रहे हैं? यदि हां, तो आपको अपनी पात्रता को साबित करने के लिए सभी दास्तावेज ओरिजिनल ही साथ रखें। इतना ही नहीं, जो लोग रेलवे के ई-पास या पीटीओ का इस्तेमाल करके यात्रा करने पर, आपको असली पहचान पत्र दिखाना होगा। उनकों इस बात का ध्यान देना होगा कि ट्रेन में बैठने से पहले उनका ई-पास संबंधित अथॉरिटी  से सही तरीके से एक्सचेंज करा लिया गया हो।

जनरल टिकट वालों की भी होगी हाई-टेक चेकिंग 

दरअसल, यह चेकिंग अभियान सिर्फ स्लीपर या एसी कोच तक ही नहीं, बल्कि आप जनरल डिब्बे में सफर कर रहे हैं, तो आप वहां भी चेकिंग स्टाफ टिकटों की असलियत जांचेगा। वहीं,  जरुरत पड़ने पर रेलवे अधिकारी टीटीई ऐप की मदद से किसी भी टिकट को तुरंत वेरिफाई कर सकते हैं।

भारतीय रेलवे क्यों कर रहा है इतनी सख्ती

सेंट्रल रेलवे ने बताया है कि, इसके पीछे मकसद है सिस्टम में होने वाली धोखाधड़ी को खत्म करना है, जाने इसके मुख्य कारण है-

– भारतीय रेलवे में होने वाले आर्थिक नुकसान को रोकना।

– वहीं, रिजर्वेशन की सुविधाओं का जो लोग गलत फायदा उठाते हैं, उन लोगों को पकड़ना।

– इसके अलावा, पास और कंसेशन के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगाना।

– सही यात्रियों की पहचान करना और टिकटों की वैधता जांचना।

चेकिंग में कौन-कौन से पहचान पत्र चलेंगे? 

इस बीच, रेलवे ने उन दास्तावेजों की एक लिस्ट भी दी है, जिन्हे आप सफर के दौरान अपनी पहचान साबित करने के लिए दिखा सकते हैं ये ओरिजनल आईडी-

-आधार कार्ड
-वोटर आईडी कार्ड
-पासपोर्ट या पैन कार्ड
-ड्राइविंग लाइसेंस
– केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले फोटो और सीरियल नंबर वाला कार्ड
– मान्यता प्राप्त स्कूल/कॉलेज का फोटो वाला स्टूडेंट आईडी कार्ड
– किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की पासबुक, जिस पर आपकी फोटो लगी हो।
– बैंक का क्रेडिट कार्ड जिस पर आपकी लैमिनेटेड फोटो हो।

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लगातार 3 दिन बंद रहेगा शेयर बाजार, BSE-NSE पर ट्रेडिंग बंद

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नई दिल्ली, एजेंसी। आमतौर पर शेयर बाजार सोमवार से शुक्रवार तक खुले रहते हैं। मार्केट में शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। कई बार किसी खास मौके, पर्व और त्योहार पर भी बाजार बंद होता है। कल से लगातार तीन दिन शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा। शुक्रवार (02 अक्टूबर) को गांधी जयंती है, ऐसे में BSE और NSE बंद रहेंगे। इसके बाद शनिवार और रविवार की नियमित छुट्टी के कारण बाजार अब सीधे सोमवार, 5 अक्टूबर को खुलेगा।

2 अक्टूबर को क्यों बंद रहेगा बाजार?

महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को देशभर में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाई जाती है। इसी के चलते भारतीय शेयर बाजार में भी इस दिन ट्रेडिंग नहीं होगी। निवेशकों को शुक्रवार को इक्विटी, डेरिवेटिव्स समेत बाजार से जुड़े कारोबार के लिए बाजार बंद मिलेगा।

2026 में शेयर बाजार की प्रमुख छुट्टियां

अवसरतारीखदिन
दशहरा20 अक्टूबरमंगलवार  
दिवाली बलिप्रतिपदा10 नवंबरमंगलवार
गुरु नानक देव जी का प्रकाश गुरुपर्व24 नवंबरमंगलवार
क्रिसमस25 दिसंबरशुक्रवार 

आज बाजार में रही गिरावट

आज (1 अक्टूबर) शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 0.79 फीसदी यानी कि 570.59 अंक गिरकर लाल निशान में 71,909.70 पर बंद हुआ। इस दौरान इसके 30 शेयरों में से केवल 6 में बढ़त दिखी, जबकि 24 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इनमें इन्फोसिस में सबसे अधिक 4.02 फीसदी की तेजी और मारुति में सबसे ज्यादा गिरावट 4.59 फीसदी नजर आई।

वहीं, 50 शेयरों वाला निफ्टी 0.88 फीसदी यानी 198.50 अंक लुढ़ककर 22,421.95 पर बंद हुआ। इसके 50 शेयरों में से 13 में तेजी और 37 में गिरावट दर्ज की गई।

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त्योहारों से पहले सरकार ने चीनी डीलर के लिए स्टॉक सीमा घटाकर 1,000 क्विंटल की

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नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने त्योहारों के मौसम में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति और उचित कीमत सुनिश्चित करने के लिए डीलर के पास चीनी रखने की सीमा घटाकर 1,000 क्विंटल कर दी। यह सीमा 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी और डीलर अधिकतम 15 दिन तक का स्टॉक रख सकेंगे। इसके साथ ही, खाद्य मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम में क्षेत्र विशेष की जरूरतों को देखते हुए स्टॉक सीमा 2,000 क्विंटल होगी। 

मंत्रालय ने बयान में कहा कि एक अक्टूबर से नए चीनी सत्र की शुरुआत के साथ त्योहारी अवधि में ग्राहकों को उचित कीमत पर चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठा रही है। मंत्रालय ने कहा, ”चीनी की मात्रा और उसे रखने की अवधि सीमित करके सरकार का उद्देश्य आपूर्ति शृंखला में चीनी की व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के लिए इसकी लगातार उपलब्धता बनाए रखना है।” 

कोलकाता और असम के लिए अलग सीमा

कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम के लिए अलग स्टॉक सीमा उस क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की गई है। मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता… उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी खरीदता है और पूर्वी भारत के साथ पूर्वोत्तर राज्यों को भी इसकी आपूर्ति करता है। 

मंत्रालय ने कहा कि असम के लिए सीमा तय करते समय भौगोलिक परिस्थितियों, परिवहन सुविधाओं और पूर्वोत्तर के उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखा गया है। उसने कहा कि संशोधित नियमों का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला में चीनी के अनावश्यक भंडारण को रोकना और मिलों से डीलर के जरिये अंतिम उपभोक्ता तक इसकी सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करना है। 

भंडारण और जमाखोरी पर रोक का उद्देश्य

यह कदम जमाखोरी, सट्टेबाजी और डीलर द्वारा स्टॉक जमा करने पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है। इससे पहले अगस्त में सरकार ने डीलर के लिए देशभर में 4,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा तय की थी। यह सीमा एक अगस्त से 30 नवंबर तक लागू की गई थी। इसके तहत चीनी मिलने की तारीख से अधिकतम 30 दिन तक स्टॉक रखने की अनुमति थी। बाद में 15 सितंबर से यह सीमा घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई। 

चीनी के खुदरा दाम में 15% गिरावट

मंत्रालय के मुताबिक, चीनी का औसत खुदरा मूल्य अगस्त के उच्चतम स्तर से अब 15 प्रतिशत घट चुका है और आपूर्ति शृंखला में कम कीमतों का लाभ मिलने के साथ इसमें आगे भी गिरावट आने की उम्मीद है। मिलों की कीमतों में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट आई है और वे पिछले तीन सप्ताह से स्थिर हैं। 

सरकार ने कहा कि चीनी मिलों, डीलर, थोक विक्रेताओं और अन्य बाजार प्रतिभागियों को चीनी की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करनी चाहिए और जमाखोरी एवं सट्टेबाजी रोकनी चाहिए। थोक और खुदरा विक्रेताओं से मिलों की कीमतों में आई तेज गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक ‘तत्काल’ पहुंचाने को कहा गया है। 

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