छत्तीसगढ़
गृह विभाग ने कमिश्नरी का बनाया नया खाका:कमेटी ने की थी भुवनेश्वर कमिश्नरी की सिफारिश, जहां 22 अधिकार, चुना भोपाल, जहां सिर्फ 10 पॉवर
रायपुर,एजेंसी। रायपुर में 23 जनवरी से लागू होने जा रहे पुलिस कमिश्नरी सिस्टम का दायरा सीमित करने के साथ ही कमिश्नर के अधिकारों में भी कटौती की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित भोपाल के सिस्टम को ही रायपुर में लागू किया जा रहा है, जबकि कमेटी ने भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम की अनुशंसा की है।
क्योंकि भुवनेश्वर के पास 22 से ज्यादा व मजिस्ट्रियल अधिकार है, जो पहले जिला प्रशासन के पास थे, जबकि भोपाल पुलिस के पास 10-12 अधिकार ही दिए गए हैं। वहां पूरा अधिकार अभी भी जिला प्रशासन के पास है। इसी व्यवस्था को रायपुर में लागू करने की तैयारी है।
दरअसल, रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू करने के लिए शासन ने पिछले वर्ष एडीजी प्रदीप गुप्ता के नेतृत्व में 8 सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने मुंबई, दिल्ली, नागपुर, कानपुर, वाराणसी, जयपुर, भुवनेश्वर और भोपाल के पुलिस कमिश्नरी सिस्टम का अध्ययन किया।
रायपुर की भौगोलिक स्थिति, आबादी, पुलिस बल और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर एक व्यवहारिक, कम खर्चीला और प्रभावी मॉडल तैयार कर रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी गई। इस रिपोर्ट में भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम को रायपुर के लिए सबसे उपयुक्त बताया गया है और उसी की अनुशंसा की गई थी।
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पुलिस कमिश्नर को 22 मजिस्ट्रियल अधिकार देने का प्रस्ताव रखा था, जो वर्तमान में प्रशासन के पास हैं। इनमें छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, सार्वजनिक उपद्रव रोकने के लिए धारा 133 और गिरफ्तारी से संबंधित धारा 145 जैसे महत्वपूर्ण अधिकार शामिल थे।
विस्तार से समझें… भुवनेश्वर और भोपाल पुलिस कमिश्नरी में क्या है अंतर
भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नरी सिस्टम
ओडिशा सरकार ने भुवनेश्वर पुलिस कमिश्नर को 22 से अधिक अधिकार दिए हैं, जो पहले जिला प्रशासन के पास थे। कमिश्नर गन का लाइसेंस जारी करते हैं। आबकारी से जुड़े लाइसेंस जारी करने का अधिकार भी उनके पास है। जिला बदर, एनएसए की कार्रवाई समेत कई बड़े अधिकार दिए गए हैं। भुवनेश्वर के पूरे जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू है।
भोपाल पुलिस कमिश्नरी सिस्टम
मध्यप्रदेश सरकार ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को सीमित अधिकार दिए हैं। यहां अधिकांश अधिकार आज भी जिला प्रशासन के पास ही हैं। गन लाइसेंस और आबकारी लाइसेंस जारी करने का अधिकार पुलिस कमिश्नर को नहीं है। केवल धारा 144 लागू करना, धारा 151, 107, 116 की कार्रवाई और जिलाबदर जैसे करीब 10 अधिकार ही दिए गए हैं।
नए कानून में जो अधिकार, वही देने की तैयारी
सरकार पुलिस कमिश्नर को 10 अधिकार देने जा रही है। ये वही अधिकार हैं, जो नए कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 15 में दिए गए हैं। प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के जोर देने के बावजूद छत्तीसगढ़ में इन्हें पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया है। नया कानून पुलिस को मजिस्ट्रेट के अधिकार देता है। इन्हीं अधिकारों को पुलिस कमिश्नर को देने की तैयारी की जा रही है।
इनके अधिकारों में कटौती नहीं…
पुलिस के कुछ अधिकार कमिश्नर को मिलते हैं, पर प्रशासनिक शक्तियां बरकरार रहती हैं। कलेक्टर और एसडीएम विकल्प बने रहते हैं।
कमेटी ने ये 22 अधिकार देने की अनुशंसा की थी
- छत्तीसगढ़ पुलिस अधिनियम 2007
- कैदी अधिनियम 1900
- विष अधिनियम 1919
- अनैतिक व्यापार (रोकथाम) एक्ट 1956
- मोटर वाहन अधिनियम 1988
- गैरकानूनी गतिविधियां एक्ट 1967
- छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1990
- आधिकारिक गोपनीयता एक्ट 1923
- पशु अतिक्रमण अधिनियम 1871
- राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980
- पुलिस (असंतोष भड़काने) एक्ट 1922
- पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960
- विदेशी अधिनियम 1946
- भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885
- राजद्रोह सभाओं की रोकथाम एक्ट 1911
- कैदियों की पहचान अधिनियम 1920
- पेट्रोलियम अधिनियम 1934
- सिनेमैटोग्राफ अधिनियम 1952
- शस्त्र अधिनियम 1959
- विस्फोटक अधिनियम 1884
- छत्तीसगढ़ उत्पाद शुल्क अधिनियम 1915
- कालाबाजारी निवारण एवं आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का रखरखाव अधिनियम 1980
पर ये अधिकार देने की तैयारी
वेश्यावृत्ति के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकेगी।
गिरफ्तार व्यक्ति को बॉन्ड ओवर करना।
शांति-व्यवस्था भंग होने पर कर्फ्यू लगाने का अधिकार।
अपराधी और गुंडों को जिलाबदर करने का अधिकार।
शस्त्र अधिनियम के तहत लाइसेंस जारी कर सकेंगे।
प्रतिबंधात्मक धारा 144 भी लागू कर सकेंगे।
बार-बार एक्सीडेंट करने पर लाइसेंस निरस्त।
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980
कोरबा
बालको की उन्नति परियोजना ने बदली ज़िंदगी, गंगोत्री से मशरूम दीदी बनने का सफर
बालकोनगर। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) अपनी सामुदायिक विकास परियोजना ‘उन्नति’ के अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इन्हीं में से एक प्रेरक कहानी लालघाट क्षेत्र की निवासी गंगोत्री विश्वकर्मा की है, जिन्होंने रोज़ की मजदूरी से निकलकर मशरूम उत्पादन के ज़रिये आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई। बालको के सामुदायिक विकास सहयोग और प्रशिक्षण से आज ‘मशरूम दीदी’ न सिर्फ अपने परिवार को संबल दे रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की राह खोल रही हैं।
गंगोत्री जी ने बताया कि कुछ साल पहले तक उनकी ज़िंदगी रोज़ की मजदूरी के सहारे चलती थी। सुबह काम मिले तो चूल्हा जले, नहीं मिले तो बच्चों के चेहरे देखकर मन भीतर ही भीतर टूट जाता था। भविष्य की चिंता हर रात नींद छीन लेती थी। लेकिन वर्ष 2019 उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मोड़ बनकर आया। इसी साल उन्नति परियोजना के माध्यम से जय मां हर्षिता स्व सहायता समूह से जुड़कर, मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण लिया। उस दिन मैंने महसूस किया कि शायद मेरी मेहनत भी किसी दिन अपनी पहचान बना सकती है।
बालको के सहयोग से मिले प्रशिक्षण के बाद मैंने उसी वर्ष मशरूम की खेती शुरू की। शुरुआत में 16 बैग लगाए थे। मन में बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन जब फसल आई तो सिर्फ 2 बैग में ही मशरूम उगे। वही दो बैग मेरे लिए हार नहीं, बल्कि नई शुरुआत की उम्मीद बन गए। मैंने अपनी गलतियों को समझा, तकनीक पर ध्यान दिया और हिम्मत जुटाकर दोबारा कोशिश की। धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ता गया और आज मसरूम इकाई में लगभग 200 बैग तक मशरूम उत्पादन हो रहा है।
इसकी खेती में 20 से 25 दिनों के भीतर पैदावार की शुरुवात होती है, सप्ताह के अंतराल पर तीन बार फसल मिलती है। लगातार उत्पादन बना रहे, इसलिए मैं रोज़ाना लगभग दो नए बैग तैयार करती हूँ। अब मुझे इंतज़ार नहीं करना पड़ता, हर दिन मेरे सपनों की फसल तैयार होती है। मशरूम उत्पादन की विधि में पैरा-कुट्टी को भिगोकर उतना ही सुखाया जाता है जिससे हल्की नमी बरकरार रहे। पोषण के लिए बायो-स्टिमुलेंट पाउडर और रोग से बचाव के लिए फॉर्मूलिन पाउडर मिलाया जाता है। इसी वैज्ञानिक तरीके से तैयार किए गए बैग में अच्छी और सुरक्षित पैदावार होती है।
मैं अपनी पूरी उपज खुद बाज़ार में बेचती हूँ। शुरुआत के कठिन दौर में मुझे बालको सीएसआर से बहुत सहयोग मिला। उसी सहयोग से मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ा। आज मैं खुद बीज मंगवाती हूँ और अपने समूह की दूसरी महिलाओं को भी बीज उपलब्ध कराती हूँ। आज मैं जय मां हर्षिता स्व सहायता समूह की सचिव के रूप में कार्य कर रही हूँ। लोग मुझे ‘मशरूम दीदी’ के नाम से जानते हैं यह मेरे लिए गर्व की बात है।
कोविड काल मेरे परिवार के लिए सबसे कठिन समय था। मेरे पति की आमदनी लगभग बंद हो गई थी। कई बार लगा कि फिर से मजदूरी की ज़िंदगी में लौटना पड़ेगा। लेकिन उसी समय मशरूम की खेती हमारे लिए सहारा बन गई। इसी फसल से घर के खर्च के साथ ही हमने थोड़ी बचत भी शुरू की। मशरूम की आमदनी और पति के सहयोग से हम एक ऑटो खरीद सके। आज मेरे पति वही ऑटो चलाते हैं। समय मिलने पर वो मेरे काम में हाथ भी बंटाते हैं। अब घर में सिर्फ संघर्ष की बातें नहीं होतीं, बल्कि आगे बढ़ने के सपने होते हैं।
आज मशरूम उत्पादन से मुझे औसतन प्रति माह लगभग 15 हजार का लाभ हो जाता है। सबसे बड़ा सुकून इस बात का है कि अब मैं अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर निश्चिंत हूँ। मेरा सपना है कि आने वाले समय में मैं 200 बैग से बढ़ाकर 5 हजार बैग तक मशरूम उत्पादन कर सकूँ, ताकि सिर्फ मेरा परिवार ही नहीं, बल्कि मेरे जैसी और भी महिलाएँ अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो लगता है, मजदूरी से शुरू हुई मेरी ज़िंदगी ने आत्मनिर्भरता तक का सफर तय कर लिया है। सही प्रशिक्षण, संस्थागत सहयोग और मजबूत हौसलों से एक साधारण महिला भी अपने भविष्य की दिशा बदल सकती है।
छत्तीसगढ़
भूपेश बोले-अमेरिका सबसे ज्यादा डरा हुआ देश:भिलाई में कहा-एपस्टीन फाइल से ध्यान भटकाने तनाव बढ़ाया,ट्रम्प भी बच नहीं पाएंगे और न ही हमारा वाला
दुर्ग-भिलाई,एजेंसी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भिलाई में आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में वैश्विक राजनीति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज अगर दुनिया में सबसे ज्यादा डरा हुआ कोई देश है तो वह अमेरिका है, उसे सबसे ज्यादा चिंता डॉलर की है।
इसी कारण वह दुनिया के ऑयल पर कब्जा करना चाहता है। जहां-जहां तेल है, वहां किसी न किसी तरह दखल दे रहा है। दुनिया में अमेरिका जहां भी लड़ाई लड़ रहा है, चाहे वह वेनेजुएला हो, ईरान हो या भारत को धमकाने की बात हो। यह सब डॉलर को बचाने के लिए हो रहा है।
भूपेश बघेल ने कहा कि ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एपस्टीन फाइल से ध्यान भटकाने के लिए विश्व में तनाव बढ़ाया जा रहा है।
बघेल ने यह भी कहा कि कुछ लोग खुद को बचाने के लिए दुनिया में अशांति फैला रहे हैं। उन्होंने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि डॉनल्ड ट्रम्प भी इससे बच नहीं पाएंगे और प्रधानमंत्री की ओर इशारा करते हुए कहा कि हमारा वाला भी बिल्कुल नहीं बच पाएगा।
होली मिलन कार्यक्रम से जुड़ी ये तस्वीरें-

भिलाई में आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में भूपेश बघेल शामिल हुए।

पूर्व सीएम ने होलिका दहन से पहले पूजा-अर्चना की।

होली मिलन में पूर्व गृहमंत्री समेत के कांग्रेसी शामिल हुए।
भूपेश बघेल ने क्या-क्या कहा ?
दरअसल, मंगलवार को भिलाई के अजंता पैलेस में होली मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने इजराइल-इरान जंग को लेकर टिप्पणी की। इसके अलावा प्रधानमंत्री के इजराइल दौरे पर भी टिप्पणी की।
भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा कि जो लोग 56 इंच सीना और विश्वगुरु बनने की बात करते थे, उनके मुंह से आज एक शब्द भी नहीं निकल रहा है। लोग इंतजार कर रहे हैं कि वे कुछ तो बोलें, लेकिन अभी पूरी तरह मौन हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें मौनमोहन सिंह कहा जाता था, लेकिन जब वे बोलते थे तो पूरी दुनिया उन्हें सुनती थी। अभी प्रधानमंत्री की आवाज ही नहीं सुनाई दे रही है।
भूपेश बघेल ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का नाम लेते हुए कहा कि उनकी स्थिति भी ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से ब्लैक मार्केटिंग शुरू होने की आशंका है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
जब-जब पीएम मीडिल ईस्ट गए तब-तब गड़बड़ी हुई
भूपेश बघेल ने कहा कि जब भी नरेंद्र मोदी मिडिल ईस्ट की यात्रा पर जाते हैं, तो कुछ न कुछ गड़बड़ हो जाती है। पिछली बार जब प्रधानमंत्री संयुक्त अरब अमीरात गए थे और फाइटर जेट का स्वागत कर रहे थे, उसी समय देश में पहलगाम की घटना हुई थी।
पूर्व सीएम ने हाल ही में प्रधानमंत्री के इजराइल दौरे के दौरान गले मिलने की तस्वीरें आईं और इसके बाद युद्ध जैसी स्थिति बन गई। उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि इजराइल को ‘फादरलैंड’ और भारत को ‘मदरलैंड’ बताया गया।
जिस पर भूपेश बघेल ने व्यंग्य करते हुए कहा कि इजराइल उनका फादरलैंड हो सकता है, हमारा नहीं। उन्होंने कहा कि हमारी पहचान भारत माता है।

ढोल नगाड़ों के साथ मनाया होली का पर्व।
घर-घर सिंदूर भिजवाने के बाद से बिगड़ा अलाइमेंट
भूपेश बघेल ने नरेंद्र मोदी पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहलगाम में आतंकी हमले के बाद शुरू किए गए कथित ऑपरेशन सिंदूर के तहत घर-घर सिंदूर भेजे जाने की चर्चा हुई थी।
सिंदूर आमतौर पर धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में बेटियों या महिलाओं को व्यक्तिगत रूप से दिया जाता है, लेकिन इसे सभी घरों में भेजे जाने पर विरोध हुआ और बाद में यह पहल बंद करनी पड़ी। उसी समय से उनका ‘अलाइनमेंट’ गड़बड़ा गया और वह गड़बड़ी आज तक जारी है।
ताम्रध्वज साहू की ली चुटकी, असहज हो गए पूर्व गृहमंत्री
भूपेश बघेल ईरान-इजराइल युद्ध के कारण डीजल-पेट्रोल संकट पर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने समुद्री रास्ता बंद कर दिया और जहाजों की आवाजाही रुक गई, तो देश में डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतें बढ़ने की आशंका है।
इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि जिनके पास 4-5 पेट्रोल पंप हैं, उन्होंने अभी से 2-3 पेट्रोल पंप बंद कर दिए हैं। पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने चुटकी लेते हुए पूछा कि क्या आपने भी ऐसा किया है? इसके बाद ताम्रध्वज साहू कुछ असहज नजर आए।
छत्तीसगढ़
इजराइल-ईरान जंग…छत्तीसगढ़ के 3 दोस्त दुबई में फंसे:फ्लाइट कैंसिल होने के कारण वापसी में देरी, तीनों घूमने गए थे, भारत सरकार से मांगी मदद
बिलासपुर,एजेंसी। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब दुबई तक महसूस किया जा रहा है। इस बीच छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के 3 युवक दुबई में फंसे हुए हैं। तीनों दोस्त घूमने के लिए दुबई गए थे, लेकिन सुरक्षा को लेकर स्थिति साफ नहीं होने के कारण उनकी वापसी में देरी हो रही है।
जानकारी के मुताबिक, युवकों का नाम शिवम मिश्रा, आकाश अग्रवाल और आयुष अग्रवाल है, जो कोटा के रहने वाले हैं। लगातार फ्लाइट रद्द होने से तीनों दुबई में फंसे हुए हैं। हालांकि, तीनों युवक होटल में सुरक्षित हैं। वहीं, परिजनों ने भारत सरकार से मदद मांगी है।
तीनों युवक वीडियो कॉल के जरिए परिजनों से संपर्क बनाए हुए हैं। बताया गया कि पहले उनकी टिकट 28 फरवरी की थी, लेकिन उड़ान निरस्त हो गई। इसके बाद तीन मार्च की नई टिकट मिली, वह भी कैंसल हो गई। अब उन्हें 5 मार्च की फ्लाइट का टिकट मिला है।
शिमव मिश्रा ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से फोन पर बात की। जिस पर उन्होंने मदद का आश्वासन दिया। इधर, इस मामले में कलेक्टर संजय अग्रवाल का कहना है कि अब तक प्रशासनिक स्तर पर जानकारी नहीं मिली है।

शिवम मिश्रा ने बुर्ज खलीफा के सामने से वहां के हालातों की जानकारी दी।

शिवम मिश्रा ने वीडियो जारी कर भारत सरकार से मदद मांगी थी।

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने युवकों से फोन पर बात की। उन्होंने मदद का आश्वासन दिया।
बार-बार कैंसिल हुई फ्लाइट
दरअसल, शिवम मिश्रा अपने दोस्त आकाश अग्रवाल और आयुष अग्रवाल के साथ घूमने के लिए दुबई पहुंचा था। उसी दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वहां की उड़ानों पर पड़ने लगा। इसके कारण उनकी वापसी में दिक्कत आ गई।
तीनों की पहली वापसी टिकट 28 फरवरी की थी, जो कैंसिल हो गई। इसके बाद 3 मार्च की टिकट मिली, वह भी कैंसिल हो गई। अब 5 मार्च की फ्लाइट का टिकट मिला है। उन्हें उसी से घर लौटने की उम्मीद है।
दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है। कई उड़ानें री-शेड्यूल हो रही हैं, जिससे लोगों को ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। शिवम ने बताया कि फ्लाइट रद होने के कारण होटल में रुकने का समय बढ़ गया है और खर्च भी बढ़ रहा है। फिर भी तीनों एयरलाइन और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन कर रहे हैं।
शिवम बोला-बुर्ज खलीफा पर कोई हमला नहीं
शिवम ने वीडियो कॉल के जरिए परिवार को बताया कि वे पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनसे साफ किया कि बुर्ज खलीफा पर किसी तरह का कोई हमला नहीं हुआ है। दुबई में हालात सामान्य हैं। शहर में रोजमर्रा की गतिविधियां जारी हैं और पर्यटक स्थल भी खुले हैं। घबराने की जरूरत नहीं है।
परिवार की सरकार से अपील
परिजनों ने भारत सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की अपील की है। उनका कहना है कि दुबई में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। जरूरत पड़ने पर विशेष उड़ानों की व्यवस्था की जाए।
परिवार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के संपर्क में है और मामले को केंद्र सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
पैकेज टूर के तहत दुबई घूमने गए थे
शिवम के चचेरे भाई विनय मिश्रा ने बताया कि चाचा राजेश मिश्रा ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं। चाची कांग्रेस नेत्री हैं। जबकि एक दोस्त के पिता डॉक्टर हैं और दूसरे दोस्त के पिता ट्रांसपोर्टर हैं। उन्हें दुबई गए 8 दिन हो गए हैं। 5 वें दिन उन्हें भारत लौटना था। पैकेज टूर के तहत दुबई घूमने गए थे।
कलेक्टर बोले- आधिकारिक जानकारी नहीं
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल उनके पास इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं आई है। विदेश में फंसे नागरिकों से जुड़ी जानकारी आमतौर पर सीधे विदेश मंत्रालय को भेजी जाती है, वहीं से आगे की कार्रवाई होती है।
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