दिल्ली में भारतीय उद्योग व्यापार मंडल का भव्य महासम्मेलन सम्पन्न
देशभर के व्यापारियों ने एकजुट होकर उठाई व्यापार जगत की प्रमुख समस्याएं
कोरबा। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के 45वें स्थापना दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित विशाल व्यापारी महासम्मेलन अत्यंत सफल, सारगर्भित एवं ऐतिहासिक रहा। देशभर से आए व्यापारियों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने एक मंच पर एकत्रित होकर व्यापार एवं उद्योग से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया तथा केंद्र सरकार से व्यापारियों के हित में आवश्यक सुधार एवं नीतिगत निर्णय लेने की पुरजोर मांग की।
महासम्मेलन का आयोजन भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य अतिथि के रूप में तथा विजय बघेल सांसद दुर्ग लोकसभा क्षेत्र विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ से सुधीर बंसल, राजेश बंसल सहित देश के लगभग 25 प्रदेशों से आए प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों ने सम्मेलन में सहभागिता की।
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष अशोक मोदी ने महासम्मेलन को अत्यंत सफल एवं महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस सम्मेलन में देशभर के व्यापारियों की समस्याओं और उनके समाधान को लेकर अत्यंत सारगर्भित चर्चा हुई। व्यापारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि सरकार व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल और सुगम बनाती है, तो व्यापारी अपना अधिक से अधिक समय व्यापार के विस्तार में लगा सकेंगे। इससे व्यापार बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और अंततः सरकार को भी अधिक राजस्व प्राप्त होगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
जीएसटी के सरलीकरण एवं लंबित रिफंड का मुद्दा प्रमुखता से उठा
अशोक मोदी ने बताया कि सम्मेलन में जीएसटी के सरलीकरण, अनावश्यक जटिलताओं को समाप्त करने तथा व्यापारियों के लंबित सेस के रिफंड का विषय प्रमुखता से उठाया गया।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जीएसटी की अधिकतम दर को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया है, लेकिन कई मामलों में व्यापारियों के पुराने एवं लंबित सेस रिफंड अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं। इस विषय को लेकर व्यापारी समुदाय द्वारा न्यायालय का भी दरवाजा खटखटाया गया है।
उन्होंने कहा कि व्यापारियों की इच्छा है कि उनकी जायज समस्याओं का समाधान न्यायालय के माध्यम से होने की नौबत ही न आए। सरकार स्वयं व्यापारियों की समस्याओं को सुने और लंबित सेस टैक्स को रिफंड करे तथा अन्य जायज मांगों का शीघ्र समाधान करे, ताकि व्यापारियों को वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया में समय और धन खर्च न करना पड़े।
ऑनलाइन व्यापार एवं विदेशी कंपनियों पर नियंत्रण की मांग
महासम्मेलन में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन व्यापार को लेकर भी व्यापारियों ने अपनी चिंता व्यक्त की। देश के लाखों छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन खरीदी-बिक्री के लिए समान एवं निष्पक्ष व्यापारिक व्यवस्था बनाए जाने की मांग की गई।
व्यापारियों ने कहा कि छोटे दुकानदारों और स्थानीय व्यापारियों को ऐसी नीतिगत व्यवस्था मिलनी चाहिए, जिससे वे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के साथ समान अवसर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।
इसके साथ ही जेसीबी इंग्लैंड जैसी विदेशी कंपनियों पर भी प्रभावी नियंत्रण एवं आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई, जो भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में व्यवसाय तो कर रही हैं, लेकिन देश की स्वदेशी एवं घरेलू कंपनियों के विकास को नुकसान पहुंचा रही हैं। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों में, जहां विदेशी कंपनियों के कारण भारतीय कंपनियों के लिए समान अवसर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नुकसान हो रहा है। इसके लिये सरकार से प्रभावी नीति बनाने की मांग की गई।
व्यापारियों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा की भी मांग
महासम्मेलन में व्यापारियों की सामाजिक सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण विषय बनाया गया। व्यापारियों ने व्यापारी सुरक्षा, जीवन एवं स्वास्थ्य बीमा, पेंशन तथा सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की।
अशोक मोदी ने कहा कि व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। व्यापारी स्वयं रोजगार देने के साथ-साथ लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराते हैं। इसलिए जिस प्रकार देश के अन्य वर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं हैं, उसी प्रकार व्यापारियों के लिए भी सम्मानजनक एवं प्रभावी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था होना आवश्यक है।
पुराने मामलों को समाप्त करने की मांग
सम्मेलन में व्यापारियों के विरुद्ध लंबे समय से लंबित पुराने मामलों की समीक्षा कर पुराने एवं अनावश्यक मामलों को समाप्त/क्लोज करने की मांग भी जोरदार ढंग से रखी गई। इस अवसर पर यह सवाल भी प्रमुखता से उठाया गया कि जब किसानों का कर्ज माफ किया जा सकता है, तो व्यापारियों पर व्यर्थ में आरोपित ब्याज, पेनल्टी एवं टैक्स को क्यों नहीं माफ किया जा सकता? इस मांग का उपस्थित प्रतिनिधियों ने जोरदार समर्थन एवं स्वागत किया।
व्यापारियों का कहना था कि वर्षों पुराने मामलों के कारण व्यापारी अनावश्यक रूप से कानूनी प्रक्रिया में उलझे रहते हैं। ऐसे मामलों की समीक्षा कर, जहां कोई गंभीर विषय नहीं है, उन्हें समाप्त किया जाना चाहिए, जिससे व्यापारी निर्भय होकर अपने व्यापार एवं उद्योग पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
विजय बघेल का विशेष सम्मान
महासम्मेलन में दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल जी का विशेष रूप से सम्मान किया गया। अशोक मोदी ने बताया कि विजय बघेल जी हाल ही में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के साथ तीन दिवसीय विदेश प्रवास से लौटे हैं। इस अवसर पर सदन की ओर से उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं तथा उनका सम्मान किया गया।
45 वर्षों से व्यापारियों की आवाज बुलंद कर रहा है भारतीय उद्योग व्यापार मंडल
अशोक मोदी ने कहा कि भारतीय उद्योग व्यापार मंडल देशभर के व्यापारियों की आवाज को मजबूती से उठाने वाला संगठन है, जो पिछले 45 वर्षों से व्यापारियों के हितों एवं अधिकारों के लिए निरंतर संघर्षरत है। संगठन ने हमेशा व्यापारियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए सकारात्मक एवं लोकतांत्रिक तरीके से प्रयास किया है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली का यह महासम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि देशभर का व्यापारी समाज अपने अधिकारों एवं समस्याओं को लेकर जागरूक है और आवश्यकता पड़ने पर एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने में सक्षम है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी भारतीय उद्योग व्यापार मंडल व्यापारियों की समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाता रहेगा तथा सरकार के साथ संवाद के माध्यम से सरल कर व्यवस्था, व्यापारियों की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, निष्पक्ष बाजार व्यवस्था एवं व्यापार के अनुकूल नीतियों के लिए निरंतर प्रयास करेगा।
महासम्मेलन में देश के लगभग 25 प्रदेशों से आए प्रतिनिधियों एवं पदाधिकारियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। सम्मेलन के सफल आयोजन से देशभर के व्यापारियों में नई ऊर्जा एवं उत्साह का संचार हुआ तथा व्यापारिक हितों के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प दोहराया गया।
कोरबा। कोरबा के बांकीमोंगरा में पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मारपीट के 4 और SECL बांकी खदान नंबर-4 में डकैती के 2 आरोपी शामिल हैं।
मारपीट के मामले में आरोपियों ने शराब पीने के लिए 500 रुपए मांगे थे। वहीं, खदान में नकाबपोश बदमाशों ने चौकीदारों को बंधक बनाकर लोहे के रैक और पाइप काटकर चोरी किए थे। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर 2 नवंबर को जेल भेज दिया।
शराब पीने के लिए मांगे 500 रुपए, मना करने पर बेल्ट से पीटा
पहले मामले में सूरज कुमार बिंझवार ने 1 नवंबर को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 30 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे वह अपने साथी दिनेश कुमार बिंझवार के साथ देसी शराब भट्ठी से लौट रहे थे। रास्ते में आरोपियों ने उन्हें रोक लिया और शराब पीने के लिए 500 रुपए मांगे।
पैसे देने से मना करने पर आरोपियों ने गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद बेल्ट और हाथ-मुक्कों से दोनों की पिटाई की। पुलिस ने अपराध क्रमांक 226/2026 के तहत BNS की धारा 296, 351(3), 119(1) और 191(2) में केस दर्ज किया।
मारपीट के मामले में 4 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए समीर कुर्रे (19), आशीष कुमार पाटले (29), अमन कुमार कुर्रे (24) और हेमलाल कुर्रे (42) को गिरफ्तार किया। चारों मोंगरा बस्ती, बांकीमोंगरा के रहने वाले हैं। समीर कुर्रे के पास से घटना में इस्तेमाल बेल्ट भी जब्त की गई। चारों को 2 नवंबर को जेल भेज दिया गया।
SECL खदान में चौकीदारों को बनाया बंधक
दूसरे मामले में सुरक्षा गार्ड व्यासनारायण चौहान ने 28 अक्टूबर को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 26 और 27 अक्टूबर की दरम्यानी रात करीब 1 बजे 10 से 12 नकाबपोश लोग SECL बांकी खदान नंबर-4 में घुस गए।
आरोपियों ने चौकीदारों को बंधक बनाकर उनके मोबाइल फोन छीन लिए। इसके बाद गैस कटर से स्टोर में रखे लोहे के रैक और पाइप काटकर ले गए। चोरी गए सामान की कीमत करीब 28 हजार रुपए बताई गई है।
पिकअप, गैस कटर और ऑक्सीजन सिलेंडर जब्त
पुलिस ने अपराध क्रमांक 223/2026 के तहत BNS की धारा 310(2), 127(2), 317(3) और 317(5) में केस दर्ज किया था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर राहुल विश्वकर्मा (22) और आकाश साहू (20) को गिरफ्तार किया गया।
राहुल पिकअप चालक है, जबकि आकाश कबाड़ दुकान संचालित करता है। पुलिस ने उनके पास से पिकअप वाहन (CG 12 BJ 6180), गैस कटर, ऑक्सीजन सिलेंडर और 2 मोबाइल फोन जब्त किए। दोनों आरोपियों को भी जेल भेज दिया गया।
कोरबा। कोरबा में पटवारियों की बेमियादी हड़ताल मंगलवार को 20वें दिन भी जारी रही। जिलाध्यक्ष को निलंबित करने और 175 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस देने के बाद भी वे घंटाघर धरना स्थल पर डटे रहे। हड़ताल के कारण राजस्व से जुड़े काम और गिरदावरी रुकी हुई है। इससे 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी पर भी असर पड़ने की आशंका है।
पटवारी 13 अक्टूबर से अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल कर रहे हैं। कोरबा जिले के पटवारी भी घंटाघर धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं। हड़ताल के कारण राजस्व संबंधी काम प्रभावित हो रहे हैं।
जिलाध्यक्ष निलंबित, 175 पटवारियों को नोटिस
शासन के निर्देश पर प्रशासन ने रविवार से कार्रवाई शुरू की। बलरामपुर जिले में 5 और कोरबा में एक पटवारी को निलंबित किया गया। कोरबा में राजस्व पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष मिथलेश वर्मा को कलेक्टर ने निलंबित किया है।
प्रशासन के मुताबिक, शासकीय काम में लापरवाही और कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं देने पर सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत यह कार्रवाई की गई।
कोरबा जिले के 254 हल्कों में 201 पटवारी पदस्थ हैं। इनमें से हड़ताल में शामिल 175 पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सोमवार को कार्यालय समय खत्म होने तक किसी ने जवाब नहीं दिया और न ही कोई काम पर लौटा।
पटवारियों ने कहा- कार्रवाई से नहीं डरेंगे
धरना स्थल पर पटवारियों ने प्रशासन की कार्रवाई को दमनात्मक बताया। उन्होंने कहा कि वे कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और हड़ताल जारी रखेंगे।
संघ के जिला प्रवक्ता ओमप्रकाश प्रधान ने कहा कि पटवारी शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू करते हैं। इसके बावजूद शासन उनकी मांगें पूरी करने के बजाय दमनात्मक नीति अपना रहा है।
जिलाध्यक्ष पर कार्रवाई पूरे संघ पर कार्रवाई
प्रधान ने कहा कि जिलाध्यक्ष पर कार्रवाई पूरे संघ पर कार्रवाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर किसानों का पूरा धान नहीं खरीदना चाहती। इसी वजह से पटवारियों पर कार्रवाई की जा रही है।
पदोन्नति और वेतन विसंगति दूर करने की मांग
पटवारियों की चार प्रमुख मांगों में पटवारी से राजस्व निरीक्षक पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करना और 2017 के वेतन संशोधन से पैदा हुई वेतन विसंगति दूर करना शामिल है।
कोरबा। कोरबा में त्योहारी सीजन में मिठाइयों की खरीदारी बढ़ने के बीच कोरबा जिले में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में लिए गए 120 खाद्य पदार्थों के सैंपलों में से करीब 20 जांच में फेल पाए गए।
यानी लगभग 17% सैंपल अमानक मिले। इस सूची में शहर के कुछ नामी प्रतिष्ठानों के साथ बड़े ब्रांडों के उत्पाद भी शामिल हैं। पतंजलि शुद्ध देसी घी और हल्दीराम के रसगुल्ला-चना के सैंपल भी मानकों पर खरे नहीं उतरे।
120 में करीब 20 सैंपल अमानक
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए विभाग ने बीते 10 महीनों में 120 नमूने लिए। इनमें से करीब 20 सैंपल जांच में फेल पाए गए। यह आंकड़ा खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर सवाल खड़े करता है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी विजय भारत के अनुसार, अमानक और मिसब्रांडेड खाद्य पदार्थों का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। मिलावटी दूध, खोवा और मिठाइयों के सेवन से पेट संबंधी बीमारियां, फूड पॉइजनिंग, दस्त और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
कई प्रतिष्ठानों पर लगाया गया जुर्माना
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर इस साल की गई कार्रवाई में कई प्रतिष्ठानों पर जुर्माना लगाया गया है। इनमें स्पेशल रेस्टोरेंट पर 1 लाख रुपए, कुरुदभुरी और चेक पोस्ट स्थित होटल पर 50-50 हजार रुपए, नेचुरल स्वीट्स पर 20 हजार रुपए, सरौन डेयरी पर 20 हजार रुपए और मानिकपुर निर्मल डेयरी पर 35 हजार रुपए का जुर्माना शामिल है।
मिलावट पर सजा और जुर्माने का प्रावधान
अभिहित अधिकारी अर्जित कुमार ने बताया कि खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों में सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। उनके अनुसार, खाद्य पदार्थ असुरक्षित पाए जाने पर मामला कोर्ट में जाता है।
स्वास्थ्य को नुकसान नहीं होने की स्थिति में 1 लाख रुपए और गंभीर बीमारी होने पर 3 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। उपभोक्ता की मृत्यु होने पर उम्रकैद और 10 लाख रुपए तक जुर्माने की बात भी कही गई है।
संयुक्त टीम ने चार प्रतिष्ठानों पर की कार्रवाई
कलेक्टर कुणाल दुदावत और आयुक्त दीपक अग्रवाल के निर्देश पर तहसीलदार अतुल वैष्णव के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने सोमवार देर शाम चार प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की। इस दौरान कुल 13 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया। टीम ने काजू कतली समेत कई खाद्य पदार्थों के नमूने भी जांच के लिए लिए हैं। इन नमूनों की जांच के बाद ही उनकी गुणवत्ता के संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी।