मेरठ,एजेंसी। कॉमेडियन सुनील पाल और एक्टर मुश्ताक खान किडनैप मामले में गिरफ्तार अर्जुन कर्णवाल ने रविवार को पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की। मेडिकल चेकअप के लिए ले जाते समय वह दरोगा की पिस्टल छीनकर गाड़ी से कूद गया और पुलिस पर फायरिंग कर दी। क्रॉस फायरिंग में उसके पैर में गोली लगी।
अर्जुन को पुलिस ने शनिवार रात पकड़ा था। उसके पास से किडनैप में इस्तेमाल की गई स्कॉर्पियो कार, 2 लाख रुपए और फिरौती में इस्तेमाल किया गया मोबाइल मिला था।
अर्जुन ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसको लवी टास्क देता था। किसका किडनैप करना है, कितनी फिरौती वसूलनी है, इस पूरी कहानी के बारे में सिर्फ लवी ही जानता था। अर्जुन को सिर्फ उतना ही पता होता था, जितना लवी उसे बताता था।
2 दिसंबर को सुनील पाल काे किडनैप किया था
कॉमेडियन सुनील पाल के मुताबिक उनको 2 दिसंबर की रात हरिद्वार के एक इवेंट में बुलाया गया था। सुनील पाल फ्लाइट से मुंबई से दिल्ली पहुंचे। दिल्ली से मेरठ के बीच सुनील पाल को किडनैप कर लिया गया। किडनैपर सुनील पाल को मेरठ लाए। आंखों पर पट्टी बांधकर मेरठ में रखा गया।
दोस्तों को फोन करके 8 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई। फिरौती की सारी रकम ऑनलाइन मंगाई गई। इसके बाद बदमाशों ने बेगमपुल के आकाश गंगा ज्वेलर्स से 4 लाख रुपए और जवाहर क्वार्टर में अक्षित सिंघल की शॉप से सवा 2 लाख के जेवरात खरीदे। दोनों जगह पर सुनील पाल के नाम से बिल बनवाए। सुनील पाल के आधार कार्ड और पैन कार्ड की कॉपी भी दी गई।
3 दिसंबर को बदमाशों ने फिरौती के 8 लाख रुपए ऑनलाइन मंगाए। पैसे मिलने के बाद बदमाशों ने 20 हजार मुझे फ्लाइट के टिकट के लिए दिए। इसके बाद लालकुर्ती थाना क्षेत्र में मुझे छोड़ दिया।
सुनील पाल के मुताबिक, 16 दिन पहले पहले अनिल नाम के युवक ने कॉल करके खुद को इवेंट कंपनी का डायरेक्टर बताया। उसने सुनील को हरिद्वार के एक इवेंट में आने को कहा। इसके लिए सुनील पाल को कुछ रकम भी ट्रांसफर की।
2 दिसंबर को सुनील दिल्ली पहुंचे तो इवेंट कंपनी की तरफ से उनको हरिद्वार ले जाने के लिए कार भेज दी गई। सुनील के कार में बैठते ही आरोपियों ने उन्हें बंधक बना लिया।
घटना की कहानी सुनील पाल की जुबानी
मेरठ पुलिस ने कॉमेडियन सुनील पाल को 12 दिसंबर को मुंबई के सांताक्रूज थाने बुलाया था। यहां पर थाना प्रभारी योगेंद्र कुमार ने सुनील के बयान दर्ज किए थे। सुनील पाल ने बताया कि जिंदगी भर वह लोगों को हंसाते रहे, डर से न घबराने की सलाह देते रहे। मगर 2 दिसंबर का दिन उनके लिए बेहद डरावना और कभी न भूलने वाला अनुभव दे गया। मैं कभी इतना नहीं डरा, जितना उस दिन डरा।
मेरी जिंदगी के वो 22 घंटे बेहद डरावने थे। मैं हर पल वहां से भागने के बारे में सोच रहा था, कभी सोचता था क्या मैं सही-सलामत अपनों के बीच पहुंच पाऊंगा।
अपहरण कर आरोपियों ने मुझे बेड पर लिटाया था, मगर वह बेड के पास ही जमीन पर सोते थे। मेरा मोबाइल छीन लिया, पासवर्ड पूछकर उससे मेरी निजी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद आरोपियों ने मुझे डराना और धमकाना शुरू कर दिया। जहर का इंजेक्शन लगाकर जान से मारने की धमकी दी। मुझे टॉर्चर किया।
मैं इतना डर गया था कि आरोपियों ने जो कहा मैंने वो किया, जो बुलवाया, वो मैंने बोला।
सुनील पाल ने बताया कि बिजनौर के रहने वाले लवी पाल और पूर्व पार्षद सार्थक उर्फ रिक्की ने अपने 8 साथियों के साथ एक फर्जी इवेंट कंपनी बनाई। उसके जरिए मुझे बुकिंग करके मेरठ बुलाया। 2 दिसंबर को मुझे और 21 नवंबर को कॉमेडियन मुश्ताक खान को इवेंट के लिए बुक किया। मेरठ पहुंचने पर मुश्ताक खान को अगवा कर लिया गया।
फिर इसी तरह से मुझे हरिद्वार में कार्यक्रम कराने के बहाने बुलाकर मेरठ से अगवा किया गया। हम दोनों को बिजनौर में अगवा करके रखा गया। उन्होंने दिल्ली से मेरठ पहुंचने, फिर किडनैप होने के बाद से छूटने तक की दास्तां पॉइंट टु पॉइंट पुलिस को बताई।
बुधवार को मेरठ के लालुकर्ती थाने में सुनील पाल की पत्नी सरिता पाल पहुंची थीं।
अपहरणकर्ता बिजनौर के रहने वाले पुलिस जांच में सुनील पाल का अपहरण करने वाले बदमाश बिजनौर के रहने वाले निकले। मुख्य आरोपियों की पहचान बिजनौर निवासी लवी पाल और अर्जुन कर्णवाल के रूप में हुई थी। मेरठ पुलिस ने शहर के 100 से अधिक CCTV खंगालकर आरोपियों की पहचान की थी।
इसके बाद बिजनौर पुलिस हिरासत में अजीम और सैनुद्दीन को अरेस्ट कर लिया था। आरोपियों ने बताया कि अपहरण के बाद मुश्ताक और सुनील पाल को लवी पाल ने अपनी स्कॉर्पियो में बैठाया था। वही बिजनौर लेकर आया था।
उनसे पूछताछ में सामने आया कि सुनील पाल को भी रात को बिजनौर शहर के नजीबाबाद रोड स्थित स्वयंवर बैंक्वेट हॉल में रखा गया था। इस मामले में मेरठ और बिजनौर पुलिस ने 25 लोगों को हिरासत में लिया हुआ है।
वहीं पुलिस ने लवी पाल गैंग के मुख्य सदस्य अर्जुन को बुधवार रात अरेस्ट कर लिया था। मगर वह पुलिस को पूरी जानकारी नहीं दे पा रहा है। उसने पुलिस को बताया कि लवी पाल 2 महीने से ज्यादा समय तक मुंबई में था। उसके वहां काफी कलाकारों से संबंध हो गए।
इसके बाद लवी ने कलाकारों को अगवा करके अपराध को अंजाम दिया। उसने पूछताछ में एक और नाम अंकित का लिया। बताया कि अंकित लवी का साथी है। यह भी वारदात में शामिल है। पुलिस लवी पाल का मुंबई के एक्टर से कनेक्शन भी खंगाल रही है।
सीसीटीवी में लवी पाल और अर्जुन।
सरेंडर करने के फिराक में है लवी पाल लवी और अर्जुन की गैंग में 9 लोग शामिल हैं। लवी पाल को गैंग का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। लवी ब्याज पर पैसे देने का काम करता है। वह पार्षद का चुनाव भी लड़ चुका है। 2016 में एक चोरी के मामले में जेल गया था। किडनैपिंग का मास्टरमाइंड लवी पाल मेरठ के कुछ वकीलों के साथ मिलकर सरेंडर करने के फिराक में है।
पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। उसका गुर्गा अर्जुन पूरी घटना के बारे में पुलिस को ज्यादा जानकारी नहीं दे पा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसी। 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने लाल किले पर 75 मिनट की स्पीच दी। पीएम ने कहा- ‘हथियारी नक्सल तो चले गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। समाज को गलत राह पर ले जाने के लिए तरह-तरह के काम कर रहे हैं।’
उन्होंने कहा, ‘ऐसे लोग हिंसा अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं। इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा और इन्हें आइसोलेट करना होगा और विकसित राष्ट्र बनाने की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।’
पीएम ने 75 मिनट के भाषण में 52 बार युवाओं का जिक्र किया। इसमें ‘युवा’ शब्द 20 बार, ‘नौजवान’ 22 बार और ‘साथियों’ 10 बार कहा। पीएम ने कहा कि सरकार अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग देगी। गरीब और मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं के लिए कई परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी।
इससे पहले लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गाया गया। पीएम ने तिरंगा फहराया। उसके बाद राष्ट्रगान हुआ, 21 तोपों की सलामी दी गई।
पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर 13वीं बार तिरंगा फहराया।
पीएम का संबोधन, 7 बड़ी बातें, कहा- हथियारबंद नक्सल गए, दिमागी नक्सल मौजूद
1. दिमागी नक्सलियों पर
‘हमने नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था। आज नक्सल क्षेत्र में नक्सल मुक्त होने के कारण विकास का तिरंगा लहरा रहा है। हमें सावधान रहने की जरूरत है। हथियारबंद नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। इन दिमागी नक्सलों को पहचानना होगा। इन्हें युवाओं को भटकाने से बचाना होगा।’
2. महिला आरक्षण पर
हमारी माताओं बहनों को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले। वे भारत की नीति में अपना योगदान दें। समय की मांग है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं। आइए महिला आरक्षण लागू करके महिलाओं के सम्मान में आप भी जुड़िए और क्रेडिट लीजिए लेकिन मेरी माताओं बहनों को हक दीजिए।
3. 2047 के लक्ष्य पर
2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। हमारी दिशा तय हो चुकी है। हमें उसे प्राप्त करके रहना है। इसके लिए हमें हमारे वर्क कल्चर और हमारी सोच को भी बदलना होगा। जो काम पिछले 5-7 दशक में नहीं हुए हैं, वो काम हमें आगामी 5-7 साल में करने हैं।
4. ग्लोबलाइजेशन पर
एक समय था जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था तो कुछ एयर कंडीशन चेंबर में बैठकर सोचने वाले लोग हमें बता रहे थे कि ग्लोबलाइजेशन का क्या होगा, लेकिन पूरी दुनिया देख रही है कि पिछले 1 दशक में ऐसा लग रहा है कि लोगों ने ग्लोबलाइजेशन बोलना ही बंद कर दिया।
5. युवाओं पर
‘एक साल में 1 करोड़ युवाओं को एआई (AI) स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही छात्रों के लिए ऑनलाइन फ्री कोचिंग व्यवस्था की शुरुआत भी की जाएगी।’
6. आत्मनिर्भर पर
बीते सालों में हमारा दृढ़ विश्वास रहा है कि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना है। हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए। दुनिया में बहुत कुछ मिलता है, सस्ता मिलता है, जल्दी मिलता है लेकिन उससे हमारा सामर्थ्य तैयार नहीं होता। इसलिए हमें भी अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है। अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद करनी है इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं।
7. आपदाओं पर
‘अब छोटे सपनों से काम चलने वाला नहीं है। हमें बड़े सपने देखने होंगे क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं। हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए। जब संकल्प दृढ़ होता है तो कठिनाइयों से, आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप उभर कर आता है।
नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी, NALSAR से जुड़े विवाद पर काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को फटकार लगाई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि भले ही छात्रों का फैसला गलत हो या उन्हें किसी ने गलत सलाह दी हो, फिर भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है।
जस्टिस सूर्यकांत ने BCI के उस सर्कुलर पर भी नाराजगी जताई जिसमें NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट रोकने को कहा गया था। CJI ने कहा- यह मेरे और छात्रों के बीच का मामला है। इसे मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं थी। बार काउंसिल इसमें दखल देने वाला कौन होता है?
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस भी जारी किया और यूनिवर्सिटी के किसी छात्र या फैकल्टी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया। NALSAR के करीब 450 छात्र जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह 2026का चीफ गेस्ट बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं।
CJI की टिप्पणी से नाराज हैं छात्र
NALSAR यानी नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च, हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी है। यहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं। इनमें से करीब 450 छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI को चीफ गेस्ट बनाने का न्योता वापस लेने की मांग की थी। समारोह की तारीख अभी तय नहीं है।
छात्रों की नाराजगी CJI की पिछले महीने की एक टिप्पणी को लेकर थी। यह टिप्पणी दिल्ली में NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी।
बार काउंसिल ने सभी 2026 ग्रेजुएट्स का एनरोलमेंट रोक दिया था
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 13 अगस्त को सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रेजुएट को अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोल न किया जाए।
साथ ही यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी। यूनिवर्सिटी से उन लोगों की पहचान करने को कहा गया, जो कैंपेन शुरू करने, उसका ड्राफ्ट तैयार करने, उसे फैलाने, छात्रों को जुटाने, मीडिया से संपर्क करने, ऑनलाइन ग्रुप चलाने या बहिष्कार की अपील करने में मुख्य भूमिका में थे।
काउंसिल ने अपने शुरुआती लेटर में कहा था कि कानून के छात्र से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति सम्मान की उम्मीद की जाती है। सम्मान न करने वाले छात्र भविष्य में जिम्मेदार वकील, शिक्षक या जज बनने की भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते। BCI ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ शिक्षकों के बीच ग्रुपिज्म और गंदी राजनीति ने छात्रों को कैंपेन के लिए उकसाने में भूमिका निभाई।
कुछ घंटे बाद ही BCI ने आदेश बदला
आदेश जारी होने के कुछ घंटे बाद BCI ने अपना रुख बदल दिया। काउंसिल ने कहा कि NALSAR के 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और वे CJI के अनादर वाले किसी अभियान में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे। BCI ने कहा कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने निर्दोष छात्रों को इस अभियान में शामिल करने की कोशिश की।
इसके बाद सभी छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी गई। हालांकि उस समय BCI ने कहा था कि वह NALSAR के वाइस चांसलर की रिपोर्ट का इंतजार करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी BCI के एक्शन पर सवाल उठाए
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के शुरुआती आदेश पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और सीनियर वकील विकास सिंह ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे मनमाना, गैरकानूनी और जरूरत से ज्यादा कार्रवाई बताते हुए कहा था कि छात्रों को अपनी बात रखने के कारण वकालत में प्रवेश से वंचित करने की धमकी नहीं दी जानी चाहिए।
CJI सूर्यकांत के हाल की 3 बयान, जिसपर विवाद हुए
15 मई: CJI ने कहा था- कुछ युवा कॉकरोच की तरह भटक रहे
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान युवाओं पर टिप्पणी की थी। CJI सूर्यकांत ने कहा था- कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं। ये हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।’
इस बयान के बाद ही 16 जुलाई को अभिजीत दीपके नाम के शख्स ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से सोशल मीडिया पेज बनाया। इसने ही दिल्ली जंतर-मंतर पर 35 दिन तक प्रदर्शन किया था।
22 जुलाई: CJI ने कहा था- हमें वीडियो देखने में दिलचस्पी नहीं है
दरअसल, 22 जुलाई को एक वकील ने CJI की अगुआई वाली 3 जजों की बेंच के सामने जनहित याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने कहा- छात्र महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन उन पर पुलिस की बर्बरता के वीडियो भी हैं। यदि संभव हो तो मामले की सुनवाई जल्द की जाए।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था, ‘हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास देखने का समय नहीं है।’ जब वकील ने छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का दूसरी बार अनुरोध किया तो CJI ने कहा, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।
24 जुलाई: CJI ने कहा था- किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा से जुड़ी 2 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें कई राज्य पक्षकार के तौर पर शामिल हैं। इनका जिक्र पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वे डायरी नंबर का इंतजार कर रहे थे। इन दलीलों के बाद CJI ने कहा, “इसे लिस्टिंग में आने दें, हम इस पर सुनवाई करेंगे।”
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के लिए 40 सवालों की लिस्ट जारी कर दी है। इसमें लोगों से SC, ST या अन्य जाति के बारे में पूछा जाएगा। आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब सभी समुदायों की जाति की जानकारी जनगणना में दर्ज की जाएगी।
इससे पहले 2011 की जनगणना के फॉर्म में 29 सवाल थे। इसमें जाति से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ SC/ST का विकल्प था। जनगणना-2027 के सवालों की लिस्ट में जाति से जुड़ा सवाल नंबर 10 पर है, जिसमें SC/ST के साथ जाति शब्द भी जोड़ा गया है।
खास बात यह है कि लोगों से कोविड वैक्सीन कहां लगवाई थी, यह सवाल भी पूछा जाएगा। इसके साथ मोबाइल नंबर, आधार, वोटर ID और बैंक अकाउंट से जुड़े सवाल भी होंगे।
1. पहचान और परिवार: 12 सवालों में नाम से जाति तक जानकारी
जनगणना में व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि और उम्र पूछी जाएगी। साथ ही वैवाहिक स्थिति, शादी के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म और SC/ST/जाति की जानकारी ली जाएगी। माता-पिता की जानकारी भी दर्ज होगी।
2. शिक्षा और भाषा: 5 सवालों में पढ़ाई और डिजिटल साक्षरता
इस हिस्से में दिव्यांगता, मातृभाषा और दूसरी भाषाएं, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की जानकारी ली जाएगी। साथ ही शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई की स्थिति और उच्चतम शैक्षणिक योग्यता, स्ट्रीम या विषय पूछा जाएगा।
3. रोजगार: 8 सवालों में काम और नौकरी की जानकारी
व्यक्ति ने पिछले एक साल में काम किया या नहीं, उसकी आर्थिक गतिविधि, व्यवसाय और काम का क्षेत्र पूछा जाएगा। इसके अलावा कामगार की श्रेणी, गैर-आर्थिक गतिविधि, काम की तलाश या उपलब्धता और काम की जगह तक आने-जाने की जानकारी भी ली जाएगी।
4. जन्म और माइग्रेशन: 8 सवालों में जन्मस्थान से बच्चों तक की जानकारी
इस सेक्शन में जन्म स्थान, पिछला निवास स्थान, माइग्रेशन का कारण और वहां रहने की अवधि पूछी जाएगी। स्थायी निवास का पता भी दर्ज होगा। महिलाओं से जीवित बच्चों, अब तक जन्मे बच्चों और पिछले एक साल में जन्मे बच्चों की संख्या भी पूछी जाएगी।
5. बैंक डिटेल्स और आधार नंबर: 7 सवालों में डॉक्यूमेंट्स की जानकारी
इसमें कोविड-19 वैक्सीन कहां लगवाई, कुल बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर पूछा जाएगा। साथ ही आधार नंबर, वोटर ID, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं इसकी जानकारी भी ली जाएगी।
देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी
जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा और लोगों को खुद अपनी जानकारी देने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। जनगणना की कानूनी प्रक्रिया सेंसस एक्ट, 1948 और सेंसस रूल्स, 1990 के तहत होगी।
केंद्र के मुताबिक, लोगों की दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, RTI के तहत नहीं दिया जा सकता और किसी कोर्ट में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनगणना पहले 2021 में होने वाली थी। इसे कोरोना महामारी के कारण टाल दिया गया था।
जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। जनगणना पूरे देश में केंद्र के समन्वय से होगी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें इसके क्रियान्वयन में मदद करेंगी।