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नीतिगत दरों में कटौती का सबसे अधिक लाभ ग्राहकों को विदेशी बैंकों ने दिया: RBI बुलेटिन

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत दर में कटौती का सबसे अधिक लाभ ग्राहकों को विदेशी बैंकों ने दिया है। मौजूदा ब्याज दर कटौती चक्र के दौरान विदेशी बैंकों ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों की तुलना में ऋण और जमा, दोनों पर ब्याज दरों में अधिक कटौती की है। आरबीआई के बुधवार को जारी मासिक बुलेटिन में यह कहा गया। बुलेटिन के अनुसार, फरवरी, 2025 से मई, 2026 के बीच मौद्रिक नीति में नरमी के दौरान अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने रेपो दर से जुड़ी बाह्य मानक आधारित ब्याज दर (ईबीएलआर) और कोष की सीमांत लागत आधारित ब्याज दर (एमसीएलआर) में कमी की। 

नई ऋण दरों में इस कटौती का सबसे अधिक लाभ बुनियादी ढांचा और अन्य बाह्य मानक आधारित ब्याज दर से जुड़े क्षेत्रों में देखने को मिला। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी बैंकों ने रुपए में लिए गए नए कर्ज पर भारित औसत ब्याज दर में 1.24 प्रतिशत की कटौती की। इसके मुकाबले निजी बैंकों ने 1.08 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 0.66 प्रतिशत अंक की कमी की। रुपए में लिए गए बकाया ऋणों पर भी ब्याज कम करने में विदेशी बैंक सबसे आगे रहे। उन्होंने ब्याज दरों में 1.20 प्रतिशत की कटौती की, जबकि निजी बैंकों ने 0.98 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 0.81 प्रतिशत अंक की कमी की। जमा दरों के मामले में भी विदेशी बैंकों ने सबसे अधिक कटौती की। 

नए घरेलू सावधि जमा पर भारित औसत ब्याज दर में विदेशी बैंकों ने 0.91 प्रतिशत की कमी की, जबकि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने क्रमशः 0.74 प्रतिशत और 0.73 प्रतिशत की कटौती की। इसी तरह, मौजूदा जमा पर विदेशी बैंकों ने ब्याज दरों में 0.90 प्रतिशत की कमी की। यह निजी बैंकों की 0.46 प्रतिशत और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 0.53 प्रतिशत अंक की कटौती से काफी अधिक है। आरबीआई ने पिछले साल फरवरी से अबतक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत अंक की कमी की है। केंद्रीय बैंक ने पिछले साल फरवरी, अप्रैल और दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठकों में 0.25-0.25 प्रतिशत अंक तथा जून की बैठक में 0.50 प्रतिशत अंक की कटौती की थी। हालांकि, अगस्त, अक्टूबर और फरवरी, 2026 की मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो दर को यथावत रखा गया था।

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सरकार बोली-कॉकरोच पार्टी को 4 बार बातचीत के लिए बुलाया:CJP ने कहा- बात करनी है तो सरकार जंतर-मंतर आए, कल देशभर में प्रदर्शन का ऐलान

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नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने गुरुवार को कहा कि वह कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के साथ किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 24 घंटे में CJP को जेपी नड्डा के घर या ऑफिस पर बातचीत के लिए 4 बार ऑफर भेजा जा चुका है।

हालांकि, CJP ने कहा है कि सरकार को बात करनी है तो जंतर-मंतर आए या फिर किसी न्यूट्रल जगह पर चर्चा करे। हम किसी के घर या ऑफिस नहीं जाएंगे।

इधर, कॉकरोच जनता पार्टी ने अब 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है। 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

प्रदर्शन में 28 जून से शामिल हुए सोनम वांगचुक के अनशन का आज 26वां दिन हैं। वांगचुक फिलहाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच संसद मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच संसद मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं।

प्रदर्शनकारियों के लिए सुबह की चाय का इंतजाम किया गया, लोग लगातार खाने-पीने का सामान भेज रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों के लिए सुबह की चाय का इंतजाम किया गया, लोग लगातार खाने-पीने का सामान भेज रहे हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान फैले कचरे को जमा किया जा रहा है। वॉलेन्टियर इन्हें गारबेज बैग में भरकर भेज रहे हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान फैले कचरे को जमा किया जा रहा है। वॉलेन्टियर इन्हें गारबेज बैग में भरकर भेज रहे हैं।

CJP के प्रदर्शन पर सरकार का रुख बदला: पहले सख्ती, अब बातचीत

करीब एक महीने में कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। शुरुआती सख्ती के बाद अब सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। सरकार का रुख कैसे बदला, इसे 5 पॉइंट्स में समझिए-

आंदोलन देश भर में फैला

सोनम वांगचुक के अनशन, छात्रों की लगातार मौजूदगी और कई राज्यों से मिले समर्थन ने प्रदर्शन को देशभर में फैला दिया है।

जन आंदोलन में तब्दील हो रहा

शुरुआती दिनों में सरकार ने बैरिकेडिंग, हिरासत और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाईं। बाद में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने CJP का समर्थन किया। अब यह जन आंदोलन में बदलता दिख रहा है।

संसद मार्च के बाद सरकार का रुख बदला

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारी और 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद सरकार बातचीत के लिए तैयार हुई।

कांग्रेस के अचानक प्रदर्शन से सरकार घिरी

21 जुलाई को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया। केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह को बातचीत करने के लिए भेजा। विपक्ष अब सदन में पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा है। संसद चल नहीं पा रही है।

CJP ने नड्डा के घर पर बातचीत से इनकार क्यों किया

22 और 23 जुलाई को सरकार ने CJP को कई बार औपचारिक बातचीत का प्रस्ताव भेजा, लेकिन बैठक की जगह पर सहमति नहीं बन सकी। पहली बैठक 20 जुलाई को नड्डा के घर हुई थी। यह बेनतीजा रही थी।

  • यदि बातचीत फिर नड्डा के घर या ऑफिस में होती, तो प्रदर्शन पर BJP के साथ राजनीतिक बातचीत का ठप्पा लग सकता था।
  • CJP प्रदर्शन को लगातार छात्र आंदोलन बता रहा है। ऐसे में वह किसी राजनीतिक दल के दफ्तर में जाकर अपनी निष्पक्ष छवि कमजोर नहीं करना चाहता।
  • जंतर-मंतर या किसी न्यूट्रल वेन्यू पर मिलने से यह संदेश जाएगा कि बातचीत बराबरी की स्थिति में हो रही है।
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UN में भारत ने पाकिस्तान क सुनाई खरी-खरी, कहा-आतंकवाद के साथ नहीं चल सकती सिंधु संधि

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न्यूयॉर्क/नई दिल्ली, एजेंसी। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की टिप्पणियों को कड़े शब्दों में खारिज करते हुए कहा कि जब ”सीमा पार आतंकवाद” का इस्तेमाल ”सरकारी नीति के हथियार” के रूप में किया जाता है तो सिंधु जल संधि के तहत सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। भारत ने यह भी दोहराया कि जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा ”हमेशा था, है और रहेगा।” संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ”प्राकृतिक संसाधनों का प्रशासन: शांति, सुरक्षा और समृद्धि की नींव” विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय खुली बहस में ये टिप्पणियां कीं। पर्वतनेनी ने पाकिस्तान को जवाब देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने ”झूठे विमर्श” को आगे बढ़ाने के लिए चर्चा का ”दुरुपयोग” किया, जिसके कारण भारत को जवाब देना पड़ा।

पर्वतनेनी ने कहा, ”सिंधु जल संधि को लेकर हमारा रुख स्पष्ट और एकसमान है। जब सीमा पार आतंकवाद का सरकारी नीति के हथियार के तौर पर नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाता है तो आपसी विश्वास और सद्भाव के आधार पर सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती।” भारत ने यह तीखी प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद के आरोपों के बाद दी। अहमद ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के भारत के फैसले को ”अवैध” बताते हुए उस पर ”पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल करने” का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि इस कदम से पाकिस्तान के 24 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका खतरे में पड़ गई है।

वर्ष 1960 में हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुआ समझौता है। यह संधि सिंधु नदी घाटी की छह नदियों के जल बंटवारे को नियंत्रित करती है। इसके तहत पूर्वी नदियां भारत और पश्चिमी नदियां मुख्य रूप से पाकिस्तान को आवंटित की गई हैं। भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था। भारत ने कहा था कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने की स्थिति में समझौते के तहत सहयोग नहीं किया जा सकता। पर्वतनेनी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खुली बहस के दौरान भारत के जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करते हुए कहा, ”जहां तक केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का सवाल है, वह भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हमेशा था, है और रहेगा। यह संवैधानिक और कानूनी वास्तविकता है, जिसे पाकिस्तान जानबूझकर नजरअंदाज करता है।”

उन्होंने कहा, ”जम्मू कश्मीर से जुड़ा एकमात्र लंबित मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारत के संप्रभु क्षेत्र पर खुलेआम हमला और अवैध कब्जा है। भारत पर उंगली उठाने के बजाय अपने देश को व्यवस्थित करके पाकिस्तान अपना और अपने लोगों का अधिक भला कर सकता है।” पर्वतनेनी ने अपने संबोधन में कहा कि ”प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन और उनकी तस्करी कुछ परिस्थितियों में सशस्त्र समूहों के वित्तपोषण और संघर्ष को लंबा खींचने में योगदान दे सकती है।” उन्होंने जोर दिया कि प्राकृतिक संसाधन मुख्य रूप से संप्रभु देशों के विकास और समृद्धि के साधन के रूप में काम आने चाहिए।  

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कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए ग्रीनलाइन, डाबर इंडिया ने की साझेदारी

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नई दिल्ली, एजेंसी। एस्सार समूह की इकाई ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस लि. ने बृहस्पतिवार को दैनिक उपयोग का सामान बनाने वाली डाबर इंडिया लि. के साथ साझेदारी की घोषणा की। इस साझेदारी के तहत देश में एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) तथा इलेक्ट्रिक ईंधन से संचालित भारी वाणिज्यिक ट्रकों के माध्यम से हरित लॉजिस्टिक सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनी ग्रीनलाइन मोबिलिटी, डाबर इंडिया के सड़क परिवहन परिचालन को कम उत्सर्जन वाले एलएनजी चालित ट्रक के माध्यम से अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाने में मदद करेगी। 

ग्रीनलाइन ने बयान में कहा कि इस साझेदारी के तहत वह डाबर इंडिया की लॉजिस्टिक गतिविधियों में एलएनजी से चलने वाले भारी वाणिज्यिक वाहनों को तैनात करेगी। इससे लंबी दूरी के माल परिवहन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलेगी। ग्रीनलाइन मोबिलिटी सॉल्यूशंस के उपाध्यक्ष (बिक्री) चार्ल्स डेवलिन डी’कोस्टा ने कहा, ”डाबर इंडिया जैसी प्रतिष्ठित उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनी के साथ साझेदारी कर हमें खुशी है। यह देखना उत्साहजनक है कि अधिक से अधिक भारतीय कंपनियां कम उत्सर्जन वाले लॉजिस्टिक समाधान को अपनी कारोबारी रणनीति का हिस्सा बना रही हैं।” 

डाबर इंडिया के वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला निदेशक सम्राट सहगल ने कहा कि कंपनी की सतत विकास रणनीति में आपूर्ति श्रृंखला के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा, ”ग्रीनलाइन के साथ साझेदारी से हमें अपनी लॉजिस्टिक गतिविधियों में कम उत्सर्जन वाले परिवहन समाधान को शामिल करने में मदद मिलेगी, जबकि दक्षता और विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।” ग्रीनलाइन वर्तमान में भारत के प्रमुख माल परिवहन मार्गों पर 1,000 से अधिक एलएनजी और बिजलीचालित भारी वाणिज्यिक वाहनों का संचालन कर रही है। ये वाहन इस्पात, सीमेंट, खनन, रोजमर्रा के सामान और रसायन समेत विभिन्न क्षेत्रों के लिए सेवाएं दे रहे हैं। 

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