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बिज़नस

अगर युद्ध में बुर्ज खलीफा को हुआ नुकसान तो क्या मिलेंगे 150 करोड़? जानें दुबई की सबसे ऊंची इमारत के इंश्योरेंस का सच

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दुबाई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद गहराते युद्ध के बादलों ने अब दुनिया की सबसे ऊंची इमारत, बुर्ज खलीफा की सुरक्षा और उसके अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। saudi arabia और Dubai के आसपास बढ़ते हमलों के बीच सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक यह चर्चा आम हो गई है कि अगर इस वैश्विक पहचान को आंच आती है, तो क्या होगा? क्या रेगिस्तान के इस गौरव को हुए नुकसान की भरपाई संभव है? आइए समझते हैं Burj Khalifa के उस सुरक्षा चक्र को, जो ईंट-पत्थर से नहीं बल्कि अरबों रुपये के कागजी दांव यानी ‘Insurance’ से बना है।

बुर्ज खलीफा का अरबों का रक्षा कवच
Dubai की इस ऐतिहासिक इमारत की सुरक्षा केवल इसकी मजबूती में नहीं, बल्कि इसके भारी-भरकम बीमा कवर में भी छिपी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुर्ज खलीफा के डेवलपर ‘Emaar Properties’ ने इसका बीमा Oman Insurance Company से कराया हुआ है। यह बीमा राशि कोई छोटी-मोटी रकम नहीं है, बल्कि लगभग 150 करोड़ रुपये (करीब 1.5 बिलियन) तक जाती है। हालांकि, यह राशि सुनने में विशाल लगती है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी मेगा-स्ट्रक्चर परियोजना के लिए बीमा की शर्तें और कवरेज सामान्य इमारतों की तुलना में कोसों अलग और बेहद जटिल होती हैं।

हमले की सूरत में क्या मिलेगा हर्जाना?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या युद्ध या मिसाइल हमले की स्थिति में बीमा कंपनी हर्जाना देगी? बुर्ज खलीफा जैसी इमारतों के लिए कराए गए इंश्योरेंस में आमतौर पर प्रॉपर्टी डैमेज, कंस्ट्रक्शन रिस्क और कई बार ‘राजनीतिक हिंसा’ जैसे विशेष क्लॉज शामिल होते हैं। यदि इमारत को किसी हमले में नुकसान पहुंचता है, तो सैद्धांतिक रूप से Insurance Company
को भुगतान करना होगा। लेकिन यहाँ एक पेंच है—बीमा कंपनियां अक्सर आतंकवादी हमलों, दंगों या ‘फुल-स्केल वॉर’ (पूर्ण युद्ध) के लिए अलग-अलग सीमाएं तय करती हैं। कई बार युद्ध से होने वाले नुकसान को स्टैंडर्ड पॉलिसी से बाहर रखा जाता है या इसके लिए बहुत ऊंचा प्रीमियम चुकाना पड़ता है।

क्या पूरी रकम मिलना संभव है?
बीमा जगत का नियम है कि क्लेम हमेशा ‘वास्तविक नुकसान’ के आधार पर मिलता है। इसका मतलब यह है कि अगर बुर्ज खलीफा के किसी एक हिस्से या सेक्शन को नुकसान पहुंचता है, तो भुगतान भी उसी अनुपात में होगा, न कि पूरी बीमा राशि एक साथ मिल जाएगी। इसके अलावा, बुर्ज खलीफा के भीतर स्थित Hotels, corporate offices और निजी अपार्टमेंट्स का बीमा उनके व्यक्तिगत मालिकों द्वारा अलग से कराया जाता है। ऐसे में किसी भी बड़े हादसे की स्थिति में क्लेम का मिलना पॉलिसी की बारीकियों, जांच रिपोर्ट और ‘exclusion clause’ (किन परिस्थितियों में पैसा नहीं मिलेगा) पर निर्भर करेगा।

राजनीतिक हिंसा और युद्ध के बीच का बारीक अंतर
बीमा विशेषज्ञ बताते हैं कि युद्ध की स्थिति में क्लेम मिलना सबसे कठिन होता है। अगर किसी हमले को आधिकारिक तौर पर ‘युद्ध’ घोषित कर दिया जाए, तो अधिकांश बीमा पॉलिसियां जिम्मेदारी से हाथ खींच लेती हैं, जब तक कि विशेष रूप से ‘वॉर रिस्क कवर’ न लिया गया हो। बुर्ज खलीफा जैसी ग्लोबल आइकन के लिए बीमा कंपनियां जांच के हर सूक्ष्म पहलू को देखती हैं। इसलिए, अगर कभी कोई अनहोनी होती है, तो हर्जाने की लड़ाई उतनी ही लंबी और ऊंची हो सकती है जितनी कि यह इमारत खुद है।

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भारतीय इकोनॉमी RBI के अनुमान से ज्यादा तेजी से बढ़ी:पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8% रही, IT-रियल एस्टेट सेक्टर्स में बढ़त का असर

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नई दिल्ली, एजेंसी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से बढ़ती महंगाई के बावजूद भारत की इकोनॉमी RBI के अनुमान से ज्यादा मजबूत रही। GDP इस साल की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में 7.8% रही। RBI का अनुमान 7% था। एक साल पहले की इसी तिमाही में यह 6.9% की दर से बढ़ी थी।

फाइनेंस, रियल एस्टेट, आईटी और प्रोफेशनल सर्विसेज सेक्टर में 12% से ज्यादा की बढ़त रही। इससे महंगाई का असर GDP ग्रोथ पर नहीं पड़ा। सोमवार को यह आंकड़े केंद्र सरकार के सांख्यिकी विभाग ने जारी किए।

PM मोदी ने कहा- यह देश के लोगों की ताकत का नतीजा

PM मोदी ने X पर पोस्ट शेयर कर लिखा, ‘दुनिया भर के संकटों और तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद, भारत ने इस साल की पहली तिमाही में 7.8% की GDP ग्रोथ हासिल की है।

यह देश के लोगों की ताकत का नतीजा है। मंदी की आशंका जताने वाले फिर पीछे छूट गए और भारत ने एक बार फिर बड़ी कामयाबी हासिल की।’

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खाद्य मानकों में सख्ती के FSSAI के कदमों के समर्थन में नेस्लेः वैश्विक सीईओ

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नई दिल्ली, एजेंसी। दिग्गज एफएमसीजी कंपनी नेस्ले के वैश्विक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) फिलिप नवरातिल ने बुधवार को खाद्य उत्पादों की लेबलिंग के नियमों को कड़ा करने के भारतीय खाद्य नियामक एफएसएसएआई के कदम का समर्थन किया। रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनी के सीईओ नवरातिल ने कहा कि ग्राहकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि वे जिस खाद्य पदार्थ का सेवन कर रहे हैं, उसमें क्या-क्या मिलाया गया है। उन्होंने कहा कि नेस्ले भारत में नियामकीय अनिवार्यता नहीं होने के बावजूद कैलोरी समेत सभी सामग्री की जानकारी देती है और कंपनी पारदर्शिता लाने के कदमों का समर्थन करती है। 

नवरातिल ने एक मीडिया गोलमेज बैठक में कहा, ”हम चाहते हैं कि उपभोक्ता इस बात को लेकर जिज्ञासु हों कि वे क्या खाते और पीते हैं। हम हमेशा पारदर्शिता के पक्ष में रहे हैं।” उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य कंपनियों के दावों और खुलासों की जांच हाल में तेज की है। नियामक ने भ्रामक विज्ञापनों, स्वास्थ्य संबंधी अप्रमाणित दावों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रमुख खाद्य एवं पेय कंपनियों को 150 से अधिक नोटिस जारी किए हैं। इस पर नवरातिल ने कहा कि नेस्ले पैकेट के सामने पोषण संबंधी जानकारी देने के नियमों का भी स्वागत करेगी। 

उन्होंने कहा कि कंपनी चीनी, वसा और सोडियम की मात्रा कम करके अपने उत्पादों के पोषण संबंधी प्रोफाइल में सुधार कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे नियमों से उपभोक्ताओं को बेहतर जानकारी मिलेगी और वे अपने तथा अपने परिवार के लिए बेहतर विकल्प चुन सकेंगे। हालांकि, उन्होंने इस पर जोर दिया कि ऐसे नियम उचित और संतुलित तरीके से तथा वैज्ञानिक आधार पर लागू किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि पोषण संबंधी जानकारी उत्पाद के कुल ग्राम के बजाय एक सामान्य हिस्से के आधार पर देना अधिक उपयुक्त हो सकता है, क्योंकि उपभोक्ता आमतौर पर उत्पाद का एक हिस्सा खाते हैं। सरकार के साथ सहयोग के बारे में पूछे जाने पर नवरातिल ने कहा कि यदि सरकार कंपनियों से सुझाव मांगती है तो नेस्ले अपने अनुभव और अन्य देशों के अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।

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Nifty जाएगा 27000 तक, JP Morgan ने भारतीय शेयर बाजार पर जताया भरोसा

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नई दिल्ली, एजेंसी। जेपी मॉर्गन (JP Morgan) ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक रुख बरकरार रखा है। ग्लोबल बैंक ने निफ्टी के लिए 27,000 का लक्ष्य तय किया है। बैंक के मुताबिक, भारतीय शेयरों में वैल्यू ट्रेड पिछले तीन वर्षों की तुलना में अब बेहतर नजर आ रहा है। घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़े और बड़े शेयरों की अपेक्षाकृत आकर्षक वैल्यूएशन बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

बेहतर रहे पहली तिमाही के नतीजे

जेपी मॉर्गन के इंडिया इक्विटी रिसर्च प्रमुख संजय मूकीम के मुताबिक, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनियों के प्रदर्शन के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे। खासकर लार्ज-कैप शेयरों की वैल्यूएशन में पहले की तुलना में सुधार हुआ है। इससे भारतीय बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा बढ़ती दिखाई दे रही है।

उत्तर एशिया के टेक्नोलॉजी शेयरों में अस्थिरता और भारतीय बड़े शेयरों की बेहतर कीमतों के चलते विदेशी निवेशक भी भारत की ओर लौट रहे हैं। हालांकि, जेपी मॉर्गन को निकट अवधि में विदेशी निवेश में बहुत बड़ी तेजी की उम्मीद नहीं है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बनी बड़ी चुनौती

भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम वैश्विक स्तर पर ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड है। जेपी मॉर्गन का मानना है कि अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड पर आकर्षक यील्ड मिलने से निवेशकों के पास डॉलर आधारित अपेक्षाकृत सुरक्षित परिसंपत्तियों में पैसा लगाने का विकल्प मौजूद है। ऐसे में उभरते बाजारों में बड़ी तेजी सीमित हो सकती है।

IPO और ब्लॉक डील से लिक्विडिटी पर दबाव

भारत में IPO, QIP और ब्लॉक डील की मजबूत पाइपलाइन भी बाजार की लिक्विडिटी को प्रभावित कर रही है। बैंक के अनुसार, फिलहाल नए शेयरों की सप्लाई घरेलू म्यूचुअल फंड में हर महीने आने वाले निवेश से अधिक है। इससे अल्पावधि में बाजार पर दबाव रह सकता है। हालांकि, लंबी अवधि में जेपी मॉर्गन इसे बाजार के विस्तार के लिए सकारात्मक मानता है।

किन सेक्टर पर भरोसा?

सेक्टर के लिहाज से जेपी मॉर्गन वित्तीय कंपनियों, फार्मा और हेल्थकेयर, डिफेंस तथा चुनिंदा पावर और पावर-इक्विपमेंट कंपनियों को लेकर सकारात्मक है। कंजम्प्शन में बैंक की पसंद स्टेपल्स के मुकाबले डिस्क्रेशनरी कंपनियां हैं। वहीं, IT सेक्टर पर बैंक सतर्क है। वैल्यूएशन में सुधार के बावजूद सेक्टर की ग्रोथ को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है।

RBI और विदेशी निवेश पर नजर

जेपी मॉर्गन को फिलहाल RBI से तत्काल ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद नहीं है। बैंक का बेस केस है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर बनाए रख सकता है। लंबी अवधि में बैंक भारत को अगले 3-5 वर्षों के लिए संरचनात्मक रूप से मजबूत ग्रोथ मार्केट मानता है। हालांकि, अगले कुछ तिमाहियों में बड़े FII प्रवाह की उम्मीद सीमित है।

AI से जुड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर को लेकर भी जेपी मॉर्गन का अनुमान सकारात्मक है। बैंक को उम्मीद है कि 2027 में AI पर होने वाला खर्च 2026 के स्तर से भी अधिक हो सकता है, हालांकि इस निवेश से मिलने वाला वास्तविक रिटर्न बाजार के लिए अहम सवाल बना रहेगा।

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