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कोरबा

समाज कल्याण विभाग के नि:शक्तजन सम्मान समारोह में दिव्यांग भाई-बहन सुबह से लेकर शाम तक भूखे गेट पर पड़े रहे

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छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया का कोरबा प्रवास पर सम्मान समारोह था आयोजित

कोरबा। गत 29 सितंबर को छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया कोरबा प्रवास पर पहुंचे थे और समाज कल्याण विभाग द्वारा जिला पंचायत परिसर में नि:शक्तजन सम्मान समारोह एवं व्हील चेयर वितरण का कार्यक्रम रखा गया था। लगभग 4:30 बजे लोकेश कावड़िया जिला पंचायत पहुंचे। अधिकारियों ने तयशुदा कार्यक्रम के तहत पहुंचे दिव्यांगों को व्हील चेयर में बैठाकर मुख्य अतिथि के साथ फोटो खिंचवाई, जबकि पाली ब्लॉक की ग्राम पंचायत नुनेरा से अपने नाना-नानी के साथ पहुंचे भाई बहनों को न तो व्हील चेयर मुहैय्या कराया और न ही उनकी सुध ली। सुबह से शाम तक जिला पंचायत गेट के बगल में भूखे-प्यासे पड़े रहे। किसी ने उन्हें नास्ता तक के लिए नहीं पूछा।
पत्रकारों की पहल पर दोनों दिव्यांगों को मिला अधिकार
जिला पंचायत कोरबा के मुख्य द्वार पर दो बुजूर्ग दम्पत्ति के साथ दो भाई बहन भूखे प्यासे पड़े थे, जिस पर नजर पत्रकार श्रीमती रेणु जायसवाल की पड़ी। पूछताछ पर पता चला कि उन्हें व्हील चेयर देने और सम्मान के लिए जिला पंचायत बुलाया गया है, लेकिन वे भूखे प्यासे पड़े रहे। रेणु जायसवाल की पहल पर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह के निज सचिव संजय जायसवाल (संजू) ने दिव्यांग भाई बहन एवं उनके परिजनों के लिए नास्ता का प्रबंध कराया।
उप संचालक हरिश सक्सेना ने दिव्यांग भाई-बहन को भगाने का दिया निर्देश
छत्तीसगढ़ नि:शक्तजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया जैसे ही जिला पंचायत के अंदर प्रवेश किए और समीक्षा बैठक लेने लगे, तभी समाज कल्याण विभाग के उप संचालक हरिश सक्सेना बाहर निकले और विभाग की मैडम को आदेश देते हुए दोनों दिव्यांगों को परिसर से रवाना करने को कहा, तब तक पत्रकार रेणु जायसवाल वहां पहुंची और उप संचालक सक्सेना के अमानवीय व्यवहार का विरोध करते हुए सक्सेना के किंकर्त्तव्यविमूढता की जानकारी लोकेश कावड़िया और गोपाल मोदी को दी। श्री कावड़िया एवं श्री मोदी ने पहल करते हुए उप संचालक सक्सेना को आदेश दिया, तब विभाग से पहले दिव्यांग लड़कि बिंदिया को व्हील चेयर उपलब्ध कराया और दोनों के आंखें तरेरने के बाद दिव्यांग भाई बबलू को भी व्हील चेयर मुहैय्या कराया गया।
अधिकारियों की लापरवाही से दोनों दिव्यांगों को पेंशन भी नसीब नहीं
पाली ब्लाक के नुनेरा निवासी छतबाई एवं उसका पति चांदर प्रसाद रोहिदास ने बताया कि पाली जनपद पहुंच कर कई बार पेंशन के लिए प्रार्थना की गई, लेकिन वहां पदस्थ एडीयो कंवर ने उन्हें कई बार भगा दिया। छतबाई ने बताया कि बबलू और बिंदिया के वे नाना-नानी हैं और उसके माता-पिता दिव्यांग संतानों को छोड़कर भाग गए हैं।
कलयुग में ऐसे भी होते हैं माता-पिता ! मानवता शर्मशार
माता-पिता के लिए पुत्र जिस स्थिति में रहें, प्यार और दुलार कभी कम नहीं होता, लेकिन कलयुग में ऐसे भी माता-पिता होते हैं कि मानवता शर्मशार हो जाए। कोरोना काल के समय जब पूरा विश्व आर्थिक मंदी से गुजर रहा था, कमोबेश छत्तीसगढ़ में भी यही हाल था। नुनेरा निवासी दिव्यांग बबलू और उसकी बहन दिव्यांग बिंदिया को छोड़कर उसकी माता रामकुमारी, पिता मोहर ने अपने इन मासूमों को नाना चांदर प्रसाद रोहिदास, नानी छत बाई के पास छोड़कर चले गए और आज तक लौट कर नहीं आए। नानी छतबाई ने बताया कि उनकी कुछ भी जमीन नहीं है और बुजूर्ग होने के कारण मजदूरी भी नहीं कर पाते, भीख मांग कर दोनों बच्चों को पाल रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही से दोनों बच्चों को पेंशन भी नहीं मिल पा रही है।
कावड़िया एवं मोदी ने भाई बहनों के चेहरों पर लायी मुस्कान


लोकेश कावड़िया और भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने अधिकारी से पूछा – कि ये दोनों भाई बहन बाहर क्यो पड़े हैं। इस पर समाज कल्याण विभाग के उप संचालक हरिश सक्सेना ने दोनों भाई बहनों के लिए व्हील चेयर की व्यवस्था की, तब दोनों भाई बहन के चेहरों पर मुस्कान आई। श्री कावड़िया और श्री मोदी के सख्त रूख के कारण दोनों भाई बहनों के चेहरों पर मुस्कान बिखरी।
समाज कल्याण के उप संचालक सक्सेना की संवेदनहीनता


दोनों दिव्यांग बच्चे व्हील चेयर पाने की खुशी में जिला पंचायत अपने नाना-नानी के साथ पहुंचे थे, लेकिन उप संचालक हरिश सक्सेना की संवेदनहीनता ऐसी, कि जिला पंचायत के गेट में पड़े इन दोनों भाई बहनों को भूखे प्यासे भगवाने की नाकाम कोशिश की गई। श्री कावड़िया और श्री मोदी के निर्देश के बाद दोनों बच्चों को व्हील चेयर उपलब्ध करायी गई।
उपसंचालक सक्सेना कावड़िया और सीईओ के सामने ही करने लगे बद्तमिजी
सक्सेना ने पहले व्हील चेयर न होने की बात की, लेकिन कावड़िया और मोदी के कहने पर एक और व्हील चेयर आई। उप संचालक सक्सेना भड़क गया और कावड़िया और सीईओ नाग के सामने ही बद्तमिजी करने लगा और कहा कि परीक्षण कराता हूं।
भूखे भाई-बहन एवं परिजनों को नाश्ता कराया संजीव जायसवाल ने
पत्रकार रेणु जायसवाल की पहल पर जिला पंचायत अध्यक्ष के निजी सचिव संजीव जायसवाल (संजू) ने भूखे प्यासे दिव्यांग भाई-बहन (बबलू-बिंदिया) एवं उनके परिजनों को नाश्ता कराया।
नरेन्द्र देवांगन ने बस किराया की व्यवस्था की
कार्यक्रम में मौजूद पार्षद एवं भाजयुमो महामंत्री नरेन्द्र देवांगन ने अति गरीब दिव्यांगों एवं उनके परिजनों के लिए कोरबा से नूनेरा तक जाने के लिए बस किराया की व्यवस्था की, जबकि समाज कल्याण विभाग में पदस्थ अधिकारियों की यहां भी संवेदनहीनता सामने आई। दिव्यांगों एवं उनके परिजनों की लाचारी पर उन्हें तरस तक नहीं आया और गेट पर पड़े रहे दिव्यांगों की सूध तक नहीं ली। संजीव जायसवाल के पास बाबू मुकेश दिवाकर सहित समाज कल्याण विभाग के अन्य लोग उपस्थित थे।
अधिकारियों पर भड़के जनपद सदस्य निषाद


कुछ दिव्यांगों को कार्यक्रम में पाली जनपद पंचायत के सदस्य सुरेश निषाद भी जिला पंचायत पहुंचे थे। नुनेरा निवासी दोनों दिव्यांग भाई-बहन को व्हील चेयर देने की गुजारिश उप संचालक हरिश सक्सेना से की थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। बाद में दोनों को व्हील चेयर उपलब्ध कराई गई, उसके बाद सुरेश निषाद भड़क गए और कहा कि ऐसे अधिकारियों के कारण ही विष्णु सरकार की छबि खराब हो रही है। तानाशाही और भ्रष्टाचार में अधिकारी गुरेज नहीं करते, लेकिन पीड़ितों की सेवा में ये संवेदनहीन होते हैं और नियम एवं शर्तों का हवाला देते हैं। उन्होंने पाली जनपद में पदस्थ एडीओ कंवर पर भी जमकर भड़ास निकाली और कहा कि कंवर की मनमानी के कारण क्षेत्र के दिव्यांगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
पेंशन के लिए करेंगे प्रयास-मुकेश
नुनेरा सरपंच पति मुकेश ने कहा कि आयु 18 वर्ष न होने के कारण पेंशन नहीं मिल पा रही है, ऐसा अधिकारी हवाला दे रहे हैं। उनकी पेंशन के लिए प्रयास किया जाएगा, ताकि उनका जीवन भी सरल हो सके।

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कोरबा

कोरबा में एकलव्य आवासीय स्कूल में छात्रों का हंगामा:विधायक-जिला पंचायत अध्यक्ष की गाड़ी रोककर प्रिंसिपल हटाने की मांग, कार्रवाई के दिए निर्देश

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कोरबा। कोरबा के कटघोरा थाना क्षेत्र स्थित शासकीय एकलव्य आवासीय विद्यालय में सोमवार को छात्रों और अभिभावकों का आक्रोश फूट पड़ा। शाला प्रवेश उत्सव से लौट रहे कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल और जिला पंचायत अध्यक्ष की गाड़ी रोककर उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य डॉ. अहमद खान को हटाने की मांग की। छात्रों ने भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

छात्रों का कहना है कि उन्हें रोजाना घटिया और अस्वच्छ भोजन दिया जाता है। आरोप है कि बरसात के पानी से खाना बनाया जाता है और भोजन में कई बार कीड़े भी निकलते हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कथित तौर पर एक्सपायरी डेट वाले दूध के पैकेट और खाद्य सामग्री भी दिखाई, जिनकी तारीखें मिटाई गई थीं।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी उठाए सवाल

छात्रों ने बताया कि कई बच्चे खाज-खुजली और त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं, लेकिन उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं मिल रहा। आरोप यह भी लगाया गया कि छात्रों को एक्सपायरी डेट वाली दवाइयां दी जा रही हैं।

अभिभावकों ने भी जताई नाराजगी

अभिभावकों ने प्राचार्य के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 240 छात्रों के अभिभावकों को पैरेंट्स मीटिंग के लिए अलग-अलग दिनों में बुलाया जाता है, जिससे उन्हें बार-बार विद्यालय आना पड़ता है। साथ ही छात्रों को बाहर से जरूरत का सामान लाने पर रोक लगाने का भी आरोप लगाया गया।

शिक्षकों की मारपीट का मामला भी उठा

प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने बताया कि हाल ही में विद्यालय के दो शिक्षकों के बीच हुए विवाद और मारपीट में कुछ छात्र भी घायल हो गए थे। इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई जा चुकी है।

विधायक ने दिए जांच के निर्देश

छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें सुनने के बाद विधायक प्रेमचंद पटेल ने मौके पर मौजूद सहायक आयुक्त को पूरे मामले की जांच कर सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुविधाओं से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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कोरबा

बाइक गुम होने के तनाव में युवक ने दी जान:कोरबा में नशे की हालत में खोई थी बाइक, कमरे में फंदे पर मिला शव

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कोरबा। कोरबा जिले के बांकी मोंगरा थाना क्षेत्र के ग्राम बलगीखार में सोमवार सुबह एक 27 वर्षीय युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान दीपक कंवर के रूप में हुई है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार दीपक कंवर अविवाहित था और मजदूरी कर अपना जीवनयापन करता था। कुछ दिन पहले वह दर्री क्षेत्र गया था। बताया जा रहा है कि नशे की हालत में उसकी बाइक कहीं गुम हो गई थी। काफी तलाश के बावजूद बाइक नहीं मिली, जिसके बाद से वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगा था।

सुबह कमरे में फंदे पर लटका मिला शव

परिजनों के मुताबिक, रविवार (26 जुलाई) देर रात दीपक नशे की हालत में घर लौटा। खाना खाने के बाद वह अपने कमरे में सोने चला गया। सोमवार सुबह काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं आने पर परिजनों ने आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। खिड़की से देखने पर उसका शव पंखे से लटकता मिला।

घर में मचा कोहराम

घटना का पता चलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलने पर बांकी मोंगरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची, दरवाजा तोड़कर शव को नीचे उतारा और पंचनामा कार्रवाई की।

सुसाइड नोट नहीं मिला

पुलिस की जांच में कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने परिजनों और आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए हैं।

पुलिस कर रही जांच

परिजनों ने पुलिस को बताया कि बाइक गुम होने के बाद से दीपक काफी परेशान रहता था और बार-बार उसी बात का जिक्र करता था। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है।

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कोरबा

कोरबा में सोते परिवार पर धारदार हथियार से हमला:बुजुर्ग महिला की हत्या, बेटा-बहू गंभीर, पूछताछ में आरोपी परिजन ने जुर्म कबूला

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कोरबा। कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र के ग्राम हर्राडीह में शनिवार (25 जुलाई) देर रात एक परिवार पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया गया। हमले में 65 वर्षीय समारिन बाई धनवार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके बेटे हेतराम (45) और बहू प्रमिला (40) गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस ने मामले में मृतका के एक परिजन को गिरफ्तार किया है, जिसने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार कर लिया है।

देर रात घर में घुसकर किया हमला

जानकारी के अनुसार, शनिवार रात करीब 11 बजे समारिन बाई अपने बेटे और बहू के साथ घर में सो रही थीं। इसी दौरान एक व्यक्ति घर में घुसा और धारदार हथियार से तीनों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में समारिन बाई के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं हेतराम और प्रमिला गंभीर रूप से घायल हो गए।

ग्रामीणों ने पहुंचाई पुलिस को सूचना

हमले की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल डायल-112 तथा पाली थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, जबकि दोनों घायलों को शुरुआती इलाज के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया। उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

परिजन ही निकला आरोपी

घटना की जांच के दौरान पुलिस ने संदेह के आधार पर मृतका के एक परिजन को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या और हमले की वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस मामले के पीछे के कारणों की जांच कर रही है।

शव और घायलों को खाट व लकड़ी के सहारे लगभग एक किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा।

शव और घायलों को खाट व लकड़ी के सहारे लगभग एक किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा।

सड़क नहीं होने से खाट पर ले जाना पड़ा शव

घटना के बाद गांव की बदहाल व्यवस्था भी सामने आई। ग्रामीणों ने बताया कि हर्राडीह तक आज भी पक्की सड़क नहीं पहुंची है। यही कारण रहा कि शव और दोनों घायलों को करीब एक किलोमीटर तक खाट और लकड़ी के सहारे मुख्य सड़क तक लाना पड़ा। इसके बाद एंबुलेंस की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।

ग्रामीणों ने इस घटना के बाद गांव तक जल्द पक्की सड़क बनाने की मांग दोहराई है।

कोरबा के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम हर्राडीह में शनिवार देर रात एक परिवार पर धारदार हथियार से हमला किया गया। इस घटना में 65 वर्षीय समारिन बाई धनवार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके बेटे 45 वर्षीय हेतराम और बहू 40 वर्षीय प्रमिला गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने मामले में एक संदेही को गिरफ्तार किया है, जो मृतिका का परिजन बताया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, शनिवार रात करीब 11 बजे समारिन बाई अपने बेटे हेतराम और बहू प्रमिला के साथ घर में सो रही थीं। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति घर में घुस आया और तीनों पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। हमले में समारिन बाई को सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। हेतराम और प्रमिला गंभीर रूप से घायल हो गए।

हमले की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। घटना की सूचना तुरंत 112 और पाली थाना पुलिस को दी गई। पुलिस टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। घायल हेतराम और प्रमिला को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और संदेह के आधार पर मृतिका के एक परिजन को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

इस घटना का एक दुखद पहलू यह भी सामने आया कि गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण शव और घायलों को खाट व लकड़ी के सहारे लगभग एक किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ा। इसके बाद ही उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया जा सका। ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में आज तक सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है।

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