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बांग्लादेश में हिंदू नेता के चुनाव लड़ने पर रोक

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शेख हसीना की सीट पर RSS से जुड़े गोबिंद का नामांकन खारिज, बोले- BNP की साजिश

ढाका,एजेंसी। बांग्लादेश में एक हिंदू नेता को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। बांग्लादेश में 12 फरवरी को चुनाव होने वाले हैं। गोबिंद चंद्र प्रमाणिक ने संसदीय चुनावों के लिए गोपालगंज-3 सीट से पर्चा दाखिल किया था, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने शनिवार को उनका नामांकन वापस कर दिया।

पूर्व PM शेख हसीना गोपालगंज-3 से सांसद थीं। यहां 50% से ज्यादा हिंदू वोटर्स हैं। गोबिंद निर्दलीय चुनाव लड़ना चाहते थे। वह पेशे से वकील हैं और बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) नामक संगठन के महासचिव भी हैं। BJHM कुल 23 संगठनों का हिंदुत्ववादी गठबंधन है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ा है।

पेशे से वकील गोबिंद चंद्र प्रमाणिक बांग्लादेश के प्रमुख हिंदुवादी नेताओं में से एक माने जाते हैं। फोटो- फाइल

पेशे से वकील गोबिंद चंद्र प्रमाणिक बांग्लादेश के प्रमुख हिंदुवादी नेताओं में से एक माने जाते हैं। फोटो- फाइल

खालिदा जिया की पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोबिंद ने कहा कि बांग्लादेश में एक प्रावधान है जिसके हिसाब से एक निर्दलीय उम्मीदवार को अपने इलाके के 1% वोटरों के साइन लाने होते हैं।

वह नियम का पालन करते हुए 1% वोटरों के हस्ताक्षर लेकर आए थे, लेकिन बाद में उन वोटरों ने रिटर्निंग ऑफिसर से आकर कहा कि उनके साइन लिए ही नहीं गए थे।

गोबिंद का आरोप है कि खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं ने वोटरों पर ऐसा करने का दबाव बनाया। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी हस्ताक्षरों को अमान्य घोषित करते हुए नामांकन रद्द कर दिया।

प्रमाणिक की सीट पर 51% वोटर हिंदू

गोबिंद ने दावा किया है कि वो निर्दलीय चुनाव इसलिए लड़ना चाहते थे, क्योंकि उन्हें अपनी जीत पर भरोसा था। उनका कहना है कि गोपालगंज के 3 लाख मतदाताओं में से 51% हिंदू हैं।

BNP ने उन्हें रास्ते से हटाया क्योंकि यहां उसके जीतने की संभावना बिल्कुल भी नहीं थी। उन्होंने कहा, मैं चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करूंगा। अगर मुझे न्याय नहीं मिला तो मैं कोर्ट भी जाऊंगा।

बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, गोबिंद ने 28 दिसंबर को अपना चुनावी नामांकन दाखिल किया था। तब गोबिंद ने कहा था कि न तो उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध है और न ही वे कभी राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

बांग्लादेश में 24 नवंबर को हुए सिख समाज के एक कार्यक्रम में गोबिंद चंद्र प्रमाणिक।

बांग्लादेश में 24 नवंबर को हुए सिख समाज के एक कार्यक्रम में गोबिंद चंद्र प्रमाणिक।

बांग्लादेश में 350+ वेदिक स्कूल चलाता है BJHM

बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत (BJHM) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन से जुड़ा है और बांग्लादेश में हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करता है। यह संगठन बांग्लादेश के अलग-अलग इलाकों में 350 से ज्यादा वैदिक स्कूल चलाता है, जहां बच्चों को भगवद गीता समेत कई हिंदू ग्रंथों की शिक्षा दी जाती है।

गोबिंद चंद्र प्रमाणिक BJHM के महासचिव हैं। गोबिंद ने वैदिक विद्यालयों के बारे में 2023 में कहा था कि ‘हमारा लक्ष्य बचपन से ही बच्चों में हिंदू गौरव की भावना पैदा करना है ताकि हमारे धर्म को बढ़ावा मिल सके और उसकी रक्षा की जा सके। हिंदू धर्म बांग्लादेश में इस समय अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है।’

बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले में वैदिक स्कूल। BJHM देशभर में ऐसे 350 से ज्यादा स्कूल चलाता है।

बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले में वैदिक स्कूल। BJHM देशभर में ऐसे 350 से ज्यादा स्कूल चलाता है।

एक और हिंदू प्रत्याशी का नामांकन वापस

गोबिंद चंद्र प्रामाणिक की तरह एक और हिंदू उम्मीदवार, दुलाल बिसवास का भी नामांकन वापस कर दिया गया है। दुलाल को एक रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी गोनो फोरम ने टिकट दिया था। इसलिए उन पर 1% मतदाताओं के हस्ताक्षर का नियम लागू नहीं हुआ, लेकिन दस्तावेजों की कमी का हवाला देकर उनका नामांकन वापस कर दिया गया। अब वे नए सिरे से दस्तावेज जमा करने वाले हैं।

गोपालगंज 2 सीट से एक और निर्दलीय हिंदू उम्मीदवार उत्पल बिस्वास चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट से कभी हसीना के चचेरे भाई शेख सलीम चुनाव लड़ते थे। बिस्वास का कहना है कि ‘मैं किसानों और वंचितों के बीच काम करता हूं। मुझे उम्मीद है कि वे मुझे वोट देंगे।’

हसीना की सरकार गिरने के 18 महीने बाद चुनाव

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार 5 अगस्त 2024 को छात्रों के आंदोलन के बाद गिर गई, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया और भारत भाग आईं। 8 अगस्त को नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ।

अंतरिम सरकार ने बांग्लादेश में 6 महीने के भीतर चुनाव कराने का वादा किया। हालांकि बाद में समय सीमा बढ़ा दी गई और अब आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को होने वाले हैं।

खालिदा जिया की पार्टी सबसे ताकतवर

शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी BNP को बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी कहा जा रहा है। 30 दिसंबर को खालिदा जिया की लंबी बीमारी के चलते मृत्यु हो गई।

अब BNP की कमान खालिदा के बेटे तारिक रहमान के हाथ में है। तारिक 17 साल के निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को बांग्लादेश लौटे हैं। ढाका एयरपोर्ट पर उनका स्वागत BNP के करीब 1 लाख कार्यकर्ताओं ने किया।

रहमान ने 29 दिसंबर को ढाका-17 और बोगुरा-6 सीट से नामांकन दाखिल किया। बोगुरा-6 रहमान की मां खालिदा जिया की पारंपरिक सीट रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तारिक रहमान BNP के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं।

बांग्लादेश में 15 दिन के भीतर 4 हिंदुओं की हत्या

भारत विरोधी नेता उस्मान हादी की 18 दिसंबर को हुई मौत के बाद बांग्लादेश में इस्लामिक संगठनों ने हिंदू अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना शुरू किया। बांग्लादेश में 15 दिन के भीतर 4 हिंदुओं की हत्या की जा चुकी है। 18 दिसंबर को ईशनिंदा के झूठे आरोप में हुई दीपू चंद्र की हत्या के बाद 24 दिसंबर को भीड़ ने 29 साल अमृत मंडल उर्फ सम्राट की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी।

इसके बाद 29 दिसंबर को मैमनसिंह जिले में 42 साल के कपड़ा फैक्ट्री कर्मचारी बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भीड़ ने इस दौरान कई हिंदुओं के घरों में आगजनी भी की।

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ईरान होर्मुज में जहाजों से टोल वसूलेगा, संसद की मंजूरी:रियाल और पसंद की करेंसी में पेमेंट लेगा, बदले में सुरक्षा और इंश्योरेंस देगा

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तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। ईरान की संसद ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल यानी टैक्स या फीस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जिन देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति होगी, उनसे समुद्री सेवाओं के बदले शुल्क लिया जाएगा।

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता हसन काशकवी के मुताबिक, फीस के बदले समुद्री सेवाएं, सुरक्षा और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।

इसके अलावा पर्यावरण संबंधी सेवाएं और खास परिस्थितियों में ईंधन भी दिया जाएगा। भुगतान ईरानी रियाल या ईरान की पसंद की किसी दूसरी करेंसी में किया जा सकेगा।

अमेरिका बोला- ईरान के खिलाफ आर्थिक जंग शुरू

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन अब ईरान के खिलाफ आर्थिक जंग के आखिरी दौर में पहुंच गया है। बेसेंट के मुताबिक अमेरिका का मकसद ईरान की कमाई के बड़े रास्ते बंद करना है।

बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अपनी सभी सरकारी एजेंसियों और अधिकारों का इस्तेमाल करेगा। इससे पहले ट्रम्प ने इसे किसी विरोधी देश के खिलाफ सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई बताया था और दूसरे देशों से ईरान को अलग-थलग करने में साथ देने की अपील की थी।

ईरान की खाड़ी देशों को चेतावनी- अमेरिका का साथ दिया तो दुश्मन मानेंगे

ईरान ने अमेरिका की आर्थिक कार्रवाई में साथ देने वाले खाड़ी देशों को चेतावनी दी है। ईरान के नए राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने कहा कि जो देश ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने में अमेरिका का साथ देगा, उसे दुश्मन माना जाएगा।

ईरानी अधिकारी का दावा- मक्का एग्रीमेंट में शामिल होने का न्योता मिला

ईरान के एक सीनियर अधिकारी ने दावा किया है कि तेहरान को मक्का एग्रीमेंट में शामिल होने का न्योता मिला है। ईरानी संसद से जुड़े मेहदी रहीमी ने शनिवार को ईरानी न्यूज चैनल अल मयादीन से बातचीत में यह जानकारी दी।

रहीमी के मुताबिक, ईरान को इस समझौते में शामिल होने का न्योता मिला है और मामले पर अभी विचार किया जा रहा है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय या समझौते के संस्थापक देशों सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने 7 अगस्त को मक्का में आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत किसी एक देश पर हमला होने को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

होर्मुज को अमेरिका का इलाका बता चुके हैं ट्रम्प

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प होर्मुज स्ट्रेट को ‘न्यू यूएस टेरिटरी’ यानी नया अमेरिकी इलाका बता चुके हैं। 18 अगस्त को उन्होंने पहली बार होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही थी।

इसके बाद उन्होंने रविवार को दोबारा ऐसी तस्वीर शेयर की, जिसमें होर्मुज को अमेरिकी इलाके के तौर पर दिखाया गया।

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी इलाका बताया।

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिकी इलाका बताया।

जंग के बाद दो रास्तों में बंटा होर्मुज

जंग शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। उनका रास्ता बंदरगाह, जहाज के समझौते और सुरक्षा को देखकर तय होता था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां दो अलग रास्तों की बात होने लगी।

ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है।

ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई कॉमर्शियल जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।

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ट्रम्प बोले- होर्मुज पर जल्द अमेरिका का फुल कंट्रोल होगा:ईरान की नेवी और एयरफोर्स खत्म, उसके पास सिर्फ कुछ मिसाइल और ड्रोन बचे

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वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और मिलिट्री लीडरशिप को बहुत नुकसान हुआ है।

ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई करना जरूरी था।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर भविष्य में ईरान की ओर से फिर ऐसा खतरा पैदा हुआ, तो अमेरिका फिर से कड़े कदम उठाएगा।

ट्रम्प बोले- ईरान से बातचीत मुश्किल

ट्रम्प ने कहा कि ईरान के कई बड़े नेता अब नहीं रहे। इसके चलते नए समझौते पर बातचीत मुश्किल हो गई है। फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि ईरान में फैसले कौन ले रहा है।

ट्रम्प ने एक बार फिर से दावा किया कि ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में महंगाई बहुत ज्यादा है। सेना को वेतन देने में भी दिक्कतें आ रही हैं।

अमेरिका ने ईरान की मदद करने वालों को चेतावनी दी

अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों को चेतावनी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बैसेंट ने कहा कि जो लोग ईरान के साथ कारोबार जारी रखेंगे, उनके खिलाफ अमेरिका कड़े आर्थिक कदम उठा सकता है।

दरअसल, अमेरिका ने गुरुवार को ईरान पर नई आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। इसका मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाकर उसे परमाणु कार्यक्रम खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए मजबूर करना है।

अमेरिका पहले ही ईरान के तेल, बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर कई प्रतिबंध लगा चुका है। अब वह ईरान से जुड़े दूसरे देशों और कंपनियों पर भी दबाव बढ़ाने की तैयारी में है।

चीन बोला- ईरान पर प्रतिबंधों से मामला नहीं सुलझेगा

चीन ने अमेरिका की उस कोशिश का विरोध किया है, जिसमें दूसरे देशों से ईरान के साथ आर्थिक रिश्ते खत्म करने को कहा जा रहा है। चीन ने कहा कि ईरान पर प्रतिबंध लगाने और दबाव बनाने से मिडिल ईस्ट का संघर्ष खत्म नहीं होगा।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने शुक्रवार को कहा कि इस समस्या का हल बातचीत और कूटनीति से ही निकाला जा सकता है। उन्होंने सभी संबंधित देशों से जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने की अपील की।

चीन का यह बयान अमेरिका की उस अपील के एक दिन बाद आया है, जिसमें उसने अपने सहयोगी देशों और चीन से ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में मदद करने को कहा था।

ईरान बोला- अमेरिकी प्रतिबंधों से नहीं झुकेंगे

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका जब बातचीत नहीं करना चाहता, तो प्रतिबंध लगाने लगता है। ईरान कई साल से ऐसे प्रतिबंध झेलता आया है और इससे उसकी नीति नहीं बदली है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान डायरेक्टर अली वाएज के मुताबिक, अमेरिका अब प्रतिबंधों के साथ सैन्य दबाव भी बढ़ा रहा है। लेकिन इससे ईरान के पीछे हटने के बजाय उसका रुख और सख्त हो सकता है।

उनके मुताबिक, ईरान के लिए अमेरिकी प्रतिबंध झेलना मुश्किल जरूर है, लेकिन अमेरिका की शर्तें मानना उसे इससे भी ज्यादा खतरनाक लगता है। इसलिए सिर्फ दबाव बढ़ाने से ईरान के झुकने की संभावना कम है।

होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल क्यों चाहते हैं ट्रम्प?

दुनिया के तेल का अहम रास्ता- दुनिया की करीब 20% तेल और LNG सप्लाई होर्मुज से गुजरती है। इस पर कंट्रोल का मतलब ऊर्जा सप्लाई पर पकड़।

ईरान का दबाव कम करना- ईरान होर्मुज को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल करता रहा है। यहां उसका असर कम होने से उसकी ताकत घटेगी।

तेल की कीमतें कंट्रोल में रखना- होर्मुज में तनाव बढ़ते ही तेल महंगा हो जाता है। अमेरिका चाहता है कि रास्ता खुला रहे और सप्लाई जारी रहे।

खाड़ी देशों की सुरक्षा- सऊदी अरब, UAE, कुवैत और कतर जैसे अमेरिकी सहयोगियों का तेल इसी रास्ते से जाता है। इसकी सुरक्षा अमेरिका के लिए अहम है।

ईरान की सौदेबाजी की ताकत कम करना- होर्मुज पर ईरान का प्रभाव घटने से किसी समझौते में उसकी सौदेबाजी की ताकत भी कमजोर हो सकती है।

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ट्रम्प बोले-आर्थिक हमले से ईरान को दुनिया से काट देंगे:जो देश ईरान का साथ देंगे, वे नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें

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वॉशिंगटन/ तेहरान, एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया है। अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा।

ट्रम्प ने चेतावनी दी कि ईरान की मदद करने वाले देशों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई होगी। इसमें बैंक, कंपनियां, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं।

उन्होंने तेल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई करने और कैश ट्रांसफर, करेंसी एक्सचेंज, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और फर्जी कंपनियों के जरिए ईरान तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद को रोकने की बात कही।

ट्रम्प का दावा- ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान

ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को बड़ा नुकसान हुआ है। उसके कई सैन्य कारखाने तबाह हो गए हैं। ईरान की मुद्रा की हालत भी बहुत खराब है और देश आर्थिक संकट में है।

ट्रम्प ने अमेरिका की नई आर्थिक कार्रवाई को ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताया। आसान भाषा में इसका मतलब है कि अमेरिका ईरान पर बहुत बड़ा आर्थिक दबाव बनाने जा रहा है।

उन्होंने दूसरे देशों से भी ईरान की मदद बंद करने और अमेरिका के साथ इस अभियान में शामिल होने की अपील की।

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर ईरान के खिलाफ सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई करने का ऐलान किया।

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर ईरान के खिलाफ सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई करने का ऐलान किया।

ईरान बोला- ट्रम्प से ज्यादा टैक्सी ड्राइवर पर भरोसा है

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सीनियर अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा नकदी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की बातों से ज्यादा भरोसा किसी टैक्सी ड्राइवर की बात पर है।

नकदी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प की सोच बचकानी है और वे दूर की नहीं सोच पाते हैं। उनके बदलते बयानों से अमेरिकी की ग्लोबल इमेज पर असर पड़ा है।

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रम्प की नई आर्थिक कार्रवाई को नाकाम बताया है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के लगाए प्रतिबंध ईरान पर असर नहीं डाल पाएंगे।

अमेरिकी प्रतिबंधों का ईरान पर क्या असर पड़ेगा?

अमेरिका की नई कार्रवाई का सबसे बड़ा असर ईरान के तेल कारोबार और पैसे के लेनदेन पर पड़ सकता है। ईरान की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल बेचने से आता है।

अगर दूसरे देश, बैंक और कंपनियां अमेरिकी कार्रवाई के डर से ईरान के साथ कारोबार कम करते हैं, तो ईरान के लिए तेल बेचना और विदेशों से पैसा लेना मुश्किल हो सकता है।

तेल की तस्करी और फर्जी कंपनियों पर कार्रवाई होने से ईरान के लिए छिपकर कारोबार करना और अमेरिकी कार्रवाई से बचना भी मुश्किल होगा। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान को दुनिया से आर्थिक तौर पर अलग करने की कोशिश करेगा।

ईरान का तेल तस्करी नेटवर्क कैसे काम करता है

तेल बेचकर कमाई, पहचान छिपाकर सप्लाई

  • ईरान तेल बेचता है, लेकिन सीधे अपने नाम से कारोबार करने पर अमेरिकी एजेंसियां इसे आसानी से ट्रैक कर सकती हैं।
  • इसलिए बिचौलियों, दूसरी कंपनियों और अलग-अलग शिपिंग नेटवर्क के जरिए तेल खरीदारों तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है।

तेल के बाद पैसे की बारी

  • तेल बेचने के बाद कमाई को ईरान तक पहुंचाना सबसे अहम हिस्सा होता है।
  • इसके लिए बैंकिंग चैनल, करेंसी एक्सचेंज, बिचौलियों और कैश ट्रांसफर जैसे रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अमेरिका पूरी चेन तोड़ना चाहता है

  • अमेरिका तेल के साथ उन जहाजों, कंपनियों और वित्तीय नेटवर्क पर भी कार्रवाई करना चाहता है, जो इस कारोबार में मदद करते हैं।
  • इसका मकसद ईरान के लिए तेल बेचना और उससे कमाई मुश्किल करना है।

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