भगवान कृष्ण के देहत्याग की कथा सुनकर भावुक हुए श्रोतागण कथा पर लगा विराम, कल हवन-पूजन के साथ सम्पन्न होगा श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ कोरबा। मृत्यु से कोई नहीं बच पाया, जो आया है, वह एक दिन जाएगा ही। मृत्यु से न ईश्वर बचा, तो मानव की क्या विसात। महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ, हस्तिनापुर विरान हो गया, चारों तरफ सन्नाटा बिखरा पड़ा था। कौरव वंश समाप्त हो गया, महल में गांधारी और धृतराष्ट्र अपनी जिंदगी का आखरी पल बिता रहे थे। कृष्ण उनसे मिलने आए, दिल में आग भभक रही थी, गांधारी के मूंह से श्राप निकला- कृष्ण तुमने मेरा वंश खत्म कर दिया और हमें तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ दिया, तुम भी जब मरोगे, तो सिर्फ अकेले रहोगे, तुम्हारा वंश भी खत्म हो जाएगा। स्वधाम गमन के पूर्व यह सब नजारा भगवान कृष्ण की आंखों के सामने तैरने लगे। उद्धव को भगवत गीता का ज्ञान देकर कृष्ण ने कहा-तुम जाओ, मेरे स्वधाम गमन का समय आ गया है और वे वहां से जंगल की ओर निकल पड़े। मृत्यु के समय भगवान चिंतन करने लगे और एक पीपल के पेड़ में टिक कर सब सोचने लगे, तभी सामने जंगल में हलचल हुई और बाण से तीर कृष्ण के शरीर पर लगा। जरा नामक शिकारी जंगल की ओर शिकार करने आया था और तीर कृष्ण को लगी। तीर लगते ही शिकारी, शिकार के पास आया और देखा तो पश्चाताप करने लगा और भगवान के श्रीचरणों में गिर पड़ा। भगवान कृष्ण ने कहा-ये तुम्हारी गलती नहीं, यह नियति और कर्म का खेल है। जो यहां आया है, उसे एक दिन जाना है। यह मार्मिक कथा पितृमोक्षार्थ गयाश्राद्धांतर्गत मातनहेलिया परिवार द्वारा जश्न रिसोर्ट कोरबा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के सातवें और अंतिम दिन कथा वाचक पंडित विजय शंकर मेहता के श्रीमुख से निकली करूण कथा थी, जिसे सुनकर श्रोतागण भावुक हो गए।
इसके पूर्व कथा वाचक पंडित विजय शंकर मेहता ने उद्धव-कृष्ण का प्रसंग सुनाया और कृष्ण ने जीवन के जो यथार्थ को उद्धव को सुनाया था, कथा वाचक ने संक्षिप्त में श्रोतागणों को सुनाया। कृष्ण ने उद्धव से कहा-सन्यास के लिए भगवा वस्त्र पहनना जरूरी नहीं, जो कामनाओं का त्याग कर कर्म करता है, वही सन्यास है। पंडित मेहता ने कहा कि मानव जीवन में संकट और परेशानियां आएंगी और इनका हल भी स्वयं के पास होता है। सुख के पल कब चले जाते हैं, पता नहीं चलता, लेकिन संकट का एक-एक पल युग जैसा लगता है। उन्होंने कहा कि परीक्षित को कथा सुनाते समय भगवान के स्वधाम गमन के बाद कलयुग की विशेषताएं भी शुकदेव ने बताई और कहा कि जो भ्रष्ट हैं, उन्हें ऊंची सत्ता मिलेगी और जो ईमानदार हैं, उन्हें रेगिस्तान जैसा जीवन जीना पड़ेगा। न्यायालय में जो पैसा खर्च नहीं कर पाएगा, उसे न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा-दूसरों पर दोष न ढूंढ़ें, स्वयं के दोष के देखें और उसे दूर करने का प्रयास करें, तो यह संसार सुखमय लगेगा, यही जीवन का सार है। जाति का भेदभाव नहीं, यह व्यवस्था है सनातन धर्म में समाज को चार वर्गों में बांटा गया। ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य एवं शुद्र। इस व्यवस्था को आज जातिगत भेदभाव का स्वरूप दे दिया गया। उन्होंने कहा कि भेदभाव मिटना चाहिए। सनातन धर्म में कथा, प्रवचन, उपदेश देने वालों को ब्राह्मण, राज करने वालों को क्षत्रीय, व्यापार, व्यवसाय करने वालों को वैश्य एवं सेवा करने वालों को शुद्र वर्ग में बांटा गया। कालांतर में इसे जातिगत भेदभाव का स्वरूप दे दिया गया और यहीं से हमारा समाज बंट गया। भेदभाव काफी हद तक मिटा, लेकिन इसे समाप्त होना चाहिए। मूर्ति के सामने बैठ कर करें ध्यान घर में या जहां भी आप ध्यान करें, भगवान हनुमान या किसी की मूर्ति सामने रखकर ध्यान करें, तो ज्यादा प्रभाव पड़ेगा और मूर्ति रखने से चारों तरफ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। ससुराल की बुराई कभी न करें कथा वाचक एवं जीवन प्रबंधन गुरू पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि जब भी दूसरे घर की बेटी व्याह करके लाते हैं, तो उसे घर की लक्ष्मी समझें, ससुराल की कभी बुराई न करें, क्योंकि उन्होंने अपने जिगर के टुकड़े को आपको सौंपा है। परिवार के साथ समय बिताएं, एक-दूसरे से संवाद करें, तभी परिवार बचेगा और खुशहाल रहेगा। परिवार बचाने के लिए झूकना सीखें, हारना सीखें, इसी में ही जीत है। दूसरों पर दोष ढ़ूंढ़ना, सबसे बड़ा दोष है पंडित विजय शंकर मेहता ने आज के कल्चर पर प्रहार करते हुए कहा कि आज लोग दूसरों पर दोष ढ़ूंढ़ते हैं और यह आज का ट्रेंड बन गया है। दूसरों पर दोष ढ़ूंढ़ना ही, मानव का सबसे बड़ा दोष है। स्वयं के दोष को ढ़ूंढ़ें और उसे दूर करने का प्रयास करें। ऐसा करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। दूसरों को बिना अपेक्षा कुछ देने का प्रयास होते रहना चाहिए। कृष्ण गीता में मिलेंगे कथा वाचक पंडित विजय शंकर मेहता ने कृष्ण-उद्धव प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कृष्ण ने कहा-हे उद्धव! मेरे जाने के बाद लोग मुझे ढ़ूंढ़ेंगे, तो उनसे कहना-मैं गीता में मिलूंगा। स्वधाम गमन के समय कृष्ण ने उद्धव से कहा-जो यहां आया है, उसे जाना ही पड़ेगा। मेरा समय आ गया है, पीछे मुड़कर मत देखना… और श्रीकृष्ण शिकारी जरा के हाथों अपनी देह त्यागते हैं। मृत्यु से पूर्व उद्धव से कृष्ण ने कहा था-नियति और कर्म के नियम होते हैं, उसी के अनुसार ही मौत मिलती है। आयुक्त आशुतोष पाण्डेय पहुंचे कथा श्रवण करने, व्यास पीठ से लिया आशीर्वाद
आईएएस निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय आज कथा समाप्ति तक कथा का श्रवण किया और व्यास पीठ से आशीर्वाद लिया। आज पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद सहित कोरबा के कई गणमान्य नागरिकों ने पंडित विजय शंकर मेहता से कथा श्रवण कर धन्य हुए।
कोरबा। जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में कलेक्टर ने लोक स्वास्थय यांत्रिकी विभाग को निर्देशित किया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण हो चुके कार्यों को संबंधित ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किया जाए तथा जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) उनका क्रॉस वेरिफिकेशन करें। उन्होंने निर्देश दिए कि मार्च 2028 तक सभी लंबित कार्य पूर्ण कर लिए जाएं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जिन योजनाओं में नल से नियमित रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी, उन्हीं कार्यों का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने ग्राम स्तर पर जल एवं स्वच्छता समितियों की नियमित बैठक आयोजित करने के भी निर्देश दिए। पाली के वनांचल क्षेत्र में योजना की दुर्गति कोरबा जिले के पाली ब्लाक के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के कार्यों की दुर्गति है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी खण्ड कोरबा के कार्यपालन अभियंता रमन उरांव को जानकारी देने के बाद भी साल भर से निरीक्षण करने का समय तक नहीं मिला। क्षेत्र में काम करने वाले ठेकेदारों ने केन्द्र की इस महत्वाकांक्षी योजना का बंटाधार कर दिया है और यदि सही जांच कराई जाए तो करोड़ों का भ्रष्टाचार निकलेगा। जल जीवन मिशन में कार्य करने वाले ठेकेदार करोड़पति बन गए और इनके तथा अधिकारियों की मिलीभगत से जहां योजना का लाभ अधिकांश एवं गांवों को नहीं मिल पा रहा है, वहीं गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों से योजना प्रारंभ होने से पहले ही दम तोड़ रही है और ठेकेदार भी कार्यवाही के अभाव में मदमस्त हैं।
मानदेय शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत पर प्रधानपाठकों की वेतनवृद्धि रोकने के निर्देश कोरबा। समय सीमा की बैठक में मंगलवार को कलेक्टर कुणाल दुदावत के तेवर सख्त दिखे। उन्होंने शिक्षा विभाग की समीक्षा में विभाग की लापरवाही देखी। शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्कूलों में पाठ्यपुस्तकों के वितरण एवं स्कूलवार स्कैनिंग कार्य की समीक्षा की। मानदेय शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ी संबंधी प्राप्त शिकायतों के निराकरण में प्रगति नहीं होने पर कलेक्टर ने संबंधित प्रधानपाठकों की वेतनवृद्धि रोकने तथा जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने विकासखंड कोरबा एवं पोड़ी-उपरोड़ा में स्कैनिंग की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए 31 जुलाई तक सभी विकासखंडों में शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने वेंडर से समन्वय कर सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत बालिकाओं को शीघ्र साइकिल वितरण सुनिश्चित करने तथा स्कूली विद्यार्थियों को गणवेश का दूसरा सेट उपलब्ध कराने के लिए उच्च अधिकारियों से समन्वय करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने पीएम पोषण गार्डन के लिए विद्यालयों की जानकारी 31 जुलाई तक उपलब्ध कराने, अहाताविहीन विद्यालयों की सूची तैयार करने तथा संबंधित जनपद पंचायतों के सीईओ को सरपंच एवं सचिव के माध्यम से उसका सत्यापन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अपार आईडी से वंचित विद्यार्थियों के लिए 1 अगस्त से 31 अगस्त तक विशेष शिविर आयोजित कर अपार आईडी बनाने तथा आधार एवं यू-डाइस से संबंधित त्रुटियों का निराकरण करने के निर्देश दिए। छात्र सुरक्षा बीमा की राशि समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने की शिकायत के मामले में कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के संबंधित शाखा प्रभारी के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
कोरबा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने विकासखंड कटघोरा अंतर्गत संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, छुरीकला में विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय की व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं से संबंधित प्राप्त गंभीर शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथयपरक जांच कर एक सप्ताह के भीतर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राचार्य को हटाने बच्चों ने विधायक पटेल और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन के काफिले का कर दिया था घेराव
गठित जांच समिति में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरबा, तहसीलदार कटघोरा, सहायक लेखा अधिकारी तथा कनिष्ठ लेखा अधिकारी (कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, कोरबा) को सदस्य बनाया गया है। समिति विद्यालय में उपलब्ध व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों को प्रदत्त सुविधाओं तथा शिकायतों से जुड़े सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच करेगी। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के हितों एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। शिकायतों की निष्पक्ष जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सहायक आयुक्त की कार्यशैली पर भी सवाल!
एकलव्य आवासीय विद्यालय में बच्चों ने कुछ दिन पूर्व पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन सहायक आयुक्त को निरीक्षण करने का समय ही नहीं मिला। महीनों से बच्चों को दूषित भोजन दिया जा रहा, लेकिन सहायक आयुक्त को कुछ पता ही नहीं।