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ईरान-अमेरिका सीजफायर खत्म, ट्रम्प बोले- आज रात बड़ा हमला करेंगे:होर्मुज में जहाजों पर ईरानी हमले के बाद एक्शन, अब तक 80 टारगेट पर अटैक

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तेहरान, एजेंसी। अमेरिका ने ईरान के 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक यह कार्रवाई होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने NATO समिट के दौरान कहा कि ईरान के साथ हुआ सीजफायर समझौता (MoU) अब खत्म हो चुका है और अब वह ईरान से कोई डील नहीं करना चाहते। ट्रम्प ने कहा,

हमने पिछली रात ईरान पर जोरदार हमला किया। खतरनाक लोगों को निशाना बनाया। हर बार वे हमला करेंगे, हम जवाब देंगे।

उन्होंने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना है। ट्रम्प ने NATO पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि गठबंधन ने “दुनिया के सबसे बड़े आतंक समर्थक देश ईरान” के खिलाफ अमेरिका का साथ नहीं दिया।

  1. ईरान ने होर्मुज में 3 टैंकरों को निशाना बनाया 
  2. खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच ईरान ने होर्मुज में 3 टैंकरों को निशाना बनाया, जिसमें एक टैंकर कतर का था। ईरान ने चेतावनी दी कि हमारी तरफ से तय रुट इस्तेमाल नहीं होने पर सुरक्षा की गारंटी नहीं रहेगी।
  3. कतर ने होर्मुज में ईरानी हमलों की निंदा की
  4. कतर ने होर्मुज में उसके जहाज पर हमले की निंदा करते हुए ईरान को कानूनी रूप से पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। साथ ही कहा कि ईरानी हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
  5. ईरान बोला- धमकियों के बीच अमेरिका से बातचीत नहीं
  6. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि धमकियों के माहौल में कोई समझौता नहीं होगा। पहले अमेरिका को अपने पुराने समझौतों का सम्मान करना होगा।
  7. कोम में खामेनेई के जनाजे में लाखों की भीड़ उमड़ी
  8. तेहरान में अंतिम यात्रा के बाद लगातार दूसरे दिन कोम में भी खामेनेई के जनाजे में लाखों की भीड़ उमड़ी। कई लोगों ने ताबूत पर लाल कपड़ा भी चढ़ाया, जो बदले का प्रतीक है।
  9. खामेनेई का पार्थिव शरीर इराक के नजफ पहुंचा
  10. ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर मंगलवार रात इराक के नजफ शहर पहुंचा। ईरान में कई दिनों तक चली अंतिम यात्रा और धार्मिक रस्मों के बाद ताबूत को विशेष विमान से नजफ लाया गया।

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ट्रम्प बोले- होर्मुज पर जल्द अमेरिका का फुल कंट्रोल होगा:ईरान की नेवी और एयरफोर्स खत्म, उसके पास सिर्फ कुछ मिसाइल और ड्रोन बचे

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वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और मिलिट्री लीडरशिप को बहुत नुकसान हुआ है।

ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने दावा किया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई करना जरूरी था।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर भविष्य में ईरान की ओर से फिर ऐसा खतरा पैदा हुआ, तो अमेरिका फिर से कड़े कदम उठाएगा।

ट्रम्प बोले- ईरान से बातचीत मुश्किल

ट्रम्प ने कहा कि ईरान के कई बड़े नेता अब नहीं रहे। इसके चलते नए समझौते पर बातचीत मुश्किल हो गई है। फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि ईरान में फैसले कौन ले रहा है।

ट्रम्प ने एक बार फिर से दावा किया कि ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। देश में महंगाई बहुत ज्यादा है। सेना को वेतन देने में भी दिक्कतें आ रही हैं।

अमेरिका ने ईरान की मदद करने वालों को चेतावनी दी

अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों को चेतावनी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बैसेंट ने कहा कि जो लोग ईरान के साथ कारोबार जारी रखेंगे, उनके खिलाफ अमेरिका कड़े आर्थिक कदम उठा सकता है।

दरअसल, अमेरिका ने गुरुवार को ईरान पर नई आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। इसका मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाकर उसे परमाणु कार्यक्रम खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए मजबूर करना है।

अमेरिका पहले ही ईरान के तेल, बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर कई प्रतिबंध लगा चुका है। अब वह ईरान से जुड़े दूसरे देशों और कंपनियों पर भी दबाव बढ़ाने की तैयारी में है।

चीन बोला- ईरान पर प्रतिबंधों से मामला नहीं सुलझेगा

चीन ने अमेरिका की उस कोशिश का विरोध किया है, जिसमें दूसरे देशों से ईरान के साथ आर्थिक रिश्ते खत्म करने को कहा जा रहा है। चीन ने कहा कि ईरान पर प्रतिबंध लगाने और दबाव बनाने से मिडिल ईस्ट का संघर्ष खत्म नहीं होगा।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने शुक्रवार को कहा कि इस समस्या का हल बातचीत और कूटनीति से ही निकाला जा सकता है। उन्होंने सभी संबंधित देशों से जिम्मेदारी के साथ कदम उठाने की अपील की।

चीन का यह बयान अमेरिका की उस अपील के एक दिन बाद आया है, जिसमें उसने अपने सहयोगी देशों और चीन से ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने में मदद करने को कहा था।

ईरान बोला- अमेरिकी प्रतिबंधों से नहीं झुकेंगे

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका जब बातचीत नहीं करना चाहता, तो प्रतिबंध लगाने लगता है। ईरान कई साल से ऐसे प्रतिबंध झेलता आया है और इससे उसकी नीति नहीं बदली है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान डायरेक्टर अली वाएज के मुताबिक, अमेरिका अब प्रतिबंधों के साथ सैन्य दबाव भी बढ़ा रहा है। लेकिन इससे ईरान के पीछे हटने के बजाय उसका रुख और सख्त हो सकता है।

उनके मुताबिक, ईरान के लिए अमेरिकी प्रतिबंध झेलना मुश्किल जरूर है, लेकिन अमेरिका की शर्तें मानना उसे इससे भी ज्यादा खतरनाक लगता है। इसलिए सिर्फ दबाव बढ़ाने से ईरान के झुकने की संभावना कम है।

होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल क्यों चाहते हैं ट्रम्प?

दुनिया के तेल का अहम रास्ता- दुनिया की करीब 20% तेल और LNG सप्लाई होर्मुज से गुजरती है। इस पर कंट्रोल का मतलब ऊर्जा सप्लाई पर पकड़।

ईरान का दबाव कम करना- ईरान होर्मुज को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल करता रहा है। यहां उसका असर कम होने से उसकी ताकत घटेगी।

तेल की कीमतें कंट्रोल में रखना- होर्मुज में तनाव बढ़ते ही तेल महंगा हो जाता है। अमेरिका चाहता है कि रास्ता खुला रहे और सप्लाई जारी रहे।

खाड़ी देशों की सुरक्षा- सऊदी अरब, UAE, कुवैत और कतर जैसे अमेरिकी सहयोगियों का तेल इसी रास्ते से जाता है। इसकी सुरक्षा अमेरिका के लिए अहम है।

ईरान की सौदेबाजी की ताकत कम करना- होर्मुज पर ईरान का प्रभाव घटने से किसी समझौते में उसकी सौदेबाजी की ताकत भी कमजोर हो सकती है।

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ट्रम्प बोले-आर्थिक हमले से ईरान को दुनिया से काट देंगे:जो देश ईरान का साथ देंगे, वे नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें

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वॉशिंगटन/ तेहरान, एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने समझौते का मौका गंवा दिया है। अब उसे आर्थिक तौर पर अलग-थलग किया जाएगा।

ट्रम्प ने चेतावनी दी कि ईरान की मदद करने वाले देशों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई होगी। इसमें बैंक, कंपनियां, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थाएं शामिल हैं।

उन्होंने तेल तस्करी नेटवर्क पर कार्रवाई करने और कैश ट्रांसफर, करेंसी एक्सचेंज, जहाजों के रजिस्ट्रेशन और फर्जी कंपनियों के जरिए ईरान तक पहुंचने वाली आर्थिक मदद को रोकने की बात कही।

ट्रम्प का दावा- ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान

ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को बड़ा नुकसान हुआ है। उसके कई सैन्य कारखाने तबाह हो गए हैं। ईरान की मुद्रा की हालत भी बहुत खराब है और देश आर्थिक संकट में है।

ट्रम्प ने अमेरिका की नई आर्थिक कार्रवाई को ‘इकोनॉमिक डी-डे’ बताया। आसान भाषा में इसका मतलब है कि अमेरिका ईरान पर बहुत बड़ा आर्थिक दबाव बनाने जा रहा है।

उन्होंने दूसरे देशों से भी ईरान की मदद बंद करने और अमेरिका के साथ इस अभियान में शामिल होने की अपील की।

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर ईरान के खिलाफ सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई करने का ऐलान किया।

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर ईरान के खिलाफ सबसे बड़ी आर्थिक कार्रवाई करने का ऐलान किया।

ईरान बोला- ट्रम्प से ज्यादा टैक्सी ड्राइवर पर भरोसा है

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सीनियर अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा नकदी ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति की बातों से ज्यादा भरोसा किसी टैक्सी ड्राइवर की बात पर है।

नकदी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प की सोच बचकानी है और वे दूर की नहीं सोच पाते हैं। उनके बदलते बयानों से अमेरिकी की ग्लोबल इमेज पर असर पड़ा है।

वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रम्प की नई आर्थिक कार्रवाई को नाकाम बताया है। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के लगाए प्रतिबंध ईरान पर असर नहीं डाल पाएंगे।

अमेरिकी प्रतिबंधों का ईरान पर क्या असर पड़ेगा?

अमेरिका की नई कार्रवाई का सबसे बड़ा असर ईरान के तेल कारोबार और पैसे के लेनदेन पर पड़ सकता है। ईरान की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल बेचने से आता है।

अगर दूसरे देश, बैंक और कंपनियां अमेरिकी कार्रवाई के डर से ईरान के साथ कारोबार कम करते हैं, तो ईरान के लिए तेल बेचना और विदेशों से पैसा लेना मुश्किल हो सकता है।

तेल की तस्करी और फर्जी कंपनियों पर कार्रवाई होने से ईरान के लिए छिपकर कारोबार करना और अमेरिकी कार्रवाई से बचना भी मुश्किल होगा। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान को दुनिया से आर्थिक तौर पर अलग करने की कोशिश करेगा।

ईरान का तेल तस्करी नेटवर्क कैसे काम करता है

तेल बेचकर कमाई, पहचान छिपाकर सप्लाई

  • ईरान तेल बेचता है, लेकिन सीधे अपने नाम से कारोबार करने पर अमेरिकी एजेंसियां इसे आसानी से ट्रैक कर सकती हैं।
  • इसलिए बिचौलियों, दूसरी कंपनियों और अलग-अलग शिपिंग नेटवर्क के जरिए तेल खरीदारों तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है।

तेल के बाद पैसे की बारी

  • तेल बेचने के बाद कमाई को ईरान तक पहुंचाना सबसे अहम हिस्सा होता है।
  • इसके लिए बैंकिंग चैनल, करेंसी एक्सचेंज, बिचौलियों और कैश ट्रांसफर जैसे रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अमेरिका पूरी चेन तोड़ना चाहता है

  • अमेरिका तेल के साथ उन जहाजों, कंपनियों और वित्तीय नेटवर्क पर भी कार्रवाई करना चाहता है, जो इस कारोबार में मदद करते हैं।
  • इसका मकसद ईरान के लिए तेल बेचना और उससे कमाई मुश्किल करना है।

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अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग बोला- RSS पर बैन लगे:यहां आने वाले संघ के नेताओं को सम्मान न मिले; भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क जाएंगे

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न्यूयॉर्क/नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। आयोग ने अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को राजनयिक सम्मान नहीं देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें नहीं करने को कहा है।

आयोग के चेयरमैन आसिफ महमूद ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी RSS के सदस्य हैं और इसके सहयोगी संगठनों ने धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं।

पाकिस्तानी मूल के महमूद का यह बयान RSS प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे से कुछ दिन पहले आया है। भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जाएंगे।

भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (AHEAD) के ‘यूनिवर्सल ऑननेस सेलिब्रेशंस’ कार्यक्रम में शामिल होंगे।

भागवत सितंबर 2018 में अमेरिका गए थे और शिकागो में वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस को संबोधित किया था। उपलब्ध रिपोर्टों में इस दौरे में उनकी किसी अमेरिकी राजनयिक से मुलाकात या औपचारिक राजनयिक सम्मान का जिक्र नहीं मिलता।

आयोग के कमिश्नर बोले- भारत सरकार से जुड़े RSS नेताओं को सम्मान न मिले

USCIRF कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि अमेरिकी सरकार को धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करना चाहिए।

100 से ज्यादा संगठनों ने भागवत के कनाडा दौरे का समर्थन किया

कनाडा के 100 से ज्यादा संगठनों ने RSS प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे का समर्थन किया है। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और मंत्रियों को पत्र लिखकर भागवत को रोकने की मांगों को खारिज करने की अपील की।

संगठनों ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले पुख्ता और स्वतंत्र सबूत होने चाहिए और कानून के मुताबिक पूरी प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

USCIRF भारत को ‘विशेष चिंता का देश वाली सूची’ में शामिल करने की सिफारिश कर चुका

USCIRF ने कई बार भारत को ‘विशेष चिंता का देश’ यानी CPC घोषित करने की सिफारिश की है।

आयोग ने पहली बार 2004 में यह सिफारिश की थी और 2020 में इसे फिर दोहराया। इसके बाद 2021 से 2026 तक की रिपोर्टों में भी USCIRF ने भारत को CPC सूची में शामिल करने की मांग की।

हालांकि, USCIRF की सिफारिश का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने भारत को CPC घोषित कर दिया है।

RSS और RAW पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन कर चुका

मार्च 2026 में USCIRF की सालाना रिपोर्ट में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों की आलोचना की गई थी। रिपोर्ट में RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) जैसी संस्थाओं और कुछ लोगों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।

भारत ने रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा था कि USCIRF संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक सोच के आधार पर लगातार देश की खराब छवि पेश करता है।

16 मार्च को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत की चुनिंदा आलोचना करने के बजाय USCIRF को अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

USCIRF के बारे में जानिए

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम यानी USCIRF अमेरिका की स्वतंत्र सरकारी संस्था है। इसे अमेरिकी कांग्रेस ने 1998 के इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम एक्ट के तहत बनाया था।

इसके सदस्य राष्ट्रपति और कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों की ओर से नियुक्त होते हैं। USCIRF का काम निगरानी और सलाह देना है।

यह किसी देश या संगठन पर प्रतिबंध की सिफारिश कर सकती है, लेकिन अंतिम फैसला अमेरिकी सरकार का होता है। यानी इसकी सिफारिश से प्रतिबंध अपने-आप लागू नहीं होता। इसकी रिपोर्टें अमेरिकी सरकार के फैसलों और विदेश नीति पर असर डाल सकती हैं।

USCIRF का काम क्या है…

  • अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक उत्पीड़न की स्थिति की निगरानी करती है।
  • अपनी रिसर्च और जांच के आधार पर सालाना रिपोर्ट जारी करती है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और कांग्रेस को नीतिगत सिफारिशें देती है।
  • कुछ देशों को ‘विशेष चिंता का देश’ (CPC) घोषित करने की सिफारिश कर सकती है।
  • गैर-सरकारी संगठनों/समूहों के लिए ‘विशेष चिंता वाली संस्था/समूह’ EPC की सिफारिश कर सकती है।
  • अमेरिकी सरकार से प्रतिबंध, राजनयिक दबाव या अन्य कदम उठाने की सिफारिश कर सकती है।

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