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कहीं छूट न जाए मौका: घर में बेटी के जन्म पर अब सरकार देगी 50,000 रुपये, जानें पूरा प्रोसेस?

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जयपुर, एजेंसी। केंद्र और राज्य सरकारें देश की बेटियों को आत्मनिर्भर और शिक्षित बनाने के लिए लगातार कई बड़ी योजनाएं चला रही हैं। इसी कड़ी में राजस्थान सरकार की एक बेहद शानदार और महत्वाकांक्षी योजना इन दिनों काफी चर्चा में है जिसका नाम है ‘मुख्यमंत्री राजश्री योजना’ (Mukhyamantri Rajshree Yojana)। 

यह विशेष स्कीम राज्य की बेटियों के जन्म से लेकर उनकी पूरी स्कूली शिक्षा (12वीं क्लास) तक का पूरा वित्तीय खर्च उठाती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में लिंगानुपात (महिला-पुरुष अनुपात) को सुधारना, भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों को रोकना और बेटियों के स्वास्थ्य व शिक्षा को बढ़ावा देना है।

राजस्थान सरकार ने इस योजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की थी। तब से लेकर आज तक यह स्कीम प्रदेश की लाखों बेटियों की जिंदगी संवार रही है। योजना के तहत पात्र बेटी को उसके जन्म से लेकर 12वीं कक्षा पास करने तक अलग-अलग चरणों में कुल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह पूरी राशि सीधे बेटी के नाम पर खुले बैंक खाते में (Direct Benefit Transfer) भेजी जाती है।

जानें कब और कितना मिलेगा पैसा?

योजना के तहत ₹50,000 की कुल राशि को 6 आसान किस्तों में बांटकर दिया जाता है:

पहली किस्त (जन्म के समय): बेटी के जन्म लेते ही परिवार को ₹2,500 दिए जाते हैं।

दूसरी किस्त (1 वर्ष पूरा होने पर): बेटी के 1 साल की होने और सभी जरूरी टीके लगने पर ₹2,500 मिलते हैं।

तीसरी किस्त (स्कूल एडमिशन): पहली बार सरकारी स्कूल में एडमिशन (पहली क्लास) लेने पर ₹4,000 दिए जाते हैं।

चौथी किस्त (क्लास 6 में प्रवेश): जब बेटी छठी क्लास में पहुंचती है, तो ₹5,000 की सहायता मिलती है।

पांचवीं किस्त (क्लास 10 में प्रवेश): दसवीं कक्षा में दाखिला लेने पर ₹11,000 खाते में आते हैं।

छठी और आखिरी किस्त (12वीं पास): बारहवीं कक्षा सफलतापूर्वक पास करने पर बेटी को एकमुश्त ₹25,000 दिए जाते हैं जिसका उपयोग उसकी आगे की पढ़ाई या शादी के लिए किया जा सकता है।

आवेदन के लिए यह Documents हैं जरूरी

अगर आप भी अपनी बेटी के लिए इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो आपके पास नीचे दिए गए कागजात होने अनिवार्य हैं। बच्ची का Birth Certificate, पहचान पत्र के रूप में पहचान संबंधी कार्ड (जैसे जन-आधार या पूर्ववर्ती पहचान कार्ड), मातृ और शिशु स्वास्थ्य कार्ड (Mamta Card), स्कूल में प्रवेश (एडमिशन) का आधिकारिक प्रमाण पत्र, बैंक खाते की जानकारी (पासबुक की फोटोकॉपी)

कैसे और कहां करें आवेदन?

मुख्यमंत्री राजश्री योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया बेहद सरल बनाई गई है। आप राजस्थान सरकार के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल या नजदीकी ई-मित्र (E-Mitra) केंद्र पर जाकर इसके लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। आप अपने क्षेत्र के महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के कार्यालय, सरकारी अस्पताल या आंगनबाड़ी केंद्र से संपर्क करके भी इस योजना का फॉर्म जमा कर सकते हैं।

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नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश

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नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश

काठमांडू,

भारत और नेपाल के बीच यात्रा और व्यापार करने वालों के लिए अच्छी खबर है। नेपाल सरकार ने भारतीय और नेपाली नागरिकों को 9 नवंबर 2016 के बाद जारी रू.200 और रू.500 के भारतीय नोट अधिकतम रू.25,000 तक नेपाल लाने और ले जाने की अनुमति दे दी है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने नई अधिसूचना जारी कर इस संबंध में नियम स्पष्ट किए हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि 8 नवंबर 2016 से पहले जारी रू.500 और रू.1,000 के भारतीय नोट पहले की तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इन पुराने नोटों को नेपाल में लाने या ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

नेपाली नागरिकों के लिए विशेष नियम
नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक भारतीय मुद्रा केवल भारत से नेपाल ला सकेंगे। उन्हें भारतीय करेंसी नेपाल से किसी तीसरे देश में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि नए नियम से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत के साथ व्यापार करने वाले नेपाली नागरिकों को काफी सुविधा मिलेगी। इससे सीमा पार नकदी लेन-देन की प्रक्रिया भी सरल होगी। नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक और विदेशी यात्री 5,000 अमेरिकी डॉलर या उसके बराबर विदेशी मुद्रा बिना कस्टम घोषणा के नेपाल ला सकते हैं। यदि इससे अधिक राशि लाई जाती है तो कस्टम अधिकारियों के समक्ष इसकी घोषणा करना अनिवार्य होगा। एजेंसी।

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दिल्ली-एनसीआर में खुदरा स्थलों का पट्टा जनवरी-जून में 78% बढ़ा: रिपोर्ट

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दिल्ली-एनसीआर में खुदरा स्थलों का पट्टा जनवरी-जून में 78% बढ़ा: रिपोर्ट

नई दिल्ली,

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में इस वर्ष जनवरी-जून के दौरान शॉपिंग मॉल और खुदरा बाजारों में खुदरा दुकानों की पट्टा गतिविधि 78 प्रतिशत बढ़कर 13 लाख वर्ग फुट हो गई। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट कहती है कि यह वृद्धि मुख्य रूप से फैशन दुकानों, खाद्य एवं पेय (एफएंडबी) कंपनियों और डिपार्टमेंटल स्टोर के विस्तार से हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही में शॉपिंग मॉल में पट्टा गतिविधि मजबूत रही और इसमें सालाना आधार पर दोगुनी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मुख्य सड़कों पर पट्टे में चार प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। कुल पट्टा गतिविधियों में फैशन खंड की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत रही, जबकि एफएंडबी का 16 प्रतिशत और डिपार्टमेंटल स्टोर का 12 प्रतिशत योगदान रहा।

कंपनी के अनुसार, बेहतर लोकेशन वाले मॉल और बाजार परिसरों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ने से रिक्तता घटी है और किराया बढ़ा है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचे, आवासीय विस्तार और उपभोक्ता मांग में वृद्धि के कारण एनसीआर देश के प्रमुख संगठित खुदरा बाजारों में तेजी से उभर रहा है। एजेंसी।

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विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश

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विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश

मुंबई,

वैश्विक निवेशकों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर शेयरों से पैसा निकालकर विदेशी फंड अब भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों के बैंकिंग, आईटी और अन्य अपेक्षाकृत स्थिर सेक्टरों में निवेश बढ़ा रहे हैं। AI निवेश से मिलने वाले रिटर्न को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच यह बदलाव एशियाई बाजारों का निवेश परिदृश्य बदलता दिख रहा है।

ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिडेलिटी इंटरनेशनल, BNP Paribas और M&G Investments जैसे निवेशकों ने दक्षिण कोरिया और ताइवान के AI एवं सेमीकंडक्टर शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करना शुरू किया है। विश्लेषकों का कहना है कि AI पर हो रहे भारी निवेश से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे में फंड मैनेजर बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स और अन्य अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी बिकवाली का असर दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों पर भी दिखा है। निवेशकों की निकासी से दोनों बाजारों में दबाव बना हुआ है और अस्थिरता बढ़ी है।

भारत और चीन विदेशी निवेशकों का केंद्र

दूसरी ओर, भारत और चीन विदेशी निवेशकों के लिए फिर आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। जुलाई के दौरान भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश बढ़ा है, जिससे आईटी सहित कई प्रमुख सेक्टरों को समर्थन मिला। वहीं, चीन में इंटरनेट कंपनियों और बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इसके अलावा इंडोनेशिया और थाईलैंड के बाजारों में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल तेज जोखिम वाले AI शेयरों की तुलना में बेहतर मूल्यांकन और स्थिर रिटर्न वाले बाजारों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

एजेंसी।

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