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कोरबा

गर्लफ्रेंड के सीने पर 51 बार पेचकस गोदकर मार-डाला:दूसरे से बात करने पर भड़का, गुजरात से फ्लाइट लेकर कोरबा पहुंचा बॉयफ्रेंड, किए ताबड़तोड़ वार ​​​​​​​

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कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में गर्लफ्रेंड पर पेचकस से 51 बार वार कर हत्या के आरोपी बॉयफ्रेंड को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। हत्या की वजह गर्लफ्रेंड का किसी दूसरे युवक से बात करना था। आरोपी बस कंडक्टर गुजरात से कोरबा फ्लाइट में पहुंचा था। मामला सीएसईबी चौकी क्षेत्र का है।

जानकारी के मुताबिक, घटना 24 दिसंबर 2022 की है। दरअसल, गर्लफ्रेंड (20) किसी दूसरी युवक से बातचीत करने लगी थी। जब इसकी भनक बॉयफ्रेंड को लगी तो उसने उसे मना किया। बावजूद वह उससे बातचीत करती रही। जिसके बाद बस कंडक्टर ने हत्या की साजिश रची और मौका पाते ही गर्लफ्रेंड को मार डाला।

बिस्तर पर खून से लथपथ युवती की लाश मिली थी।

बिस्तर पर खून से लथपथ युवती की लाश मिली थी।

वारदात की सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी।

वारदात की सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी।

डॉग स्क्वायड की टीम से आसपास के इलाकों की जांच कराई गई थी।

डॉग स्क्वायड की टीम से आसपास के इलाकों की जांच कराई गई थी।

जानिए कैसे शुरू हुई लव स्टोरी?

दरअसल, सहबान खान (30) गुजरात का रहने वाला है। वह जयपुर में किराया के मकान में रहता था और चिश्ती बस सर्विस का कंडक्टर था। जो कोरबा से जयपुर चलती थी। युवती मदनपुर क्षेत्र में पढ़ाई कर रही थी और बस में आना-जाना करती थी। कंडक्टर और युवती में दोस्ती हुई। जो कि धीरे-धीरे प्यार में बदल गया।

दूसरे युवक के चक्कर में फंसी युवती

बॉयफ्रेंड ने शादी मन बना लिया। इस बीच गर्लफ्रेंड किसी दूसरे युवक के चक्कर में फंस गई और उससे बातचीत करने लगी। जब बॉयफ्रेंड को इसकी जानकारी लगी तो उसने उसे मना किया। यहां तक वह युवती के मां को कॉल कर धमकी देने लगा कि अपनी बेटी को बात करने के लिए मना कर दो नहीं तो दोनों को मार दूंगा।

ये आरोपी बॉयफ्रेंड की तस्वीर है, जो कंडक्टर का काम करता था।

ये आरोपी बॉयफ्रेंड की तस्वीर है, जो कंडक्टर का काम करता था।

फ्लाइट से कोरबा पहुंचा बॉयफ्रेंड

24 दिसंबर को वह अहमदाबाद (गुजरात) से फ्लाइट का सफर तय कर कोरबा पहुंचा और होटल सलीम में रुका हुआ। मौका देखकर वह गर्लफ्रेंड के घर पहुंचा। जहां दोनों में जमकर विवाद हुआ। जिसके बाद उसने उसका रेप किया। फिर पेचकस से सीने पर 51 बार वार किया। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद वह फ्लाइट से गुजरात भाग निकला।

भाई ने दी पुलिस को सूचना

वारदात के वक्त घर पर कोई नहीं थी। जब युवती का भाई घर पहुंचा तो उसने बहन को खून से लथपथ देखा और पुलिस की सूचना दी। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो खून से सना सूजा, जूते, शर्ट, इयरफोन, कंडोम पैकेट सहित कई सबूत मिले। मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर सेल की मदद की और डेढ़ महीने बाद आरोपी बॉयफ्रेंड को गुजरात से पकड़कर कोरबा लाया गया।

कोरबा जिला न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

कोरबा जिला न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

इन धाराओं के तहत सुनाई सजा

पूछताछ में उसने जुर्म स्वीकार किया। इस पूरे मामले में जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश जयदीप गर्ग की अदालत ने आरोपी को बीएनएस की धारा 376, 302 और SC/ST एक्ट की धारा 3(2)(W) के तहत दोषी पाया। कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास और 75 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड न देने पर उसे अतिरिक्त 18 माह कारावास भुगतना होगा।

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कोरबा

सेवा संकल्प अभियान के तहत दीपका एवं छुरी कला में विशेष शिविर कल

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कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत आम नागरिकों तक विभिन्न शासकीय सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नगरीय निकाय एवं जनपद पंचायत क्षेत्रों में 01 अक्टूबर से विशेष शिविर आयोजित किए जा रहें।
इसी क्रम में 02 अक्टूबर को नगर पालिका परिषद दीपका कार्यालय एवं नगर पंचायत छुरीकला अंतर्गत बस स्टैंड छुरी के समीप शिविर आयोजित किए जाएंगे। आम नागरिकों से अपील की गई है कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर शिविर का लाभ उठायें।

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कोरबा

कीचड़ भरे रास्ते से मिली राहत, डोंगानाला के बिरहोर परिवारों तक पहुँची पक्की सड़क

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पीएम जनमन के अंतर्गत लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से अटल चौक से जंगल पारा तक बना 2.38 किलोमीटर मार्ग
कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। विकासखंड पाली के दूरस्थ ग्राम डोंगानाला के जंगल पारा में रहने वाले बिरहोर परिवारों के लिए बारिश का मौसम बड़ी परेशानी लेकर आता था। अटल चौक से बस्ती तक जाने वाला कच्चा रास्ता कीचड़ से भर जाता था। पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता था और बच्चे स्कूल जाने से कतराते थे। अब प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के अंतर्गत बनी पक्की सड़क ने उनकी रोजमर्रा की यात्रा आसान कर दी है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत अटल चौक से जंगल पारा तक लगभग 2.38 किलोमीटर सड़क का निर्माण लगभग 167.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है। मार्ग में सीसी सड़क के साथ डामर सड़क भी बनाई गई है। इससे बस्ती में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर समुदाय के लगभग 40 परिवारों को आवागमन में सुविधा मिल रही है।
बस्ती के सुनहर सिंह बिरहोर बताते हैं कि पक्की सड़क बनने से अब आने-जाने में आसानी होती है। गीता बाई के अनुसार उन्हें रास्ते में पहले जैसी परेशानी नहीं होती और बच्चे भी आसानी से स्कूल आ-जा सकते हैं। गाँव के किसान पुनो राम पटेल पुराने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि बारिश में रास्ते पर घुटनों तक कीचड़ हो जाता था। अब पक्की सड़क बनने से उस परेशानी से राहत मिली है।
जंगल पारा के परिवारों के लिए यह सड़क स्कूल और आवश्यक सेवाओं तक पहुँचने का सुगम रास्ता बन गई है। बारिश के दिनों में जिस मार्ग से गुजरना कठिन था, उसी पर अब ग्रामीण अधिक आसानी से आ-जा रहे हैं।

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कोरबा

धान की एक फसल से आगे बढ़कर वर्ष में दो से तीन फसलें ले रहे गुरुचरण मरार

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उद्यानिकी विभाग की सहायता से अपनाई ड्रिप सिंचाई, प्लास्टिक मल्चिंग और उन्नत खेती
कोरबा, 01 अक्टूबर 2026। पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नगौई बछेरा निवासी किसान गुरुचरण मरार पहले परंपरागत तरीके से धान की खेती करते थे। वर्ष में एक ही फसल लेने के कारण खेती से होने वाली आय सीमित थी। सिंचाई का साधन नहीं था और कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर व अन्य मशीनें किराये पर लानी पड़ती थीं। ऐसे में छह सदस्यीय परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन होता था।
गांव के भ्रमण के दौरान उद्यानिकी विभाग के कर्मचारियों ने श्री मरार को विभागीय योजनाओं और आधुनिक खेती की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने शासकीय उद्यान रोपणी, नगौई में आवेदन किया। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत उन्हें ड्रिप सिंचाई प्रणाली, प्लास्टिक मल्चिंग तथा ग्राफ्टेड बैंगन रोपण के लिए कुल 46 हजार रुपये का विभागीय अनुदान मिला।
इन संसाधनों और विभागीय मार्गदर्शन की मदद से श्री मरार ने खेती के तरीके में बदलाव किया। अब वे वर्ष में दो से तीन फसलें लेते हैं और वर्तमान में भिंडी की खेती से भी आय अर्जित कर रहे हैं। विभाग को दी गई जानकारी के अनुसार, उनकी अनुमानित वार्षिक आय पहले लगभग 45 हजार रुपये थी, जो अब लगभग ढाई से तीन लाख रुपये तक पहुंच गई है। बढ़ी हुई आय से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरी है। वे गांव के अन्य किसानों को भी खेती से जुड़ी जानकारी देते हैं।
श्री मरार कहते हैं कि उद्यानिकी विभाग से योजनाओं की जानकारी मिलने पर उनका आधुनिक खेती के प्रति उत्साह बढ़ा। वे आगे भी विभागीय मार्गदर्शन लेकर खेती करना चाहते हैं और मिली सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हैं।

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