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इजराइल ने ईरान के 4 एटमी ठिकाने तबाह किए:2 सैन्य अड्डे भी बर्बाद; सेना प्रमुख, स्पेशल फोर्स चीफ और दो परमाणु वैज्ञानिकों की मौत

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तेहरान/तेल अवीव, एजेंसी। इजराइल ने शुक्रवार सुबह ईरान के 4 एटमी और 2 सैन्य ठिकानों पर 200 फाइटर जेट से मिसाइलें दागीं। हमले में ईरान के सेना प्रमुख, स्पेशल फोर्स के चीफ, 2 बड़े परमाणु वैज्ञानिक समेत 5 बड़े अफसर मारे गए।

हमले के बाद इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने कहा कि ईरान परमाणु बम तैयार करने वाला था, इसलिए उस पर हमला किया गया। इजराइली सेना का दावा है कि ईरान के पास 15 परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम है।

इजराइल ने इसीलिए टारगेट भी 4 बड़े न्यूक्लियर प्लांट्स को किया। वहीं हथियार बनाने की क्षमता रखने वाली एक फैक्ट्री और बड़े मिलिट्री अफसरों के रेसिडेंशियल कॉम्प्लेक्स को भी तबाह कर दिया।

अब उन 6 जगहों के बारे में जानिए जहां हमला हुआ…

1. नतांज- एटॉमिक फैसिलिटी सेंटर

तेहरान से लगभग 250 किलोमीटर दक्षिण में मौजूद इस सेंटर की सैटेलाइट तस्वीरें पहली बार 2002 में सामने आई थीं। कई रिपोर्ट्स में अनुमान लगाया गया है कि इस साइट पर 9 परमाणु बम बनाने जितना यूरेनियम मौजूद है।

हमला क्यों हुआ- यहां एडवांस सेंट्रीफ्यूज लगे हैं। इस मशीन की मदद से यूरेनियम-235 की सफाई होती है जिसका इस्तेमाल हथियार बनाने में किया जाता है। IAEA की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान 60% संवर्धन तक पहुंच चुका है, जो हथियार-ग्रेड यूरेनियम के करीब है। इजराइली पीएम नेतन्याहू ने इसे ‘ईरान का सबसे बड़ा परमाणु खतरा’ बता चुके हैं।

IAEA रिपोर्ट- अंडरग्राउंड साइट को 7.6 मीटर मोटी कॉन्क्रीट की दीवार से ढंका गया था, लेकिन फिर भी हमले में मुख्य ट्रांसफॉर्मर को नुकसान पहुंचा।

हमले के बाद नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी साइट्स की सैटेलाइट इमेज।

हमले के बाद नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी साइट्स की सैटेलाइट इमेज।

2. तेहरान- एटॉमिक एनर्जी ऑर्गेनाइजेशन ऑफ ईरान

राजधानी में तेहरान न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर (TNRC) है। इसकी स्थापना 1967 में अमेरिका की मदद से हुई थी। TNRC में 600 ग्राम तक प्लूटोनियम उत्पादन करने में सक्षम है, जो परमाणु हथियारों के लिए संवेदनशील माना जाता है।

इसके साथ ही तेहरान ईरान की राजधानी है। यहां पर संसद के अलावा सरकार के सभी अहम ऑफिस है। ईरान के सुप्रीम लीडर का अयातुल्ला खामेनेई भी यही रहते हैं। इसके अलावा तेहरान में कई अहम मिलिट्री ठिकाने और एयरपोर्ट्स हैं।

तेहरान के आसपास इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई ट्रेनिंग सेंटर और हथियार डिपो हैं।

IRGC कमांडर हुसैन सलामी, सेनाध्यक्ष मोहम्मद बघेरी और सभी परमाण वैज्ञानिकों की मौत तेहरान पर हुए हमले में ही हुई है।

हमला क्यों हुआ- इजराइल ने नेतृत्व पर सीधा हमला कर यह जताया कि वो ईरान के सबसे सुरक्षित केंद्रों तक पहुंच सकता है।

3. इस्फहान- परमाणु टेक्नोलॉजी सेंटर

इस शहर में यूरेनियम कन्वर्जन फैसिलिटी है, जहां कच्चे यूरेनियम को गैस में बदला जाता है।

यहां न्यूक्लियर फैसिलिटी की शुरुआत साल 1999 में हुई।

इस शहर में ईरान का एक बड़ा एयरबेस भी है, यहां पुराने अमेरिकी F-14 टॉमकैट फाइटर जेट रखे गए हैं, जो ईरान ने 1979 की क्रांति से पहले खरीदे थे।

माना जा रहा है कि इस बार के हमले में एयरबेस पर स्थित एक रडार केंद्र को निशाना बनाया गया था।

इस्फहान में हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियां भी हैं, जिनमें से एक पर पिछले साल भी इजराइल ने हमला किया था।

इस बार 3 ड्रोन से यहां हमला हुआ। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि दो ड्रोन मार गिराए गए और एक ने फैक्ट्री की छत को थोड़ा नुकसान पहुंचाया।

हमला क्यों हुआ- ईरान की वायुसेना और रक्षा सिस्टम को कमजोर करना और हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को हथियार मिलने से रोकना।

इस्फहान में यूरेनियम कन्वर्जन फैसिलिटी है। यह जगह तेहरान से 410 किमी दूर है।

इस्फहान में यूरेनियम कन्वर्जन फैसिलिटी है। यह जगह तेहरान से 410 किमी दूर है।

4. अराक- हैवी वाटर रिएक्टर

अराक में हैवी वाटर रिएक्टर है। इससे प्लूटोनियम बन सकता है। यह परमाणु हथियार बनाने का एक और तरीका है। जिसे आधिकारिक तौर पर IR-40 रिएक्टर के रूप में जाना जाता है।

यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम का हिस्सा है और इसे मुख्य रूप से अनुसंधान और रेडियो आइसोटोप उत्पादन के लिए डिजाइन किया गया था।

अराक रिएक्टर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के सबसे विवादास्पद हिस्सों में से एक रहा है। पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका और इजराइल, ने चिंता जताई थी कि इस रिएक्टर का उपयोग हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम के उत्पादन के लिए हो सकता है।

हमला क्यों हुआ- ईरान के एटमी प्रोग्राम के दूसरे रास्ते को भी रोकना।

अराक में हैवी वाटर रिएक्टर है। यह तेहरान से लगभग 280 किमी दूर है।

अराक में हैवी वाटर रिएक्टर है। यह तेहरान से लगभग 280 किमी दूर है।

5. तबरीज- मिलिट्री बेस और एक बड़ा तेल रिफाइनरी

तबरीज ईरान के अजरबैजान प्रांत की राजधानी है। यहां कोई परमाणु ठिकाना नहीं है। यह तुर्की और आर्मेनिया की सीमा के करीब है। यहां कई मिलिट्री वेयरहाउस, मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट और IRGC से जुड़े ठिकाने हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का उत्पादन करते हैं।

इजराइल ने 2023 में भी यहां पर एक ड्रोन फैक्ट्री पर हमला किया था। तबरीज में तेल रिफाइनरी भी है। यहां हमला करने का मकसद ईरान के तेल क्षमता को कमजोर करना है।

हमला क्यों हुआ- सैन्य और आर्थिक ढांचे को कमजोर करना।

6.करमनशाह- इराक की राजधानी बगदाद के पास

ईरान के मिसाइल बेस और औद्योगिक कॉम्प्लेक्स इराक सीमा के पास हैं। करमनशाह शहर इराक के दियाला प्रांत और सुलेमानिया जैसे क्षेत्रों के पास है। यह इराक की राजधानी बगदाद से बस 150-200 किलोमीटर दूर है।

करमनशाह में कई महत्वपूर्ण सीमा क्रॉसिंग पॉइंट हैं, जैसे खोस्रवी सीमा चौकी, जो ईरान और इराक के बीच व्यापार और तीर्थयात्रा (विशेष रूप से शिया तीर्थयात्रियों के लिए, जो इराक में करबला और नजफ जाते हैं) के लिए उपयोग होती है।

हमला क्यों हुआ- अक्टूबर 2024 के ईरानी मिसाइल हमलों के बाद, करमनशाह से संभावित जवाबी हमलों को रोकना।

यह तेहरान से लगभग 525 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में और इराक की सीमा के करीब है।

यह तेहरान से लगभग 525 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में और इराक की सीमा के करीब है।

नेतन्याहू बोले- ईरान हमारे लिए खतरा इजराइल सेना ने कहा कि यह ‘प्री-एम्पटिव स्ट्राइक’ थी। यानी खतरे को भांपकर इजराइल ने हमला किया, ताकि ईरान कोई बड़ी कार्रवाई न कर सके। इजराइली सेना ने यह भी कहा कि आगे और भी ऐसे कई हमले हो सकते हैं।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि ईरान चोरी-छिपे परमाणु हथियार बना रहा था। यह हमारे देश के लिए खतरा था। इसलिए हमारी सेना ने नतांज जैसे अहम परमाणु ठिकानों और ईरान के कुछ प्रमुख वैज्ञानिकों पर हमला किया।

नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए ये कदम उठा रहा है। ईरान आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और पूरी दुनिया को अस्थिर करना चाहता है। आज का दिन इतिहास में उस दिन के रूप में याद किया जाएगा जब अच्छाई ने बुराई पर और रोशनी ने अंधकार पर जीत की दिशा में कदम बढ़ाया।

ईरान पर इजराइली हमले के बाद की 5 तस्वीरें…

तेहरान में शुक्रवार तड़के इजराइली हमले का निशाना बने एक स्थान से धुआं उठता हुआ दिखाई दिया।

तेहरान में शुक्रवार तड़के इजराइली हमले का निशाना बने एक स्थान से धुआं उठता हुआ दिखाई दिया।

ईरान की राजधानी तेहरान में इजराइली हमलों के बाद लोग एक क्षतिग्रस्त इमारत को देखते हुए।

ईरान की राजधानी तेहरान में इजराइली हमलों के बाद लोग एक क्षतिग्रस्त इमारत को देखते हुए।

तेहरान मे इमारत में हुए विस्फोट की जगह पर दमकलकर्मी काम कर रहे हैं।

तेहरान मे इमारत में हुए विस्फोट की जगह पर दमकलकर्मी काम कर रहे हैं।

इजराइली हमलों के बाद तेहरान में दमकलकर्मी साफ-सफाई करते हुए।

इजराइली हमलों के बाद तेहरान में दमकलकर्मी साफ-सफाई करते हुए।

इजराइली हमलों के बाद सड़क किनारे बैठा एक घायल शख्स।

इजराइली हमलों के बाद सड़क किनारे बैठा एक घायल शख्स।

IAEA ने ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था

इससे पहले अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया था। एजेंसी ने कहा था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर जो नियम तय हैं, उनका पालन नहीं कर रहा है।

IAEA के मुताबिक, ईरान के पास इतनी अधिक मात्रा में संवर्धित यूरेनियम है कि वह एक साल से भी कम समय में 10 परमाणु बम बना सकता है। एजेंसी ने आरोप लगाया कि ईरान कई जगहों पर परमाणु गतिविधियों की जानकारी देने से लगातार इनकार कर रहा है और वह जांच में सहयोग नहीं कर रहा।

यह बीते 20 साल में पहली बार हुआ जब संयुक्त राष्ट्र की इस निगरानी संस्था ने ईरान को लेकर इतनी सख्त कार्रवाई की है।

IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के डायरेक्टर राफाएल मारियानो ग्रोसी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में। तस्वीर 11 जून की है।

IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के डायरेक्टर राफाएल मारियानो ग्रोसी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में। तस्वीर 11 जून की है।

IAEA के 35 देशों के बोर्ड में से 19 देशों ने इस ईरान के खिलाफ प्रस्ताव में वोटिंग की। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी शामिल थे। वहीं रूस और चीन ने इसके खिलाफ वोट दिया और बाकी देशों ने या तो हिस्सा नहीं लिया या वोटिंग से दूर रहे।

ईरान ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह पूरी तरह से राजनीतिक है। ईरानी विदेश मंत्रालय और देश की परमाणु एजेंसी ने संयुक्त बयान में कहा कि इस तरह के फैसलों से अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

हालांकि ईरान बार-बार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और नागरिक इस्तेमाल के लिए है, जैसे बिजली बनाना या दवा तैयार करना, न कि हथियार बनाने के लिए।

ईरान-इजराइल के बीच टकराव बढ़ा

ईरान लंबे समय से इजराइल को खत्म करने की बात करता आया है और उन क्षेत्रीय लड़ाकों का समर्थन करता है जो इजराइल के खिलाफ हैं। दूसरी तरफ इजराइल ईरान को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता है। उसका मकसद ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकना है।

पिछले कुछ सालों में यह टकराव लगातार बढ़ा है। 2019 में इजराइल ने सीरिया, लेबनान और इराक में उन ठिकानों पर हमले किए जहां से ईरान अपने सहयोगियों को हथियार भेजता था। साल 2020 में इजराइल ने ईरान के एक बड़े परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की हत्या कर थी।

फखरीजादेह अपनी कार में थे। इस दौरान एक रिमोट मशीन गन से लैस एक गाड़ी ने उन पर हमला कर दिया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हथियार सैटेलाइट से कंट्रोल होता था। इसमें AI का इस्तेमाल किया गया था ताकि सटीक निशाना लगाया जा सके।

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बिज़नस

अगर युद्ध में बुर्ज खलीफा को हुआ नुकसान तो क्या मिलेंगे 150 करोड़? जानें दुबई की सबसे ऊंची इमारत के इंश्योरेंस का सच

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दुबाई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद गहराते युद्ध के बादलों ने अब दुनिया की सबसे ऊंची इमारत, बुर्ज खलीफा की सुरक्षा और उसके अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। saudi arabia और Dubai के आसपास बढ़ते हमलों के बीच सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक यह चर्चा आम हो गई है कि अगर इस वैश्विक पहचान को आंच आती है, तो क्या होगा? क्या रेगिस्तान के इस गौरव को हुए नुकसान की भरपाई संभव है? आइए समझते हैं Burj Khalifa के उस सुरक्षा चक्र को, जो ईंट-पत्थर से नहीं बल्कि अरबों रुपये के कागजी दांव यानी ‘Insurance’ से बना है।

बुर्ज खलीफा का अरबों का रक्षा कवच
Dubai की इस ऐतिहासिक इमारत की सुरक्षा केवल इसकी मजबूती में नहीं, बल्कि इसके भारी-भरकम बीमा कवर में भी छिपी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुर्ज खलीफा के डेवलपर ‘Emaar Properties’ ने इसका बीमा Oman Insurance Company से कराया हुआ है। यह बीमा राशि कोई छोटी-मोटी रकम नहीं है, बल्कि लगभग 150 करोड़ रुपये (करीब 1.5 बिलियन) तक जाती है। हालांकि, यह राशि सुनने में विशाल लगती है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी मेगा-स्ट्रक्चर परियोजना के लिए बीमा की शर्तें और कवरेज सामान्य इमारतों की तुलना में कोसों अलग और बेहद जटिल होती हैं।

हमले की सूरत में क्या मिलेगा हर्जाना?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या युद्ध या मिसाइल हमले की स्थिति में बीमा कंपनी हर्जाना देगी? बुर्ज खलीफा जैसी इमारतों के लिए कराए गए इंश्योरेंस में आमतौर पर प्रॉपर्टी डैमेज, कंस्ट्रक्शन रिस्क और कई बार ‘राजनीतिक हिंसा’ जैसे विशेष क्लॉज शामिल होते हैं। यदि इमारत को किसी हमले में नुकसान पहुंचता है, तो सैद्धांतिक रूप से Insurance Company
को भुगतान करना होगा। लेकिन यहाँ एक पेंच है—बीमा कंपनियां अक्सर आतंकवादी हमलों, दंगों या ‘फुल-स्केल वॉर’ (पूर्ण युद्ध) के लिए अलग-अलग सीमाएं तय करती हैं। कई बार युद्ध से होने वाले नुकसान को स्टैंडर्ड पॉलिसी से बाहर रखा जाता है या इसके लिए बहुत ऊंचा प्रीमियम चुकाना पड़ता है।

क्या पूरी रकम मिलना संभव है?
बीमा जगत का नियम है कि क्लेम हमेशा ‘वास्तविक नुकसान’ के आधार पर मिलता है। इसका मतलब यह है कि अगर बुर्ज खलीफा के किसी एक हिस्से या सेक्शन को नुकसान पहुंचता है, तो भुगतान भी उसी अनुपात में होगा, न कि पूरी बीमा राशि एक साथ मिल जाएगी। इसके अलावा, बुर्ज खलीफा के भीतर स्थित Hotels, corporate offices और निजी अपार्टमेंट्स का बीमा उनके व्यक्तिगत मालिकों द्वारा अलग से कराया जाता है। ऐसे में किसी भी बड़े हादसे की स्थिति में क्लेम का मिलना पॉलिसी की बारीकियों, जांच रिपोर्ट और ‘exclusion clause’ (किन परिस्थितियों में पैसा नहीं मिलेगा) पर निर्भर करेगा।

राजनीतिक हिंसा और युद्ध के बीच का बारीक अंतर
बीमा विशेषज्ञ बताते हैं कि युद्ध की स्थिति में क्लेम मिलना सबसे कठिन होता है। अगर किसी हमले को आधिकारिक तौर पर ‘युद्ध’ घोषित कर दिया जाए, तो अधिकांश बीमा पॉलिसियां जिम्मेदारी से हाथ खींच लेती हैं, जब तक कि विशेष रूप से ‘वॉर रिस्क कवर’ न लिया गया हो। बुर्ज खलीफा जैसी ग्लोबल आइकन के लिए बीमा कंपनियां जांच के हर सूक्ष्म पहलू को देखती हैं। इसलिए, अगर कभी कोई अनहोनी होती है, तो हर्जाने की लड़ाई उतनी ही लंबी और ऊंची हो सकती है जितनी कि यह इमारत खुद है।

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विदेश

जंग का तीसरा दिन : ईरान ने किया 10 जगहों पर हमला, सामने आई मरने वालों की संख्या

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तेहरान,एजेंसी। अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमले का तीसरा दिन भी दुनिया को दहला देने वाला रहा। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने कसम खाई कि अब वह पीछ नहीं हटने वाला है और इजरायल अमेरिका को अंतिम समय तक चुनौती देगा। इसी बात पर अटल रहते हुए सोमवार को ईरान द्वारा 11 जगहों पर भयानक हमले किए गए। 

इन 11 जगहों पर किए हमले

ईरान ने गल्फ देशों निशाना बनाया, ईरान ने जोर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई, सउदी अरब और ओमान पर मिसाइलें दागी। साथ ही साइपरस औऱ इजरायल पर भी अटैक किए। इन हमलों में सबसे ज्यादा मौतें इजरायल में देखने को मिली। जहां 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए, वहीं कुवैत में 1 की मौत 32 घायल, बहरीन में एक की मौत 4 घायल, यूएई में 3 की मौत 58 घायल और ओमान में 1 की मौत 5 लोग घायल हुए। वहीं 4 अमेरिकी अधिकारियों की मौत और 4 घायल हुए। वहीं जोर्डन और साइपरस में हुए हमलों में किसी तरह की मौत की खबर की पुष्टि अभी तक नहीं हुई। इसके अलावा इऱाक में 2 की मौत 5 घायल हुए है। 

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लेबनान में 13 की मौत

अमेरिका-इजरायल द्वारा किए गए हमले में लेबनान में अभी तक 13 की मौत हो चुकी है, जबकि 149 लोग घायल हुए हैं। वहीं, ईरान में अभी तक चल रही जंग में 155 लोगों की जान चली गई है, जबकि सैंकड़ों लोग घायल हुए हैं।

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अफगानिस्तान का पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हमला:तालिबान के मंत्री बोले- हमने डूरंड लाइन पार की, PAK का दावा- 400 अफगान लड़ाके मारे

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इस्लामाबाद/ काबुल,एजेंसी। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बीते चार दिनों से लगातार हवाई हमले और गोलीबारी जारी है। तालिबान सरकार का कहना है कि हमने पाकिस्तान के बेहद संवेदनशील नूर खान एयरबेस पर हमला किया है। यह एयरबेस रावलपिंडी में है।

इसके साथ ही तालिबान के एक मंत्री ने दावा किया कि उनके लड़ाके डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान की जमीन में घुस चुके हैं। तालिबान के मुताबिक, क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ सैन्य ठिकानों पर भी हमले किए गए हैं।

ये कार्रवाई पाकिस्तान की ओर से काबुल, बगराम और अन्य इलाकों में किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई। दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार ने दावा किया है कि अब तक 400 से ज्यादा अफगान लड़ाके मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हुए हैं।

पाकिस्तान ने 27 फरवरी को अफगानिस्तान में कई ठिकानों पर हमला किया।

पाकिस्तान ने 27 फरवरी को अफगानिस्तान में कई ठिकानों पर हमला किया।

तालिबान के अनुसार, जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, उनमें शामिल हैं:

  • नूर खान एयरबेस
  • बलूचिस्तान के क्वेटा में 12वीं कोर का मुख्यालय
  • खैबर पख्तूनख्वा के मोहम्मद क्षेत्र का एक सैन्य कैंप

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात

पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी।

पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया।

अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था।

पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है।

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 415 तालिबान लड़ाके मारे

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ हमले को ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन नाम दिया है और काबुल समेत कई प्रांतों में हमले किए। ‘गजब लिल हक’ का मतलब है, अपने हक के लिए खड़े होना।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के मुताबिक अब तक –

  • 415 तालिबान लड़ाके मारे गए
  • 580 से ज्यादा घायल हुए
  • 182 पोस्ट तबाह की गईं
  • 31 पोस्ट पर कब्जा किया गया
  • 185 टैंक और सैन्य वाहन तबाह किए गए

पाकिस्तानी वायुसेना ने दावा किया है कि उसने नंगरहार और कंधार में तालिबान के सैन्य मुख्यालयों को निशाना बनाया।

वहीं तालिबान का कहना है कि उसके सिर्फ 8 से 13 लड़ाके मारे गए और कुछ घायल हुए हैं। उसने दावा किया कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दो सैन्य मुख्यालयों समेत कई चौकियों पर कब्जा किया गया। तालिबान ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने आगे हमला किया तो और कड़ा जवाब दिया जाएगा।

हमले के बाद की तस्वीरें…

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में लड़ाई के दौरान एक मस्जिद क्षतिग्रस्त हो गई।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में लड़ाई के दौरान एक मस्जिद क्षतिग्रस्त हो गई।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के एक अस्पताल में 27 फरवरी को एक घायल लड़की का इलाज करते डॉक्टर।

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के एक अस्पताल में 27 फरवरी को एक घायल लड़की का इलाज करते डॉक्टर।

पाकिस्तान और अफगान सेनाओं के बीच 27 फरवरी को चली सीमा पार की झड़प में कई लोग घायल हो गए थे।

पाकिस्तान और अफगान सेनाओं के बीच 27 फरवरी को चली सीमा पार की झड़प में कई लोग घायल हो गए थे।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तोरखम सीमा पर 27 फरवरी को अफगान सैन्य अड्डे के पास धुआं उठता हुआ दिखाई दिया।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तोरखम सीमा पर 27 फरवरी को अफगान सैन्य अड्डे के पास धुआं उठता हुआ दिखाई दिया।

पाकिस्तान की संसद में निंदा प्रस्ताव पास

पाकिस्तान की सीनेट ने अफगानिस्तान के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि आगे किसी भी उकसावे पर कड़ा और निर्णायक जवाब दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सेना मुख्यालय का दौरा कर जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई। पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने अफगान तालिबान सरकार को गैर-कानूनी बताते हुए आरोप लगाया कि वहां महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकार छीने जा रहे हैं।

दोनों देशों के बीच पहले भी हुआ है तनाव

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले और आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान हुकूमत पर तालिबान के कंट्रोल के बाद से तनाव और बढ़ गया है।

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