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बंगाल में 5% वोट बढ़े, तो बीजेपी नंबर-1 बनेगी:मुस्लिम एकजुट हुए, तो असम फिसल जाएगा, 5 राज्यों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा

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नई दिल्ली,एजेंसी। अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 5% वोटर खिसके, तो बीजेपी नंबर-1 पार्टी बन सकती है। लेकिन अगर असम के 34% मुस्लिम एकजुट हो गए, तो हिमंता बिस्व सरमा की सरकार का लौटना मुश्किल हो जाएगा।

अगले 30 दिनों में भारत के 4 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। आखिर इन पांचों प्रदेशों में बीजेपी का दांव पर क्या लगा है…

  • 2015 में मध्यप्रदेश के नेता कैलाश विजयवर्गीय को बीजेपी ने महासचिव बनाया और जिम्मेदारी दी पश्चिम बंगाल की। उस वक्त बंगाल में बीजेपी के सिर्फ 2 सांसद थे और विधायक जीरो।
  • 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 42 में से 18 सीटें जीत लीं। 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 38% वोटों के साथ रिकॉर्ड 77 सीटें जीती। TMC को 48% वोटों के साथ 215 सीटें मिलीं। बीजेपी विपक्ष में बैठी।
  • 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी सरकार बनाने के सबसे करीब है। पश्चिम बंगाल में मुकाबला दो पार्टियों के बीच है। अगर बीजेपी ने TMC का 5% वोट भी अपने पाले में कर लिया, तो वह नंबर-1 बन सकती है।
  • 2021 के चुनाव में बीजेपी ने 38 सीटें 5% के मार्जिन से और 75 सीटें 10% के मार्जिन से हारी थीं। ऐसे में बीजेपी इन्हीं सीटों पर टारगेट करेगी।
  • अगर बीजेपी ने TMC के 5% वोट खींच लिए तो 10% के मार्जिन से हारी सीटें बीजेपी जीत सकती है। इस हिसाब से उसकी कुल सीटें 75+77 यानी 152 हो जाएंगी और इसी के साथ नंबर-1 पार्टी बन जाएगी।
  • इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी ममता बनर्जी को चुनौती दे सकती हैं। एंटी-इनकम्बेंसी, बेरोजगारी और स्थानीय असंतोष से ममता की TMC के लिए मुकाबला और कठिन बन सकता है।
  • 2015 में कांग्रेस के पॉपुलर लीडर हिमंता बिस्व सरमा ने बीजेपी जॉइन की। अगले साल हुए असम विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और असम गण परिषद से गठबंधन किया। नतीजे आए तो NDA को 126 में से 86 सीटें मिलीं।
  • बीजेपी ने अकेले 60 सीटें जीतीं। पहली बार नॉर्थ-ईस्ट के किसी राज्य में बीजेपी की सरकार बनी। वरिष्ठता के हिसाब से सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने।
  • बीजेपी ने नॉर्थ-ईस्ट में पैर जमाने और बाहरी पार्टी का टैग हटाने के लिए मई 2016 में रीजनल पार्टियों के साथ नया गठबंधन ‘नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस’ यानी NEDA बनाया। हिमंता इसके संयोजक बने।
  • 2021 में बीजेपी को लगातार दूसरी बार बहुमत मिला। इस बार हिमंता सीएम बने। आज हिमंता नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा हैं और पार्टी आलाकमान के नजदीकी माने जाते हैं।
  • 2026 के चुनाव में बीजेपी हिमंता के चेहरे पर हैट्रिक की तैयारी में है। यहां हार का मतलब होगा- नॉर्थ-ईस्ट में बीजेपी की पकड़ ढीली पड़ना। क्योंकि असम ही नॉर्थ-ईस्ट का प्रवेश द्वार और सबसे बड़ा राज्य है। यहीं बीजेपी सबसे ज्यादा मजबूत है।
  • 2011 की जनगणना के मुताबिक असम में 34% मुस्लिम हैं। अगर मुस्लिमों का वोट कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की AIUDF की पार्टी में बंट गया, तो इससे बीजेपी को फायदा होगा। लेकिन अगर ये वोटर्स एकजुट होकर कांग्रेस के साथ चले गए तो मुकाबला कड़ा हो जाएगा।
  • इसके लिए बीजेपी बांग्लादेश घुसपैठ का मुद्दा उठा रही है। हिमंता ने भी एग्रेसिव हिंदू लीडर की छवि बनाई है।
  • तमिलनाडु की राजनीति दशकों से दो द्रविड़ ध्रुवों- DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ‘हिंदी भाषी’ और ‘उत्तर भारतीय पार्टी’ की छवि के कारण बीजेपी की राह हमेशा कठिन रही।
  • बीजेपी ने 2001 में DMK के साथ चुनाव लड़ा, तो 4 सीटें जीतीं। लेकिन सरकार AIADMK की जे. जयललिता ने बनाई।
  • कुछ साल बाद बीजेपी और AIADMK का गठजोड़ हुआ। इसके चलते 2021 में बीजेपी को फिर से 4 सीटें मिलीं, लेकिन सत्ता DMK के एमके स्टालिन ने संभाली।
  • चुनाव के बाद बीजेपी ने पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। उन्होंने एग्रेसिव स्ट्रैटजी अपनाई। कुछ समय बाद बीजेपी और AIADMK अलग हो गए।
  • वहीं अन्नामलाई ने ‘एन मन, एन मक्कल’ यानी ‘मेरी भूमि, मेरे लोग’ पदयात्रा से हर जिले में बीजेपी का झंडा पहुंचाया। द्रविड़ पार्टियों को भ्रष्टाचार और परिवारवाद के मुद्दे पर घेरा।
  • 2024 का लोकसभा चुनाव बीजेपी ने छोटे क्षेत्रीय दलों से अलायंस किया और 19 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन खाता तक नहीं खुला। अन्नामलाई खुद कोयंबटूर की सीट हार गए।
  • हालांकि बीजेपी को 11.2% वोट मिले, जबकि 2021 के विधानसभा चुनाव में 2.6% वोट मिले थे। 9 सीट पर बीजेपी दूसरे नंबर पर रही। इसने बीजेपी को द्रविड़ पार्टियों के विकल्प के तौर पर पेश किया।
  • 2026 के चुनाव में बीजेपी ने AIADMK और छोटे क्षेत्रीय दलों से गठबंधन किया है। बीजेपी 27 और AIADMK 178 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
  • बीजेपी का लक्ष्य केवल सीटें जीतना नहीं, बल्कि खुद को पॉलिटिकल ऑप्शन के तौर पर पेश करना है। बीजेपी द्रविड़ पार्टियों से नाराज वोटर्स को साधना चाहती है।
  • प्रोफेसर और इलेक्शन एनालिस्ट संजय कुमार मानते हैं कि बीजेपी ने धीरे-धीरे उन राज्यों में जड़े जमाई हैं, जहां उसकी मौजूदगी पहले काफी कम थी। खासकर उन राज्यों में जहां क्षेत्रीय पार्टियां हावी हैं। अगर तमिलनाडु में अच्छी साझेदारी हुई तो बीजेपी अपना परफॉर्मेंस सुधार सकती है और मजबूत हो सकती है।
  • केरलम को बीजेपी के लिए ‘फाइनल फ्रंट’ माना जाता है। क्योंकि दशकों से बीजेपी और संघ यहां जमीन तैयार कर रहे हैं, लेकिन चुनावी सफलता से कोसों दूर हैं।
  • बीते कुछ दशकों में सत्ता की बागडोर या तो CPIM के लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट ने संभाली या फिर कांग्रेस के यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने।
  • 2016 के चुनाव में बीजेपी की बोहनी हुई। तिरुवनंतपुरम की नेमोम विधानसभा सीट जीती। दशकों से संघ-बीजेपी के लिए जमीन बना रहे 86 साल के ओ. राजगोपाल ने यहां कमल खिलाया।
  • 2021 में बीजेपी अपनी इस इकलौती सीट को बचा नहीं पाई और फिर से शून्य पर पहुंच गई। हालांकि पलक्कड़ सीट बीजेपी जीतते-जीतते रह गई। यहां मेट्रो मैन ई. श्रीधरन करीब 4 हजार वोट से हार गए।
  • 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की फिर किस्मत खुली। मलयालम सुपरस्टार सुरेश गोपी ने त्रिशूर सीट पर कमल खिलाया। सुरेश केरलम से बीजेपी के पहले और इकलौते सांसद हैं।
  • वहीं बीजेपी का वोट शेयर 16.8% हो गया, जो 2019 में 13% था। इस चुनाव से माना जाने लगा कि बीजेपी केरलम में तीसरा ऑप्शन बन सकती है।
  • फिर दिसंबर 2025 में निकाय चुनाव हुए। बीजेपी ने चार दशकों से तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर काबिज लेफ्ट को हरा दिया। इस जीत से पार्टी को उम्मीद है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका निभाएगी।
  • लेफ्ट के गढ़ में इन कामयाबियों के बावजूद बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती है यहां का सामाजिक ढांचा। केरलम की करीब 45% आबादी मुस्लिम और ईसाई है, जो पारंपरिक रूप से बीजेपी के वोटर नहीं माने जाते हैं। वहीं केवल हिंदू वोटर्स को एकजुट कर उनके सहारे सत्ता पाना बीजेपी के लिए मुश्किल है।
  • ऐसे में 2026 के चुनाव में बीजेपी ईसाइयों को लामबंद करना चाहती है। इसके लिए उसने 7 ईसाई उम्मीदवार उतारे हैं। वहीं ट्वेंटी-20 पार्टी समेत कुछ स्थानीय दलों के साथ अलायंस किया। 19 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली ट्वेंटी-20 को ईसाई समुदाय का समर्थन है।
  • इस चुनाव में बीजेपी की कोशिश है कि कुछ सीट जीतने के साथ वह मुकाबले को त्रिकोणीय बनाए और वोट काटने वाली पार्टी से ऊपर उठाकर ‘किंगमेकर’ बने। साथ ही अपना मजबूत वोटबेस तैयार करे।
  • अमिताभ तिवारी कहते हैं, केरलम में राजनीति पर लंबे समय से UDF और LDF का वर्चस्व रहा है, जिससे तीसरे मोर्चे की गुंजाइश कम बची है। ऐसे में बीजेपी तुरंत सत्ता हासिल करने की बजाय अपने वोट शेयर और सीटें बढ़ाने की कोशिश करेगी।
  • दक्षिण भारत के छोटे से केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की राजनीति एक दौर में द्रविड़ पार्टियों और कांग्रेस के इर्द-गिर्द थी। लेकिन हाल में बीजेपी ने साबित किया है कि वह दक्षिण में भी बेहतर तरीके से गठबंधन सरकार चला सकती है।
  • 2014 में बीजेपी ने पूर्व सीएम एन. रंगास्वामी की पार्टी AINRC के साथ गठजोड़ किया। हालांकि दो चुनावों में बीजेपी का खाता तक नहीं खुला।
  • आखिरकार 2021 में बीजेपी ने 9 सीटों पर लड़कर 6 पर जीत दर्ज की। वहीं AINRC को 10 सीटें मिलीं। एन. रंगास्वामी सीएम बने।
  • यहां 3 विधायक केंद्र सरकार नॉमिनेट करती है। इस प्रावधान का फायदा बीजेपी को मिला और उसके पास कुल 6 विधायक हो गए। इसी के साथ बीजेपी, AINRC के लगभग बराबर हो गई।
  • 2026 के चुनाव में पुडुचेरी में बीजेपी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश करेगी। साथ ही नई सीट जीतना चाहेगी। दक्षिण भारत में एक मैसेज भी देना चाहेगी कि हम AINRC जैसे क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर लंबे समय तक सरकार चला सकते हैं।
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कोरबा

एविडेंस एक्ट की धारा 68- रजिस्टर्ड सेल डीड के लिए गवाहों के सर्टिफिकेशन (अटेस्टेशन) के सबूत की ज़रूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली/कोरबा। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (14 जुलाई) को फैसला सुनाया कि इंडियन एविडेंस एक्ट, 1872 की धारा 68 का प्रोविज़ो (शर्त) रजिस्टर्ड सेल डीड पर लागू नहीं होता है, क्योंकि कानून के तहत सेल डीड के लिए गवाहों से सर्टिफिकेशन ज़रूरी नहीं है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द करते हुए यह बात कही, जिसमें सेल डीड ट्रांज़ैक्शन पर धारा 68 के प्रोविज़ो को गलत तरीके से लागू किया गया।

बेंच ने कहा,

“धारा 68 का प्रोविज़ो कहता है कि किसी भी डॉक्यूमेंट (वसीयत को छोड़कर) के निष्पादन (execution) के सबूत के तौर पर अटेस्टिंग गवाह को बुलाना ज़रूरी नहीं है, अगर उसे इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 (1908 का 16) के प्रावधानों के अनुसार रजिस्टर किया गया हो; सिवाय तब जब उस व्यक्ति द्वारा इसके निष्पादन से खास तौर पर इनकार किया गया हो, जिसके द्वारा इसे निष्पादित किया गया माना जाता है। चूंकि कानून के तहत सेल डीड के लिए अटेस्टेशन ज़रूरी नहीं है, इसलिए इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रावधान इस पर लागू नहीं होते हैं।”

बेंच ने धारा 68 के प्रोविज़ो के सीमित दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह प्रावधान केवल उन डॉक्यूमेंट्स पर लागू होता है जिनके लिए अनिवार्य अटेस्टेशन की ज़रूरत होती है।

“‘किसी भी डॉक्यूमेंट का निष्पादन, वसीयत को छोड़कर’ का मतलब है, वे डॉक्यूमेंट्स जिनके लिए अनिवार्य अटेस्टेशन की ज़रूरत होती है, जैसे कि गिफ्ट डीड, मॉर्गेज डीड, सेटलमेंट डीड आदि; लेकिन ऐसे डॉक्यूमेंट्स के सबूत के तौर पर किसी अटेस्टिंग गवाह से पूछताछ करना ज़रूरी नहीं है, जब तक कि इसके निष्पादन से खास तौर पर इनकार न किया गया हो।”

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद केरल में प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े एक सिविल प्रॉपर्टी विवाद से संबंधित है, जिसका दावा एक रजिस्टर्ड सेल डीड के ज़रिए किया गया।

वादी ने विवादित प्रॉपर्टी पर पूर्ण मालिकाना हक और कब्ज़ा साबित करने के लिए मुकदमा दायर किया और मालिकाना हक के मुख्य सबूत के तौर पर रजिस्टर्ड सेल डीड पेश की।

इसके जवाब में, प्रतिवादी ने लिखित बयान दायर करके साफ तौर पर इनकार किया कि सेल डीड निष्पादित की गई और दावा किया कि यह धोखाधड़ी थी। हालांकि, उन्होंने डॉक्यूमेंट को कानूनी रूप से अमान्य करने के लिए कोई स्वतंत्र मुकदमा या औपचारिक काउंटर-क्लेम दायर नहीं किया। केरल हाईकोर्ट ने सेल डीड (बिक्री विलेख) पेश करने वाले के खिलाफ फैसला सुनाया, क्योंकि उन्होंने गवाही देने वाले किसी भी गवाह को कोर्ट में नहीं बुलाया। कोर्ट का तर्क था कि चूंकि लिखित बयान में डीड के निष्पादन (execution) से “साफ तौर पर इनकार” किया गया, इसलिए एविडेंस एक्ट की धारा 68 का प्रावधान लागू होता है, जिसके तहत डीड को साबित करने के लिए गवाह की गवाही अनिवार्य हो जाती है।

इसके बाद वादी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और तर्क दिया कि सेल डीड के लिए कानूनी रूप से गवाही (Attestation) की आवश्यकता ही नहीं होती है, इसलिए हाई कोर्ट द्वारा धारा 68 को लागू करना बुनियादी रूप से गलत था।

फैसला

अपील स्वीकार करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 68 केवल उन दस्तावेजों पर लागू होती है, जिनके लिए कानूनन गवाही अनिवार्य है, जैसे कि वसीयत (इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 की धारा 63 के तहत), गिफ्ट डीड (ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट की धारा 123 के तहत) और मॉर्गेज डीड (बंधक विलेख)। हालांकि, सेल डीड इस श्रेणी में नहीं आती है। ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 54 के तहत सेल डीड का रजिस्ट्रेशन तो जरूरी है, लेकिन इसकी गवाही अनिवार्य नहीं है।

कोर्ट ने कहा,

“पहली नज़र में ऐसा लगता है कि हाईकोर्ट ने एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रोविज़ो (शर्त) में दिए गए वाक्यांश ‘वसीयत के अलावा किसी भी दस्तावेज़ का निष्पादन (Execution)’ का गलत अर्थ निकाला। हाईकोर्ट ने ‘किसी भी दस्तावेज़ के निष्पादन’ का अर्थ निकालते हुए इसमें रजिस्टर्ड सेल डीड (बिक्री विलेख) को भी शामिल कर लिया। हमारी राय है कि हाईकोर्ट ने एविडेंस एक्ट की धारा 68 के प्रोविज़ो के असली मकसद को समझने में गलती की। ‘वसीयत के अलावा किसी भी दस्तावेज़ का निष्पादन’ का मतलब है वे दस्तावेज़ जिनके लिए गवाहों द्वारा तस्दीक (Attestation) अनिवार्य है, जैसे कि गिफ्ट डीड, मॉर्गेज डीड, सेटलमेंट डीड आदि; लेकिन ऐसे दस्तावेज़ों को साबित करने के लिए गवाहों से पूछताछ करना तब तक ज़रूरी नहीं है जब तक कि उनके निष्पादन से साफ़ तौर पर इनकार न किया गया हो। वसीयत के मामले में गवाहों में से किसी एक से पूछताछ करना ज़रूरी है, चाहे उसके निष्पादन से साफ़ तौर पर इनकार किया गया हो या नहीं। एविडेंस एक्ट की धारा 68 का प्रोविज़ो बस यही बात बताना या स्पष्ट करना चाहता है।”

कोर्ट ने कानूनी व्याख्या के उस अहम नियम को दोहराया कि प्रोविज़ो को उसी मुख्य प्रावधान के संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए, जिसे वह सीमित या स्पष्ट करता है।

कोर्ट ने कहा,

“धारा 68 का प्रोविज़ो केवल उन दस्तावेज़ों के संबंध में अपवाद बनाता है, जिनकी कानूनन तस्दीक (attestation) अनिवार्य है। सेल डीड ऐसे दस्तावेज़ों की श्रेणी में नहीं आती है।”

चूंकि हाई कोर्ट ने CPC की धारा 100 के तहत कानून का अहम सवाल (Substantial Question of Law) तय न करके गंभीर गलती की, इसलिए कोर्ट ने मामले को वापस हाईकोर्ट भेज दिया ताकि कानून का अहम सवाल तय करने के बाद मामले की फिर से सुनवाई हो सके।

Cause Title: R. VERONICA & ANR. VERSUS RUDRAYANI DEVAKI(D) THROUGH LRS. S. SATHA KUMAR & ORS.

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देश

पीएम आवास के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस ने राहुल-प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया

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नई दिल्ली, एजेंसी। संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन (21 जुलाई) भी विपक्षी पार्टियों ने जोरदार हंगामा किया. जिसे देखते हुए लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया. संसद की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने पीएम आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.

दिल्ली पुलिस ने राहुल-प्रियंका गांधी को हिरासत में लिया

लोक कल्याण मार्ग पर विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

विपक्ष से कुछ भी कहना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है : चिराग पासवान

चिराग पासवान ने कहा, “विपक्ष हम पर बार-बार यह आरोप लगाता है कि हम बातचीत नहीं करते, है ना? लेकिन जब असल में बातचीत शुरू होती है, तो वे कहां होते हैं? सच कहूं तो, मुझे लगता है कि विपक्ष से कुछ भी कहना भैंस के आगे बीन बजाने जैसा है. वे बस सुनना ही नहीं चाहते. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि यहां कितने अहम मुद्दे उठाए जा रहे हैं, जैसे कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाना. आज NDA सांसदों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि भारत के भविष्य या युवाओं और छात्रों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता. लेकिन अगर आप हर सत्र से पहले एक-दो मुद्दे चुनते हैं, तो सारे मुद्दों पर एक साथ बात क्यों नहीं करते? आप मुद्दों को बीच में ही क्यों छोड़ देते हैं? आपको उन मुद्दों को उनके अंजाम तक पहुंचाना चाहिए. आप आज एक मुद्दा उठाते हैं, लेकिन अगले सत्र में कोई नया मुद्दा ले आते हैं. इसका मतलब है कि आपका एकमात्र मकसद हंगामा करना है, न कि बातचीत से मामलों को सुलझाना. जब हम किसानों, छात्रों और युवाओं के साथ खड़े होते हैं, तो कृपया सुझाव दें कि हम उनके साथ और मजबूती से कैसे खड़े हो सकते हैं. हम आपके हर सुझाव को अपनाएंगे और तथ्यों पर आधारित आपकी हर सही बात को मानेंगे. चर्चा तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए, फिर भी आप हंगामा करना चुनते हैं, सड़कों पर अफरा-तफ़री मचाते हैं और लोगों को गुमराह करते हैं, जबकि बातचीत और सही चर्चा के लिए बने मंच को ही नज़रअंदाज़ कर देते हैं.”

सरकार पेपर लीक और युवाओं के मामले को राजनीतिक रंग देना चाहती है: संदीप दीक्षित

PM आवास के बाहर विरोध-प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा, “कोई माने या न माने, राहुल गांधी ने हमेशा ऐसे मुद्दे उठाए हैं. उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया. जिस दिन पेपर लीक हुआ, वे सड़कों पर उतर आए. सरकार इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है. हमें देश के हर उस युवा के साथ खड़ा होना है, जिसकी उम्मीदों और आकांक्षाओं को कल सरकार ने बेरहमी से कुचल दिया.”

छात्रों के साथ अत्याचार हो रहा, लोकतंत्र को दबाया जा रहा: जयराम रमेश

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि छात्रों पर अत्याचार हो रहा है और लोकतंत्र को दबाया जा रहा है. विपक्ष पिछले 45 दिनों से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है. हम इन सभी अहम मुद्दों पर संसद में विस्तार से चर्चा और जवाब चाहते हैं.

लोक कल्याण मार्ग पहुंचे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, विरोध प्रदर्शन में बैठे राहुल गांधी से की बात

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लोक कल्याण मार्ग पहुंचे और यहां कांग्रेस के चल रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से बात की.

दिल्ली पुलिस ने कन्हैया कुमार समेत कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया

दिल्ली पुलिस ने लोक कल्याण मार्ग पर विरोध प्रदर्शन कर रहे कन्हैया कुमार समेत कांग्रेस नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया.

पीएम आवास के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने पार्टी महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य कांग्रेस नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकारी आवास, 7 लोक कल्याण मार्ग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने विभिन्न मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगें उठाईं.

छात्र प्रदर्शन के बहाने डिंपल यादव का सियासी दांव: बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए युवाओं से मांगा साथ

सपा सांसद डिंपल यादव ने सीजेपी आंदोलन पर कहा- मुझे लगता है कि इससे एक मजबूत संदेश गया है कि कितने युवा बदलाव चाहते हैं. मैं छात्रों से कहना चाहती हूं कि बदलाव सिर्फ वोटिंग से ही आ सकता है. आने वाले समय में, आपको उन पार्टियों का समर्थन करना चाहिए जो BJP को सत्ता से हटाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

डिंपल यादव का दावा, विपक्षी पार्टियों ने स्पीकर से चर्चा की मांग की, लेकिन उन्होंने ठुकरा दिया

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा, “विपक्षी पार्टियों ने स्पीकर से मुलाक़ात की और चर्चा की मांग की, लेकिन उन्होंने इसे साफ़ तौर पर ठुकरा दिया. यहां सरकार की मंशा को समझना ज़रूरी है; उनका पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है और कई मामलों में बीमार नजर आता है. जो युवा विरोध करने आए थे, वे सिस्टम की नाकामी को उजागर करना चाहते थे, क्योंकि सरकार खुद इस मुद्दे पर ध्यान देने को तैयार नहीं थी. वे सरकार से शिक्षा में सुधार लाने और NEET पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले 20 छात्रों की मौत के मामले पर कार्रवाई करने की अपील करने आए थे. उन्हें यह भी लगा कि जिम्मेदार होने के नाते शिक्षा मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए; लेकिन मंत्री के इस्तीफे की मांग करने के बजाय, जैसा कि छात्रों ने किया था, अधिकारियों ने उन पर लाठियां बरसाईं और उनके कपड़े फाड़ दिए. मेरा मानना ​​है कि सरकार के इन कामों ने इन युवाओं की उम्मीदों और सपनों को बुरी तरह तोड़ दिया है.

CCTV फुटेज खंगाले जा रहे, जांच के आधार पर होगी प्राथमिकी दर्ज

एडिशनल DCP आनंद कुमार मिश्रा ने न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में कहा, “कुछ FIR पहले ही दर्ज की जा चुकी हैं और यह संख्या निश्चित रूप से और बढ़ सकती है. अभी CCTV फुटेज की जांच की जा रही है और जैसे-जैसे दूसरे पहलुओं की जांच होगी, और FIR दर्ज की जा सकती हैं. विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर 100 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए हैं. उन सभी की निगरानी की जा रही है; इसके लिए एक खास टीम लगाई गई है और कई टीमें मिलकर काम कर रही हैं. हम हर चीज़ की बारीकी से जांच कर रहे हैं- CCTV फुटेज, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो और हमारे अपने लगाए गए कैमरों की फुटेज। हमने पहले ही एक टीम बना ली थी ताकि जरूरत पड़ने पर तेजी से जांच की जा सके; वह टीम अभी काम कर रही है.”

संसद की कार्यवाही आज दिन भर के लिए स्थगित

विपक्ष के हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा को आज दिन भर के लिए स्थगित करने का फैसला किया. जबकि राज्यसभा में भी भारी हंगामे को देखते हुए कार्यवाही को आज के लिए स्थगित कर दिया गया है. सदन की कार्यवाही अब 22 जुलाई को सुबह 11 बजे से होगी.

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PM आवास के बाहर धरने पर बैठे कांग्रेसी नेताओं ने केंद्र सरकार के सामने रखीं ये 5 बड़ी मांगें

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और कई अन्य नेता छात्रों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री आवास के निकट धरने पर बैठ गए। प्रधानमंत्री के आवास ‘7 लोक कल्याण मार्ग’ के निकट धरने पर बैठे कांग्रेस नेताओं ने यहां ‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’ के नारे लगाए।

केंद्र के सामने रखी ये 5 बड़ी मांगें

  • प्रदर्शन के दौरान हिंसा की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की
  • गृहमंत्री का दोनों सदनों में बयान
  • सदन में इस मामले की डिटेल पर चर्चा होनी चाहिए
  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग रखी
  • छात्रों के मुद्दे को सुने जाने की बात कही

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने की खरगे से मुलाकात

धरना स्थल पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह पहुंचे हैं। यहां पर वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बातचीत कर उन्हें प्रदर्शन रोकने के लिए बातचीत कर रहे हैं। 

इससे पहले, राहुल गांधी ने कहा कि पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को माफी मांगनी चाहिए और पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से यह भी कहा कि छात्रों की पिटाई के लिए गृह मंत्री अमित शाह को भी त्यागपत्र देना चाहिए। प्रियंका गांधी ने कहा, ”हम सदन में चर्चा करना चाहते हैं, लेकिन विपक्ष को बात करने नहीं दिया जाता। ये सदन उन्हीं युवाओं का है जिन पर सरकार लाठी चला रही है, आंसू गैस के गोले छोड़ रही है। बच्चों की बात सुनी जाए और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लिया जाए। ” कांग्रेस के दोनों प्रमुख नेताओं ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से मुलाकात भी की।

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