विदेश
ईरान को भी नहीं पाकिस्तान पर भरोसा ! इस्लामाबाद भेजे नकली विमान, असली प्रतिनिधिमंडल की छुपाई पहचान
इस्लामाबाद/तेहरान, एजेंसी। इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पहले एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान को अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता थी, जिसके चलते उसने असाधारण कदम उठाए। बताया जा रहा है कि ईरान को पाकिस्तान में संभावित हवाई हमले या सुरक्षा खतरे का डर था। इसी वजह से उसने इस्लामाबाद जाने के लिए कई “डमी” विमान भेजे। इन विमानों का उद्देश्य असली प्रतिनिधिमंडल की पहचान छिपाना और संभावित खतरे को भ्रमित करना था।सूत्रों के मुताबिक, केवल एक विमान में असली ईरानी प्रतिनिधिमंडल सवार था, जबकि बाकी विमान सुरक्षा रणनीति का हिस्सा थे। इस कदम को एक “डिकॉय ऑपरेशन” के रूप में देखा जा रहा है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर हाई-रिस्क स्थितियों में किया जाता है।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोहम्मद बगेर गालिबफ कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी इस महत्वपूर्ण वार्ता में शामिल हैं।यह पूरी घटना ऐसे समय सामने आई है जब पाकिस्तान खुद को इस शांति वार्ता का मेजबान और मध्यस्थ बता रहा है। लेकिन इस तरह की खबरों से उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जे डी वेंस इस वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनेर भी मौजूद हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दिखाता है कि ईरान इस वार्ता को लेकर कितना सतर्क और गंभीर है। साथ ही यह भी संकेत देता है कि क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।

देश
अमीर-गरीब देशों के बीच खाई बढ़ी, United Nations रिपोर्ट में खुलासा
नई दिल्ली,एजेंसी। अमीर-गरीब देशों के बीच बढ़ती खाई को कम करने के लिए वैश्विक वित्तीय संस्थानों में बड़े सुधार समेत जिन ऐतिहासिक फैसलों पर पिछले साल सहमति बनी थी, उनके पूरा नहीं होने से जहां समृद्ध राष्ट्र और मजबूत होते जा रहे हैं, वहीं गरीब देश विकास की दौड़ में पीछे छूटते जा रहे हैं। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में दी गई है।

स्पेन के सेविले में पिछले साल जून में अपनाए गए खाके का आकलन करती यह रिपोर्ट अगले हफ्ते वाशिंगटन में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की अहम बैठकों से ठीक पहले जारी की गई है। पिछले साल जून में अपनाई गई इस रूपरेखा का उद्देश्य अमीर-गरीब देशों के बीच की खाई को पाटना और 2030 तक संयुक्त राष्ट्र के विकास लक्ष्यों को हासिल करना है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि वैश्विक विकास को गति देने की पूरी तैयारी थी लेकिन ईरान युद्ध के कारण अब विश्व अर्थव्यवस्था के भविष्य पर अनिश्चितता के गहरे बादल छा गए हैं।
वहीं, संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक और सामाजिक मामलों के अवर महासचिव ली जुनहुआ ने चेताया कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव विकासशील देशों की चुनौतियों को और गंभीर बना रहे हैं, जिससे उनके लिए वित्तीय संसाधन जुटाना पहले से कहीं अधिक कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए यह समय बेहद जोखिमभरा बनता जा रहा है, क्योंकि भू-राजनीतिक हित अब तेजी से आर्थिक संबंधों और वित्तीय नीतियों की दिशा तय करने लगे हैं।”
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि बढ़ती व्यापारिक बाधाएं और एक के बाद एक आ रही जलवायु संबंधी आपदाएं भी इस बढ़ती खाई को और चौड़ा कर रही हैं। पिछले वर्ष सेविले में आयोजित सम्मेलन में अमेरिका को छोड़कर कई देशों के नेताओं ने सर्वसम्मति से ‘सेविले प्रतिबद्धता’ को अपनाया था, जिसका उद्देश्य विकास के लिए हर साल मौजूद चार हजार अरब डॉलर की वित्तीय कमी को पाटना था। ‘सेविले प्रतिबद्धता’ के क्रियान्वयन का आकलन करती संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती वित्तीय खाई को पाटने के लिए यह “सबसे बड़ी उम्मीद” के रूप में सामने आती है।
ली जुनहुआ ने कहा कि 2025 में 25 देशों ने गरीब राष्ट्रों के लिए अपनी विकास सहायता में कटौती कर दी, जिसके परिणामस्वरूप 2024 की तुलना में कुल मिलाकर 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी 59 प्रतिशत की गिरावट अमेरिका की ओर से देखी गई। ली ने यह भी कहा कि प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर 2026 में इसमें और 5.8 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है, जो वैश्विक सहयोग के सामने नई चुनौतियों की ओर संकेत करती है।

बिज़नस
Online Shopping का लगा झटका! शख्स ने 34,000 की खरीदी जैकेट, 21,000 भरा टैक्स, जानें अब कैसे वापस मिलेंगे पैसे?
वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एलेक्स नाम के एक ग्राहक ने करीब रू.34,000 की जैकेट खरीदी, लेकिन डिलीवरी के समय उस पर लगभग रू.21,000 का अतिरिक्त टैक्स लगा दिया गया। आईए जानते है क्या है मामला?
दरअसल, अक्सर Online Shopping करते समय हम Discount देखकर खुश हो जाते हैं, लेकिन कभी-कभी ‘Extra Charge’ जेब पर भारी पड़ जाता है। ऐसा ही कुछ अमेरिका के मैसाचुसेट्स में रहने वाले एलेक्स ग्रोसोमेनाइड्स के साथ हुआ, जिन्होंने एक जैकेट मंगवाई तो उन्हें उसकी कीमत से कहीं ज्यादा टैक्स भरना पड़ा। लेकिन अब एक अदालती फैसले ने करोड़ों लोगों की उम्मीदें जगा दी हैं।

क्या था पूरा विवाद?
एलेक्स ने पिछले साल फ्रांस की एक कंपनी से ऑनलाइन जैकेट ऑर्डर की थी। जब जैकेट अमेरिका पहुंची, तो उन्हें 248.04 डॉलर (करीब 21,000 रुपये) का अतिरिक्त टैक्स देना पड़ा। असल में वह जैकेट म्यांमार में बनी थी, और उस समय अमेरिका ने म्यांमार से आने वाले सामान पर 40% टैरिफ लगा रखा था।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
इस मामले को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट और इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट में लंबी लड़ाई चली। कोर्ट ने अंततः राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा म्यांमार जैसे देशों पर लगाए गए इन भारी टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया। कोर्ट का मानना है कि ये टैक्स नियम विरुद्ध वसूले गए थे, इसलिए अब यह पैसा वापस किया जाना चाहिए।
इतिहास का सबसे बड़ा रिफंड
कितनी रकम वापस होगी: अमेरिकी सरकार को करीब 160 बिलियन डॉलर (लगभग 13 लाख करोड़ रुपये) रिफंड करने का आदेश दिया गया है।
किसे मिलेगा फायदा: इसका सीधा लाभ लगभग 3,30,000 इम्पोर्टर्स (आयातकों) को मिलेगा। रिफंड सिस्टम इसी महीने शुरू होने की उम्मीद है। कस्टम अधिकारियों को 14 अप्रैल तक कोर्ट में प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करनी है।
आम ग्राहकों के लिए क्या है चुनौती?
भले ही कोर्ट ने रिफंड का आदेश दे दिया है, लेकिन एलेक्स जैसे आम ग्राहकों के लिए राह इतनी आसान नहीं है। दरअसल, सरकार यह पैसा सीधे ग्राहकों को नहीं, बल्कि DHL जैसी शिपिंग कंपनियों और इम्पोर्टर्स को लौटाएगी। अब सवाल यह है कि क्या ये कंपनियां ईमानदारी से वह पैसा आम ग्राहकों को वापस करेंगी या खुद रख लेंगी? इसी को लेकर कई ग्राहकों ने अब सामूहिक मुकदमे (Group Lawsuit) भी शुरू कर दिए हैं।

विदेश
सीजफायर के बीच नेतन्याहू का ऐलानः समझौता करें या युद्ध, इजराइल हर हाल में पूरा करेगा लक्ष्य
यरूशलम, एजेंसी। मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इज़राइल अपने सभी सैन्य और रणनीतिक लक्ष्यों को हर हाल में पूरा करेगा। चाहे वह समझौते के जरिए हो या फिर दोबारा युद्ध शुरू करके। नेतन्याहू ने देश के लोगों की हिम्मत और सेना की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि इस संघर्ष में इज़राइल ने बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब पहले से कहीं ज्यादा कमजोर हो गया है, जबकि इज़राइल पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में है।

उन्होंने उन सैनिकों और नागरिकों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी जान गंवाई। साथ ही, घायल लोगों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। इस बयान के बीच जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इज़राइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है कि उसने बेरूत में हिज़्बुल्लाह के एक बड़े नेता के करीबी सहयोगी अली यूसुफ हर्शी को मार गिराया है। इसके अलावा, दक्षिणी लेबनान में हथियारों के ठिकानों और सप्लाई रूट्स को भी निशाना बनाया गया है।
इज़राइल का कहना है कि लेबनान में उसकी कार्रवाई जारी रहेगी, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर में लेबनान शामिल नहीं है। इस बात को अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई वादा नहीं किया गया था। इस बीच, इज़राइल की कार्रवाई से लेबनान में हालात और खराब हो गए हैं। लगातार हमलों के कारण वहां भारी जनहानि और तबाही की खबरें सामने आ रही हैं।
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